ऑफिस की लड़की की चूत मारी

Kamukta, office sex stories

मेरा नाम संतोष है और मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर के पद पर हूं, मेरी उम्र 30 वर्ष की है और मैंने इस कंपनी में कुछ समय पहले ही जाइनिंग की है। जब मैंने इस कंपनी में ज्वाइन किया उसके कुछ समय बाद ही मेरे घर वालों ने मेरे लिए एक लड़की देख ली लेकिन मेरा मन अभी शादी करने का नहीं है और मैंने उन्हें इस बारे में बताया भी परंतु वह कहने लगे कि लड़की वाले बहुत अच्छे खानदान से है और वह हमारे पुराने परिचित भी है इसलिए उन्होंने मेरी उससे रिश्ते की बात पक्की कर दी परन्तु मैं बिल्कुल ही उस रिश्ते के खिलाफ था क्योंकि मैं चाहता था कि मैं जिस लड़की को पसंद करूं उससे ही मेरी शादी हो लेकिन मेरे पिताजी बहुत ही पुराने ख्यालात के है इसलिए वह मेरी बात बिलकुल भी नहीं माने और उन्होंने उस लड़की से मेरे रिश्ते की बात कर ली।

मुझे बहुत बुरा लगा जब उन्होंने मुझसे बिना पूछे मेरे रिश्ते की बात कर दी लेकिन मैं कुछ भी नहीं बोल सकता था इसलिए मुझे बहुत ज्यादा बुरा लगने लगा। मैं जब लड़की से मिला तो वह बहुत ही पुराने ख्यालातो की लग रही थी और मैं नहीं चाहता था कि मैं उस प्रकार की लड़की से शादी करूं क्योंकि वह लोग गांव के माहौल के तरीके के थे। गांव में उनके पास बहुत ही पैसा है उसके बावजूद उनका रहन-सहन बिल्कुल भी बदला नहीं था इसलिए मुझे यह रिश्ता बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था। मैंने अपने भैया से भी इस बारे में बात की तो वो कहने लगे कि वह लोग अच्छे हैं, मैंने उन्हें कहा कि मैंने कभी भी इस बारे में नहीं कहा कि वह लोग बुरे हैं या गलत हैं परंतु मैं उस लड़की से शादी नहीं करना चाहता लेकिन मेरे पिता जी बिल्कुल अपनी बात पर अड़े हुए थे और उन्होंने मेरी सगाई उस लड़की से करवा दी जब मेरी सगाई हो गई तो मैं उसे कभी भी फोन नहीं करता था लेकिन कभी-कबार उस लड़की के मुझे फोन आ जाते थे।

मैंने कभी भी उसे दिल से स्वीकार नहीं किया था और ना ही मैं उससे शादी करना चाहता था हालांकि उसका व्यव्हार बहुत ही अच्छा था परंतु मैं उसे बिल्कुल भी शादी करने के लिए तैयार नहीं था। उसी दौरान हमारे ऑफिस में एक लड़की आई जिसका नाम दीपिका है, वह दिखने में बहुत ही सुंदर और बहुत ही खुले विचारों की लड़की है। जब वह हमारे ऑफिस में आई तो मैंने ही उसका इंटरव्यू लिया था और मैंने उसे सारा काम समझाया था, उसके बाद उसने हमारे ऑफिस में ज्वाइन कर लिया। जब उसने हमारे ऑफिस में ज्वाइन किया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा,  वह मुझसे बात किया करती थी और जब भी उसे कुछ भी समझ नहीं आता तो वह तुरंत ही मेरे पास आ जाती थी। धीरे-धीरे हम दोनों के बीच बातें होने लगी थी और हम दोनों एक दूसरे को पहचानने लगे थे। मुझे भी उसके बारे में सब कुछ पता चल चुका था कि उसका घर कहां पर है और वह इससे पहले कहां नौकरी कर रही थी। उसे मेरे बारे में भी पता था कि मेरी सगाई हो चुकी है, उसने मुझसे पूछा कि आपने कभी भी अपनी होने वाली पत्नी की फोटो नहीं दिखाई, मैंने उसे बताया कि मैंने कभी भी उसे दिल से स्वीकार नहीं किया है क्योंकि मैं नहीं चाहता कि उससे मेरी शादी हो। जब उसने मुझसे इसका कारण पूछा तो मैंने उसे बताया कि वह लोग अभी कुछ समय पहले ही शहर में आए हैं, वह बहुत ही ऊंचे खानदान से हैं परंतु वह लोग पृष्ठभूमि से आए हैं इसलिए वह बिल्कुल ही बदले नहीं हैं। दीपिका मुझसे कहने लगी कि कुछ समय बाद वह बदल जाएंगे यदि आप उन्हें समय देंगे तो, मैंने उससे कहा कि वह तो सही बात है परंतु फिर भी मेरा मन उसे बिल्कुल भी शादी करने का नहीं है क्योंकि मैं उसे दिल से स्वीकार नहीं कर सका हूं। दीपिका और मेरे बीच में बहुत बातें होती थी और अक्सर वह मुझे इस बारे में समझाती थी कि आप यदि शादी कर लेंगे तो आप बहुत खुश रहेंगे परंतु मैं बिल्कुल भी उस लड़की को स्वीकार नहीं कर पा रहा था और मेरे दिमाग में सिर्फ दीपिका के बारे में ही चलता रहता था। मैंने एक दिन दीपिका को अपने दिल की बात कह दी। मैने उसे कहा कि मैं तुम्हें बहुत पसंद करने लगा हूं और इसी वजह से मैं तुमसे ही शादी करना चाहता हूं।

