सासू मां की कई सालों की प्यास

Hindi sex kahani, antarvasna मुंबई में मानसून का समय था और बारिश काफी हो रही थी उस दिन मुझे आने में भी देर हो चुकी थी। अपने ऑफिस से तो मैं समय पर निकल चुका था लेकिन ट्रेन समय पर नहीं आई और मुझे काफी देर तक ट्रेन का इंतजार करना पड़ा। जब बारिश थोड़ा रुकी तो कुछ देर बाद ट्रेन भी आ चुकी थी और मैं ट्रेन में बैठ कर अपने कानों पर हेडफोन लगाकर गाने सुनने लगा। ट्रेन में काफी भीड़ थी और सब लोगों के चेहरे ऐसे नजर आ रहे थे जैसे कि उनके चेहरे पर खुशी ही ना हो। मैं सबके चेहरों को देखता तो मुझे लगता कि शायद मुझसे ज्यादा वह लोग परेशान हैं। यह सोचते सोचते मैंने करीबन आठ दस गाने सुन लिए थे और मेरा स्टेशन भी आने वाला था। मैं अपने स्टेशन पर उतरा और वहां से मैंने स्टेशन के बाहर से ऑटो लिया और अपने घर तक चला आया।

 मैं जब अपने घर पहुंचा तो मैं पूरी तरीके से भीग चुका था मैंने जल्दी से अपने कपड़े बदले और अपने कपड़ों को सुखा दिये। मेरी पत्नी का मूड उस वक्त कुछ ठीक नहीं दिखाई दे रहा था। मैंने उससे पूछा क्या हुआ तो उसने मुझे कोई जवाब नहीं दिया लेकिन मैं समझ चुका था कि आखिर उसका मूड क्यों खराब है। मेरी बहन शांति जिसकी उम्र 30 वर्ष है उसकी शादी हम लोगों ने 5 वर्ष पहले करा दी थी। उसकी शादी ज्यादा समय तक टिक नही पाई और वह घर वापस लौट आई वह अब अपने ससुराल जाना ही नहीं चाहती थी। हम लोगों का भी उसके प्रति कोई फर्ज बनता था हमने शांति को कहा कि अब तुम यहीं रहो। मैंने काफी कोशिश की थी कि उसके पति और उसके बीच में सब कुछ ठीक हो जाए लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। उन दोनों का डिवोर्स हो गया और तब से शांति हमारे पास ही रहती है। मेरे पिताजी और मेरी मां इस बात से काफी परेशान रहते हैं कि शांति के साथ इतना गलत हुआ। इसमें किसी की भी गलती नहीं है इसमें सिर्फ शांति के ससुराल पक्ष वालों की गलती थी। जिस वजह से शांति को वह घर छोड़कर आना पड़ा लेकिन अब शांति की वजह से मेरे और मेरी पत्नी के बीच में कई बार झगड़ा हो जाया करता था। मेरी पत्नी गरिमा का झगड़ा उस दिन शांति से भी हुआ था मैंने गरिमा से पूछा तो गरिमा ने मुझे बताया हां मेरा आज भी शांति के साथ झगड़ा हुआ था।

