वह लडकी जो मिली और चली गई

Antarvasna, hindi sex story: मेरा ट्रांसफर कुछ समय पहले चंडीगढ़ में हुआ था मुझे चंडीगढ़ आए हुए अभी सिर्फ कुछ हफ्ते ही हुए थे लेकिन हमारे पड़ोस में रहने वाले सहानी साहब से मेरी काफी अच्छे बनने लगी थी। सहानी साहब ने हीं मुझे वह घर किराए पर दिलवाया था, मेरे भैया को सहानी साहब पहले से ही जानते थे इसलिए उन्होंने मेरी मदद की और उन्होंने अपने सामने वाला घर ही मुझे रहने के लिए दिलवा दिया। अब मैं वहां रहने लगा था सहानी साहब अक्सर मुझसे मेरी शादी के बारे में बात किया करते थे मैं उन्हें हमेशा कहता कि फिलहाल तो मैं अपनी जिंदगी जीना चाहता हूं और अभी मेरा शादी करने का कोई विचार नहीं है। सहानी साहब मेरी अक्सर मदद कर दिया करते थे मुझे जब भी कुछ जरूरत होती तो मैं सहानी साहब से कह दिया करता था वह मेरी मदद कर दिया करते थे।

एक दिन मैंने सहानी साहब से कहा कि सर मुझे आपसे एक जरूरी काम था तो वह मुझे कहने लगे कि अमन कहो तुम्हें क्या जरूरी काम था। मैंने उनसे कहा कि मुझे आज आपकी कार चाहिए थी तो उन्होंने तुरंत ही अपने पॉकेट में से अपनी कार की चाबी निकाली वह उस वक्त अपने किसी काम से घर लौटे ही थे तो उन्होंने मुझे चाबी दे दी और फिर मैं उनकी कार लेकर अपने दोस्त के घर चला गया, उसके घर से मुझे आने में ज्यादा देर होने वाली थी इसीलिए मैंने उनसे कार ली थी। मैं जब उस रात घर लौटा तो मैंने उन्हें कार की चाबी देदी थी वह भी उठे हुए थे उन्होंने मुझे कहा कि अमन क्या तुमने खाना खा लिया है तो मैंने उन्हें कहा कि हां मैंने खाना खा लिया था। मैं अपने घर आ गया और मैं अपने पापा से बात करने लगा पापा से कुछ देर बात करने के बाद उन्होंने मां को फोन पकड़ा दिया और थोड़ी देर तक मैंने मां से बात की। मां कहने लगी कि अमन बेटा तुम्हारी बहुत याद आ रही है मैंने मां से कहा कि मां मैं भी आप लोगों को बहुत मिस कर रहा हूं मां मुझे कहने लगी की अमन बेटा तुम छुट्टी लेकर कुछ दिनों के लिए घर आ जाओ।

