तेज चोदो जानेमन पूरी ताकत लगा दो

Antarvasna, hindi sex kahani: मैं अपने ऑफिस के बाहर चाय के स्टॉल पर चाय पी रहा था सामने से एक बुजुर्ग महिला रोड क्रॉस कर रही थी मैं यह सब देख रहा था तभी एक बाइक सवार युवक बड़ी तेजी से आ रहा था मेरी नजर जब उस पर पड़ी तो मैंने देखा कि कहीं वह उन बुजुर्ग महिला को टक्कर ना मार दे इसलिए मैं तेजी से रोड की तरफ गया और मैंने बुजुर्ग महिला को रोड क्रॉस करवा दी। वह लड़का भी बड़ी तेजी में वहां से निकल कर भाग गया मैं यह सब देख कर उस पर बहुत गुस्सा हुआ मैं जब उन्हें रोड क्रॉस करा कर अपनी तरफ ले आया तो वहां खड़े लोगों ने मेरी तारीफ की और कहने लगे कि आपने यह बहुत अच्छा किया। मैंने उन्हें कहा यह तो मेरा फर्ज था और आंटी भी मुझे शुक्रिया कहने लगी वह मुझे कहने लगी कि बेटा यदि तुम मुझे रोड क्रॉस नहीं करवाते तो शायद वह लड़का मुझे टक्कर मार देता।

मैंने आंटी को कहा इसमें आपको मुझे शुक्रिया कहने की जरूरत नहीं है यह तो मेरा फर्ज था और मैंने अपना फर्ज निभाया। मैं अपने ऑफिस पहुंच चुका था मैं अब अपना काम करने लगा और शाम के वक्त मैं अपने घर के लिए निकल गया। शाम के वक्त मैं अपने घर पहुंचा तो घर पहुंच पर मैंने देखा पापा शराब के नशे में चूर थे पापा की शराब की आदत की वजह से घर का माहौल पूरी तरीके से खराब हो चुका है पापा शराब की आदत को छोड़ ही नहीं पा रहे हैं जिस वजह से मां बहुत ज्यादा परेशान रहती है। मैं कुछ देर अपनी मां के साथ बैठा और बात करने लगा तो मां मुझे कहने लगी कि आज भी तुम्हारे पापा शराब पीकर आए हैं। मैंने मां को कहा मां पापा को तो इतनी बार हम लोगों ने समझा दिया लेकिन पापा कहां समझने वाले हैं उन्होंने तो अपनी जिम्मेदारियों से ही मुंह मोड़ा लिया है वह तो आपने घर को संभाल लिया नहीं तो शायद हम लोग भी आज कहीं फुटपाथ पर आ चुके होते।

