नाजायज संबंध जायज हैं

Hindi sex stories, antarvasna मै आकाश को दिल ही दिल चाहती थी आकाश और मेरा परिवार एक दूसरे को काफी वर्षो से जानता है और उनका हमारे घर पर आना जाना भी था। एक दिन जब आकाश के पिताजी ने मेरे पिताजी से मेरा हाथ मांगा तो मैं फूली नहीं समा रही थी मैं उस दिन बहुत खुश थी। आकाश अपने घर में इकलौता है हमारे परिवार एक दूसरे को काफी वर्षों से जानते हैं इसलिए मेरे पिताजी को भी कोई आपत्ति ना थी और हम दोनों के रिश्ते के लिए मेरे माता-पिता तैयार हो चुके थे। हम दोनों के रिश्ते को अब रजामंदी मिल चुकी थी और जल्द ही हम दोनों की सगाई की रस्म पूरी हुई। हम दोनों एक रिश्ते में बंध चुके थे क्योंकि मैं सरकारी स्कूल में टीचर थी तो मेरे पिताजी मुझे कहने लगे बेटा तुमने आगे क्या सोचा है?

मैंने पिता जी से कहा मैंने अभी फिलहाल तो ऐसा कुछ नहीं सोचा है अभी तो मैं अपने स्कूल को जारी रखना चाहती हूं। करीब 6 महीने बाद हम दोनों एक सूत्र में बंध गए अब हम दोनों पति पत्नी बन चुके थे। आकाश के घर में बहुत खुशी का माहौल था मेरे मन में भी खुशी का भाव था मैं बहुत ज्यादा खुश थी क्योंकि मैं आकाश को दिल ही दिल चाहती थी और आकाश से मेरी शादी हो चुकी थी। हम दोनों एक दूसरे को पहले से ही भली भांति जानते थे हम दोनों को एक दूसरे के साथ अर्जेस्ट करने में कोई मुश्किल नहीं हुई। उस रात हम दोनों के जिस्म एक हो चुके थे हम दोनों के जिस्मो का मिलन हो चुका था। अब हमारी शादी को 15 दिन हो चुके थे इन 15 दिनों में मुझे ऐसा लगा जैसे कि मैं दुनिया की सबसे खुशनसीब लड़की हूं। हम दोनों आपने हनीमून पर शिमला चले गए शिमला की खूबसूरत वादियां जैसे हम दोनों को अपनी और मोहित कर रही थी। मैं और आकाश बहुत ज्यादा खुश थे मुझे इस बात की खुशी थी आकाश मुझे शिमला घुमाने के लिए लाए। मैं बचपन से ही जिस राजकुमार के बारे में सोचा करती थी उस राजकुमार से मेरी शादी हो चुकी थी मैं अपने इस रिश्ते से बहुत ज्यादा खुश थी। हम दोनों का हनीमून बड़ा ही अच्छा रहा करीब एक हफ्ते बाद हम लोग मुंबई लौट आए। जब हम लोग मुंबई लौट आए मैंने शादी के चलते स्कूल से छुट्टी ली थी आकाश ने भी अपने दफ्तर से छुट्टी ली थी।

