पडोसी पे दिल अटक गया

Antarvasna, desi kahani: मैं अपने शादीशुदा जीवन से बिल्कुल भी खुश नहीं थी मैं एक आजाद खयालात की लड़की हूं। मेरी शादी को 4 वर्ष बीत चुके हैं और 4 वर्ष पूरे हो जाने के बाद मेरे पति आकाश और मेरे बीच रिश्तो को लेकर हर रोज झगड़े होते रहते हैं हम दोनों का रिश्ता कुछ ठीक नहीं हैं। हम दोनों की पहली मुलाकात मूवी देखने के दौरान थिएटर में हुई थी हम दोनों एक कॉमन फ्रेंड के माध्यम से मिले और उसी के बाद हम दोनों की मुलाकातें बढ़ने लगी। हमारी मुलाकात इतनी बढ़ गई कि हम दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया लेकिन शायद मेरा यह फैसला गलत साबित हुआ जब आकाश के साथ मेरी शादी हो गई। मुझे जैसा लगता था आकाश बिल्कुल उसके विपरीत हैं मैंने जो सपने देखे थे वह सब चकनाचूर हो चुके थे और मैं अपनी जिंदगी बस जी रही थी। मेरी जिंदगी में कुछ भी नया नहीं था मेरी जिंदगी में सिर्फ मेरे दोस्तों का ही सहारा था जिनके साथ शायद मैं खुश थी। आकाश को भी शायद मेरे होने से कोई फर्क नहीं पड़ता था हम दोनों एक ही छत के नीचे रहते हैं लेकिन उसके बावजूद भी हम दोनों एक दूसरे के साथ ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे कि हम दोनों एक दूसरे को जानते ही नहीं हैं।

इसी बीच आकाश ने अपनी जॉब से रिजाइन दे दिया जब आकाश ने अपनी जॉब से रिजाइन दिया तो आकाश ने अपने एक दोस्त के साथ अपना स्टार्टअप खोल लिया। जब आकाश ने अपना स्टार्टअप खोला तो आकाश और मेरे बीच बिल्कुल भी बातचीत नहीं होती थी क्योंकि आकाश घर कम ही आया करते थे वह अपने दोस्त के साथ ही ज्यादातर रहते। आकाश को जैसी मेरी कोई परवाह ही नहीं थी आकाश ने मुझसे शादी की थी लेकिन उसके बावजूद भी कभी आकाश ने अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे से नहीं निभाया आकाश हमेशा ही अपनी जिम्मेदारियों से दूर भागते रहे। एक दिन आकाश घर पर ही थे उस दिन मैंने आकाश से बात करने के बारे में सोचा, मैंने जब आकाश से बात की तो आकाश मुझे कहने लगे गरिमा यदि तुम्हें मुझसे डिवोर्स लेना है तो तुम डिवोर्स ले सकती हो।

मैंने आकाश को कहा आकाश तुम्हें तो मेरे होने से कोई फर्क ही नहीं पड़ता पहले तो तुम ऐसे बिल्कुल भी नहीं थे लेकिन अब तुम बदल चुके हो। आकाश कहने लगे कि समय के साथ बदलना जरूरी है लेकिन गरिमा तुम्हारे पास भी तो मेरे लिए वक्त नहीं होता। जब मैंने आकाश को कहा कि मैंने तो तुम्हारे साथ हमेशा अच्छा समय बिताने के बारे में सोचा लेकिन एक तुम हो कि तुम्हारे पास तो बिल्कुल भी समय नहीं है और कभी तुमसे कुछ बात करो तो तुम हमेशा ही कहते हो कि गरिमा इस बारे में हम लोग बाद में बात करेंगे। हम दोनों के बीच अब सब कुछ बदल चुका है और पहले जैसा तो कुछ भी नहीं है आकाश के पास भी शायद मेंरी बातों का कोई जवाब नहीं था आकाश ने मुझे कुछ नहीं कहा लेकिन मैंने आकाश से डिवोर्स लेने के बारे में सोच लिया था। मैंने जब यह बात अपने दोस्तों को बताई तो मेरे दोस्तों ने मुझसे कहा कि तुम दोनों ने तो लव मैरिज की थी और यदि तुम दोनों डिवोर्स ले लोगे तो शायद यह ठीक नहीं होगा। मेरे पास इसके अलावा कोई और चारा नहीं था क्योंकि मैं और आकाश शायद अपने रिश्ते को जी ही नहीं पा रहे थे। मैं भी आकाश के साथ रहना नहीं चाहती थी इसलिए मैंने आकाश से अलग होने का फैसला कर ही लिया आकाश को भी इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी। आकाश अपने स्टार्टअप में इतने डूबे हुए थे कि उन्हें तो जैसे कुछ परवाह ही नहीं थी और हम दोनों अब अलग रहने लगे मैंने अपने लिए एक अलग फ्लैट ले लिया था और मैं अलग रहने लगी थी लेकिन कई बार मुझे आकाश की कमी भी खलती थी। अभी कुछ दिन ही बीते थे और मुझे लगने लगा कि शायद मैं अकेले अपना जीवन नहीं काट पाऊंगी लेकिन मुझे हिम्मत दिखाते हुए अब आगे तो बढ़ना ही था। मेरे माता-पिता को भी इस बारे में पता चल चुका था मेरे पिताजी ने आज तक मुझे कभी भी किसी चीज के लिए रोका नहीं लेकिन शायद वह लोग इस फैसले से बिल्कुल भी खुश नहीं थे। मैं जब अपने घर कोलकाता गई तो मेरे माता पिता ने मुझे कहा कि गरिमा बेटा तुमने यह बिल्कुल भी ठीक नहीं किया तुम्हें हमसे एक बार इस बारे में पूछना तो चाहिए था।

