सहेली का पति कहे मुझे चूत दोगी

Hindi sex kahani, antarvasna सर्दी की गुनगुनी धूप में बदन जैसे पूरी तरीके से खिलने लगा था जैसे ही धूप नजरों से ओझल हो जाती वैसे ही सर्दी से बदन कांपने लग जाता। धूप अब नजरों से ओझल हो चुकी थी और मैं घर के अंदर आ गई हम लोग काफी देर तक अपने घर के छत पर ही बैठे हुए थे तभी मेरी सासू मां ने मुझे आवाज लगाते हुए कहा सुरभि एक कड़क सी चाय बना देना। मैंने अपनी सासू मां को कहा हां माजी बस अभी बना कर लाती हूं और मैंने उनके लिए कड़क सी चाय बनाई। मैंने जैसे ही अपनी सासू मां को चाय दी वैसे ही मेरे पति भी आ गए और उन्होंने भी मुझसे चाय बनाने की फरमाइश की मैंने उनके लिए भी चाय बना दी। वह कहने लगे सर्दियों में तो चाय जैसे अमृत का काम करती है।

 रात होने आई थी शाम के करीब 7:00 बज चुके थे बाहर पूरी तरीके से अंधेरा हो चुका था और सर्दियों के मौसम में बाहर कोई दिखाई भी नहीं दे रहा था गलियों में सिर्फ कुत्ते भौंक रहे थे। मैंने अपने पति संकेत से कहा क्या खाना बना दूं वह कहने लगे हां सुरभि तुम खाना बना दो। मैं खाना बनाने के लिए रसोई में चली गई मैं खाना बना ही रही थी कि मेरे भैया का मुझे फोन आया और वह कहने लगे सुरभि हम लोग तुमसे मिलने के लिए आ रहे हैं। मैंने भैया से कहा क्या बात कर रहे हो भैया आप मुझसे मिलने के लिए आ रहे है, मैं खुशी से झूम उठी मैंने जल्दी से रोटी बनाई है और हम लोगों ने रात का भोजन कर लिया था उसके बाद मैं और मेरे पति बेडरूम में बैठे हुए थे। मैंने उन्हें बताया भैया और भाभी मुझसे मिलने के लिए आ रहे हैं मेरे पति कहने लगे चलो यह तो बहुत अच्छा है कि वह तुमसे मिलने के लिए आ रहे हैं। भैया का प्यार मेरे लिए बहुत ज्यादा है वह बचपन से ही मुझे बहुत ज्यादा प्यार करते हैं भैया अहमदाबाद में रहते हैं हम लोग जयपुर में रहते हैं भैया और भाभी दो दिन बाद मुझसे मिलने के लिए आ गए। जब वह मुझसे मिलने के लिए आए तो मुझे बहुत खुशी हुई कि कम से कम भैया और भाभी मुझसे मिलने के लिए तो आए मैंने भैया से कहा भैया आपने बहुत अच्छा किया जो मुझसे मिलने के लिए आ गए। मेरी सासू मां मेरी भाभी से ना जाने किस प्रकार के सवाल कर रही थी भाभी उनकी बातों का जवाब दे रही थी लेकिन भाभी का मन उनसे बात करने का नहीं था।

