सूरत की सेक्सी भाभी को जमकर चोदा

sexy bhabhi हैल्लो दोस्तों, में भी आप लोगों की तरह  पिछले कुछ सालों से लगातार सेक्सी कहानियों को पढ़कर उनके में बहुत मज़े लेता आ रहा हूँ। ऐसा करना मुझे बड़ा अच्छा लगता है, क्योंकि यह कहानियाँ बहुत ही सेक्सी मनोरंजन से भरपूर बहुत मजेदार होती है, जिनको पढ़कर समय का अंदाजा ही नहीं लगता, कई घंटे कुछ मिनटों की तरह निकल जाते है जिनका पता भी नहीं चलता और वैसे तो मुझे चुदाई करने की इच्छा बहुत होती है, इसलिए में अपने लंड को शांत करने के लिए किसी ना किसी चूत की तलाश में हमेशा ही लगा रहता हूँ। मैंने अब तक जिसको भी चोदा है उसको हमेशा पूरी तरह से संतुष्ट ही करके छोड़ा है क्योंकि में ज्यादा देर तक अपने मोटे मूसल जैसे लंड से चूत को पूरा फैलाकर तेज जमकर धक्के देता हूँ इसलिए मेरे लंड का टोपा सीधा बच्चेदानी से जाकर टकरा जाता है। दोस्तों में सबसे पहले आप सभी को अपनी सच्ची घटनाए लिखकर पहुँचाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहता हूँ क्योंकि इनको पढ़कर मेरे जैसे लोगो का मन लगा रहता है और आज में भी अपने जीवन की एक सच्ची घटना को लेकर आप सभी के लिए आया हूँ, जिसमे मैंने अपनी एक आंटी के साथ बड़े मज़े किए और उनकी समस्या को हल किया जिसकी वजह से वो बहुत समय से परेशान थी। मेरा नाम राहुल है और मेरी उम्र 24 साल है मेरा शरीर बड़ा ही गठीला रंग गोरा और में सूरत में रहता हूँ।
दोस्तों मेरी एक आंटी है जो सूरत में ही रहती है और वो एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी भी करती है क्योंकि वो शादीशुदा होने के कुछ सालों बाद ही अपने पति से अलग होकर रहने लगी थी, इसलिए उनको अपने घर का खर्चा चलाने के लिए नौकरी करनी पड़ी, मेरी उस आंटी की उम्र करीब 35 की है और उनकी अब दो बेटियां है जिसमे से बड़ी बेटी की उम्र 18 और छोटी बेटी की उम्र 14 है। उनकी वो दोनों ही लड़कियाँ पढ़ाई करती है। मेरी आंटी के बूब्स का आकार 34-32-40 और उनकी गांड बहुत भरी हुई बड़े आकार की है इसलिए में जब भी उनके घर पर जाता तो बस में उनके बूब्स और गांड को ही देखा करता था और उनकी बड़ी बेटी के भी उस गोरे हॉट सेक्सी बदन का आकार 32-28-34 है और उसकी भी गांड बहुत ही प्यारी आकर्षक नजर आती है। दोस्तों वो दोनों माँ बेटी बड़ी ही कामुक लगी है और इसलिए में अपनी उस आंटी को हमेशा ही अपनी सेक्सी नजरो से देखा करता था, लेकिन उन्होंने कभी भी मेरी उस नजर की तरफ गौर नहीं किया क्योंकि वो मुझे अपना बेटा मानती थी और में उनके गोरे गदराए हुए बदन को देखकर अपने मन को बहलाने की कोशिश किया करता था। एक दिन जब में उनके घर उनसे मिलने गया तो मैंने घर पहुंचकर देखा कि उस समय वो अपने घर पर बिल्कुल अकेली ही थी और उन्होंने उस समय हरे रंग की एक सिल्क साड़ी पहन रखी थी, जिसमे वो मुझे बहुत ही सुंदर और सेक्सी नजर आ रही थी और मैंने देखा कि उनका वो ब्लाउज जो उन्होंने उस समय पहना हुआ था वो बहुत ही छोटा था, जिसकी वजह से मुझे बड़े आराम से उनके दोनों बूब्स के बीच का वो सुंदर आकर्षक रास्ता उनके दोनों पहाड़ो के बीच की बहुत गहराई तक साफ साफ नज़र आ रहा था। फिर में कुछ देर अपनी