नाना के घर मामी का मजा

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राज है और मेरी उम्र 20 साल है. में बहुत सीधा हूँ, लेकिन ये तो आप भी जानते है कि सीधे लोगो को ही सेक्स की ज़्यादा भूख होती है, क्योंकि उन्हें आसानी से ये सब कुछ नहीं मिलता है, तो अब में सीधे कहानी पर आता हूँ.

ये बात 2014 जून की है और में हर छुट्टियों में अपने नाना के घर जाता था, क्योंकि वहाँ मामी माधुरी, उम्र 34 साल और छोटी मौसी श्रुति, उम्र 30 साल रहती थी. में वहाँ इसलिए जाता था कि कम से कम उनकी चूची और गांड तो दिनभर देखने को मिलेगी. उनकी ब्रा और पेंटी में मुठ मारने में बड़ा मज़ा आता था, लेकिन अब श्रुति मौसी की 2 साल पहले शादी हो गई थी, लेकिन इस बार वो भी आने वाली थी तो जिस दिन वो सुबह पहुँची तो शाम को में भी पहुँच गया, उनके एक साल की लड़की भी थी, उसका नाम ऋतु था.

अब में मौसी को 2 साल के बाद देख रहा था और अब उनके बूब्स एकदम बड़े-बड़े और तने हुए रहते थे और गांड भी चौड़ी हो गई थी. मेरे मामा पतले दुबले से है तो मामी अभी भी वैसी थी जैसी शादी के वक़्त लगती थी. मेरे मामा उन्हें ठीक से चोदते नहीं थे, लेकिन उनके भी 2 लड़के थे. अब में गया तो सबने खाना खाया, फिर सोने का इंतजाम हुआ तो वहाँ 3 कमरे थे, एक में नाना नानी रहते थे और बीच वाले रूम में डबल बेड पर में, मौसी और फिर उनकी लड़की और लास्ट वाले रूम में मामा मामी और उनके बच्चे रहते थे.

फिर कुछ देर मैंने और मौसी ने बात की और फिर वो सो गई, लेकिन अब मुझे कहाँ नींद आने वाली थी, उन्होंने लाल कलर की साड़ी पहनी थी और मेरी तरफ अपनी गांड करके सो रही थी. फिर में धीरे से उनके पास गया और उनकी कमर को पकड़ा और ऐसे ही सोया रहा. में बचपन से ही ऐसा करता हूँ तो अगर मौसी जाग भी जाती तो कुछ नहीं कहती है.

अब में ऐसे ही कुछ देर पड़ा रहा और तब मौसी पलटी तो उनके बूब्स एकदम से मेरे मुँह के ऊपर आ गये. अब मुझे कुछ समझ में नहीं आया कि क्या हुआ? लेकिन ये में जानता था कि मौसी बेफ़िक्र होकर सोती है, अब मुझे बहुत ही सॉफ्ट-सॉफ्ट महसूस हो रहा था और ये पहली बार था. फिर मैंने हल्की सी अपनी जीभ बाहर निकाली और ब्लाउज के ऊपर से ही चाटने लगा, लेकिन मुझे डर भी बहुत लग रहा था कि अब मेरी आगे कुछ करने की हिम्मत नहीं हुई.

मौसी घर में सबसे पहले 5 बजे उठती है तो मैंने फोन में 4:30 बजे का अलार्म लगाया और हेडफोन लगाकर सो गया ताकि अलार्म सिर्फ़ मुझे सुनाई दे. फिर में 4:30 बजे उठा तो मौसी पीठ के बल सो रही थी. फिर में उनके पास आया और उनके हाथ को मेरी पेंट के अंदर डाल दिया और उनके सीधे हाथ को उनके बूब्स पर रख दिया, ताकि उन्हें लगे कि वो नींद में उत्तेजित हो गई थी और अपने बूब्स दबा रही थी और उनके एक हाथ में मेरा लंड पकड़ लिया था.

अब में मौसी के उठने का इंतजार करने लगा और फिर 5 बजे उनकी नींद खुली और उनका अपने हाथ की तरफ जैसे ही ध्यान गया तो उन्होंने तुरंत अपना हाथ बाहर खींचा और उसके साथ में मेरा लंड भी बाहर आ गया. अब में चोरी से मौसी के चेहरे को देख रहा था, अब वो एकदम डरी हुई थी कि क्या हो गया? फिर उन्होंने मेरे लंड को अंदर नहीं किया, शायद उन्हें डर था कि में जाग जाऊंगा और बस वो चादर डालकर चली गई और मैंने भी अपना लंड अंदर नहीं किया और में भी वैसे ही लेटा रहा.

