नाचो चुदाई मचा के

antarvasna, desi kahani

मेरा नाम अनुराग है और मैं अभी 22 वर्ष का एक नौजवान युवक हूं। मैं अभी कॉलेज ही कर रहा हूं। मेरे पिताजी काफी अच्छे व्यक्ति हैं। वह सब लोगों की मदद करते रहते हैं। उन्होंने अपनी बहुत इज्जत बना रखी है जिसकी वजह से सब लोग मुझे भी बहुत ही इज्जत से देखते हैं। सब लोग मुझे पूछा करते हैं बेटा तुम क्या कर रहे हो? मैं उन्हें बताता हूं कि अभी तो कॉलेज ही कर रहा हूं। कॉलेज खत्म होने के बाद कोई अच्छी नौकरी कर लूंगा। मेरी मां भी काफी शांत स्वभाव की हैं और एक अच्छी महिला हैं। उन्होंने कभी भी मेरे पिताजी से झगड़ा नहीं किया और ना ही मेरे पिताजी का कभी उनके साथ कोई भी झगड़ा हुआ है। मैंने आज तक कभी भी उन दोनों को झगड़ते हुए नहीं देखा। मेरे पिताजी घर में इकलौते हैं और उनकी एक बहन है। उनका नाम सविता है। वह बीच-बीच में हमारे घर आती रहती हैं। उनकी अपने पति से बिल्कुल भी नहीं बनती  और वह ज्यादातर हमारे घर पर ही रहने आ जाती हैं। उनका बच्चा नहीं हो रहा है, इस वजह से उनके पति और उनके बीच बिल्कुल नहीं बनती है। मेरे पिताजी उन दोनों को बहुत समझाते हैं, लेकिन वह बिल्कुल भी समझते नहीं हैं और दोबारा से झगड़ा करना शुरू कर देते हैं। ऐसे ही काफी समय से उन लोगों के बीच में तनाव बना हुआ है। मेरे पिताजी ने बहुत कोशिश की, की वह दोनों समझ जाएं लेकिन अब बात सर से ऊपर जा चुकी थी।

इस समय मेरी बुआ हमेशा के लिए हमारे घर पर रहने के लिए आ चुकी थी। मेरे पिताजी ने उस का कारण पूछा तो वह कहने लगी कि हमारा घर नीलाम होने वाला है। हमने जो बैंक से लोन लिया था वह चुकता नहीं हो पाया इस वजह से वह नीलामी की कगार पर है और अब मेरे पति से भी मेरी बनती नहीं है। इस वजह से मैं अब यहीं पर रहूंगी। यह बात मेरे पिताजी को थोड़ा बुरी लगी। उन्हें लग रहा था कि समाज में जो उनकी इज्जत है, सब लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे। उन्होंने यही सोचते हुए मेरे बुआ के पति से बात करने की कोशिश की और उन्होंने उन्हें भी घर पर बुलाया। तब वह भी कहने लगे कि मैं तो यही चाहता हूं कि हम लोग साथ में रहें और हमारे बीच में कभी भी किसी प्रकार का झगड़ा ना हो लेकिन अब बात तो ज्यादा ही पड़ चुकी है। मेरे घर की नीलामी हो गई है और अब मेरे पास भी अपना जीवन यापन करने के लिए इतने पैसे बचे नहीं हैं। उसके बावजूद भी मैं सविता से हमेशा कहता रहता हूं कि हम लोग कुछ ना कुछ कर लेंगे, लेकिन यह समझती ही नहीं है और हर बात में मुझसे सिर्फ झगड़ा करती रहती है। अब मैं इसके झगड़ों से परेशान हो चुका हूं और इस समय मैं अकेला रहना चाहता हूं। यदि सविता को लगता है तो वह हमारे साथ आ सकती है। लेकिन मेरी बुआ ने साफ मना कर दिया और कहने लगी अब मैं सिर्फ अपने भैया के घर पर ही रहूँगी और तुम्हारे घर पर तो बिल्कुल भी नहीं रहने वाली। उन्होंने उनके सामने एक शर्त रख दी जब तुम कोई नया घर ले लोगे, तो तब मैं तुम्हारे साथ रहूंगी। नहीं तो मुझे बिल्कुल भी तुम्हारे साथ रहना नहीं है। यह कहते हुए मेरे बुआ के पति हमारे घर से गुस्से में ही चले गए। मेरे पिताजी भी बहुत बेबस थे। वह कुछ भी नहीं कर सकते थे। अब उनके पास कोई भी रास्ता नहीं था सिवाय उन्हें अपने घर पर रखने का। अब  उन्होंने मेरी बुआ को अपने घर पर ही रख लिया और वह कुछ दिनों तक तो हमारे घर पर अच्छे से रह रही थी। किंतु अब उन्होंने हमारे घर का माहौल भी खराब करना शुरू कर दिया।