चकित नजरों से उस द्रश्य के मज़े लेता रहा और ऐसा करने में मेरे मन को बहुत ठंडक मिल रही थी। में अपने होश खोकर अपनी एक टक नजर से बस देखता ही रहा और तभी उन्होंने मुझसे चाय के लिए पूछा और तब जाकर मैंने अपने होश में आकर उनको हाँ कर दिया। अब वो मेरे लिए चाय बनाने के लिए रसोई में चली गई। उस समय में उनके बेडरूम में बेड पर बैठा हुआ था और टीवी देख रहा था, जिसमें बड़ी ही मस्त फिल्म आ रही थी और कुछ देर बाद उसमे एक सेक्सी द्रश्य आने लगा, जिसको में बड़े ध्यान से देख रहा था। फिर तभी अचानक से आंटी के आ जाने पर मैंने घबराकर चेनल को बदल दिया। तो वो मुझसे बोली कि तुमने उसको क्यों हटा दिया? दुबारा लगाओ, मैंने उनके कहने पर दोबारा लगा दिया और वो कुछ देर देखकर चली गई और उसके कुछ देर बाद वो हम दोनों के लिए चाय बनाकर ले आई। फिर उसके बाद वो भी अब मेरे पास बैठकर उस फिल्म को देखकर बड़ी खुश हो गई थी और वो देखने में इतनी व्यस्त थी कि उसका बिल्कुल भी मेरे ऊपर ध्यान नहीं रहा कि वो मुझे चाय का कप दे रही है और में भी उस कप को पकड़ना ही भूल गया, शायद मैंने जानबूझ कर ऐसा किया था और फिर अचानक से वो गरम गरम चाय मेरी जांघ पर जा गिरी जिसकी वजह से मेरी पेंट खराब होने के साथ साथ मेरी जांघ पर भी उस गरम चाय का असर हुआ था।

फिर उन्होंने जब देखा तो वो एकदम से बहुत घबरा गई कि गरम गरम चाय मेरी जांघ पर गिरी है और उन्होंने बिना सोचे समझे तुरंत ही एक पानी से भरा हुआ जग दौड़कर लाकर मेरे पैर पर डाल दिया और उनको ज्यादा जल्दी होने पर कोई भी कपड़ा नहीं मिलने पर उन्होंने तुरंत ही मेरे पैरो के पास नीचे बैठकर अपनी साड़ी के पल्लू से उसको साफ करना शुरू किया और जब उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू अपनी उभरी हुई गोरी छाती से दूर हटाया तो उसी समय मुझे उनके वो बूब्स अब एकदम साफ साफ नज़र आ रहे थे, जो अब मेरे घुटनों से छू भी रहे थे। दोस्तों वो सब मेरे साथ होता हुआ देखकर उसी समय धीरे धीरे मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया और में लगातार बूब्स को हिलते हुए देखते समय उस मौके का फायदा उठाकर अब जानबूझ कर अपने एक पैर से उस मुलायम बूब्स को छूकर मज़े लेने लगा था। फिर पानी को साफ करते समय ही अचानक से मेरी आंटी का हाथ मेरे लंड पर जा लगा और वो जांघ से आगे बढ़ते हुए मेरे लंड को भी अपनी साड़ी के पल्लू से साफ करने लगी थी और अपने बूब्स को मेरे घुटनों के एकदम चिपकाकर वो ज़ोर से बूब्स को दबाने भी लगी थी। दोस्तों उनका मेरे साथ यह सब करना बहुत ही मजेदार था। मेरा लंड तनकर खड़ा था और में पूरी तरह से जोश में आ चुका था, इसलिए अब मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं गया और मैंने उसी समय अपने दोनों हाथों से उनको कसकर पकड़कर ज़ोर से उनके नरम गुलाबी होंठो पर एक फ्रेंच किस कर दिया। मेरा लंड अभी भी आंटी के एक हाथ में था और मेरे घुटने उनके बूब्स को लगातार दबाकर मज़े ले रहे थे और मेरे होंठ आंटी के होंठो को चूसकर उनको जोश में ला रहे थे और करीब दस मिनट तक में उनके होंठो को वैसे ही लगातार चूसता रहा और इस बीच में दो चार बार उन्होंने और मैंने हम