दीपिका मुझसे कहने लगी कि यह संभव नहीं हो पाएगा क्योंकि आपकी सगाई हो चुकी है और यदि आप सगाई तोड़ेंगे तो आपके घर वालों को बहुत बुरा लगेगा। मैंने उसे कहा कि मैं अपने घरवालों को मना लूंगा, तुम उसकी बिल्कुल भी चिंता मत करो लेकिन मुझे यह बात मालूम है कि मेरे पिता जी बिल्कुल भी नहीं मानने वाले और उन्होंने मेरी सगाई जहां करवाई है वही वह मेरी शादी करवाएंगे। यह मुझे अच्छी तरीके से मालूम था लेकिन फिर भी मैं अपने आप को झूठा दिलासा दे रहा था और दीपिका से मैंने इस बारे में बात की तो वह कहने लगी यदि आपके घर वाले मान जाते हैं तो मुझे इस रिश्ते से कोई आपत्ति नहीं है। मुझे भी दीपिका जैसी लड़की से शादी करनी थी और हम दोनों ऑफिस में ज्यादा से ज्यादा समय साथ में बिताते थे और उसे जब भी किसी प्रकार की कोई समस्या होती तो वह तुरंत ही मेरे पास आ जाती थी क्योंकि मैं ही ऑफिस का सारा काम संभालता था इसलिए वह हमेशा ही मुझसे पूछने के लिए आती रहती थी। वह जब भी मेरे कैबिन में आती तो काफी देर तक वह मेरे साथ ही बैठी रहती थी, मुझे भी उससे बात करने में बहुत अच्छा लगता था और वह भी मुझसे बात कर के बहुत खुश होती थी।

एक दिन दीपिका का बर्थडे था लेकिन मुझे पता नहीं चला कि उसका बर्थडे है, वह ऑफिस में आई और कहने लगी कि आपने मुझे बर्थडे विश नहीं किया। मैंने उसे कहा कि मुझे वाकई में इस बारे में बिल्कुल भी नहीं पता था, मैं तुरंत ही ऑफिस के बाहर गया और मैंने एक रिंग ले ली। मैंने वह रिंग जब दीपिका को पहनाई तो वह बहुत खुश हो गई और वह मुझसे गले मिल गई, जब वह मुझसे गले मिली तो मुझे बहुत ही अच्छा महसूस होने लगा। जब हमारे मुझसे गले लगी तो उसके स्तनों मुझसे टकराने लगे मैंने उसे पकड़ कर किस कर लिया और उसके होठों को बहुत देर तक मैंने अपने होठों से चूसना जारी रखा उसके नरम और मुलायम होठ जब मेरे होठों से मिल रहे थे तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। वह भी पूरे मूड में आ रही थी मैंने धीरे-धीरे उसके स्तनों को दबाना शुरू किया। मैंने उसकी गांड को भी दोबाना शुरू कर दिया मैंने जब उसके कपड़े खोल तो उसने लाल रंग की पैंटी और ब्रा पहनी हुई थी जिनमें कि उसका बदन बड़ा सेक्सी लग रहा था। मैंने उसकी लाल रंग की ब्रा को खोलते हुए उसके स्तनों को अपने मुंह में ले लिया और बहुत देर तक मैं उसके स्तनों का रसपान करता रहा। वह भी पूरे मजे में आ चुकी थी और अपने मुंह से सिसकिंया ले रही थी मुझे भी बड़ा आनंद आ रहा था जब मैं उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूस रहा था। मैंने उसकी योनि पर जैसे अपनी उंगली लगाई तो वह पूरी गिली हो चुकी थी मैंने भी उसे अपने ऑफिस में रखे सोफे पर लेटा दिया। कुछ देर मैंने उसके मुंह में अपने लंड को डाल दिया उसने मेरे लंड को अपने गले तक लेकर चूसना जारी रखा और बहुत ही अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी। मुझे भी बहुत अच्छा महसूस होने लगा मैंने जब उसकी योनि पर अपने लंड को लगाया उसकी योनि बहुत गर्म हो रखी थी। मैंने जैसे ही अपने लंड को अंदर डाला तो उसकी योनि से खून बाहर की तरफ निकलने लगा। मुझे  बहुत मजा आने लगा जब मैं दीपिका को चोद रहा था और वह भी बहुत तेज सिसकिंया ले रही थी। मैंने उसके दोनों पैरों को मिलाते हुए बड़ी तेजी से धक्के देने शुरू किया क्योंकि मेरा दीपिका के साथ पहला ही अनुभव था इसलिए उसकी नरम और मुलायम चूत मारने में मुझे बड़ा अच्छा महसूस हो रहा था। मैंने उसे बड़ी तीव्र गति से धक्के देने शुरू कर दिया और उन झटको के बीच में ना जाने कब मेरा वीर्य पतन हो गया। मैंने उसके साथ 10 मिनट तक संभोग किया और उन 10 मिनट में मुझे बहुत मजा आ गया दीपिका भी बहुत ज्यादा खुश थी और उसके बाद से हम दोनों लगातार सेक्स करते रहते हैं।