जिंदगी के हसीन दो पल

desi kahani हैल्लो दोस्तों, यह मेरी  आज पहली कहानी है। वैसे मुझे समय ही नहीं मिलता कि में अपनी कोई कहानी को लिखकर आप लोगो तक पहुंचा दूँ और वैसे भी मेरी ज़िंदगी तो बिल्कुल अच्छी है। मेरा नाम राजेश है और मेरी उम्र 26 साल, ठीक-ठाक लम्बाई, गोरा रंग, लेकिन में एक अपंग हूँ और मेरे एक पैर में पोलीयो है इसलिए में बिना सहारे नहीं चल सकता, लेकिन में वो सब कुछ कर सकता हूँ जो एक आम इंसान कर सकता है में दिखने में भी ठीक लगता हूँ, लेकिन आप सभी लोग जानते हो कि एक मुझ जैसे अपंग इंसान से कौन प्यार कर सकता है? और अब में अपनी उस कहानी को शुरू करता हूँ जो एक पल के लिए मुझे कुछ हंसी पल दे गई। दोस्तों यह बात उन दिनों की बात है जब मेरे पापा गुजरात उनकी बहन से मिलने गए हुए थे और वो चार दिन बाद वहां से लौटने वाले थे और तीन दिन के बाद मेरे पापा का मेरे पास फोन आ गया तब उन्होंने मुझसे कहा कि आज में आ रहा हूँ। तो मैंने खुश होकर अपनी मम्मी से कहा कि आज रात का खाना हम पापा के साथ ही खाएगें क्योंकि वो आज रात तक ही वापस आ रहे है। फिर करीब 9 बजे दरवाजे की घंटी बजी और मेरे छोटे भाई ने तुरंत ही जाकर दरवाज़ा खोल दिया तो अंदर आने के बाद मैंने देखा कि मेरे पापा के साथ मेरी बुआ उनका लड़का वो उम्र में करीब 16 साल का होगा और उनकी एक लड़की जो 18 साल की होगी, वो सभी मेरे पापा के साथ आए हुए थे। दोस्तों में तो उनको देखता ही रह गया और वैसे मैंने अपनी बुआ की लड़की को बहुत सालों के बाद देखा था, मैंने सबसे पहले अपनी बुआ के पैर छुए और रिश्ते में तो (प्रिया) मेरी बुआ की लड़की का नाम है, इसलिए प्रिया मेरी बहन हुई।
अब मम्मी ने मुझसे कहा कि तुम प्रिया के भी पैर छू लो और फिर मैंने अपनी मम्मी का कहना मानते हुए उसके भी पैर छू लिए और उसके बाद हम सभी लोगों ने एक साथ में बैठकर खाना खाया और उसके बाद मेरी मम्मी, बुआ आपस में इधर उधर की बातें करने लगी थी, लेकिन प्रिया को सफर की थकावट की वजह से सोफे पर बैठे ही नींद लग गई। अब में उसको देख रहा था, लेकिन मेरे मन में उसके लिए कोई भी ग़लत विचार नहीं था, वो दिखने में बहुत सुंदर थी उसका पूरा गोरा ज़िस्म भरा हुआ था जिसको देखकर कोई भी पहली बार में उसका दीवाना हो जाए। फिर सुबह उठकर सभी लोग अपने काम में लग गए और मुझे भी अपने ऑफिस जाना था इसलिए में जल्दी से तैयार हो गया और तब तक प्रिया भी उठ चुकी थी और शायद वो मेरी मम्मी की रसोई में उनके काम में मदद कर रही थी। फिर थोड़ी ही देर बाद वो चाय लेकर मुझे देने आई, दोस्तों में बहुत शर्मिला किस्म का लड़का हूँ और मैंने उससे चाय ले ली, लेकिन वो बहुत मिलनसार लड़की थी और एकदम बिंदास भी है और मेरा छोटा भाई तो उससे इतने कम समय में बहुत घुलमिल गया था और वो बहुत हंसी मज़ाक भी करते थे। दोस्तों प्रिया अब कुछ दिनों के बाद हमेशा मुझसे मेरे काम के बारे में पूछती थी, क्योंकि उसको कंप्यूटर के बारे में इतनी जानकारी नहीं थी, इसलिए मुझसे पूछती कि कंप्यूटर पर क्या क्या होता है और इसी तरह हम दोनों एक दूसरे से थोड़ा थोड़ा खुलने लगे थे। एक दिन उसने मुझसे मेरे पैर के बारे में पूछा कि यह सब कैसे हुआ और जब एक नॉर्मल आदमी को देखता हूँ तब तुम्हे कैसा लगता है? अब मैंने उसकी बात का कोई भी जवाब नहीं दिया क्योंकि में उसको और जवाब देता भी क्या? और अब प्रिया को हमारे घर में रहते हुए पूरे पांच दिन हो चुके थे, मैंने बहुत बार गौर किया था कि प्रिया की नज़रे मुझे कुछ अलग तरह से देखती थी। सभी घर वाले जब भी साथ में होते तो वो मेरे साथ ही ज़्यादा बातें किया करती और वो हमेशा मेरे पास ही बैठती थी। दोस्तों यह बात उस रात की है जब हम सभी हॉल में