पड़ोस की महिला की गांड को चौड़ा करके मजा

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मेरा नाम संजय है और मैं पुणे में रहता हूं, मैं पुणे में ही नौकरी करता हूं इसलिए मैं यहां पर किराए में रहता हूं। मुझे पुणे में रहते हुए एक वर्ष हो चुका है और मैं जहां पर रहता हूं वहां पर मैं ज्यादा लोगों को नहीं पहचानता क्योंकि मैं सिर्फ छुट्टी के दिन ही घर पर रहता हूं लेकिन हमारे जो मकान मालिक हैं वह बहुत ही अच्छे हैं। मुझे कभी भी कोई आवश्यकता होती है तो वह तुरंत ही उसे पूरा कर देते हैं, मैं उन्हें समय पर किराया दे देता हूं क्योंकि मुझे अपने ऑफिस से हाउस रेंट मिलता है इसलिए मैं उन्हें समय पर ही किराया दे देता हूं। मेरे ऑफिस में बहुत अच्छे दोस्त हैं और उन लोगों से मेरा बहुत ही अच्छा और संबंध है। मैं अपने दोस्तों के यहां भी अक्सर जाता रहता हूं और उनके घर वाले भी मुझे पहचानते हैं।

एक दिन मेरी छुट्टी थी और मैं अपने घर पर ही था, मेरे दोस्तों ने मुझे फोन किया और कहने लगे कि आज कहीं घूमने चलते हैं,  मैंने उन्हें कहा कि आज मेरी तबीयत ठीक नहीं है इसलिए मैं तुम्हारे साथ नहीं आ पाऊंगा, आज मैं घर पर ही आराम करने वाला हूं। मेरी तबीयत बहुत ज्यादा खराब थी इसलिए मैं डॉक्टर के पास चला गया और मैं डॉक्टर से दवाई लेकर आ गया। जब मैं दवाई लेकर आया तो मैंने वह दवाई खाई और मुझे बहुत गहरी नींद आ गई। जब मेरी आंख खुली तो उस वक्त काफी अंधेरा हो चुका था। मैं अपना मुंह हाथ धोते हुए बाहर चला गया,  मैं पास में किसी दुकान पर कुछ सामान लेने लगा तभी वही एक महिला मुझे दिखाई दी जो कि मुझे बहुत ज्यादा घूर कर देख रही थी। मेरे अंदर बिल्कुल भी हिम्मत नहीं थी कि मैं उससे बात कर सकूं इसलिए मैं वहां से चला गया और वह फिर भी मुझे देखती रही। मेरी तबीयत खराब थी इसलिए मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली। मैंने ऑफिस से एक हफ्ते की छुट्टी ले ली थी और उस बीच में मेरे दोस्त मुझे मिलने आये, वह कहने लगे कि तुम्हारी तबीयत ज्यादा खराब है तो तुम अपने घर चले जाओ, मैंने उन्हें कहा कि घर में जाऊंगा तो मेरे घर वालों को मेरी चिंता होने लगेगी इसलिए मैं यहीं पर रह कर अपना इलाज करवा लूंगा।

वह लोग मुझसे पूछने लगे कि तुम्हें क्या हुआ है, मैंने उन्हें बताया कि मुझे बहुत तेज बुखार आ रहा है और डॉक्टर ने मुझे एक हफ्ते के लिए बेड रेस्ट के लिए कहा है इसलिए मैं घर पर ही रहकर आराम कर रहा हूं। अब मेरा बुखार थोड़ा ठीक होने लगा है, मैं उस दुकान में गया जहां से मैं। अक्सर सामान लेता हूं। उस दिन मुझे वह महिला दोबारा से मिली और वह मुझे देख रही थी। मैंने जब दुकान वाले से पूछा कि यह महिला मुझे इतना घूर क्यों रही है तो वह मुझे कहने लगा कि इनकी आदत ही ऐसी है, मैंने उनसे पूछा कि यह कौन है, वह कहने लगे की यह यहीं पास में रहती हैं लेकिन इनका इनके पति के साथ बहुत झगड़ा रहता है, इस वजह से यह हर किसी को इस प्रकार से देखती हैं। उसके बाद जब मैं वापिस अपने कमरे की तरफ लौट रहा था तो उन्होंने मुझे पीछे से आवाज देते हुए रोक लिया और कहने लगी कि तुम क्या करते हो, मैंने उन्हें बताया कि मैं यहीं पर नौकरी करता हूं। उसके बाद वह मुझसे कहने लगी कि तुम कहां पर रहते हो, मैंने उन्हें बता दिया कि मैं यहीं पास में रहता हूं, मैंने अपने घर का एड्रेस उन्हें दे दिया। मैंने जब उनसे पूछा कि आप मुझे इतना क्यों देख रहे हैं तो वह कहने लगी कि मैंने तो तुम्हें नहीं देखा, शायद हो सकता है कि तुम्हें इस प्रकार से आभास हो रहा हो कि मैं तुम्हें घूर कर देख रही हूं। उन्होंने मुझे बताया कि जब से मेरा और मेरे पति के बीच झगड़ा होने लगा है उसके बाद से मेरा थोड़ा मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा है और मैं हर किसी को घूर कर देखती हूं और मुझे ऐसा लगता है कि मैं भी मानसिक तौर पर तनाव में हूं। मैंने उन्हें कहा कि आप किसी अच्छे डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाती जिससे की आपको थोड़ा आराम मिले। वह कहने लगे कि मैंने कई जगह दिखाया लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि मैं शायद ठीक नहीं हो सकती। उन्होंने मुझे अपना नंबर दे दिया और उन्होंने मुझे अपना नंबर देते हुए कहा कि यह मेरा नंबर है यदि तुम्हें मुझे कभी फोन करना हो तो तुम मुझे फोन कर लेना। उनका नाम सोनिया था। अब वह यह कहते हुए चली गई, मैं जब अपने कमरे में आ रहा था तो मुझे लगा कि वाकई में इनका मानसिक संतुलन बिगड़ चुका है।