दोनों ने एक दूसरे की जीभ को चूसकर भी मज़ा किया और एक दूसरे के मुहं का थूक चाटा जिसकी वजह से हम दोनों के होंठ पूरे गीले हो चुके थे और जब मैंने किस करना बंद किया तो हम दोनों की सांसे बड़ी तेज़ी से चल रही थी और तब तक वो मेरा लंड मेरी पेंट से बाहर भी निकाल चुकी थी जो अब उनके नरम हाथों का स्पर्श लेकर बड़ा ही अकड़ रहा था। अब आंटी ने कुछ सेकिंड चेन की सांसे लेकर मेरा लंड अब अपने मुहं में लेकर उसको चूसना शुरू कर दिया और में आअहह उफ्फ्फ्फ़ कर रहा था। फिर करीब 15 मिनट तक वो मेरा लंड लोलीपोप की तरह लगातार अपने मुहं से कभी अंदर तो कभी बाहर निकालकर चूसती ही रही और में भी अब उसके बूब्स को अपने दोनों हाथों से ज़ोर ज़ोर से दबाकर मज़े ले रहा था। उसी समय मैंने थोड़ा जोश में आकर एक बूब्स की निप्पल को थोड़ा ज्यादा ज़ोर मसल दिया, जिससे उसको तेज दर्द हुआ और उसी समय उसने भी मेरे लंड को अपने दांतों से हल्का सा काटना भी शुरू कर दिया, जिसकी वजह से मेरे पूरे बदन में एक अजीब सी हरक़त होने लगी और फिर मैंने भी दोबारा से उसके निप्पल को ज़ोर से दबा दिया जिसकी वजह से आंटी के मुहं से अब वो चीख निकल गयी और वो आईईईइ माँ ऊईईईईइ करने लगी।

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फिर उन्होंने जोश में आकर मेरे लंड को छोड़कर अब मेरे होंठो को एक बार फिर से किस करना और अब काटना भी शुरू कर दिया। फिर उसके थोड़ी देर बाद दोबारा से मेरे लंड अपने मुहं में लेकर ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करते हुए लगातार किसी अनुभवी रंडी की तरह वो चूसने लगी थी और फिर उनके ऐसा करने के कुछ ही देर बाद मेरे लंड से निकले गरम वीर्य का फुहारा बाहर निकलकर सीधा उसके मुहं के अंदर ही छूट गया, जिसको वो बड़े मज़े से चूसने के बाद मेरे लंड को अब अपनी जीभ से चाट भी रही थी। लंड को लगातार चूस चूसकर चमकाकर दोबारा उसने खड़ा होने के लिए मजबूर कर दिया। फिर में वहीं बेड पर ही लेट गया और अब वो मेरे कपड़े उतारने लगी थी। कपड़े उतार देने के बाद उसने मेरे पूरे जिस्म पर किस करना शुरू कर दिया था, लेकिन आंटी ने अभी तक अपनी साड़ी पहन रखी थी यह देखकर में अब उठ गया और मैंने भी बिना देर किए उसका ब्लाउज उतारकर एक तरफ फेंक दिया और फिर उसकी मस्त गुलाबी रंग की सिल्की ब्रा जिसमें छोटे छोटे छेद भी थे, मैंने उसको भी उतार दिया और धीरे धीरे मैंने उसको अपने सामने पूरा नंगा कर दिया और अब में उसके नंगे गोरे बदन को अपनी जीभ से चाटने चूमने लगा। फिर कुछ देर बाद में एक बर्फ का टुकड़ा लाकर उसके बदन पर उस बर्फ को फेरने लगा, जिसकी वजह से वो अपने बदन को इधर उधर करने लगी और कुछ देर बाद मैंने उसी बर्फ को उसकी चूत पर ले जाकर में अब चूत को भी बर्फ रगड़कर मज़े देने लगा। वो अब ज्यादा ज़ोर से चिल्ला रही थी और उसके मुहं से आआआहह उफ्फ्फ्फ़ स्स्सीईईईइ की आवाजे अब बाहर आने लगी थी और वो अपनी गांड को लगातार ऊपर नीचे कर रही थी। फिर तभी अचानक से वो बर्फ का टुकड़ा मेरे हाथ से छूटकर अब आंटी की चूत के अंदर चला गया और उसकी ठंडाई को महसूस करके वो चीख उठी।