मैंने मां से कहा कि मां थोड़े समय बाद मैं घर आ जाऊंगा और फिर थोड़ी देर बाद मैंने फोन रख दिया। उस दिन मुझे काफी अकेलापन महसूस हो रहा था और मैं मां को बहुत मिस कर रहा था मैं अपने पूरे परिवार को बहुत मिस कर रहा था इसलिए मैंने कुछ दिनों की छुट्टी लेने का फैसला किया। अगले दिन मैंने अपनी छुट्टी के लिए अर्जी अपने ऑफिस में दे दी थी और जल्द ही मुझे छुट्टी मिल गई थी उसके बाद मैं कुछ दिनों के लिए अपने घर लखनऊ जाना चाहता था। मैंने अपनी ट्रेन की रिजर्वेशन करवा ली थी और मेरी ट्रेन की रिजर्वेशन भी हो चुकी थी जिस दिन मुझे घर जाना था उस दिन मैं सुबह जल्दी उठ गया था और मैं अपने घर के बाहर ही ऑटो का इंतजार कर रहा था लेकिन उस वक्त ऑटो तो नजर नहीं आ रहा था तभी मैंने देखा कि सहानी साहब आगे से आ रहे थे और उन्होंने मुझे कहा कि अमन क्या तुम कहीं जा रहे हो? मैंने उन्होंने कहा कि हां मैं अपने घर जा रहा हूं। वह मुझे कहने लगे कि लेकिन तुमने मुझे इस बारे में बताया नहीं मैंने उन्हें कहा कि आप घर पर थे भी तो नहीं। सहानी साहब अपने काम के सिलसिले में कुछ दिनों के लिए घर से बाहर गए हुए थे इसलिए उनसे मेरी मुलाकात नहीं हो पाई थी। उन्होंने मुझे कहा कि अमन तुम्हें अभी ऑटो नहीं मिलेगा मैं तुम्हें रेलवे स्टेशन तक छोड़ देता हूं और उन्होंने मुझे उस दिन रेलवे स्टेशन तक छोड़ दिया। जब उन्होंने मुझे स्टेशन पर छोड़ा तो वह मुझे कहने लगे कि अपने भैया से कहना कि मैं उन्हें याद कर रहा था। सहानी साहब और भैया एक साथ ही बठिंडा में जॉब करते थे इसलिए उनकी दोस्ती अच्छी हो गई थी और फिर वह घर लौट चुके थे, मैं भी ट्रेन में बैठ चुका था थोड़ी देर बाद ट्रेन चलने वाली थी। जब ट्रेन चलने लगी तो उसके बाद मैं अपने मोबाइल में गाने सुनने लगा गाने सुनते सुनते मेरी आंख पता नहीं कब लग गई मुझे पता ही नहीं चला लेकिन अचानक से ट्रेन का एक जोरदार झटका लगा और मेरी आंख खुली। मैंने आसपास देखा तो काफी लोग बैठे हुए थे लेकिन मुझे बहुत ज्यादा नींद आ रही थी इसलिए मैं सबसे ऊपर वाली सीट में सोने के लिए चला गया मैं वहां पर लेट गया और मुझे गहरी नींद आ गई थी।

जब दोपहर के वक्त मेरी आंख खुली तो ट्रेन रुकी हुई थी मैंने भी सोचा कि मैं कुछ खा लेता हूं मुझे काफी ज्यादा भूख भी लग रही थी। मैं ट्रेन से जैसे ही नीचे उतरा तो मैंने देखा कि ट्रेन किसी स्टेशन पर रुकी हुई थी वह स्टेशन ज्यादा बड़ा नहीं था और वहां ट्रेन ज्यादा देर तक रुकने वाली भी नहीं थी इसलिए मैं जल्दी से एक पानी की बोतल ले लिया और खाने के लिए कुछ सैंडविच और चिप्स लेके ट्रेन में आ गया। मैं सैंडविच खा ही रहा था कि मैंने देखा बच्चे मेरी तरफ देख रहे थे मैंने उन्हें एक चिप्स का पैकेट दे दिया जब मैंने उन्हें चिप्स का पैकेट दिया तो बच्चे खुश हो गये और फिर मैं अपने मोबाइल में गाने सुनने लगा था। सफर आराम से कटता जा रहा था तभी मेरे मोबाइल में फोन आया और मैंने देखा कि भैया का फोन आ रहा था भैया ने मुझसे कहा कि अमन क्या तुम घर आ रहे हो तो मैंने भैया से कहा हां मैं घर आ रहा हूं। मैंने यह बात भैया को नहीं बताई थी मैंने भैया से पूछा कि आपको यह बात किसने बताई तो भैया ने कहा कि मुझे यह बात सहानी जी ने बताई थी। मेरी बात कुछ देर भैया से हुई लेकिन नेटवर्क की समस्या के कारण मैं उनसे ज्यादा देर तक बात नहीं कर पाया और मैंने फोन रख दिया।