 उन दोनों के बीच ना जाने क्यों इतनी दूरियां थी दोनों ही एक दूसरे को बिल्कुल भी पसंद नहीं करते थे। वह दोनों एक दूसरे से बिल्कुल विपरीत थे मुझे उन दोनों की बहुत चिंता थी। उस दिन गरिमा इतनी ज्यादा गुस्से में थी कि उसने अपना सामान पैक किया हुआ और मुझे कहा मैं आज अपने घर जा रही हूं मुझे यहां अब नहीं रहना। मैंने उसे कई बार मनाने की कोशिश की लेकिन उस दिन वह मेरी बात नहीं मानी और आखिरकार वह अपने घर चली गई। मुझे कुछ समझ नहीं आया कि मैं किसके पक्ष में बोलूं क्योंकि शांति मेरी बहन है और गरिमा मेरी पत्नी थी। मैं उन दोनों के बीच में पीसने लगा था मेरे मम्मी पापा भी इसके लिए कुछ नहीं कर सकते थे। उन्होंने मुझे कहा बेटा हम भी तुम्हारी मदद नहीं कर सकते हालांकि उन्होंने शांति को भी काफी बार समझाने की कोशिश की। शांति हमेशा कहती कि भैया इसमें मेरी कभी गलती नहीं होती लेकिन भाभी को ऐसा लगता है कि जैसे मैं उनकी बुराइयां पड़ोस में करती हूं परन्तु ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। मुझे नहीं पता कि कौन सही था और कौन गलत था लेकिन मुझे तो दोनों को ही देखना था। मैंने अगले दिन ऑफिस पहुंचकर गरिमा को फोन किया तो गरिमा ने मेरा फोन नहीं उठाया। मैंने गरिमा को दोबारा से फोन किया लेकिन उसने फिर भी मेरा फोन नहीं उठाया। मुझे समझ नहीं आया कि आखिरकार मुझे क्या करना चाहिए। थक हार कर मैंने गरिमा को मैसेज किया और कहा मुझे तुमसे जरुरी बात करनी थी। गरिमा का भी मुझे मैसेज में रिप्लाई आया उसने मुझे कहा मुझे अब तुमसे कोई बात नहीं करनी और ना ही मुझे तुमसे कोई संबंध रखने हैं। मैंने गरिमा को फिर से फोन किया तो गरिमा की मम्मी ने फोन को उठाया वह मुझे कहने लगी बेटा तुम लोग आपस में क्यों झगड़ते रहते हो। मैंने उनको सारी बात बता दी लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि इसमें किसकी गलती है और किसकी नहीं क्योंकि इस बात को तो मैं खुद ही नहीं समझ पा रहा था।

 गरिमा ने मुझसे बात की मैंने गरिमा से कहा तुम्हें ऐसे घर छोड़कर नहीं जाना चाहिए था तुमने बहुत गलत किया। गरिमा मुझे कहने लगी जब तक आपकी बहन शांति घर में रहेगी तब तक मैं बिल्कुल भी घर वापस नहीं लौटने वाली और आप मुझे भूल जाएं। मैंने उसे कहा तुम यह कैसी बात कर रही हो लेकिन वह तो जैसे अब चाहती ही नहीं थी कि वह घर वापस लौटे। इस बात को काफी समय हो चुका था एक दिन मैं काफी परेशान था तो मुझे शांति ने कहा भैया आप काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं मैंने शांति से कहा नहीं ऐसी कोई बात नहीं है। वह मेरे पास आकर बैठी और मुझे कहने लगी भैया मैं आपको बचपन से जानती हूं आप जब भी परेशान होते हैं तो आप अपनी परेशानी किसी को भी नहीं बताते आप अकेले ही कमरे में बैठे रहते हैं। मैंने शांति से कहा नहीं शांति ऐसी कोई बात नहीं है तुम्हें कोई गलतफहमी हुई है भला मैं क्यों परेशान होने लगा। शांति ने मुझे कहा देखो भैया मुझे सब मालूम है आप भाभी की वजह से परेशान है क्योंकि भाभी घर से गुस्से में चली गई थी ना और यह सब मेरी वजह से हुआ है। शांति अपने सर पर सारी गलती को लेने के लिए तैयार थी लेकिन मैंने उसे कहा देखो शांति ऐसा कुछ भी नहीं है। उसे बहुत बुरा लग रहा था और वह भी कुछ नहीं कर सकती थी। मैंने शांति से कहा हां मैं गरिमा के जाने से दुखी हूं क्योंकि मुझे लगता था कि वह ऐसा नहीं करेगी परंतु उसने बहुत गलत किया जो वह अपने घर चली गई।