अब वो ज्यादा ज़ोर से अपने कूल्हों को उठाने लगी थी। में अब उसकी परेशानी को देखकर कुछ देर बाद अपनी एक ऊँगली को चूत के अंदर डालकर उस बर्फ के टुकड़े को बाहर निकाल रहा था, लेकिन तभी वो मुझसे कहने लगी कि तुम इसको अंदर ही रहने दो, मुझे अब बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। फिर मैंने उनके कहने पर उस बर्फ के टुकड़े को आंटी की चूत के अंदर ही रहने दिया और अब में नीचे झुककर आंटी की चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा था। तब मुझे पता चला कि बर्फ का वो टुकड़ा आंटी की चूत के अंदर की गरमी की वजह से अब पिघल रहा था, जिसकी वजह से चूत और बर्फ का पानी एक साथ मिलकर अब बाहर आकर बह रहा था, जिसको में बड़े ही मज़े से चाट रहा था, वो थोड़ा खट्टा और ठंडा पानी मुझे बड़ा ही स्वादिष्ट लगा और में अपनी जीभ से चूत के दाने को टटोलने के साथ साथ चूत के अंदर तक जीभ को डालकर उसकी सफाई के साथ साथ चुदाई के मज़े भी अब आंटी को देने लगा था। फिर मेरी आंटी के साथ यह सब करने की वजह से आंटी कुछ देर बाद अपने एक हाथ से अपनी चूत को खोलकर और दूसरे हाथ से मेरा सर अपनी चूत पर दबाकर जोश में आकर ज़ोर ज़ोर से चीख और चिल्ला भी रही थी। वो मुझसे अब कह रही थी उफ्फ्फफ्फ्फ़ आह्ह्हह्ह मादरचोद तू आज खा जा, मेरी इस चूत को हाँ ऊईईई आज तू अपनी इस आंटी की चूत को पूरा का पूरा खा जा, हाँ पूरा अंदर तक जीभ को डालकर चूस मुझे बहुत मज़ा आ रहा है।
अब मैंने भी अपनी कामुक आंटी का वो जोश देखकर अब उनके कहने पर चूत को ज़ोर ज़ोर से चाटने के साथ साथ चूसना भी शुरू कर दिया। में उसकी चूत को अपने दांतों से काटने भी लगा था जिसकी वजह से अब आंटी की आवाज़ भी अब धीरे धीरे तेज़ हो रही थी और उधर दूसरी तरफ मेरे दोनों हाथ उनके 40 इंच के मोटे बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबा रहे थे, जिसकी वजह से अब तक दोनों गोरे गोरे बूब्स पूरी तरह से लाल हो चुके थे और उनका दूध भी बाहर निकलने लगा था। फिर कुछ देर आंटी की चूत को चाटने के बाद उन्होंने मुझे अपने ऊपर लेटा लिया और उन्होंने मुझसे कहा कि आजा मादरचोद आजा तू अब मेरा दूध भी पी ले और मुझे भी मज़े दे। फिर में ज़ोर ज़ोर से अब उनके बूब्स को चूसने लगा उनका दूध भी बहुत ही स्वादिष्ट था। फिर करीब दस मिनट तक उनके बूब्स को चूसने और निप्पल को खींच खींचकर दूध पीने के बाद मैंने उनको अब अपने सामने कुतिया बन जाने को कहा तो उन्होंने तुरंत वैसा ही किया। फिर मैंने अपने लंड को झट से खुली रसभरी चूत के मुहं पर रखकर एक ही ज़ोर का धक्का देकर पूरा अंदर डालकर चुदाई करना शुरू किया और कुछ देर बाद मैंने उनकी गांड पर मक्खन लगाकर अपने पांच इंच के लंड को अब उनकी गांड में डाल दिया। तो अचानक से हुए उस प्रहार मेरे तेज धक्के की वजह से वो ज़ोर से चीख पड़ी, वो मुझसे कहने लगी आऊऊऊ आईईईई माँ में मर गई बाहर निकालो इसको, मुझे बड़ा तेज दर्द हो रहा है, लेकिन मैंने अपने लंड को बाहर नहीं निकाला तो में पहले से ज्यादा ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगा, जिसकी वजह से थोड़ी के देर बाद अब आंटी को भी मेरे धक्को से मज़ा आने लगा था और वो भी मस्ती में आकर अपनी गांड तो आगे पीछे करने लगी थी।