मैंने तो उनसे उनका नंबर भी नहीं लिया, उसके बावजूद भी वह मुझे अपना नंबर देकर चली गई। मैं सोचने लगा की उनका मानसिक संतुलन इतना ज्यादा बिगड़ चुका है कि शायद वह कुछ गलत कदम ना उठा ले इसीलिए जब मैंने उनसे उनका हाल-चाल पूछे तो वो कहने लगी तुम बहुत दिनों से मुझे मिले नहीं, मैंने कहा कि हां मैं आजकल अपने काम में ही व्यस्त हूं इसलिए मैं नहीं पाया। उन्होंने कहा कि अब तुम्हारी तबीयत कैसी है,  मैंने उन्हें कहा कि मेरी तबीयत अब ठीक है और मैं अब अपने काम में ही बिजी हूं, इस वजह से मैं आपको मिल नहीं पाया। वह मुझे कहने लगी कि कभी तुम्हारे पास समय हो तो तुम मेरे घर पर आ जाना, मैंने उन्हें कहा कि ठीक है इस हफ्ते मेरी छुट्टी होगी तो मैं आपसे मिलने आपके घर पर आ जाऊंगा। मेरी छुट्टी के दिन मैं सुबह देर से उठता हूं इसलिए मैं आराम से लेटा हुआ था। तभी सोनिया जी का मुझे फोन आया और वह कहने लगी कि तुम मुझे मिलने वाले थे लेकिन तुम अभी तक आए नहीं, मैंने उन्हें कहा कि अभी मैं सोया हुआ था इसलिए मैं आया नहीं मैं कुछ देर में तैयार होकर आपके घर पर आता हूं। मैं अब तैयार होकर उनके घर पर चला गया।

जब मैं सोनिया के घर गया तो उसके घर पर कोई भी नहीं था। मैं सोफे पर बैठा था तो वह मेरे पास आकर बैठ गई और मुझसे चिपक कर बैठी हुई थी उनकी बड़ी बड़ी गांड मुझसे टकरा रही थी मेरा मूड खराब हो रहा था। मैंने कस कर सोनिया को पकड़ लिया और उसके होठों को चूमने लगा। मैंने उसे कहा कि तुम्हारा दिमागी संतुलन बिल्कुल भी सही नहीं है। वह कहने लगी कि मुझे सेक्स की भूख है इसलिए मैंने तुम्हें फोन करके बुलाया। मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके मुंह में डाल दिया और उसने बहुत ही अच्छे से मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया। वह बहुत अच्छे से मेरे लंड को को चूस रही थी मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जब वह मेरे लंड को चूसने रही थी। मैंने भी उसके बड़े बड़े स्तनों को चूसना शुरू कर दिया और काफी देर तक उसके स्तनों का मैने रसपान कर रहा था। मैंने उसकी गांड को चाटना शुरू कर दिया और उसकी गांड से बहुत ही ज्यादा चिपचिपा निकलने लगा। मैने उसकी गांड मे लंड डाल दिया तो उसकी गांड मे मेरा लंड चला गया। मुझे बहुत ज्यादा दर्द महसूस होने लगा और उसकी गांड से खून निकलने लगा मैंने उसके चूतडो को कसकर पकड़ लिया और उसे बड़ी तेजी से मै झटके देने लगा। वह मुझे कहने लगी कि तुम्हारा तो बहुत ही मोटा है मुझे बहुत मजा आ रहा है जब तुम मेरी गांड में अपना लंड डाल रहे हो। वह अपनी चूतडो को मुझसे टकराने लगी और जब वह अपनी चूतडो को मुझसे टकराती तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होता क्योंकि उसकी चूतडे बहुत बड़ी बड़ी थी उनका साइज़ बहुत बडा था इसलिए मुझे बड़ा आनंद आ रहा था। मैं उसे बड़ी ही तेजी से चोदे जा रहा था मैंने उसे इतनी तेज तेज झटके मारे की उसकी गांड पूरी फट चुकी थी। मुझे भी बहुत मजा आ रहा था जब मैं उसकी गांड मार रहा था वह मुझे कहने लगी कि मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है। मैंने भी सोनिया को बड़ी तेज तेज धक्के मारे और उसकी चूतडे मुझसे टकरा रही थी उसकी चूतडो से बहुत तेज आवाज निकलती। मुझे बहुत मजा आ रहा था जब उसकी चूतडे मुझसे टकरा रही थी मुझे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हुआ और कुछ देर बाद ही मेरा माल सोनिया की गांड में ही गिर गया। जब मेरा वीर्य उसकी गांड में गिरा तो वह बहुत खुश हो गई और कहने लगी तुमने तो मुझे आज पूरे मजे दिलवा दिए। अब मैं अक्सर सोनिया के पास चला जाता था और वह मेरी इच्छा को पूरा कर देती थी।