 भाभी के चेहरे को देखते ही साफ-साफ समझ आ जाता की भाभी सिर्फ उन्हें टालने की कोशिश कर रही हैं लेकिन फिर भी मेरी सासू मां उनसे बात करने पर लगी हुई थी। मैं जब भैया और भाभी के साथ बैठी तो मैंने भैया से पूछा मम्मी पापा कैसे हैं तो भैया कहने लगे वह लोग तो अच्छे हैं और तुम्हें बहुत याद करते हैं तुम्हारी याद सब लोगों को बहुत आती है। तभी कुछ पुरानी यादें हमारे सामने आ गई भैया ने जब मुझे बचपन के मेरे कुछ किस्से सुनाए तो मैंने भैया से कहा आपके और मेरे बीच में पहले कितना झगड़ा हुआ करता था लेकिन उसके बावजूद भी आपने हमेशा मेरा ही साथ दिया मैं बचपन में कितनी शरारत किया करती थी। भैया मुझे कहने लगे हां सुरभि तुम बहुत ज्यादा शरारत करती थी मेरी अब शादी हो चुकी थी इसलिए मेरा व्यवहार पूरी तरीके से बदल चुका था। भैया ने मुझे कहा कि मैं यहां पर एक फैक्ट्री शुरू कर रहा हूं मैंने भैया से कहा तो क्या आप अहमदाबाद से अब जयपुर शिफ्ट होने वाले हैं। वह कहने लगे नहीं मैं रहूंगा तो अहमदाबाद में ही लेकिन मेरे पुराने दोस्त हैं वह मेरे साथ काम करने के इच्छुक थे तो हम लोगो ने मिलकर यहां फैक्ट्री खोलने के बारे में सोच लिया था इसी के सिलसिले में मैं यहां आया था। जब मैं यहां आ ही रहा था तो मैंने तुम्हारी भाभी से भी कहा कि तुम भी मेरे साथ चलो इस बहाने कम से कम सुरभि से तो मुलाकात हो जाएगी। तुम्हारी भाभी भी तुमसे मिलने के लिए बहुत ज्यादा उत्सुक थी इसलिए हम दोनों ही अहमदाबाद से तुमसे मिलने के लिए आ गए। मुझे भैया और भाभी का साथ बहुत अच्छा लग रहा था और काफी देर तक हम लोगों ने बात की लेकिन ठंड उस दिन बहुत ज्यादा हो रही थी और रात को हमें बहुत ज्यादा गहरी नींद आई। सुबह मेरी आंखें नहीं खुली जब मैं उठी तो संकेत कहने लगे मैं ऑफिस के लिए निकल रहा हूं मुझे अब लेट हो गई है मैंने संकेत से कहा लेकिन तुम कुछ देर तो रुको मैं अभी तुम्हारे लिए नाश्ता बना देती हूँ।

उस दिन संकेत को जल्दी ऑफिस जाना था इसलिए संकेत जल्दी ऑफिस निकल गए मैं और भैया भाभी साथ में बैठे हुए थे भैया ने मुझे कहा कि मैं अभी चलता हूं तुमसे शाम के वक्त मुलाकात करूंगा। यह कहते हुए भैया भी चले गए भाभी और मैं साथ में ही बैठे हुए थे भाभी मुझसे पूछने लगी संकेत तुमसे प्यार तो करते हैं ना। मैंने भाभी से कहा भाभी संकेत मुझसे बहुत प्यार करते हैं और वह मेरा बहुत ख्याल रखते हैं भाभी मुझे कहने लगी तुम कभी संकेत को लेकर अहमदाबाद आओ। मैंने भाभी से कहा मैं तो संकेत से कितनी बार कह चुकी हूं कि तुम मेरे साथ अहमदाबाद चलो नहीं तो मुझे वहां छोड़ दिया करो लेकिन संकेत कहां मेरी बात मानने वाले वह तो अपने ऑफिस से छुट्टी ही नहीं लेते हैं मैं कई बार तो घर में अकेले बोर हो जाती हूं। भाभी मुझसे पूछने लगी तुम घर में क्या करती हो मैंने भाभी से कहा मैं क्या करूंगी भाभी बस घर पर ही बैठे रहती हूं भाभी मुझे कहने लगी चलो आज कहीं घूम आते हैं। मेरी भी इच्छा उस दिन घूमने की हुई तो मैं भाभी के साथ घूमने के लिए चली गई मैं भाभी के साथ घूमने के लिए उस दिन मॉल में गई। हम दोनों मॉल में गए तो वहां पर मेरी एक पुरानी सहेली से मेरी मुलाकात हो गई वह अहमदाबाद में मेरे साथ ही स्कूल में पढ़ा करती थी।

