सुहानी के साथ की सुहानी यादें

Antarvasna, hindi sex story: मैं कुछ दिनों पहले ही मुंबई से घर लौटा था और मैं कुछ समय तक घर पर ही था क्योंकि पापा और मम्मी चाहते थे की मैं अपने ऑफिस से कुछ दिनों की छुट्टी ले लूं। मैंने अपने ऑफिस से कुछ दिनों की छुट्टी लेली थी और फिर हम लोग फैमिली टूर पर जाने के लिए प्लान कर रहे थे। मैंने जब पापा मम्मी से इस बारे में कहा कि हम लोग अपनी फैमिली टूर पर कहां जाएं तो मम्मी ने कहा कि हम लोगों को माउंट आबू जाना चाहिए।

हम लोगों के पास ज्यादा समय तो नहीं था इसलिए हम लोग कुछ दिनों के लिए ही माउंट आबू जाना चाहते थे। हम लोग पूरी फैमिली के साथ माउंट आबू चले गए और वहां पर हम लोगों ने साथ में काफी अच्छा समय बिताया। मुझे इस बात की बड़ी खुशी थी कि मेरे पूरे परिवार साथ में मैं लंबे समय बाद कहीं घूमने के लिए गया। दीदी और जीजाजी भी हम लोगों के साथ में थे और हम लोग बहुत ही ज्यादा खुश थे जिस प्रकार से हम लोगों ने माउंट आबू में इंजॉय किया और सब लोग बड़े ही खुश थे।

अब हम लोग वापस लौट आए थे और जब लोग वापस लौटे तो उसके बाद मैं अपना ऑफिस ज्वाइन कर चुका था और अब हर रोज की तरह मैं सुबह ऑफिस के लिए तैयार हो रहा था। मैं ऑफिस के लिए तैयार हो चुका था और मां से मैंने कहा कि मां मेरे लिए नाश्ता लगा दो मां ने मेरे लिए नाश्ता लगाया। मैं अब नाश्ता करके अपने ऑफिस के लिए निकल ही रहा था कि मेरे दोस्त का फोन आ गया और वह मुझे कहने लगा कि आकाश क्या तुम मुझे भी रिसीव कर लोगे तो मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हें लेने के लिए तुम्हारे घर पर आता हूं।

मैं अपनी कार से उसे लेने के लिए उसके घर पर गया जब मैं उसके घर पर पहुंचा तो हम दोनों वहां से ऑफिस के लिए निकल पड़े। जब हम लोग ऑफिस पहुंचे तो उसके बाद हम लोग अपने ऑफिस का काम करने लगे। उसी दिन दोपहर में लंच टाइम से वक्त मैं अपने ऑफिस के बाहर ही खड़ा होकर सिगरेट पी रहा था कि तभी सामने से एक लड़की आती हुई मुझे दिखाई दी वह भी शायद किसी ऑफिस में ही जॉब करती थी। उस दिन उसे देखकर मुझे काफी अच्छा लग रहा था और मैं चाहता था कि उससे मैं बात करूं लेकिन मेरा उससे कोई भी परिचय नहीं था।

उसके कुछ दिनों के बाद वह मुझे एक फंक्शन में दिखाई दी और वहां पर जब वह मुझे लड़की दिखी तो मैंने सोचा कि आज मैं उससे बात कर ही लेता हूँ। मैंने उस दिन उससे बात कर ली मुझे पहले तो लगा था कि शायद वह मुझसे बात नहीं करेगी लेकिन उसने बड़े ही अच्छे से मुझसे बात की और मुझे काफी अच्छा भी लगा जिस तरीके से हम लोगों ने एक दूसरे से बात की। अब मुझे उसका नाम पता चल चुका था उसका नाम सुहानी है और सुहानी के साथ में मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो चुकी थी हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी अच्छा समय बिताने लगे थे। जब भी मैं सुहानी को मिलता तो मुझे सुहानी से मोलकर काफी ज्यादा अच्छा लगता। कहीं ना कहीं सुहानी को भी मेरे साथ अच्छा लगने लगा था और हम दोनों की दोस्ती और भी ज्यादा गहरी होती जा रही थी। समय के साथ साथ मै सुहानी के साथ अपनी बातों को शेयर किया करता और सुहानी भी मुझसे अपनी बातों को शेयर किया करती तो मुझे काफी अच्छा लगता। अब हम दोनों काफी ज्यादा खुश थे जब भी मैं और सुहानी साथ में होते तो हम दोनों को अच्छा लगता।