मैंने अपने पिताजी को कहा मुझे लगा कि जब मैंने शादी की थी तब भी तो मैंने अपनी मर्जी से ही शादी की थी और यदि मैंने आकाश को डिवोर्स दिया है तो वह भी मैंने अपनी मर्जी से ही दिया है मैं नहीं चाहती कि उसके लिए मैं आप लोगों को जिम्मेदार ठहराऊँ यह मेरा खुद का ही फैसला था। मेरी मम्मी ने कहा बेटा तुम्हें एक बार तो हम लोगों से बात करनी चाहिए थी मैंने अपनी मम्मी से कहा अब इस बारे में हम लोग भूल जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। उन लोगों ने भी उसके बाद इस बारे में बात नहीं कि मैं कुछ दिन तक घर पर ही थी और घर पर मैं अपने माता पिता के साथ अच्छा महसूस कर रही थी। मैं इस बात से भी खुश थी कि कुछ दिनों के लिए ही सही परन्तु मैं अपने माता पिता के पास रह रही हूं लेकिन मुझे वापस मुंबई लौटना था और मैं जब मुंबई लौटी तो ऑफिस में काम करने वाली मेरी सहेली जिसका नाम आकांक्षा है उसने मुझे कहा कि मैं तुमसे मिलने के लिए आ रही हूं। मैं कोलकाता से उसी वक्त लौटी थी इसलिए मैंने आकांक्षा को कहा तुम थोड़ा रुक कर आना मैं अभी लौटी हूं और मैं साफ सफाई कर रही हूं आकांक्षा कहने लगी कि ठीक है मैं थोड़ी देर बाद आती हूं। थोड़ी देर बाद आकांक्षा आई तो उस वक्त मैं साफ़ सफाई कर चुकी थी और आकांक्षा ने दरवाजे की बेल बजाई तो मैंने दरवाजा खोला आकांक्षा दरवाजे पर खड़ी थी वह मुझे कहने लगी कि गरिमा क्या तुम आज ही घर से लौटी हो मैंने उसे बताया कि हां मैं आज ही घर से लौट रही हूं।