 मेरी जब उससे मुलाकात हुई तो मुझे बहुत अच्छा लगा मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि उससे मेरी मुलाकात हो जाएगी अब हम दोनों की मुलाकात हो चुकी थी हम दोनों साथ में काफी देर तक बैठे रहे और भाभी भी हमारे साथ ही थी। मैंने उससे पूछा क्या तुम भी जयपुर में रहती हो वह कहने लगी हां मेरी शादी भी जयपुर में हुई है, मेरी सहेली का नाम मानसी है। मानसी और हम लोग आपस में बात कर रहे थे तभी एक नौजवान युवक हमारे पास आए और वह हमारे साथ बैठ गए मानसी ने कहा कि यह मेरे पति है। मानसी ने अपने पति गगन से हमारी मुलाकात करवाई गगन एक सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर है गगन ने कहा कि मैं कुछ समय बाद अपनी खुद की कंपनी खोलने जा रहा हूं। गगन से मिलकर बहुत अच्छा लगा मानसी और हम लोग साथ में काफी देर तक बैठे रहे मैंने मानसी से कहा कभी तुम गगन को लेकर घर पर आना मानसी कहने लगी क्यों नहीं मैं जरूर आऊंगी। मानसिक का नंबर मैंने ले लिया था और उसके बाद हम लोग भी घर लौट आए। काफी दिन बाद मुझे मानसी का फोन आया मैंने मानसी को अपने घर पर डिनर के लिए इनवाइट किया। जब वह घर पर आई तो मैंने मानसी को अपने पति संकेत और अपनी सांसू मां से भी मिलवाया। मानसी के पति का गगन भी आए हुए थे लेकिन गगन मुझे हवस भरी नजरों से देख रहे थे क्योंकि मेरे शरीर में अब भी वह बात है जो कि मानसी के अंदर अब नहीं थी। गगन बार बार मेरी तारीफ किए जा रहे थे संकेत शायद इस बात से अनजान थे लेकिन मैं गगन के इरादे पूरी तरीके से समझ रही थी। मुझे भी लगने लगा कि जैसे गगन मेरे बारे में बहुत ज्यादा सोचते हैं गगन का नंबर मैंने मानसी से ले लिया था। एक शाम गगन ने मुझे मैसेज किया मैसेज में उन्होंने मुझसे सिर्फ इतना ही कहा क्या तुम मेरे साथ सेक्स करोगी?

 मैंने उनके मैसेज का रिप्लाई करते हुए कहा मैं तुम्हारे साथ सेक्स करने के लिए तैयार हूं। गगन खुश थे और मैं भी बहुत खुश थी लेकिन हम दोनों को सही मौके का इंतजार था और आखिरकार सही मौका जल्दी आ गया। मानसी को गगन ने कुछ दिनों के लिए अपने मायके में भेज दिया और गगन घर पर अकेले ही थे। गगन ने मौके का फायदा उठाया और मुझे अपने घर पर बुला लिया उस दिन गगन बहुत ज्यादा अच्छे दिख रहे थे उन्होंने सफेद रंग का कुर्ता पजामा पहना हुआ था जिसमें की उनके पर्सनैलिटी बड़ी अच्छी लग रही थी। मैंने गगन से कहा आज तुम बड़े हैंडसम लग रहे हो गगन कहने लगा आज तो मेरे लिए बहुत ही खास दिन है। मैने मजाकिया अंदाज में कहा लेकिन ऐसा क्या खास दिन है तो गगन ने मुझे अपनी बाहों में लेते हुए कहा मैं अभी बताता हूं। गगन ने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया जब गगन ने मुझे बिस्तर पर लेटाया तो मेरे शरीर में हलचल सी पैदा होने लगी थी। गगन ने धीरे धीरे मेरे कपड़ों को उतारना शुरू किया मै उनके सामने नग्न अवस्था मे थी। जैसे ही गगन ने मेरे स्तनों का रसपान करना शुरू किया तो मेरे स्तनों से दूध बाहर की तरफ को निकलने लगा।

 गगन ने मेरे निप्पल से खून भी निकाल दिया था मैं पूरी तरीके से अब जोश में आ चुकी थी काफी देर तक गगन ने ऐसा ही किया। जैसे ही गगन ने मेरी योनि को चाटना शुरू किया तो मैंने गगन से कहा मुझे भी तुम्हारे लंड को अपने मुंह में लेना है। मैंने जब गगन से अपनी इच्छा व्यक्त की तो गगन ने अपने लंड को बाहर निकाल कर मेरे मुंह में डाल दिया। मैंने उसे गले तक लेकर चूसना शुरू किया गगन के लंड से कुछ पानी की बूंदे गिर रही थी जो कि मुझे उत्तेजित कर रही थी। जैसे ही गगन ने अपने लंड को मेरी योनि पर लगाया तो मैं पूरी तरीके से उत्तेजना में आ गई और गगन से कहा तुम पूरी ताकत से मुझे धक्के दो गगन ने भी मुझे पूरी ताकत के साथ धक्के देने शुरू कर दिए काफी देर तक गगन ने मुझे धक्के दिए। जैसे ही गगन का वीर्य बाहर की तरफ को निकलने वाला था तो मैंने गगन से कहा तुम मेरी योनि में ही अपने माल को गिरा देना। गगन ने मेरी योनि के अंदर ही अपने वीर्य को गिरा दिया हम दोनों ने उस दिन जमकर सेक्स का आनंद लिया।