सम्बन्ध नौकरानी संग

Antarvasna, hindi sex stories: मेरा कॉलेज पूरा होने के बाद मैं अपने करियर को लेकर काफी ज्यादा चिंतित था मेरी जॉब लग नहीं पाई थी लेकिन जब मेरी जॉब लगी तो उसके बाद मैं लखनऊ चला गया। मैं एक छोटे शहर का रहने वाला हूं लखनऊ में मैं जब गया तो लखनऊ में मैं पूरी मेहनत के साथ काम करने लगा मुझे लखनऊ में जॉब करते हुए दो वर्ष हो चुके थे।  एक दिन मेरे ऑफिस में काम करने वाले सुधीर ने मुझसे कहा कि वह कुछ समय बाद मुंबई जा रहा है उसकी जॉब मुंबई में लग चुकी थी। सुधीर को मुंबई में काफी अच्छी सैलरी मिल रही थी इसलिए वह मुम्बई जा चुका था मुम्बई जाने के बाद भी उससे मेरा संपर्क होता ही रहता था हम दोनों की फोन पर बातें होती रहती थी। एक दिन सुधीर ने मुझे कहा कि यदि हमारी कंपनी में तुम इंटरव्यू देना चाहो तो तुम इंटरव्यू देने के लिए मुंबई आ सकते हो। मुझे भी लगा कि मुझे अच्छी तनख्वाह मिलेगी इसलिए मैं कुछ दिनों के लिए मुंबई चला आया। मैंने मुंबई में इंटरव्यू दिया और वहां पर मेरा सिलेक्शन हो गया मुंबई में मेरा सिलेक्शन हो चुका था और मैं काफी ज्यादा खुश था कि अब मेरा सिलेक्शन मुंबई में हो चुका है।

सब कुछ काफी अच्छे से चलने लगा था मैं मुंबई में जॉब करने लगा और मुंबई में मेरी जिंदगी अच्छी चले लगी थी। मैं  और सुधीर साथ में ही रहा करते थे हमारे ऑफिस में कुछ दिनों पहले ही महिमा ने ज्वाइन किया था महिमा जो कि शादीशुदा थी लेकिन उसकी शादी शुदा जिंदगी बिल्कुल भी ठीक नहीं चल रही थी। महिमा से मेरी अक्सर बातें होती थी इसलिए वह मुझसे हर एक चीज बताया करती थी। महिमा मुझसे अपनी हर एक परेशानी शेयर किया करती थी। जब से हम दोनों के बीच में प्यार होने लगा तब से मुझे महिमा का साथ अच्छा लगने लगा और महिमा को भी मेरा साथ काफी अच्छा लगता। मुझे नहीं मालूम था कि हम दोनों के बीच में प्यार इतना बढ़ जाएगा। महिमा और उसके पति के बीच बिल्कुल भी नहीं बनती थी उन लोगों के बीच अक्सर झगड़ा हुआ करता था महिमा मुझसे हर एक बात कहा करती थी लेकिन अब मुझे भी लगने लगा था कि महिमा को अपने पति से अलग हो जाना चाहिए। मैंने महिमा से इस बारे में बात की तो महिमा ने मेरी बात मान ली, महिमा मेरी बात मान चुकी थी और वह अब अपने पति को डिवोर्स देना चाहती थी लेकिन उसके पति उसे डिवोर्स नहीं देना चाहते थे। महिमा एक अच्छे परिवार से है और उसके पति कुछ काम नहीं करते हैं जिस वजह से वह महिमा को पैसे के लिए काफी ज्यादा परेशान किया करते लेकिन किसी तरीके से महिमा को अपने पति से छुटकारा मिल गया और वह अपने पति को डिवोर्स दे चुकी थी। महिमा चाहती थी कि मैं उसके परिवार वालों से मिलूं जब मैं महिमा की फैमिली से मिला तो मुझे उन लोगों से मिलकर काफी अच्छा लगा। वह लोग भी मुझसे महिमा की शादी करवाने के लिए तैयार थे उन्हें मेरे और महिमा के रिश्ते से कोई एतराज नहीं था और मैं इस बात से काफी खुश था कि महिमा के परिवार वाले भी अब मेरे और महिमा के रिश्ते को स्वीकार कर चुके थे।