आकांक्षा के साथ मेरी बहुत अच्छी बातचीत है मैंने आकांक्षा से कहा आज तुमने मुझे फोन किया क्या कोई जरूरी काम था तो आकांक्षा मुझे कहने लगी कि नहीं ऐसे ही तुमसे मिलने का मन था तो सोचा तुम्हे फोन करूं लेकिन मुझे नहीं पता था कि तुम आज ही कोलकाता से वापस लौट रही हो काफी दिन हो गए थे तुम्हें मिली भी नहीं थी। मैंने आकांशा को कहा तुमने यह बहुत अच्छा किया कि तुम मुझसे मिलने के लिए आ गई। आकांक्षा और मैं बैठ कर बात कर रहे थे आकांक्षा मेरे साथ काफी समय तक रुकी और उसके बाद वह चली गई। थोड़ी देर बाद में अपने फ्लैट से नीचे आई जब मैं नीचे आई तो मैंने देखा हमारे पड़ोस में रहने वाला लड़का मुझे देख रहा था वह अक्सर मुझे देखा करता था लेकिन मैं हमेशा ही उसे नजरअंदाज कर दिया करती लेकिन उस दिन मैंने उससे बात की तो मुझे उससे बात करके अच्छा लगा। उस दिन पहली बार मुझे उसका नाम पता चला उसका नाम रौनक है रौनक से बात कर के मुझे अच्छा लगा और उसके साथ में काफी देर तक बात करकी रही। अब हम लोग एक दूसरे से मिला करते वह भी मेरे साथ मेरे फ्लैट पर आ जाया करता था। एक दिन मैंने रौनक को ड्रिंक ऑफर किया और हम दोनों ने साथ में बैठकर उस दिन शराब पी मुझे कुछ ज्यादा ही नशा हो गया था और मैं आकाश को याद करने लगी। मैंने रौनक के कंधे पर अपना सर रख लिया जब मैंने उसके कंधे पर अपना सर रखा तो वह मुझे कहने लगा लगता है आपको आपके पति की बहुत याद आ रही है मैंने उसे किस कर लिया। मैंने उसे किस किया तो वह भी मुझे मेरे सोफे पर लेटा कर चूमने लगा हम दोनों एक दूसरे को चुम्मा चाटी करने लगे तो मुझे भी अच्छा लग रहा था। वह जिस प्रकार से मेरे होठों को चूम रहा था उससे मुझे बहुत ही आनंद आ रहा था मैंने भी उसकी पैंट से उसके लंड को बाहर निकालते ही अपने मुंह के अंदर लेना शुरू किया और मैं उसके लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी तो मुझे बहुत मजा आ रहा था।

मैंन उसके लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग करना शुरू किया तो वह कहने लगा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने अपने कपड़े उतारने शुरू किए वह मेरे बदन की गर्मी को महसूस कर रहा था उसने मेरे पूरे शरीर को ऊपर से लेकर नीचे तक चाटा जब वह मेरे शरीर को चाट रहा था तो मुझे मज़ा आ रहा था। अब मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक ना सकी और जैसे ही मैंने उसे मोटे लंड को अपनी चूत के अंदर लिया तो वह मुझे कहने लगा आपकी चूत बडी टाइट है। मैंने उसे कहा अब तुम मुझे चोदते रहो मैंने अपने दोनों पैरों को खोल रखा था जिस प्रकार से मैं उसका साथ दे रही थी उससे वह और भी ज्यादा उत्तेजित हो रहा था और उसकी उत्तेजनना वह मेरी चूत के अंदर उतार रहा था वह बड़ी तेज गति से मुझे धक्के मार रहा था काफी देर तक वह मुझे सोफे पर लेटा कर चोदता रहा।

जब उसने मुझे घोड़ी बनाया तो मैं सोफे के सहारे खड़ी हो गई वह मुझे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था वह जिस गति से मुझे धक्के मार रहा था मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। वह मेरी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को आसानी से कर रहा था मैंने उसे कहा तुम और तेज मुझे धक्के मारो उसने मुझे इतनी तेजी से धक्के मारे मेरी चूतड़ों से एक अलग ही प्रकार की आवाज आ रही थी और उसे हम दोनों ही उत्तेजित हो जाते। वह मुझे इतनी तेज गति से धक्के मार रहा था मुझे लग रहा था कि मेरे चूत से बहुत ज्यादा पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा है इसलिए मैं अपने आपको रोक ना सकी और मैंने उसे कहा मुझे लगता है मैं झड चुकी हूं। वह अभी भी मेरी चूतडो को पकड़कर धक्के मार रहा था और जैसे ही उसने अपने वीर्य को मेरी चूत के अंदर गिराया। उसके बाद हम दोनों बेडरूम में चले गए और उस रात हम दोनों ने सेक्स का मजा लिया। मुझे जब भी रौनक की जरूरत पड़ती तो रौनक मेरे पास आ जाया करता और वह हमारी इच्छा को पूरा कर दिया करता। रौनक भी कहीं ना कहीं इस बात से बहुत ज्यादा खुश था कि उसे भी सेक्स का सुख मिल रहा है।