प्रतिभा भाभी की प्रतिभा कमाल की

Antarvasna, hindi sex story: नौकरी की तलाश में मैं कोलकाता पहुंचा तो वहां पर भी कुछ दिनों तक मुझे खाली ही रहना पड़ा मैं गरीब परिवार से ताल्लुक रखता हूं। मेरे पिताजी मजदूरी का काम किया करते इस वजह से मैंने भी पढ़ाई नहीं की और मैं ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं हूं लेकिन मैं चाहता था कि अपने जीवन में कुछ अच्छा करूं मैं नहीं चाहता था कि मैं उनकी तरह ही मजदूरी का काम करुं। मैं जब कोलकाता पहुंचा तो काफी समय तक तो मैं खाली ही रहा मेरे पास पैसे भी खत्म होने लगे थे मैंने एक दुकान में काम करने का फैसला किया मैं एक गारमेंट शॉप में काम करने लगा। वहां पर मैं काफी अच्छा काम कर रहा था इसलिए वहां के मालिक ने मेरी तनख्वाह भी बढ़ा दी मैं काफी समय से अपने घर नहीं गया था और अपने बूढ़े मां-बाप से मैं मिल नहीं पाया था इसलिए मैं कुछ दिनों के लिए अपने घर चला गया। जब मैं अपने घर गया तो मैंने अपनी मां को कुछ पैसे दिए वह बहुत खुश हुई और कहने लगी कि बेटा हम बहुत खुश हैं।

मैंने मां से कहा मां मुझे भी तो बहुत अच्छा लग रहा है कि मैं तुम लोगों से मिलने के लिए आया। इतने समय बाद मैं अपने मां बाप से मिलने के लिए आया था कुछ समय तक मैं अपने घर पर ही रहा हमारा गांव कोलकाता से कुछ किलोमीटर की दूरी पर है। घर में कुछ समय अपने मां-बाप के साथ बिताने के बाद मैं वापस कोलकाता लौट आया मैं जब कोलकाता वापस लौटा तो मैं अब अपने काम पर ध्यान देने लगा। हर रोज की तरह मैं सुबह काम पर जाता और शाम को घर लौटता मुझे घर लौटते वक्त काफी देर हो जाती थी क्योंकि दुकान बंद करने का समय रात के 10:00 बजे का होता जिस वजह से मैं घर काफी देर में पहुंचा करता हूं। मेरे पास अपने लिए भी समय नहीं था लेकिन मैं फिलहाल अपने काम से खुश था और अपने काम पर ही मैं ध्यान दे रहा था। एक दिन हमारी दुकान में काम करने वाले लड़के की गलती की वजह से मुझे भी अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा मैंने अब गारमेंट शॉप से नौकरी छोड़ दी थी और उसके बाद मैं नौकरी की तलाश करने लगा। मैं दूसरी जगह नौकरी करने लगा मैं एक दूसरी दुकान में काम करने लगा और वहां पर काम करते हुए मुझे करीब दो महीने हो चुके थे मैं दुकान में ज्यादा किसी से बात नहीं किया करता मैं सिर्फ अपने काम से ही मतलब रखा करता हूं।