हम दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया था और अब हम दोनों की शादी हो चुकी थी उसके बाद महिमा और मैं साथ में रहने लगे और हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी खुश थे। मैं चाहता था कि महिमा को मैं कभी भी किसी भी प्रकार से कोई कमी महसूस ना होने दूं और मैंने हमेशा ही ऐसा किया। महिमा भी जॉब कर रही थी मैंने महिमा से कई बार कहा कि महिमा तुम जॉब छोड़ दो लेकिन महिमा ने मेरी बात नहीं मानी और वह कहने लगी कि नहीं रजत मैं जॉब करना चाहती हूं। मैंने भी हमेशा महिमा की बात मानी और महिमा अभी भी जॉब कर रही थी मैं और महिमा एक दूसरे के साथ काफी खुश थे। महिमा मेरी खुशियों का ध्यान रखती और मुझे बहुत अच्छा लगता जब भी महिमा और मैं साथ में होते। सुबह के वक्त महिमा और मैं ऑफिस चले जाया करते थे इसलिए मुझे भी लगने लगा कि क्यों ना हम लोगों को घर में किसी कामवाली को रख लेना चाहिए क्योंकि महिमा और मेरे पास समय नहीं होता था। हम लोग ऑफिस से काफी देर में लौटा करते थे इसलिए मैंने घर पर काम वाली को रख लिया वह सुबह आकर घर की साफ सफाई कर दिया करती और वह घर का पूरा काम किया करती। महिमा और मैं एक दूसरे के साथ काफी ज्यादा खुश थे हम दोनों को एक दूसरे के साथ बहुत अच्छा लगता है जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ होते। हम दोनों ज्यादा से ज्यादा एक दूसरे के साथ समय बिताने की कोशिश किया करते।

मेरे और महिमा की जिंदगी में सब कुछ अच्छे से चल रहा था और हम दोनों काफी ज्यादा खुश थे। मैंने भी अब अपना घर खरीदने के बारे में सोच लिया था और जल्द ही मैंने एक फ्लैट खरीद लिया महिमा और मैंने अपनी मेहनत के बलबूते फ्लैट खरीदा। महिमा और मेरे सपने धीरे धीरे कर के पूरे होते जा रहे थे हम दोनों एक दूसरे को हमेशा खुश रखने की कोशिश किया करते। मैं महिमा के साथ बहुत खुश था और महिमा भी मेरे साथ काफी ज्यादा खुश है। मैं अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में कुछ दिनों के लिए बाहर जाने वाला था मैंने महिमा को कहा कि महिमा तुम अपना ध्यान रखना महिमा ने मुझे कहा कि हां रजत मैं अपना ध्यान रखूंगी तुम बिल्कुल भी चिंता ना करो। मैं कुछ दिनों के लिए दिल्ली चला गया दिल्ली में मैं 4 दिनों तक रहा और उसके बाद मैं मुंबई लौट आया। मैं जब मुंबई लौटा तो उस दिन महिमा ऑफिस में थी और मैं घर पर ही था मैंने महिमा को फोन किया तो महिमा मुझे कहने लगी कि रजत आप आराम कर लीजिए। मैंने महिमा को कहा ठीक है और मैं घर पर ही आराम कर रहा था। मैं घर पर आराम कर रहा था उस वक्त शाम के 6:00 बज रहे थे महिमा अभी भी ऑफिस में ही थी लेकिन तभी घर की डोर बेल बजी। मैं दरवाजा खोलने के लिए गया मैंने जब दरवाजा खोला तो मैंने देखा दरवाजे पर कामवाली बाई सुनीता खड़ी है।