मेरी मां मुझे कहने लगी कि शोभित बेटा मुझे तो कोई ना कोई कदम उठाना ही था तुम्हारे पिताजी की ऐसी हरकत की वजह से मैं बहुत परेशान हो गई थी और मैं चाहती हूं कि वह अभी भी अपनी इस आदत को छोड़ दें लेकिन मेरे पापा कहां यह बात मानने वाले थे। आए दिन वह घर पर शराब पीकर आते और मां के साथ बहुत झगड़ा किया करते थे लेकिन मैंने हमेशा अच्छे संस्कार लिए इसीलिए आज मैं एक अच्छी कंपनी में जॉब कर रहा हूं और यह सब मेरी मां की वजह से ही संभव हो पाया है। यदि वह सही समय पर सही फैसला नहीं लेती तो शायद आज हम लोगों की स्थिति ही कुछ और होती परंतु अब सब कुछ ठीक है और मैं बहुत खुश हूं कि पहले से सब कुछ ठीक हो चुका है। हर सुबह की तरह मैं अपने ऑफिस जाता और शाम के वक्त घर लौटता यही मेरी दिनचर्या थी मेरे दोस्तों से भी मेरी बहुत कम मुलाकात हो पाती थी और उनसे मुझे जब भी मिलना होता था तो मैं उन्हें फोन करता था उसके बाद ही हमारी मुलाकात हो पाती थी। एक दिन मम्मी मुझे कहने लगी कि शोभित बेटा क्या हम लोग आज सुपरमार्केट से कुछ सामान ले आए तो मैंने मां को कहा ठीक है मां हम लोग आज सामान ले आते हैं। जब मैंने यह बात मां को कहीं तो मां तैयार हो गई उस दिन मैं घर पर ही था और मेरी छुट्टी थी मैं और मां सुपर मार्केट चले गए वहां पर हम लोगों ने सामान लिया और उसके बाद हम लोग घर लौट आए। जब हम लोग घर लौटे तो मां ने मुझे कहा शोभित बेटा कल माधुरी के कॉलेज में फंक्शन है मेरा तो उसके कॉलेज के फंक्शन में जा पाना मुश्किल होगा लेकिन क्या तुम कल छुट्टी लेकर माधुरी के कॉलेज चले जाओगे, माधुरी को भी अच्छा लगेगा। माधुरी मेरी छोटी बहन है और वह पढ़ने में और कॉलेज के हर कार्यक्रम में सबसे आगे रहती है माधुरी ने भी मुझे कहा कि भैया आपको तो आना ही पड़ेगा मां ने तो आने से मना कर दिया है। मेरे पास भी अब कोई और रास्ता नहीं था इसलिए मुझे अगले दिन कॉलेज जाना ही पड़ा। मैं अगले दिन जब माधुरी के साथ कॉलेज गया तो कॉलेज में माधुरी ने मुझे अपने दोस्तों से मिलवाया माधुरी के दोस्तों से मिलकर मुझे अच्छा लगा उनसे मिलना मुझे इसलिए भी बहुत अच्छा लगा कि वह लोग माधुरी के बारे में मुझे बता रहे थे। उन्होंने माधुरी की बड़ी तारीफ की और ना जाने वह माधुरी को इतने अच्छे से कैसे जानते हैं माधुरी के कॉलेज का प्रोग्राम बहुत ही अच्छा रहा माधुरी जब स्टेज से उतर कर मेरे पास आई तो वह कहने लगी भैया आपको हमारा प्रोग्राम कैसा लगा।

मैंने माधुरी को कहा तुम्हारा प्रोग्राम तो बड़ा अच्छा था और मुझे बहुत खुशी हुई माधुरी मुझे कहने लगी कि भैया मैं चाहती थी कि मम्मी भी मेरा प्रोग्राम देखने के लिए आए तो मम्मी को भी अच्छा लगता लेकिन मम्मी तो मेरा प्रोग्राम देखने के लिए आई ही नहीं। मैंने माधुरी को कहा देखो इसमें दिल छोटा करने की कोई बात नहीं है क्या हुआ तो मम्मी प्रोग्राम देखने के लिए नहीं आई उन्होंने मुझे तो भेज दिया था। तब जाकर माधुरी के चेहरे पर मुस्कुराहट आई लेकिन मुझे इतना तो पता चल चुका था कि माधुरी कॉलेज के अन्य गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है इसीलिए उसे सब लोग पसंद भी करते हैं। कुछ दिनों बाद माधुरी ने मुझे दोबारा से अपने कॉलेज में बुलाया मैं जब उसके कॉलेज में गया तो उसने मुझे अपने दोस्तों से मिलाया मुझे माधुरी के दोस्तों से मिलकर अच्छा लगा वह लोग भी मुझे पहचानने लगे थे उन्हें भी यह बात पता चल चुकी थी कि मैं माधुरी का भैया हूं। माधुरी ने भी मेरी अपने दोस्तों से बहुत तारीफ की थी लेकिन जब मैं माधुरी के कॉलेज में था तो उसी वक्त मेरी नजर माधुरी के कॉलेज में ही पढ़ने वाली डिंपल पर पड़ी।