बैठकर टीवी देख रहे थे तो मैंने गौर किया कि प्रिया वहीं पर लगे एक आईने से मुझे देख रही थी। उस समय में सोफे पर बैठा हुआ था और वो एक कुर्सी पर मुझसे थोड़ा दूर अपने भाई के साथ बैठी हुई थी और जब मैंने उस कांच में देखा तो उसने अपनी नजर उस कांच से हटा ली और वो अब एकदम अंजान बनने का नाटक कर रही थी, लेकिन मेरे मन में कोई भी ग़लत विचार नहीं आया इसलिए मैंने उसकी इस हरकत को ज्यादा दिमाग में नहीं लिया और टीवी देखते हुए मुझे तो पता ही नहीं चला कि कब मुझे नींद आ गई और में वहीं सोफे पर ही सो गया।

फिर देर रात को अचानक से मुझे ऐसा महसूस हुआ कि कोई मेरे सर के बालो में अपनी ऊँगली को फेर रहा है और वो मेरे बाल भी खींच रहा है। मैंने नींद का झूठा नाटक करके अपनी करवट बदली और तब में देखता ही रह गया कि प्रिया अब भी जाग रही थी और यह उसी का हाथ था वो मुझे उस समय बहुत गरम भी लग रही थी। अब मैंने नींद में उसका हाथ पकड़कर झटक दिया उसको लगा कि में नींद में यह सब काम कर रहा हूँ और उसने इस बार मेरे होंठो पर अपनी उँगलियों को फेरना शुरू कर दिया। तो मुझे भी अब कुछ होने लगा था, क्योंकि में भी तो एक इंसान ही हूँ, लेकिन मैंने अपने ऊपर बहुत कंट्रोल किया यह बात सोचकर कि रिश्ते में तो प्रिया मेरी बहन लगती है, लेकिन उस समय वो बस एक सेक्स की भूखी शेरनी लग रही थी, इसलिए उसने मुझे बहुत परेशान कर दिया था और मेरे इतना टालने के बाद भी वो नहीं मान रही थी इसलिए अब मुझे गुस्सा भी आ रहा था और मेरा दिल भी कर रहा था कि उसको पकड़कर चोद दूँ। फिर इस बार मैंने उसका एक हाथ पकड़कर बड़ी धीरे से उससे कहा कि तुम यह क्या कर रही हो? तो प्रिया मेरे मुहं से वो शब्द सुनकर जैसे चौक सी गई और तुरंत ही उसने अपनी नज़रे नीचे झुका ली। अब मैंने अपनी करवट बदली और में सोने लगा, लेकिन इस बार मुझे भी लगा कि जब उसको रिश्ते की नहीं पड़ी है तो में क्यों भाई बहन का रिश्ता देख रहा हूँ और वो भी कोई मेरी सग़ी बहन नहीं है। फिर यह सभी बातें सोचकर मैंने हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके गाल पर रख दिया, लेकिन वो कुछ नहीं बोली क्योंकि इस बार वो सोने का नाटक कर रही थी, लेकिन थोड़ी देर के बाद वो अचानक मुझसे लिपट गई और मैंने कहा कि तुम्हारा भाई जाग जाएगा जो कि हॉल में ही सो रहा था।

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दोस्तों उस रात को हॉल में हम सिर्फ तीन लोग ही सो रहे थे, अब वो मुझसे बोली कि वो रात में एक बार सो जाने के बाद दोबारा नहीं उठता, क्योंकि वो हमेशा बहुत गहरी नींद में सोता है। फिर मैंने उसके मुहं से यह बात सुनकर तुरंत ही बहुत खुश होकर उसके होंठो पर अपने होंठ लगा दिए और में उनको चूसने लगा था। ऐसा करने में मुझे बहुत मस्त मज़ा आ रहा था और वैसे भी यह मेरा पहली बार का अनुभव था जब में किसी लड़की को किस कर रहा था या किसी को मैंने छुआ भी था। अब किस करते करते में उसके बूब्स पर अपना एक हाथ रखकर बूब्स को दबाने भी लगा था, जिसकी वजह से में बहुत खुश होने के साथ साथ अब बहुत गरम भी हो गया था, क्योंकि आज मेरी 25 साल की भूख मिट रही थी। अब में बहुत गरम होकर पूरी तरह से जोश में आ चुका था और शायद उसकी भी वही हालत थी जो मेरी हो रही थी और बहुत देर तक हम दोनों एक दूसरे को किस करते रहे, फिर रात के करीब तीन बज रहे थे। अब मैंने प्रिया से कहा कि चलो हम दोनों अब मेरे बेडरूम में चलते है, क्योंकि अभी हम दोनों के पास पूरे तीन घंटे का समय और था और वहां पर हमे कोई भी परेशान भी नहीं करेगा और वो मेरे कहने पर तुरंत ही तैयार हो गई। फिर मेरे कमरे के अंदर जाते ही मानो प्रिया में कोई तूफान भर गया उसने एक पल में ही अपने सारे कपड़े उतार दिए। में तो बस उसको देखता ही रह गया। उसका क्या मस्त गोरा भरा हुआ कामुक बदन था? उसके उस गोरे जिस्म को देखकर मेरी आखों में एक अजीब सी चमक आ गई और में पहली बार किसी लड़की को पूरा नंगा अपने सामने देख रहा था और अब मैंने भी ज्यादा देर ना करते हुए अपने कपड़े उतार दिए और उसके बाद में बेड पर बैठ गया और प्रिया को अपने सामने पकड़कर मैंने उसको अपनी गोद में बैठा लिया।