हम दोनों की छुट्टियां खत्म होने वाली थी लेकिन मुझे अपने स्कूल जाने का बिल्कुल मन नहीं था। मैं अपने ससुराल में थी इसलिए मैं सुबह जल्दी उठ जाया करती थी लेकिन आकाश अब भी बिस्तर पर लेटे हुए थे। मैंने उन्हें चाय देते हुए कहा आकाश अभी तक आप सो रहे हैं लेकिन उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ते हुए कहा क्यों सुमन तुम जल्दी उठ गई तो क्या मैं भी जल्दी उठ जाऊं। उन्होंने बड़े प्यार भरे अंदाज में मुझे कहा तो मैं जैसे उनकी तरफ खींची चली गई उन्होंने मेरे हाथ को खींचते हुए बिस्तर पर मुझे लेटा दिया। मैंने उन्हें कहा आकाश मुझे जाने भी दो मम्मी बाहर मेरे बारे में क्या सोच रही होंगी। आकाश ने मुझे छोड़ा ही नहीं उन्होंने मेरी कलाई को पकड़े रखा और उन्होंने मेरे गाल पर एक किस किया। उसके बाद मैं बाहर चली गई अब हर रोज की तरह आकाश तैयार होकर दफ्तर चले जाते, वह सुबह उठते और नहा धोकर नाश्ता करके अपने दफ्तर के लिए रवाना हो जाते। मैं भी शाम को स्कूल से घर लौट आती थी लेकिन मैं काफी थकी हुई रहती थी। आकाश भी अपने दफ्तर से शाम को आ जाते थे कुछ देर हम दोनों बैठ कर एक दूसरे से बातें किया करते मुझे उनसे बात कर के ऐसा लगता जैसे मेरी सारी थकान दूर हो गई मैं बहुत ज्यादा खुश हो जाती थी। हमारी शादी को 6 महीने हो चुके थे लेकिन 6 महीने बाद आकाश का व्यवहार बदलने लगा था आकाश का व्यवहार अब पहले जैसा नहीं रह गया था। आखिरकार एक दिन मैंने आकाश से पूछ ही लिया आकाश में काफी समय से देख रही हूं जब से हमारी शादी हुई है उसके बाद हम लोग एक दूसरे के साथ काफी अच्छे से समय बिता रहे थे और तुम मेरे लिए वक्त भी निकालते थे लेकिन अब जैसे तुम्हारे पास मेरे लिए वक्त ही नहीं है। आकाश ने मुझे जवाब देते हुए कहा सुमन हमारी शादी होनी थी अब शादी हो चुकी है अब मुझे अपने कैरियर को लेकर भी थोड़ा सोचने दो और मुझे अपने काम पर ध्यान देने दो। मैं इस बात से खुश नही थी मै आकाश के सामने मुस्कुराने लगी लेकिन मेरे दिल में आकाश के प्रति वह प्यार नहीं रह गया था।

हम दोनों का वैवाहिक जीवन अब पहले जैसा नहीं रह गया था हम दोनों के जीवन में वह खुशियां नहीं थी जो पहले थी। मैं आकाश की हर एक बात को अभी भी मानती थी लेकिन आकाश मेरे लिए समय ही नहीं निकालाते। आकाश मुझसे जो कहते मै वह करती उनकी पसंद के हिसाब से मैं उनके लिए ऑफिस का खाना बनाती। वह मेरे लिए समय नहीं निकाल पाते थे हम दोनों की प्यार की नीव कमजोर होने लगी थी और धीरे धीरे सब कुछ बदलता चला गया। मुझे कई बार ऐसा लगता जैसे मैं आकाश के प्यार में डूबी हुई थी लेकिन अब हम दोनों के रास्ते काफी अलग हो चुके हैं। आकाश ऑफिस से थके हारे आते वह जल्दी ही सो जाते थे। एक दिन आकाश का मुझसे बात करने का मूड था लेकिन उस दिन मैं काफी थक चुकी थी क्योंकि हमारे स्कूल में बच्चों के  एग्जाम चल रहे थे जिस वजह से मुझे बच्चों की पेपरों की कॉपी चेक करनी पड़ रही थी मुझे जमाई आने लगी। आकाश मुझे कहने लगे सुमन तुम्हारा ध्यान कहां है यदि तुम्हारे पास मेरे लिए वक्त नहीं है तो हम दोनों को एक दूसरे से बात नहीं करनी चाहिए और वह गुस्से में तिलमिला कर सो गए। मैंने आकाश से कुछ नहीं कहा और मैं भी सो गई। अगली सुबह जब मैं उठी तो आकाश अपने ऑफिस के लिए तैयार हो रहे थे मैंने उनके लिए टिफिन पैक किया तो वह मुझे कहने लगे रहने दो मुझे टिफिन नहीं ले जाना वह गुस्से में ऑफिस चले गए। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था मुझे लग रहा था कि शायद हम दोनों एक दूसरे को समझ नहीं पा रहे हैं।