एक दिन सुहानी और मैं कॉफी शॉप में बैठे हुए थे उस दिन हम लोग ऑफिस से फ्री होकर कॉफी शॉप में बैठे हुए थे और हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे। मुझे सुहानी से बातें कर के अच्छा लग रहा था और उसे भी मुझसे बातें करना अच्छा लग रहा था हम दोनों ने उस दिन साथ में काफी अच्छा टाइम स्पेंड किया। करीब दो घंटे तक उस दिन हम दोनों साथ में बैठे रहे फिर मैंने ही उस दिन सुहानी को उसके घर तक छोड़ा। मैंने जब सुहानी को उसके घर पर छोड़ा तो सुहानी और मैं साथ में काफी ज्यादा खुश थे और हम दोनों को बहुत ही ज्यादा अच्छा लगा जिस तरीके से हम दोनों ने साथ में टाइम स्पेंड किया। सुहानी और मेरी फोन पर भी बातें होती रहती थी और हम दोनों फोन पर जब भी एक दूसरे से बातें करते तो हम दोनों को ही अच्छा लगता। कुछ दिनों से मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं थी इसलिए मैं अपने ऑफिस नहीं जा पा रहा था तो सुहानी ने मुझे फोन किया और कहने लगी की तुम कुछ दिनों से मुझे मिल नहीं रहे हो ना ही तुम्हारा फोन आ रहा है। मैंने सुहानी को कहा कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है इस वजह से मैं तुम्हें फोन नहीं कर पाया था। सुहानी ने मुझे कहा कि मुझे तुमसे मिलना है तो मैंने सुहानी को कहा कि तुम घर पर ही आ जाओ। यह पहली बार था जब सुहानी उस दिन हमारे घर पर आई थी मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि सुहानी जब मम्मी से मिलेगी तो मम्मी मुझसे कहेगी की सुहानी से तुम शादी कर लो। सुहानी को देखते ही मम्मी ने पसंद कर लिया था।

मैंने मम्मी से कहा कि मम्मी मैंने कभी भी सुहानी के बारे में ऐसा कुछ नहीं सोचा। सुहानी तो घर से जा चुकी थी लेकिन अब मम्मी मेरे पीछे पड़ी हुई थी कि तुम सुहानी से अपने रिश्ते की बात करो। सुहानी का भी हमारे घर पर अक्सर आना जाना रहने लगा था लेकिन हम दोनों के बीच अभी भी कुछ ऐसा नहीं था परंतु मुझे भी लगने लगा था कि सुहानी के बिना शायद मैं नहीं रह पाऊंगा इसलिए मैंने उसे अपने दिल की बात कह दी। सुहानी ने भी मेरे रिलेशन को स्वीकार कर लिया और हम दोनों बहुत ही खुश थे जिस तरीके से हम दोनों का रिलेशन चल रहा था। मैं और सुहानी एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा खुश थे हम दोनों साथ में ज्यादा से ज्यादा समय बिताया करते और वह भी मुझसे मिलने के लिए घर पर आ जाया करती थी। जब भी वह मुझसे मिलने के लिए घर पर आती तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता और सुहानी को भी बहुत ज्यादा अच्छा लगता। एक दिन मैं और सुहानी साथ में बैठे हुए थे उस दिन मैंने सुहानी के हाथों को महसूस करना शुरू किया तो वह भी कहीं ना कहीं गर्म होने लगी थी। यह पहली ही बार था जब मेरे और सुहानी के होंठ आपस मे टकराने जा रहे थे उस दिन जब हम दोनों के होंठ आपस में टकराने लगे तो हम दोनों को बड़ा अच्छा लगने लगा और सुहानी को भी बड़ा मजा आने लगा था। हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश हो गए थे। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो सुहानी ने उसे देखते ही कहा मैं तुम्हारे लंड को अपने मुंह में लेना चाहती हूं।