फिर मेरे लंड की गरमी को पाकर वो बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी थी और अब उसके वो गरम गोलमटोल बूब्स मेरी छाती से दबे हुए थे और मेरे होंठ उसके होंठो से और मेरा तनकर खड़ा लंड उसकी प्यासी कामुक चूत से टकरा रहा था, जो हम दोनों के गरम चुदाई के लिए तड़पते हुए बदन का एक मिलन था। हम दोनों वैसे ही एक दूसरे से चिपककर होंठो को चूमते चाटते हुए मज़े लेते रहे। फिर कुछ देर के बाद मैंने उसको सीधा लेटा दिया, क्योंकि अब में बहुत बेकरार था और उसकी चूत में अपने लंड को डालने के लिए और मेरा लंड एक गरम सरिये की तरह सीधा खड़ा हुआ था। मैंने ज्यादा देर ना करते हुए अपने लंड को धीरे से उसकी चूत में डालना शुरू किया और दर्द की वजह से वो बहुत बुरी तरह से तड़प रही थी और वैसे मेरा भी यह पहला सेक्स अनुभव था। में क्या बताऊँ दोस्तों मुझे जैसे सारे जहान की खुशियाँ मिल गई हो ऐसा लग रहा था। फिर में धीरे धीरे अपने लंड को अंदर करता रहा और जब पूरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया तो मैंने अपने धक्को की स्पीड को पहले से ज्यादा बढ़ाकर उसको चोदना शुरू किया,, में उसके लगातार तेज धक्के लगाकर चोदता रहा और उसके मुहं से जोश भरी वो ऊफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्ह आईईईई की आवाजे निकलती रही जिसकी वजह से मेरा जोश अब पहले से ज्यादा बढ़ने लगा था, लेकिन उस चुदाई में कुछ देर बाद उसने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया था।
अब मुझे उसकी तरफ से भी अब हल्के हल्के धक्के महसूस होने लगे थे, जिसको देखकर में बड़ा खुश हुआ और फिर उसके बाद हम दोनों ने बहुत तरह की अलग अलग पोज़िशन से चुदाई के बड़े मस्त मज़े लिए। उसके बाद जब में झड़ने वाला था तब मैंने अपने धक्को की स्पीड को हल्का करके अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकालकर अपना पूरा गरम गरम वीर्य उसकी चूत के ऊपर ही निकाल दिया जो उसके गोरे गोरे पेट पर पहुंचकर उसकी गहरी नाभि में भी भर गया तब मैंने उसके चेहरे पर मेरे साथ चुदाई की वो चमक संतुष्टि देखी, जिसको देखकर मेरे मन में ख़ुशी की एक लहर दौड़ पड़ी। फिर उसके बाद हम दोनों एक एक करके फ्रेश होकर दोबारा से उसी अपनी अपनी जगह पर आकर सोने आ गए। फिर दूसरे दिन सुबह मैंने सही मौका देखकर उससे बात करके कहा कि धन्यवाद प्रिया कल रात जो तुमने मुझे मेरी ज़िंदगी के जो कुछ हसीन पल दिए है वो में कभी भी नहीं भूल सकता, क्योंकि में एक अपंग लड़का हूँ और मेरे साथ कौन लड़की इतना सब करेगा धन्यवाद। तो उसने मेरी बातें सुनकर मुस्कुराकर मुझसे कहा कि तुम अब कभी भी अपने आप को अपंग मत समझना, क्योंकि कल रात को मुझे ऐसा कुछ भी महसूस नहीं हुआ कि तुम अपंग हो, कल रात को तुम्हारे साथ वो सब करने के बाद मुझे पूरी तरह से उम्मीद है कि तुम किसी भी लड़की को कल रात की तरह पूरी तरह से संतुष्ट कर सकते हो, बाकी भगवान की मर्ज़ी के आगे किसकी चलती है, उसने तुम्हारी किस्मत जो भी होना लिखा होगा वो सब तुम्हारे साथ होगा, लेकिन मुझे कल रात के बाद से पूरी उम्मीद है कि तुम्हारे साथ अब जो भी होगा वो सब एकदम ठीक ही होगा। दोस्तों उसके मुहं से निकले यह दो शब्दों ने मुझे जीने की एक नई राह दिखाई है ।।
धन्यवाद