मैंने सुनीता से कहा आज तुम जल्दी आ गई। वह कहने लगी हां साहब आज मुझे जल्दी जाना है इसलिए मैं जल्दी आ गई। मैंने सुनीता को कहा चलो ठीक है। सुनीता घर की साफ सफाई करने लगी। मैंने सुनीता से कहा तुम मेरे लिए चाय बना देना। सुनीता ने कहा अभी आपके लिए चाय बना देती हूं। सुनीता ने मेरे लिए चाय बनाई मैं चाय पी रहा था मैंने सुनीता से कहा मेरे पास बैठो। सुनीता मेरे सामने ही बैठी हुई थी मैंने सुनीता से कहा सुनीता तुम्हारे घर में कौन-कौन है? सुनीता ने मुझे बताया वह घर पर अकेली ही है उसके पति ने उसे छोड़ दिया था इसलिए सुनीता अकेली रहती है। सुनीता को देखकर मेरे मन में ना जाने क्या बात आई और मैंने सुनीता से कहा मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता हूं। सुनीता मेरी तरफ देख रही थी पहले तो वह इस बात के लिए तैयार नहीं थी लेकिन जब मैंने उसे पैसे देने की बात कही तो वह मेरी बात मान चुकी थी। उसने मुझे कहा ठीक है हम लोगों को सेक्स करना चाहिए। वह मेरी बात मान चुकी थी मैंने उसे कुछ पैसे दिए मैंने सुनीता की साड़ी को ऊपर उठाया तो मैंने देखा उसने पैंटी नहीं पहनी हुई थी। मैंने सुनीता की चूत के अंदर उंगली घुसाई तो वह कहने लगी साहब आप तो कुछ ज्यादा ही जोश में नजर आ रहे हैं। मैंने सुनीता को कहा कि मैं तुम्हारी चूत मारना चाहता हूं। सुनीता कहने लगी साहब मेरी चूत आपकी ही तो है और यह कहकर उसने मेरे लंड को मेरी पैंट से बाहर निकालते हुए उसे हिलाना शुरू किया। कुछ देर तक उसने मेरे लंड को हिलाया लेकिन जैसे ही उसने मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर उसको चूसना शुरू किया तो मुझे अच्छा लगने लगा।

मैंने सुनीता को कहा तुम ऐसे ही मेरे लंड को चूसते रहो। वह मेरे मोटे लंड को अपने गले तक लेने लगी थी उसे बड़ा ही आनंद आ रहा था और मुझे भी बहुत ज्यादा आनंद आने लगा था जिस प्रकार से वह मेरे लंड को चूस रही थी मुझे मजा आने लगा था। मैंने सुनीता को कहा अब मुझे तुम्हारी चूत मारनी ही पड़ेगी। मैंने उसकी साड़ी को ऊपर उठाते हुए उसकी चूतडो को अपनी तरफ किया। सुनीता ने मेरे लंड को पकड़ा हुआ था उसकी चूतडे मेरे हाथों में थी। मैंने उसकी चूतडो को दबाया और उसकी चूत के अंदर जैसे ही मैने अपने लंड को घुसाया तो वह जोर से चिल्लाई और बोली मेरी चूत फाड़ कर रख दी है मुझे दर्द हो रहा है। सुनीता को बहुत ही ज्यादा दर्द हो रहा था लेकिन मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। मैंने सुनीता को कहा मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है। मैं उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाए जा रहा था मुझे उसे चोदने में मजा आ रहा था और उसको भी बड़ा आनंद आ रहा था जिस प्रकार से वह मेरे साथ सेक्स संबंध बनाए जा रही थी। सुनीता मुझे कहने लगी साहब मुझे और भी तेजी से चोदते जाओ। मैंने उसकी कमर को कस कर पकड़ लिया और उसकी चूतडो पर बड़ी तेजी से प्रहार करने लगा।

उसकी चूत के अंदर बाहर मेरा लंड आसानी से हो रहा था और उसको मजा आ रहा था जिस प्रकार से मैं सुनीता की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था उसे वह बहुत ही ज्यादा गरम हो गई थी और मुझे कहने लगी साहब मुझे बस ऐसे ही आप चोदते जाओ। मैंने उसे चोदा लेकिन मेरा लंड उसकी चूत की गर्मी को बर्दाश्त ना कर सका और मेरा वीर्य पतन हो गया। मेरा वीर्य पतन हो चुका था और मुझे दोबारा से सुनीता के साथ सेक्स करना था। मैंने सुनीता की चूत में अपने लंड को घुसाया और उसे चोदना शुरू कर दिया। मैं जब सुनीता को धक्के मार रहा था तो उसे बड़ा ही मजा आ रहा था और मुझे भी बहुत आनंद आ रहा था। मैंने सुनीता की चूत अच्छे से मारी।मैंने उसके पैरों को चौड़ा कर लिया था जिससे कि वह मुझे कहती साहब मुझे ऐसे ही चोदते रहो। मैंने उसे बहुत तेजी से धक्के मारे। सुनीता गरमा गरम सिसकारियां ले रही थी उसकी सिसकारियां मुझे और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी और उसकी उत्तेजना पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी मुझे बड़ा ही मजा आया जिस प्रकार से मैंने और सुनीता ने एक दूसरे के साथ सेक्स संबंध बनाए।