एक दिन मैं दुकान में काम कर रहा था उस दिन मेरी मां का फोन आया और उन्होंने मुझे बताया कि पिताजी ने कुछ समय पहले कुछ पैसे लिए थे जिसे कि वह अभी तक लौटा नहीं पाए हैं। मुझे इस बारे में कुछ पता नहीं था कि आखिरकार उन्होंने पैसे क्यों लिए हैं लेकिन जब उन्होंने मुझे बताया कि उन्होंने वह पैसे घर बनाने के लिए लिए थे तो मुझे वह पैसे लौटाने थे। उन्होंने वह पैसे एक साहूकार से लिए थे और मैं धीरे धीरे कर के वह पैसे अब लौटाने लगा मैं जब अपने घर गया तो अपने माता पिता से मिलकर मैंने उनसे इस बारे में पूछा तो उन्होंने मुझे बताया कि बेटा हमने उससे घर बनाने के लिए पैसे लिए थे लेकिन वह अब हमसे काफी ज्यादा ब्याज ले रहा है। मैंने भी सोचा कि क्यों ना मैं उस साहूकार से बात करूं और जब मैं उनसे मिलने के लिए गया तो मैंने उनसे बात की और उन्होंने मुझे कहा कि अभी भी पचास हजार रुपये और देने हैं। मैंने उन्हें कहा हम लोग अब तक तो इतने पैसे दे चुके हैं लेकिन वह हमारी बात मानने को तैयार नहीं थे अब धीरे धीरे कर के मैं उनके पैसे देता जा रहा था और मैंने सारे पैसे उन्हें लौटा दिए थे। एक दिन मैं और मेरे साथ में काम करने वाला रमेश हम लोग साथ में ही रहते हैं तो रमेश मुझे कहने लगा कि अनिल हम लोग घर के लिए कुछ राशन ले आते हैं। मैंने रमेश को कहा ठीक है और हम लोग घर के लिए राशन लेने के लिए चले गए रमेश मेरे साथ ही रहता है और उसे मेरे साथ रहते हुए काफी समय हो चुका है हम दोनों एक ही दुकान में काम करते हैं। हम लोग अब पास की ही दुकान में राशन लेने के लिए चले गए जब हम लोग राशन लेकर वापस लौटे तो मैंने देखा घर का दरवाजा खुला हुआ था मैंने रमेश को कहा क्या तुमने ताला नहीं लगाया था। रमेश कहने लगा नहीं मैंने ताला तो लगाया था परंतु घर का ताला खुला हुआ था और जब हम लोग अंदर गए तो अंदर सामान बिखरा हुआ था फिर हम लोग अपने मकान मलिक के पास गए तो उनके घर में भी चोरी हुई थी दिन में ही चोरी हो गई थी और हम लोग अब इस चोरी की कंप्लेंट पुलिस में करवाना चाहते थे।

हम लोगो ने पुलिस स्टेशन में जाकर कंप्लेंट करवा दी लेकिन चोरों का कुछ भी पता नहीं चला और मेरे पास बिल्कुल भी पैसे नहीं बचे थे पैसे खत्म हो चुके थे क्योंकि मेरा बटवा भी वह चोरी कर के ले गए थे। जैसे तैसे हम दोनों ही अपने दिन काट रहे थे सुबह मैं दुकान में काम करने के लिए जाता और देर रात घर लौटता रमेश भी मेरे साथ घर लौटता और हम दोनों हर रोज दुकान से काम कर के देर रात से घर लौटा करते। जब मेरी तनख्वाह मुझे मिली तो तब जाकर मैं खुश हुआ क्योंकि मेरे पास बिल्कुल भी पैसे नहीं थे पैसे सारे खत्म हो चुके थे रमेश मुझे कहने लगा कि कुछ दिनों के लिए मैं अपने गांव जा रहा हूं और यह कहकर रमेश कुछ दिनों के लिए अपने गांव चला गया। मैं अकेला ही था और रात को देर रात से घर लौटता एक दिन मैंने देखा कि कुछ लोग वहीं आसपास घूम रहे हैं मुझे तो लगा कि वह लोग चोर हैं उस वक्त मैं भी उठा हुआ था। मैंने देखा कि वह लोग घर के अंदर घुस रहे हैं फिर मैं भी उनके पीछे-पीछे चला गया लेकिन जब वह लोग घर का ताला तोड़कर अंदर गए तो मैं जोर से चिल्लाया और उन्हें वही कमरे में बंद कर दिया।

