फटा भोसड़ा निकला माल

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मेरा नाम हरीश है और मैं एक शादीशुदा व्यक्ति हूं। मेरी उम्र 30 वर्ष है। मैं अपनी छोटी मोटी जॉब कर के अपने घर का पालन पोषण कर रहा हूं। मेरे घर में मेरे पिताजी और मेरे बड़े भैया उनकी पत्नी है। मेरी माता का देहांत कुछ वर्षों पहले हो चुका है। हम लोग एक जॉइंट फैमिली में ही रहते हैं। इसलिए अब मुझे उसकी आदत भी हो चुकी है और अच्छा भी लगता है कि हम लोग सब साथ में ही रहते हैं। जब भी कोई परेशानी या तकलीफ हमें होती है तो हम सब आपस में बैठकर बातें कर लिया करते हैं और उसका समाधान निकाल लेते हैं। मेरे पिताजी भी हम दोनों भाइयों के प्रेम से बहुत ज्यादा खुश थे और वह हमेशा एक ही बात कहते रहते हैं की तुम लोग अपना और अपने परिवार का अच्छे से ध्यान रखना। जिस तरीके से मैंने हमेशा तुम लोगों को एक अच्छे समाज में रखा और एक अच्छी परवरिश दी है। एक दिन मेरे पिताजी की तबीयत अचानक से खराब हो गई और हमें उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट करवाना पड़ा। डॉक्टरों ने हमसे कहा कि वह काफी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। इसलिए कुछ कहा नहीं जा सकता। अब कुछ दिनों से वह थोड़ा बहुत ठीक हो चुके हैं। और डॉक्टरों ने उन्हें डिस्चार्ज कर दिया। अब हम उन्हें घर लेकर आ गए।

जब हम उन्हें घर लेकर आए तो उन्होंने हमें बताया कि उनका एक पुश्तैनी मकान है, जो कि उन्होंने मेरे भैया के नाम पर किया हुआ है लेकिन हमें कभी भी इसके बारे में जानकारी नहीं थी। हम लोग अपने पिताजी की देखभाल बड़े अच्छे से करने लगे और वह बड़े खुश हुए एक दिन अचानक से उनकी मृत्यु हो गई और उनके देहांत के कुछ दिनों बाद मेरे भैया उस जायदाद को देखने गए तो उन्होंने उसका कहीं सौदा कर दिया था और मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। मैंने भी उनसे कभी पूछा नहीं लेकिन एक दिन मेरी पत्नी ने मुझे यह बात बताई कि उन्होंने वह जायदाद किसी को बेजदी है। मुझे पहले यह सुनकर थोड़ा ताज्जुब हुआ लेकिन मैंने उनसे फिर भी नहीं पूछा।  मेरी पत्नी के कई बार कहने के बाद मैंने उनसे पूछ ही लिया। जब मैंने उनसे पूछा तो वह कहने लगे कि हां मैंने उस प्रॉपर्टी को बेच दिया है और वह पैसे मेरे पास ही हैं। यह सब मेरी भाभी ने उन्हें बताया था और वह पैसे उन्होंने कहीं और इन्वेस्टमेंट कर दिये और मुझे उन्होंने एक भी पैसा नहीं दिया। जबकि हम दोनों को उसमें बराबर हक था। इस बात को काफी समय हो चुका था  और हम दोनों में अब बनती भी नहीं थी। मैं ज्यादातर उनसे बात नहीं करता था। एक बार मैंने अपने बच्चे का एडमिशन एक अच्छे स्कूल में करवाना था तो वहां पर फीस काफी ज्यादा थी। मैंने अपने भैया से कहा कि भैया वह आपने जो मकान बेचा था, तो उसके पैसे में से मुझे कुछ पैसे दे दीजिए लेकिन उन्होंने मुझे टालना शुरु कर दिया।

ऐसे ही वह काफी दिनों तक टालते गए। एक दिन मैंने उनसे बोल ही दिया, की क्या उसमें मेरा हक नहीं था? उन्होंने बोला कि वह जायदाद तो मेरे नाम पर की थी। तुम्हारा कहां से उस पर हक बनता है। मैं यह बात सुनकर थोड़ा हक्का-बक्का रह गया और मेरी भाभी भी पीछे से आकर यही बात कहने लगी। मुझे वहां पर अपने आप को बेबस सा महसूस किए जाने का आभास हो रहा था। अब मैंने अपने बच्चों का एडमिशन एक छोटे से स्कूल में करवा दिया। जिसमें मेरी हैसियत थी। मेरे पास अब कुछ भी नहीं था। सिर्फ मेरे पास रहने के लिए एक छत थी जो कि मेरे पिता जी ने हमें दी थी और मेरी छोटी सी नौकरी! जिसमें सिर्फ मैं अपने बच्चों का पालन पोषण हीं कर सकता था। मैंने अब अपने भैया से भी बातें लगभग बंद ही कर दी थी। हम लोग रहते एक ही छत के नीचे थे लेकिन अब पहले वाली बात नहीं थी। बस सिर्फ बोलने के लिए हम दोनों भाई थे और मेरी भाभी तो हमें बिल्कुल ही नीचा दिखाने की कोशिश करती रहती थी। वह हर बात में हमें ताने दिया करती थी और मेरी पत्नी भी काफी परेशान हो गई थी। इन सब बातों से मैंने उसे कहा कोई बात नहीं तुम चिंता मत करो।