दोस्तों उस समय मेरे दोनों हाथ उसकी गांड पर और लंड उनकी गांड में था। में दोनों कूल्हों को कसकर अपनी पकड़ बनाकर तेज तेज धक्के देता ही गया। फिर करीब दस मिनट के बाद मैंने अपना पानी उनकी गांड में ही निकाल दिया। फिर उसके बाद मैंने अपने मुरझाये हुए छोटे आकार के लंड को बाहर निकाला तो आंटी तुरंत ही मेरे लंड को अपने मुहं में लेकर चूसने लगी और फिर में आंटी के ऊपर ही लेट गया और अब में उनके होंठो को चूसने लगा और लेटे हुए चूत में ऊँगली करता रहा। फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों नंगे ही उठे और किचन में चले गये। वहाँ हमने जूस और दूध पिया और फिर मेरे हाथ में बेलन आ गया जिसको मैंने उसकी चूत में डाल दिया। में बेलन को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा तो आंटी ने मुझसे कहा कि यह बेलन तो छोटा पतला है और तुम दोबारा से अपना लंड मेरी इस चूत में डालकर धक्के दो, तब मुझे असली मज़ा आएगा और फिर मैंने यह बात आंटी के मुहं से सुनकर उनको उसी समय वहीं किचन में ही लेटा दिया और उनके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया। उसके बाद में अपना लंड उनकी चूत में दबाव बनाकर डालने लगा, पहले धीरे धीरे और फिर थोड़ी देर के बाद में अपने लंड से आंटी की चूत पर ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगा था, जिसकी वजह से वो चीख उठी ऊईईईईई माँ मादरचोद हाँ और ज़ोर से चोद ऊउफ़्फ़्फ़्फ़ हाँ आज तू फाड़ दे मेरी इस चूत को, तू अपना यह मोटा लंबा लंड मेरी आहहाह चूत में पूरा अंदर डालकर दमदार तेज धक्के दे ऊईईई माँ मर गई की आवाज़े निकल रही थी।
अब में जोश में आकर पहले से भी ज्यादा ज़ोर ज़ोर से झटके देकर चुदाई कर रहा था। फिर करीब दस मिनट तक लगातार धक्के देकर चोदने के बाद मैंने उनसे कहा कि अब में झड़ने वाला हूँ। में अपना वीर्य कहाँ निकालूं? तो उन्होंने मुझसे बोला कि तुम इसको मेरी चूत के अंदर ही छोड़ दो, मेरी चूत बहुत सालों से सूखी है। अब तुम इसकी प्यास को बुझा दो, मुझे तुम आज चुदाई का पूरा सुख दे दो, जिसके लिए में पिछले इतने सालों से तरस रही हूँ। फिर मैंने आंटी के कहने पर वैसे ही तेज धक्के देकर उसकी चूत के अंदर ही अपने लंड का वीर्य छोड़ दिया और तेज तेज धक्के देते हुए मैंने वीर्य को आंटी की चूत की गहराईयों तक पहुंचा दिया और उसके बाद में आंटी के ऊपर ही थककर लेट गया, क्योंकि इतनी देर तक लगे रहने की वजह से में और आंटी हम दोनों ही थोड़ा थका हुआ सा महसूस कर रहे थे और अब में उनके पेट पर ही लेटकर धीरे धीरे उनके बूब्स को चूसने लगा।
दोस्तों तब मैंने देखा कि आंटी अपने चेहरे से बहुत ही खुश पूरी तरह से संतुष्ट नजर आ रही थी और उस पहली चुदाई के बाद मैंने आंटी को ठीक वैसे ही पांच बार उनके घर पर जाकर बहुत जमकर चोदा। उस समय भी वो अपने घर में एकदम अकेली थी और मेरी हर बार चुदाई से वो अब मेरे साथ बहुत खुश रहने लगी है, क्योंकि उनको अब मेरा लंड मिल चुका है जो उनकी प्यासी चूत की प्यास को बुझाकर मुझे भी चुदाई के मज़े देने के साथ साथ मन की शांति दे रही थी, जिसकी वजह हम दोनों को काम चल रहा था। हम दोनों साथ में बहुत खुश थे ।।
धन्यवाद