फिर कुछ देर के बाद मामी मुझे उठाने आई तो उन्होंने मुझे 2 बार आवाज़ दी, लेकिन में नहीं उठा तो उन्होंने मेरी चादर खींच दी तो उनकी नज़र मेरे लंड पर पड़ी. फिर उन्होंने कुछ देर तक मेरे लंड को देखा और फिर मेरे लंड को पकड़ा और मेरे लंड के सुपाड़े को अपने अंगूठे से सहलाया और पेंट के अंदर डालकर चली गई. अब में उनके जाते ही उठा और उनके पीछे आने लगा, ताकि उन्हें लगे कि उन्होंने जो किया है, वो मुझे पता है.

फिर उनकी नज़र मुझ पर पड़ी तो उन्होंने कहा कि आप कब उठे? तो मैंने कहा कि जब आप जा रही थी तो आपकी पायल की आवाज़ से उठ गया. फिर वो मुस्कुरा कर चली गई. अब मौसी भी मुझसे नॉर्मल बात कर रही थी और अब में नज़र बचाकर दोनों की चूचीयों को देख रहा था. फिर मौसी नहाकर आई तो में तुरंत बाथरूम में घुस गया ताकि में उनकी पेंटी में मुठ मार सकूँ.

फिर जब में अंदर गया तो उनकी काली ब्रा और पेंटी धुलकर बाल्टी में रखी थी. फिर मैंने दोनों को बाहर निकाला और बाथरूम में ऐसे बिछाया, जैसे मौसी ने पहनी हो और अपने सारे कपड़े उतार कर लेट गया और उनकी ब्रा को मसलने लगा और पेंटी पर लंड रगड़ने लगा. अब मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था कि तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया, अब बाहर मौसी थी और उनकी लड़की ने पेशाब कर दिया था तो वो उसके पैर धुलाने के लिए आई थी.

फिर मैंने अपनी चड्डी पहनी और उनकी ब्रा पेंटी को बाल्टी में डाल दिया, लेकिन ये भूल गया कि मौसी ने उन्हें सारे कपड़ो के नीचे रखा था, लेकिन मैंने उनकी ब्रा पेंटी एकदम ऊपर रख दी थी और ऊपर से मेरी पेंट में भी टेंट बना था. अब में वैसे ही खड़ा था. मैंने छुपाया नहीं तो मौसी ने उसे देखा, लेकिन कुछ नहीं कहा और फिर उनकी नज़र बाल्टी पर पड़ी, शायद वो समझ गई थी कि में क्या कर रहा था? अब वो जाते वक़्त बाल्टी साथ में लेकर चली गई.

अब मुझे बड़ा गुस्सा आया, लेकिन मैंने मुठ नहीं मारी और वैसे ही बाहर आ गया और मामी के सामने पंखे के नीचे सिर्फ़ टावल पहन कर पैर ऊपर करके बैठ गया. अब उन्हें मेरा लंड दिख रहा था, अब वो बार-बार मेरे लंड को देख रही थी. फिर दोपहर में मामा, नाना ऑफिस गये थे और मामी के बच्चे स्कूल गये थे और नानी, मौसी पड़ोस में गई थी, तो घर पर सिर्फ़ में और मौसी थे और एक ही बेड पर सोकर बात कर रहे थे. अब में बात करते वक़्त पेंट के ऊपर से लंड सहला रहा था, लेकिन मामी कुछ कह नहीं रही थी और वो बात करते-करते सो गई थी.

फिर जब मैंने देखा कि वो सो गई है तो में तुरंत उठा और उनके बूब्स पर से साड़ी के पल्लू को हटा दिया. अब मेरे सामने उनके ब्लाउज में क़ैद उनके बूब्स थे, फिर मैंने डरते-डरते उनके ब्लाउज के सारे हुक खोल दिए और अब मामी सिर्फ़ सफ़ेद ब्रा में थी. अब मुझे बहुत डर लग रहा था, लेकिन कंट्रोल भी नहीं हो रहा था.

फिर मैंने उनके दोनों बूब्स पर हाथ रख दिया और धीरे से दबाया तो अब मुझे बड़ा मज़ा आया और मेरी कुछ हिम्मत भी बढ़ गई. फिर मैंने मामी की ब्रा के अंदर हाथ डालकर उनकी एक चूची को बाहर निकाला और उसे चूमा कि तभी बेल बजी, अब मामा आवाज़ लगा रहे थे. दोस्तों इसके आगे में कुछ नहीं कर पाया.