मैंने जब यह बात शांति को कहीं तो शांति कहने लगी भैया मैं सब कुछ ठीक कर दूंगी यह सब मेरी ही वजह से हुआ है। मुझे नहीं लगता था कि यह सब शांति की वजह से हुआ है लेकिन फिर भी शांति को यही लगता था और शांति ने शायद गरिमा से माफी मांगी। अगले दिन मुझे गरिमा का फोन आया और वह कहने लगी मैं कल घर आ रही हूं आप मुझे लेने के लिए आ जाइएगा। मैंने उसे कहा ठीक है मैं कल तुम्हें लेने के लिए आ जाऊंगा और मैं अगले दिन अपने ससुराल में चला गया। वहां पर जब मैं गया तो गरिमा की मम्मी यानी कि मेरी सासू मां मुझे कहने लगे बेटा आप दोनों आपस में कभी झगड़ा मत किया करो। इससे घर के माहौल में फर्क पड़ता है इसलिए आप दोनों एक दूसरे को समझने की कोशिश किया करो। मै सिर्फ उनकी हां में हां मिला रहा था क्योंकि वह मुझसे बड़ी हैं और मुझसे ज्यादा समझदार भी हैं। मेरे पास उस वक्त उनकी बातों को सुनने के सिवा और कोई चारा नहीं था उस रात मैं अपने ससुराल में ही रुक गया। गरिमा के चेहरे पर अब थोड़ी बहुत मुस्कान थी क्योकि मैं उसे लेने के लिए उसके घर पर आया हूं। गरिमा भी घर में इकलौती है इसलिए शायद वह जल्दी गुस्सा हो जाया करती है। गरिमा और मेरे बीच में काफी दिनों बाद शारीरिक संबंध बने इतने दिनों से मैं भी तड़प रहा था और गरिमा भी तड़प रही थी इसलिए उस रात मैने गरिमा की चूत तेल लगाकर मारी। उस दिन मेरा मन ही नहीं भरा और मैं उसे बड़ी जबरदस्त तरीके से चोद रहा था जिससे कि उसकी आवाज बाहर भी जाने लगी थी शायद उसकी मम्मी भी आवाज सुनकर आ गई और दरवाजा खटखटाने लगी और कहने लगी क्या हुआ?

 मैंने धीरे धीरे गरिमा को चोदा और अपने वीर्य को गरिमा की योनि में डाल दिया। जब मैं अपनी सासू मां के कमरे में गया तो मैंने देखा वह अपनी योनि के अंदर वाइब्रेटर ले रही थी क्योंकि उनकी चूत भी किसी ने काफी समय से नहीं मारी थी इसलिए वह भी तड़प रही थी। उनकी इच्छा पूरी करने के लिए मैंने अपने लंड को उनके हाथों में दिया तो वह उसे हिलाने लगी और काफी देर तक उन्होंने उसे हिलाया। जब उन्होंने अपने मुंह में मेरे लंड को लिया तो मुझे ऐसा लगा कि वह बड़े अच्छे से मेरे लंड को चूस रही है। उन्होंने मुझे कहा कसम से आज मजा आ गया काफी समय बाद किसी के लंड को अपने मुंह में लेने का मौका मिला है और ऐसा मजा मैंने कब से नहीं लिया था। उस दिन मुझे बड़ा मजा आया मैंने काफी देर तक उनके स्तनों का रसपान किया और उनके स्तनों को चूसने मे बड़ा मजा आता। मैंने जब अपने मोटे लंड को उनकी चूत में प्रवेश करवाया तो वह मुझे कहने लगी दामाद जी आप तो छुपे रुस्तम निकले। मैंने अपनी सासू मां से कहा आप भी तो बड़ी सेक्स की भूखी है यदि मुझे यह बात पहले मालूम होती तो मै कब की आपकी प्यास बुझा चुका होता।

 उन्होने मुझे कहा अब भी कौन सा देर हो गई है, उनकी मादक आवाज में गहराई थी। मैंने उनके दोनों पैरों को चौड़ा कर के उन्हें बड़ी तेजी से धक्के देने शुरू कर दिए थे जिससे कि वह चिल्ला रही थी। जब मैंने उन्हें घोड़ी बनाकर धक्के देने शुरू किए तो वह कहने लगी अब तो मजा ही आ गया ऐसे ही आप करते रहो। जब मैंने उनकी गांड में तेल लगाकर अपने लंड को डाला तो मुझे और भी ज्यादा मजा आने लगा मैं उन्हें बड़ी तेजी से धक्के देने लगा। मैंने उनकी गांड बहुत तेजी से मारी जिससे कि उनकी गांड से खून बहने लगा लेकिन वह तो थक ही नहीं रही थी और मैं भी उन्हें धक्के मरता गया मुझे मालूम ही नहीं पड़ा कब मेरा वीर्य गिर गया और जैसे ही मेरा वीर्य पतन हुआ तो मैंने कहा मैं अब गरिमा के पास जाता हूं। वह कहने लगी हां गरिमा को आपके प्यार की जरूरत है आप वहां चले जाइए। मै गरिमा के पास चला गया और गरिमा को मैने कहा तुम अभी सोई नही क्या? वह कहने लगी नहीं। हम दोनो एक दूसरे की बाहो मे सो गए।

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