सुहानी ने उसे अपने मुंह में लेना शुरू किया। वह मेरे लंड को बड़ी अच्छी तरीके से चूसने लगी जिस तरीके से वह मेरे मोटे लंड को सकिंग कर रही थी उस से मुझे मजा आने लगा था और सुहानी को भी बहुत ज्यादा मजा आने लगा था।

हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ही ज्यादा खुश थे अब मैंने सुहानी से कहा सुहानी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। सुहानी ने जब अपने बदन से अपने कपड़े उतारे तो मैंने उसकी ब्रा को खोल दिया। मैंने जब सुहानी की ब्रा को खोला तो मुझे काफी अच्छा लगने लगा था और मैं सुहानी के स्तनों को दबाने लगा थोड़ी देर तक मैंने उसके स्तनों को दबाया और फिर उसके बाद मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरू कर दिया था। मैं जिस तरीके से उसके स्तनों को चूस रहा था मुझे मजा आने लगा था और सुहानी को भी बहुत ज्यादा मजा आने लगा था जिस तरीके से वह मेरा साथ दे रही थी उससे हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थे।

अब कहीं ना कहीं हम दोनों की खुशी में इजाफा होता जा रहा था क्योंकि मैं बिल्कुल भी अपने आप को रोक नहीं पा रहा था और ना ही सुहानी अपने आपको रोक पा रही थी इसलिए मैंने अपने मोटे लंड पर थूक लगाते हुए सुहानी की योनि पर लंड को लगाया। सुहानी की चूत से चिपचिपा पदार्थ बाहर को निकाल रहा था उसकी योनि बहुत ही ज्यादा गर्म हो रही थी और मुझे वह अपनी और खींच रही थी। मैं समझ चुका था वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही है मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाला तो वह जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है।

अब हम दोनों ही काफी खुश हो चुका थे मैंने उसकी योनि के अंदर बाहर लंड को करना शुरू कर दिया था लेकिन सुहानी की चूत से खून बाहर की तरफ निकल रहा था जिससे कि वह बड़ी तेज आवाज में सिसकारियां ले रही थी। वह जिस तेज आवाज में सिसकारियां ले रही थी उससे मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मारे जा रहा था हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थे। मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करना शुरू कर दिया था मैंने जैसे ही उसकी योनि में अपने माल को गिराया तो मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया। सुहानी ने मुझे कहा तुमने मेरी चूत को अपने माल से पूरी तरीके से भर दिया है। सुहानी बड़ी ही खुश थी उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कुराहट थी।

सुहानी की चूत से मेरा वीर्य बाहर टपक रहा था। मैंने जैसे ही सुहानी की योनि के अंदर अपने लंड को घुसाया तो हम दोनों को ही मजा आने लगा मुझे भी बड़ा अच्छा लग रहा था जिस तरीके से मैं और सुहानी एक दूसरे का साथ दे रहे थे। हम दोनों ने एक दूसरे का साथ जमकर दिया कहीं ना कहीं हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बिल्कुल भी झेल नहीं पा रहे थे मेरा वीर्य पतन होने को था। जैसे ही मेरे वीर्य की पिचकारी मेरे अंडकोष तक आने वाली थी तो मैंने सुहानी को तेज गति से धक्के देना शुरू कर दिया और सुहानी की चूत में मैंने अपने माल को गिराकर उसकी इच्छा को पूरा किया। वह खुश हो गई थी और मैं भी बड़ा खुश था।