 एक दिन मैंने आकाश से बात की और कहा आकाश मुझे लगता है कि मुझे अपनी नौकरी से इस्तीफा दे देना चाहिए। आकाश ने मुझे उस दिन बड़े प्यार से समझाया और कहने लगे नहीं सुमन तुम रहने दो। मैंने आकाश से कहा हम दोनों एक दूसरे के लिए समय ही नहीं निकाल पा रहे हैं जब भी मैं तुमसे बात करती हूं तो तुम मेरी बात को टाल दिया करते हो इसलिए मुझे लगने लगा है कि मुझे अब अपने स्कूल को छोड़ देना चाहिए। आकाश ने मुझे उस वक्त कहां रहने दो तो मैं उनकी बात मान गई कुछ महीने तो सब कुछ ठीक चलता रहा और सब कुछ पहले जैसा ही सामान्य होने लगा। हम दोनों के बीच में अच्छे से बातें होती और हम दोनों एक दूसरे को समय दिया करते लेकिन धीरे-धीरे फिर दूरिया बढने लगी। हमारे स्कूल में एक नई टीचर आए उनका नाम मोहन है उनसे मेरी काफी अच्छी दोस्ती होने लगी। जब मैंने उन्हें इस बारे में बताया तो वह मुझे समझाने लगे। मै सब कुछ पहले जैसा सामान्य करने की कोशिश करती लेकिन हम दोनों के बीच अब पहले जैसा कुछ भी नहीं था सब कुछ बदल चुका था। मै ना जाने क्यों मोहन की बातों से प्रभावित होने लगी मैं मोहन की तरफ खींची चली गई। मोहन एक सामान्य कद काठी के व्यक्ति हैं वह बडे ही सामान्य किस्म के हैं लेकिन उनके व्यक्तित्व में ऐसी कोई तो बात है जिससे मैं उनकी तरफ खींची चली गई। हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिताने लगे लेकिन यह बात आकाश को पता चली तो वह मुझ पर गुस्सा हो गया हम दोनों के रिश्ते में और ज्यादा खटास पैदा होने लगी।

हम दोनों के रिश्ते में कड़वाहट आ चुकी थी हम दोनों एक दूसरे से बहुत कम बातें किया करते थे लेकिन इसी बीच एक दिन मोहन और मैंने साथ में समय बिताने के बारे में सोचा तो हम दोनों पार्क में बैठकर बातें कर रहे थे। उस दिन ना जाने मुझे ऐसा क्या हुआ कि मैंने मोहन को किस कर लिया। हम दोनों के बीच जब किस हुआ तो हम दोनों ही उसके बाद वहां से चले गए हमने रास्ते भर कुछ बात नहीं की। मुझे मालूम चल चुका था कि हम दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे हैं मोहन और मैं एक दूसरे से प्यार करने लगे थे। इसी के चलते एक दिन हम दोनों के बीच में शारीरिक संबंध बन गए। मैं उस दिन मोहन के साथ उसके घर पर चली गई मैं मोहन के रूम में बैठी हुई थी तो हम दोनों आपस में बातें कर रहे थे बात करते करते मोहन ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया और अपने बिस्तर पर मुझे लेटा दिया। मैं मोहन को कुछ कह ना सकी मोहन ने मेरे होठों को चूमना शुरू किया तो मुझे भी अच्छा लगने लगा। मोहन ने जब मेरे ब्लाउज को खोलते हुए मेरी ब्रा को खोल दिया और मेरे स्तनों का वह रसपान करने लगे।

वह मेरे स्तनों का रसपान बड़े अच्छे से कर रहे थे मुझे ऐसा प्रतीत होता जैसे कि ना जाने कितने समय बाद मेरी इच्छा पूरी हो रही है। यह सब चलता रहा जब मैंने मोहन के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो उन्हें भी बड़ा अच्छा लगा। मैंने उनके लंड को चूसकर उनके लंड से पानी बाहर निकाल दिया। उन्होंने मुझे घोडी बनाते हुए मेरी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो मुझे एक अलग ही फीलिंग आने लगी। काफी लंबे अरसे बाद में सेक्स को अच्छे से अनुभव कर पा रही थी मोहन मुझे बड़ी तेजी से धक्के दिए जा रहे थे। उनके धक्को से मुझे और भी जोश चढ़ने लगा उन्होंने मेरे चूतड़ को पकड़कर मुझे बड़ी देर तक धक्के दिए जिससे कि मेरी योनि से पानी बाहर की तरफ को निकालने लगा। मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई जब उन्होंने अपने वीर्य को मेरी योनि में गिराया तो वह मुझे कहने लगे सुमन मैडम तुम्हें अच्छा तो लगा? मैंने गर्दन हिला कर जवाब दिया और कहा आज काफी समय बाद ऐसा लगा जैसे कि किसी का प्यार मुझे मिला हो। हम दोनों के बीच सेक्स संबंध बनते ही रहते हैं मुझे नहीं लगता कि हम दोनों के नाजायज संबंध कोई गलत है।