थोड़ी देर बाद ट्रेन रूकी तो मैंने देखा कि एक लड़की मेरे सामने वाली सीट में बैठी है मैं उसकी तरफ देख रहा था और वह मेरी तरफ देख रही थी लेकिन उसकी आंखों में एक अलग ही प्यास नजर आ रही थी। मैंने उसे इशारों इशारों में कहा कि तुम बाथरूम की तरफ आओ और वह मेरे पीछे पीछे आ गई। जब हम लोग बाथरूम के पास पहुंचा तो वह मुझे कहने लगी तुम्हारा क्या नाम है? मैंने उसे कहा मेरा नाम अमन है वह मुझे कहने लगी मेरा नाम सुहानी है। मुझे नहीं पता था कि वह एक कॉल गर्ल है मैंने उससे कहा मुझे तुम्हें चोदना है। वह कहने लगी लेकिन उसके बदले तुम्हे मुझे पैसे देने पड़ेंगे मैंने उसे कहा तुम्हें कितने पैसे चाहिए उसने मुझे कहा तुम जितने मुझे दे सकते हो। मैंने उसे दो हजार रुपए दिए और हम दोनो बाथरूम के अंदर चले गए मैं उसे बाथरूम के अंदर ले गया तो वहां पर उसने मेरी पैंट की चैन को खोलते हुए मेरे लंड को बाहर निकाल लिया। जब उसने मेरे लंड को बाहर निकाला तो वह अपने हाथों से उसे सहलाने लगी और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब वह मेरे लंड को अपने हाथों से सहला रही थी तो मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी और उसके अंदर की गर्मी भी बढ़ चुकी थी। उसने मुझे कहा मुझे तुम्हारे लंड को चूसना है उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेना शुरू किया तो मुझे अच्छा लगा और उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था। वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी और वह मुझे कहने लगी तुम जल्दी से मेरी चूत मार लो मेरी चूत से पानी निकलने लगा है लेकिन मैं तो उसके बदन को महसूस करना चाहता था ट्रेन भी अपनी पूरी गति से चल रही थी। मैंने उसे कहा तुम अपने कपड़े उतार दो हालांकि उसे अपने कपड़े उतारने में थोड़ा परेशानी हुई लेकिन मैंने उसकी मदद की और मैं उसके निपल्स को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था और वह बहुत ही ज्यादा मजे मै आ गई थी। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है तुम ऐसे ही मेरे स्तनों को चूसते रहो।

मैंने उसके स्तनों को काफी देर तक चूसा जब मैंने उसके स्तनों को चूसा तो वह पूरी तरीके से गर्म होने लगी और मुझे कहने लगी आज तो मजा ही आ गया। मैंने उसके सलवार को उतारते हुए उसकी चूत के अंदर उंगली डाली तो वह कहने लगी तुम मुझे अब मत तड़पाओ मैं ज्यादा देर तक अपने आपको रोक नहीं पाऊंगी। उसने मुझे कहा क्या तुम्हारे पास कंडोम है मैंने उसे कहा नहीं उसने अपने छोटे से बैग से कंडोम निकाला और मेरे लंड के ऊपर उसने कंडोम को चढाया और मेरे लंड को कंडोम से ढक दिया। उसने मुझे कहा तुम मेरी चूत में अपने लंड को डाल दो उसने मेरी तरफ चूतडो को कर लिया था उसकी बड़ी चूतडो को देखकर मैं बड़ा ही उत्तेजित हो गया था। मैंने जब उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो मेरा मोटा लंड उसकी योनि के अंदर तक चला गया और वह जोर से चिल्ला कर कहने लगी मुझे तो मजा ही आ गया अब मैं उसे लगातार तेजी से धक्के मारे जा रहा था।

मैंने उसे बहुत तेजी से धक्के मारे जब मैं उसे चोद रहा था तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था और वह भी बहुत ज्यादा खुश थी मेरे लंड से पूरी तरीके से पानी बाहर निकलने लगा था और मुझे ऐसा लग रहा था कि कहीं गर्मी से कंडोम फट ना जाए। वह मुझसे अपनी चूतड़ों को मिलाए जा रही थी वह मुझे कहने लगी तुम्हारा लंड बहुत ही मोटा और कठोर है। मैंने उसे कहा तुम्हारी चूत भी बहुत ज्यादा टाइट है मैंने उसे पूछा तुम यह काम क्यों करती हो? उसने मुझे कहा मेरी कुछ मजबूरियां है इसलिए मुझे यह काम करना पड़ता है अब तुम इस बारे में बात मत करो और मेरी चूत मारते रहो यह कहकर उसने अपनी चूतड़ों को मुझसे और भी तेजी से मिलाना शुरू किया तो मैंने भी उसे बड़े जोर से झटके देना शुरू किए। उन्हीं झटको के बीच में ना जाने का मेरा वीर्य कब गिर गया मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और उसको उसने अपने मुंह में लेकर चूसा। वह अगले स्टेशन में उतर गई उसके बाद मैं कभी उससे नहीं मिला मैं भी अपने घर पहुंच चुका था सब लोग बहुत ही ज्यादा खुश थे।