डिंपल को देखकर मुझे अच्छा लगा मुझे नहीं मालूम था कि डिंपल और मैं इतनी जल्दी इतने करीब आ जाएंगे इसमें माधुरी ने मेरी थोड़ी मदद की और मुझे भी खुशी हुई कि मैं अब डिंपल से बात करने लगा हूं। डिंपल के साथ मेरी अच्छी दोस्ती हो चुकी थी डिंपल और मैं अक्सर एक दूसरे को मिलते थे मैंने डिंपल को अपने बारे में सब कुछ बता दिया था। डिंपल ने भी मुझे अपने बारे में सब कुछ बताया कि कैसे कॉलेज में ही वह एक लड़के को प्यार करती थी लेकिन उसने उसके साथ बहुत बड़ा धोखा किया जिस वजह से उसका प्यार पर से विश्वास ही उठ चुका था लेकिन जब वह मुझसे मिली तो उसे अच्छा लगा और उसे यह भी लगा कि हर कोई एक जैसा नहीं होता इसलिए वह मुझसे अब बात करने लगी थी। हम दोनों का रिलेशन बहुत आगे बढ़ चुका था माधुरी मुझे हमेशा ही कहती कि डिंपल आपको बड़ा याद करती रहती है डिंपल से मिलने के बहाने मैं अक्सर माधुरी के कॉलेज चला जाया करता था। डिंपल और मेरे रिश्ते के बारे में माधुरी के दोस्तों को भी पता चल चुका था। डिंपल और मैं एक दिन साथ में बैठे हुए थे मै डिंपल की तरफ में देखे जा रहा था और वह मेरी तरफ देख रही थी। जब मैंने डिंपल की जांघ पर अपने हाथ को रखा तो वह मेरी तरफ देखने लगी हम दोनों के होंठ एक दूसरे से मिलने के लिए बेताब होने लगे। मैंने डिंपल के होंठों को अपने होंठों में ले लिया जब मैंने उसके होठों का रसपान शुरू किया तो मैंने डिंपल के होठों से खून निकाल कर रख दिया। वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी मैं भी पूरी तरीके से गर्म हो चुका था बहुत देर तक मैंने डिंपल के गुलाबी होठों को अपने होठों में लेकर चूमा डिंपल भी अब मचलने लगी थी। मैंने डिंपल के बदन से कपड़े उतारे उसके गोरे बदन देखकर मैंने उसके स्तनों का रसपान करना शुरू किया।

डिंपल ने मुझे कहा तुम भी अपने कपड़े उतार दो मैंने भी अपने कपड़े उतारे जब मेरा लंड डिंपल की योनि से टकरा रहा था तो उसकी योनि से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा था। मैं डिंपल के होठों को चूम रहा था मुझे उसके होठों को चूमने में मजा आता काफी देर तक मैंने उसके होंठों को चूमा और उसके स्तनों का रसपान किया। डिंपल की चूत के अंदर मैंने अपने लंड को धीरे धीरे डालना शुरू किया तो उसके मुंह से तेज निकलने लगी मैंने उसके दोनों पैरों को खोला और बड़ी तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिए। मुझे बहुत खुशी थी जिस प्रकार से मै उसे चोद रहा था मैंने डिंपल की योनि से खून निकाल कर रख दिया था और डिंपल मुझे अपनी बाहों में लेने लगी मैंने भी डिंपल को अपनी बाहों में ले लिया और डिंपल की चूत मै बड़े ही अच्छे तरीके से मारता रहा। वह अपने मुंह से मादकता भरी आवाज में मुझे कहने लगी मुझे और तेज चोदो और तेजी से करो ना जब उसने कहा मुझे कहा तो मैंने भी उसकी चूतड़ों को अपनी तरफ किया और अपने लंड पर मैंने थूक लगाते हुए डिंपल की योनि के अंदर अपने लंड को डाला तो धीरे-धीरे मेरा लंड डिंपल की योनि के अंदर जाने लगा।

जब मेरा लंड डिंपल की योनि के अंदर तक चला गया तो वह चिल्ला उठी और मुझे कहने लगी मुझे अच्छा लग रहा है। अब मैं डिंपल को लगातार तेजी से धक्के मार रहा था और डिंपल की चूतडे मुझसे टकरा रही थी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और डिंपल को भी बड़ा मजा आता। हम दोनों ही एक दूसरे के साथ बड़े अच्छे तरीके से सेक्स संबंध स्थापित कर रहे। डिंपल की चूत से कुछ ज्यादा ही खून बहा निकलने लगा था उसकी चूत से खून के साथ गर्मी भी बाहर निकलने लगी थी। मेरे लंड और चूत से जो गर्मी निकल रही थी उसको हम दोनों ही नहीं झेल पा रहे थे डिंपल मुझे कहने लगी मैं तो झड़ चुकी हूं। डिंपल ऐसे ही खड़ी थी मै भी थोड़ी देर बाद अपने वीर्य को बाहर गिराने वाला था मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और मैंने डिंपल के ऊपर गिरा दिया। डिंपल मुझे कहने लगी तुमने आज मेरे साथ बड़े अच्छे तरीके से सेक्स संबंध स्थापित किया मैंने डिंपल को कहा तुम्हारी चूत मार कर आज मुझे बड़ा अच्छा लगा।