वह लोग अब कमरे में ही बंद हो चुके थे और थोड़ी देर बाद पुलिस आ गई पुलिस के आते ही उन चोरों को पुलिस अपने साथ ले कर चली गई। घर में रहने वाले व्यक्ति ने मेरा धन्यवाद दिया और उन्होंने मुझे कहा कि जब भी तुम्हे कोई जरूरत हो तो तुम मुझसे कह सकता हो लेकिन मुझे ऐसी कोई जरूरत होती ही नहीं। उस दिन के बाद से आज पड़ोस में सब लोग मेरी बहुत इज्जत करने लगे। पूरी कॉलोनी में अब मेरी इज्जत बढ़ चुकी थी इसलिए आसपास के लोग मेरी बड़ी इज्जत करने लगे थे। एक दिन पड़ोस में रहने वाली प्रतिभा भाभी ने मुझसे कहा कभी आप घर पर खाने के लिए आईए। उन्होंने मुझे एक दिन अपने घर पर खाने के लिए बुलाया लेकिन मुझे नहीं पता था क्योंकि उनकी नीयत में ही खोट थी। उन्होंने मुझे घर पर खाने के लिए नहीं बल्कि अपनी इच्छा को पूरा करवाने के लिए बुलाया था उस दिन उनके घर पर कोई भी नहीं था और उनके पति कहीं काम से बाहर गए हुए थे। मैंने प्रतिभा भाभी से कहा आज घर में कोई भी नजर नहीं आ रहा? वह कहने लगी मेरे पति कुछ समय के लिए अपने काम के सिलसिले में कहीं बाहर गए हुए हैं। प्रतिभा भाभी के लिए यह बडा अच्छा मौका था उन्होंने मेरे साथ उस दिन सेक्स करने के बारे में सोच लिया था। मुझे नहीं पता था कि वह मेरे ऊपर ना जाने कबसे नजर मार रही थी परंतु जब उन्होंने मेरे सामने अपने स्तनों को दिखाना शुरू किया तो मैं भी उनके बड़े स्तनों को देखकर अपने अंदर की गर्मी को कहा रोक पाया। मैं उनके बदन को महसूस करने लगा पहले तो उन्होंने मेरे साथ डिनर किया उन्होंने मुझे काफी ज्यादा खाना खिला दिया था जिसके बाद वह मुझसे अपने बदन की गर्मी को बुझाना चाहती थी। मेरे लिए यह सब अच्छा ही था क्योंकि मैंने तो कभी किसी की चूत मारी ही नहीं थी। मेरे लिए यह बिल्कुल नया था वह जब मेरी गोद मे आकर बैठी तो उन्होंने मुझसे कहा जानेमन क्या हम लोग बेडरूम में चले, हम लोगों मे बेडरूम मे चले गए।

जब हम लोग बेडरूम मे गए तो प्रतिभा भाभी ने लाइट बुझा दी जिसके बाद कमरे में काफी ज्यादा अंधेरा हो चुका था। अंधेरा हो जाने के बाद उन्होंने मुझसे कहा मेरे बदन को मैंने तुम्हें सौंप दिया है। उन्होंने अपने कपड़े उतारने शुरु किए जब उन्होंने अपने कपड़े उतारे तो उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया और मेरे लंड को हिलाने लगी। उन्होंने मुझसे कहा मैं तुम्हारे लंड को अपने मुंह में लेना चाहती हूं? उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया जब उन्होंने मेरे लंड को अपने गले मे लेकर चूसना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा और वह इतनी ज्यादा खुश हो चुकी थी कि वह मेरे लंड को बड़े अच्छे से अपने गले के अंदर बाहर कर रही थी। कुछ देर बाद मैंने उनके स्तनों को चूसना शुरू किया मैं जब उनके बड़े स्तनों को चूस रहा था तो उनके निप्पल खड़े हो चुके थे।

मैंने उनकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया मैंने जब उनकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह बहुत जोर से चिल्लाई मेरा लंड उनकी चूत के अंदर तक जा चुका था। जब मेरा लंड उनकी चूत के अंदर गया तो वह बड़ी तेजी से चिल्लाने लगी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है। उन्होंने अपने पैरों को खोल लिया था जिससे कि मेरा लंड बड़ी आसानी से उनकी चूत के अंदर प्रवेश हो रहा था। उन्होंने मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ लिया मैंने उन्हें कहा आप अपने पैरों को खोल लीजिए। उन्होंने अपने पैरों को खोल लिया फिर मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू किया। मैंने जब उन्हें डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू किया तो वह बड़ी खुश नजर आ रही थी मैंने उनकी चूत बहुत देर तक मारी। उसके बाद मेरा वीर्य बाहर निकल चुका था मैंने अपने वीर्य की वर्षा उनकी बड़ी चूतडो पर कर दी मेरा सफेद वीर्य गिर चुका था। वह मुझे कहने लगी आज तो मुझे मजा ही आ गया। वह मुझे अक्सर अपने घर पर बुलाने लगी वह मुझे अपनी प्रतिभा दिखा कर खुश कर दिया करती।