कुछ ना कुछ हम कर ही लेंगे। मैं ऐसे ही अपने दोस्तों से इस बारे में बात किया करता था। वह सिर्फ मुझे शांति नहीं दे सकते थे। उससे अधिक वह मेरे लिए कुछ भी नहीं कर सकते थे। ना तो मैं अपने भैया के खिलाफ कुछ कह सकता था और ना ही अब वह पैसे मुझे मिलने वाले थे। तो मैंने भी यह सब सोचना छोड़ ही दिया और सिर्फ यह सोचने लगा कि मैं किस तरीके से अब अपने आगे की जिंदगी और अपने बच्चों का भविष्य सुधारूँगा। एक दिन ऐसे ही मैं एक दुकान में बैठकर शराब पी रहा था और तभी अचानक से एक आदमी मेरे पास में आकर बैठा। पहले तो काफी देर तक हम लोगों में कोई भी बात नहीं हुई, लेकिन उसके बाद जब उस व्यक्ति ने भी थोड़ा शराब पी ली तो वह भी मुझसे बात करने लगा। मैंने उससे पूछा आप क्या करते हैं। वह दिखने में बहुत ही ज्यादा अमीर लग रहा था। उसने मोटी मोटी सोने की चैन और हाथों में ब्रेसलेट पहने हुए थे। वह मुझे कहने लगा मेरा एक छोटा सा कारोबार है। अब मेरी उससे ऐसे ही बातें होने लगी बातों बातों में मैंने उसे अपनी सारी समस्याएं बताई। मैंने उसे बताया किस प्रकार से मेरे भैया ने मेरे साथ धोखा किया और मुझे कहीं का भी नहीं छोड़ा। वह यह बात सुनकर बहुत ही दुखी हो गया और मुझे कहने लगा, दोस्त तुम चिंता मत करो। मैं तुम्हारी इन  मुसीबतों में तुम्हारा साथ दूंगा।

वह मुझे कहने लगा कि तुम अपनी भाभी की चूत मारोगे तो तुम्हारा सारा हिसाब चुकता हो जाएगा। अब मेरे भी दिमाग में यह बात समझ आ गई थी और मैंने भी उसकी बात को समझ लिया। मैं जैसे ही घर गया तो घर में अंधेरा हो रखा था। मेरे बड़े भैया शायद घर में नहीं थे और मैं ऐसे ही चुपके से उनके बेडरूम में चला गया। भाभी को लगा शायद उनके पति हैं मै उनके बगल में लेट गया। जैसे ही मैंने उनके स्तनों को छुआ तो वह एकदम नंगी लेटी हुई थी। मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हुआ मैंने उनके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दिया और थोड़ी देर में उनकी योनि में भी अपनी उंगली करने लगा। जैसे ही मैंने उनकी चूत मे उंगली डाली तो उनकी चूत का पानी गिरने लगा और फिर भाभी की चूत गिली हो गई। मुझे अंदर से सुकून मिल रहा था। अंधेरे में मैंने उनके दोनों पैर को चौड़े किया और उनके ऊपर लेट गया। मैंने धीरे से धक्का मारा तो उनकी चूत मे मेरा लंड जा चुका था। मै उनके होंठों को भी चूस रहा था और उनके स्तनों को भी अपने मुंह मे ले रहा था। जिससे कि उनका दूध भी निकल जाता और मैंने उनका दूध भी पी लिया। वह बड़ी उत्तेजना से अपने मुंह से आवाज निकालने लग जाती  और जब वह आवाज निकाल रही थी तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मेरा सारा हिसाब चुकता हो रहा है। मैं बड़ी देर तक उसकी चूत मारता रहा और उसका झडने वाला था तो उसने अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया और मेरे सामने अपने आप को समर्पित कर दिया।

जैसे ही उसने अपने पैरों को चौड़ा किया तो मैंने इतने तेज तेज झटके मारे कि उसका पूरा शरीर हिल रहा था और उसकी चीखें निकल रही थी। जैसे ही उसके मुंह से उसकी चीख निकलती तो मुझे बहुत अच्छा लगता। मैंने उसे ऐसे ही चोदना चालू रखा और मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने अपने वीर्य को उसकी योनि के अंदर ही गिरा दिया। जैसे ही मेरा वीर्य गिरा तो मैं आपके ऊपर ऐसे ही लेटा रहा मैं काफी देर तक अपनी भाभी के ऊपर ही लेटा हुआ था। मैंने अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकाला और अब उनके मुंह के पास ले गया। जैसे ही मैं उनके मुंह के पास ले गया तो उन्होने तुरंत ही उसे अपने मुंह में ले लिया। जैसे ही उन्होंने अपने मुंह में लिया तो मेरा लंड दोबारा से खड़ा हो गया और मैं दोबारा उनके पास गया और उनको उल्टा लेटाते हुए उनके ऊपर ही लेट गया। मैंने जैसे धीरे से अपने लंड को उनकी योनि में डाला तो वैसे ही मेरा अंदर चला गया और मैंने बड़ी तेजी से झटके मारने शुरू किए। मैं इतनी तेज तेज झटके मारता जा रहा था कि उनका पूरा शरीर हिल रहा था। उनकी चूतडे मेरे लंड से टकरा रही थी। मैं उनके बालों को कसकर पकड़ लेता और उनके चूतड़ों पर बड़ी तेज लंड से प्रहार करता। ऐसा ही काफी देर तक मैं उन्हें चोदता रहा। जिससे कि मेरा वीर्य दोबारा से गिर गया और मेरा माल जैसे ही गिरा। मैंने जल्दी से कपड़े पहने और अपने बेडरुम में चला गया।