रंजीत ने मुझे कॉल गर्ल बनाया

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मेरा नाम सरला है और मेरी उम्र 23 वर्ष है। मेरा जन्म एक बहुत ही गरीब परिवार मैं हुआ है। हमारे पास खाने तक को अच्छे से नहीं होता था। खाने के लिए भी हमें बहुत ज्यादा जद्दोजहद करनी पड़ रही थी। यह सब मेरे पिताजी की वजह से ही हुआ। क्योंकि वह अपने नशे की लत की वजह से कोई भी काम नहीं कर रहे थे और सिर्फ घर पर ही पड़े रहते थे। उन्हें सिर्फ अपने नशे से प्यार था। हम लोगों से उन्हें कोई भी मतलब नहीं रहता। तब मैं  इन सब से बहुत ही परेशान हो चुकी थी। लेकिन मैं कुछ कर भी नहीं पा रही थी और मैं ज्यादा पढ़ी-लिखी भी नहीं थी। उन्होने मेरी पढ़ाई भी छुड़वा दी और अब ऐसे ही हमारी जिंदगी कट रही थी। मेरा एक छोटा भाई भी था। मुझे उसकी बहुत ही चिंता रहती थी और अपनी मां की भी बहुत चिंता होती थी। मैंने कई बार सोचा कि मैं कहीं बाहर चली जाऊं लेकिन ऐसा कभी हो नहीं पा रहा था। क्योंकि मेरे पास बिलकुल भी पैसे नहीं होते थे, कहीं भी बाहर जाने के लिए। यदि मैं चली भी जाती तो तब भी मैं कुछ नहीं कर सकती थी।

मैंने एक दिन अपनी मां से इस बारे में बात की, कि मैं कहीं शहर में जाना चाहती हूं और वहां कुछ अच्छे से पैसे कमा कर तुम्हें भी वही बुला लूंगी। मेरी माँ ने कहा कि हमारे पास इतने पैसे नहीं है और हम इतने पैसे कहां से लाएंगे जो कि तुम वहां जा सको। अगर तुम चली भी गई तो यह कोई जरूरी नहीं कि तुम्हें वहां पर कुछ काम मिल जाएगा। क्योंकि हम किसी को जानते भी नहीं हैं और आजकल किसी पर भरोसा करना भी सही नहीं है लेकिन यह बात मेरे दिल में अब बैठ गई थी कि जब तक मैं शहर नहीं जाऊंगी तब तक मैं कुछ नहीं कर सकती। क्योंकि ऐसे में तो हमें जिंदगी भर परेशानी होती रहेगी और हमें दो वक्त का खाना भी मुश्किल से मिल पाएगा। मेरी सबसे पहली समस्या मुझे पैसों को लेकर थी। मैंने अपनी मां से इस बारे में बहुत बार बात की लेकिन वह हर बार मुझे मना कर देती लेकिन इस बार मैंने उन्हें मना ही लिया और कह दिया कि वैसे भी तो हमारी जिंदगी कौन से अच्छी चल रही है। हमारे पास रहने के लिए सिर्फ एक छत है और इसके अलावा हमारे पास कुछ भी नहीं है। हम कब तक अपनी जिंदगी ऐसे ही काटते रहेंगे। मैंने अपनी मां से यह भी कहा कि मैं यह सब तुम्हारे लिए ही तो कर रही हूं। नहीं तो मुझे कोई आवश्यकता नहीं थी यह सब करने की।

मेरी मां को यह बात समझ आ गई। अब वह भी मेरे लिए पैसो का बंदोबस्त करने लगी लेकिन कहीं से भी कुछ पैसों की व्यवस्था नहीं बन पा रही थी। हमें कोई भी पैसे देने को तैयार नहीं था। क्योंकि सबको यही डर था कि इनके पास तो खाने के लिए भी पैसे नहीं है और यह हमारे पैसे कैसे लौटाएंगे। इस वजह से हमें कोई भी पैसे देने के लिए तैयार नहीं था। तब मैंने अपनी मां से कहा कि तुम ये घर गिरवी रख दो। हमारे पास और कुछ भी नहीं है। मुझे उन्हें मनाने में बहुत ही समय लगा। वह मेरे काफी जिद करने के बाद मान गई। उन्होंने घर गिरवी रखवा दिया और एक साहूकार से पैसे ले लिए। फिर उन्होंने मुझे वह पैसे दिए और कहा कि तुम इन पैसों को जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी लौटा देना। मैंने उन्हें कहा कि तुम चिंता मत करो। मुझे भी यह बात पता है कि यदि मैं पैसे नहीं लौटा पाई तो हमारे सर से छत भी छिन जाएगी। मेरी मां ने मुझे पैसे दिए और मैं उन पैसों से दिल्ली आ गई। जब मैं दिल्ली आई तो मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। मैं कैसे शुरुआत करूं। क्योंकि मुझे ना तो पढ़ना आता था और ना ही मैं किसी से बात कर सकती थी। क्योंकि मैं गांव के माहौल में ही पढ़ी लिखी थी।

मैंने सबसे पहले अपने लिए रहने के लिए एक छोटा सा कमरा ले लिया। उसका किराया भी ज्यादा नहीं था। इसलिए मैंने वही कमरा लिया जिसका मैं किराया भर सकती थी। मुझे फिलहाल रहने की तो कोई समस्या नहीं थी और मैं अब काम के सिलसिले में इधर उधर भटकने लगी लेकिन सब जगह से मुझे निराशा ही हाथ लग रही थी। मैं सोचने लगी कि कैसे मैं अब यह पैसे अपनी मां को लौटा पाऊंगी। पैसे भी धीरे-धीरे खर्च होते जा रहे थे और मुझे बहुत ही डर भी लग रहा था। मैं सोच रही थी कि कोई चमत्कार हो जाता जिससे कि मुझे ऐसा कुछ हासिल हो जाए जिससे मैं अपनी जिंदगी अच्छे से चला पाऊं। अपनी मां और अपने भाई को अपने पास ही बुला लूं फिर भी ऐसा कुछ हुआ नहीं और मैं ऐसे ही भटकती रही। एक दिन मैं बस स्टैंड पर बस का इंतजार कर रही थी। तभी मेरे बगल में एक लड़का बैठा हुआ था। उसने चश्मे लगाए हुए थे और उसने अपने बालों को भी ऊपर की तरफ खड़ा कर रखा था। वह टशन में चल रहा था। मैं उसे देखती जा रही थी। तभी बस आ गयी और मैं बस में चढ़ने लगी। तो उसने मुझे पीछे से आवाज दी और कहने लगा तुम्हारा रुमाल छूट गया है। अब वह वो रुमाल देने के बहाने मेरे पास आ गया और मुझसे बात करने लगा। हम दोनों बस में चढ़ चुके थे। मैं जैसे ही बस की सीट में बैठी तो वह भी मेरे बगल में बैठ गया और वह ऐसे ही मुझसे बात करने लगा। वह कहने लगा की तुम शहर में नई आई हो। मैंने उसे बताया कि हां मैं शहर में नहीं हूं और मुझे काम की तलाश है लेकिन कहीं भी मुझे कुछ काम नहीं मिल रहा है। उसने मुझे अपना नाम बताया। उसका नाम रंजीत  था  और उसने मुझे अपना फोन नंबर दे दिया और कहने लगा मुझे फोन करना अगर तुम्हें कुछ भी काम नहीं मिलता तो। मैंने उसे कहा ठीक है अगर मुझे कुछ काम नहीं मिलता है तो मैं तुम्हें फोन कर दूंगी। अब वह अगले स्टेशन पर उतर गया लेकिन मुझे अभी कोई काम नहीं मिला था। तब मुझे रंजीत का ध्यान आया। मैंने उसे फोन कर दिया। उसने मुझे कहा ठीक है। मैं तुम्हें कल मिलता हूं। मैं उसे मिलने अगले दिन चली गई।

वह मुझे अगले दिन मिला तो वह मुझे एक बड़े से रेस्टोरेंट में ले गया। हम दोनों बैठ कर काफी देर बातें कर रहे थे। और उसने मुझसे कहा कि तुम्हें पहले अपनी चूत मुझसे मरवानी होगी उसके बाद मैं तुम्हें अन्य कस्टमरों के पास भेजूंगा तुम्हें कॉल गर्ल बना दूंगा। मैंने उसे कहा कि मुझे अब सिर्फ पैसों की जरूरत है ताकि मैं अपना कर्जा चुका पाऊं। अब वह मुझे एक बड़े से होटल में ले गया और उसने मेरी सारे कपड़ों को उतारते हुए मेरी कमसिन और नाजुक चूत पर अपनी जीभ लगा दी और उसे चाटना शुरू किया। मैंने भी थोड़ी देर बाद उसके लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसना शुरू किया। थोड़े समय में उसने मेरे स्तनों को बहुत ही अच्छे से चूसा और मुझे ऐसा लगा कि मेरी चूत से पानी गिर रहा है। उसने अपनी उंगली से मेरी चूत के पानी को साफ किया। अब उसने अपने लंड को मेरी चूत के अंदर डाल दिया और जैसे ही उसने अपने लंड को मेरी योनि के अंदर डाला तो मेरी चूत के दोनों दरवाजे खुल गए और मेरी चूत से खून निकलने लगा। वह मुझे ऐसे ही चोदता जाता जिससे कि मुझे भी बहुत मज़ा आने लगा। पहले तो शुरुआत में मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा था लेकिन बाद में मुझे बहुत मजा आ रहा था।

ऐसे ही रंजीत मेरी चूत मार रहा था और मुझे बहुत ही आनंद आता अब उसने मेरे दोनों पैरों को और चौड़ा करते हुए मुझे और तीव्र गति से झटके देना शुरु किया। थोड़ी देर बाद उसने मेरे पैरो को अपने कंधो पर रख दिया और अब मेरी चूतडे उसके लंड से टकराती जाती और वह बड़ी तेजी से मुझे ऐसे ही धक्के मार रहा था। मैं उसके लंड की गर्मी को ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाई और मेरा तो झड़ चुका था लेकिन रंजीत का अभी भी नहीं झड़ा था और वह मुझे ऐसे ही बड़ी तीव्र गति से अब भी धक्के देते जाता। वह इतनी तेज गति से मुझे धक्के मार रहा था कि मेरा पूरा शरीर हिल रहा था। मैं सोच रही थी कि कब वह मुझे छोड़ेगा लेकिन वह मुझे छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था और ऐसे ही मेरी चूत मे अपने लंड को डालकर धक्के मारता जाता। मेरे मुंह से बड़ी तेज आवाजे निकलने लगी तो उसका माल भी मेरी योनि के अंदर ही गिर गया और जैसे ही उसका वीर्य मेरी योनि में गिरा तो वह मेरे ऊपर ही लेटा रहा। मैंने उसे अपने ऊपर से थोड़ी देर बाद हटाया। उसके बाद उसने मुझे कहा कि तुम्हारी डिमांड बहुत होगी उसके बाद से वह मुझे नए-नए पुरुषों के पास भेजता और मैं बहुत पैसे कमाने लगी। रंजीत कुछ पैसों को अपने पास ही रख लेता तब से मैं एक कॉल गर्ल बन गई।