अब वह मेरी मां से भी झगड़ा करने लग जाती है। उनकी उम्र कुछ ज्यादा नहीं है 33 वर्ष की उनकी उम्र है। मेरी मां से बहुत ज्यादा झगड़ा करती हैं और मेरी मां ने इस बारे में मेरे पिताजी से बात की। मेरे पिताजी उसे समझाते। उसके बावजूद भी मेरी बुआ दुबारा से मेरी मां से झगड़ा करने लग जाती। मैं इन बातों से बहुत परेशान हो चुका था। क्योंकि वह मुझे भी ताने मारती रहती थी और हर बात में मुझे नीचा दिखाने की कोशिश करती रहती थी। मैं उन्हें कई बार यह बात भी कहता था कि आप इस तरीके से मेरे साथ क्यों बर्ताव करते हैं लेकिन उनका स्वभाव बिल्कुल भी बदलने वाला नहीं था। मैं समझ चुका था कि अब यह मानने वाली नहीं हैं। सिर्फ झगड़ा ही करती रहेंगी। मेरे पिताजी ने एक दिन हम हम सबको साथ में बैठाया और उन्होंने मेरी मां से भी कहा कि तुम सविता को कुछ भी मत कहा करो। मेरी मां कहने लगी कि मैंने आज तक कभी उसे कुछ भी नहीं कहा है। मैं तो उसे ना किसी काम के लिए बोलती हूं और ना ही सविता से झगड़ा करती हूं। मेरे पिताजी ने उस दिन काफी कड़क आवाज में कहा कि आइंदा से घर में यह सब नहीं होना चाहिए। इससे घर का माहौल खराब हो रहा है और सब लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे कि मैं अपने घर को भी नहीं संभाल सकता। लोग मेरी काफी इज्जत करते हैं, मैं नहीं चाहता कि वह सब लोग मुझे बीच बाजार में कुछ अनाप-शनाप कहे। इसलिए तुम थोड़ा झगड़ों को कम कर दो और आइंदा से मुझे यह सब शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। यह कहते हुए वह अपने कमरे में चले गए। अब मेरी बुआ का नजरिया हमारे प्रति थोड़ा बदलने लगा था। वह मेरी मां की काम में हेल्प कर दिया करते थे और मुझे भी कभी वह पढ़ा दिया करते थे। हमें भी अब सब अच्छा लगने लगा और हम सब लोग अब अच्छे से रहने लगे।

ऐसे ही एक दिन मेरी बुआ मुझे पढ़ा रही थी तभी मैं बाथरुम में चला गया। मैं जब बाथरूम में गया तो वह मुझे चुपके से देख रही थी और मैंने उसे देख लिया। मैंने बाहर आकर उसे कहने लगा तुम अंदर क्या देख रही थी वह कहने लगी कि मैं तुम्हारा लंड देख रही थी। मैंने उसे वही बिस्तर पर लेटया और कहने लगा तुमने साला हमारे घर की जिंदगी को खराब कर दिया है। आज मैं तेरी चूत का भोसड़ा बनाता हूं। मैंने उसके सारे कपड़ों को फाड़ दिया और जैसे ही मैंने उसके बड़े बड़े स्तनों को देखा तो मेरा मन ललचाने लगा। मैंने तुरंत ही उन्हें अपने मुंह में समा लिया और थोड़ी देर बाद उसके मुंह में अपना लंड डाल दिया। जब मैंने अपने लंड को उसके मुंह में डाला तो वह बड़ी तेजी से मेरे लंड को अपने मुंह में ले रही थी और बड़ी तेज तेज सकिंग कर रही थी। मैंने भी अब उसके दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए उसके चूत मे अपने लंड को डाल दिया। जैसे ही मैंने उसकी चूत मे डाला तो वह बहुत ज्यादा गर्म हो रखी थी और अब मैं उसे ऐसे ही धक्के मारने लगा। उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर दोबारा चूसना शुरु किया उसके स्तनों से दूध निकाल रहा था वह दूध भी मैंने पी लिया और वह मुझे कहने लगी। तुम तो बड़े अच्छे से कर रहे हो लगता है तुम जवान हो गए हो। मैंने उसकी चूत से अपने लंड को बाहर निकाला और उसके मुंह के अंदर दोबारा से डाल दिया। उसने उसको बहुत अच्छे से चूसना शुरू किया।

जब वह मेरे लंड को चूसती तो मुझे बहुत ही शांति मिल रही थी। मैंने दोबारा से उसके पैरों को अपने कंधे पर रखते हुए उसकी योनि में अपना लंड डाल दिया। मैंने जैसे ही अपने लंड को उसकी योनि में दोबारा डालो तो वह चिल्लाने लगी। अब जब वह चिल्लाने लगी तो मैंने भी बड़ी तेजी से झटके मारने शुरू कर दिए। मैंने उसको आधे घंटे तक इतने बुरी तरीके से चोदा कि उसकी चूत छिल गई थी और मेरा लंड भी छिल हुआ था लेकिन मेरा माल अभी नहीं गिर रहा था। मैंने उसके दोनों पैरों को कसकर पकड़ लिया जिससे उसकी चूत और ज्यादा टाइट हो गई। मै बड़ी तीव्र गति से उसे चोदने लगा ऐसा करते हुए मुझे थोड़ी देर बाद ऐसा प्रतीत हुआ कि मेरा वीर्य गिरने वाला है। जैसे ही मेरा माल गिरने वाला था तो मैंने एक बड़ी तेजी से झटका मारा और वह उसकी योनि में बड़ी तीव्र गति से चला गया। जैसे ही मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो वह उसकी चूत से बाहर की तरफ टपक रहा था। मैं उसे देख कर बहुत खुश हुआ। मैंने उसे अपने लंड को दोबारा से चूसवाना शुरू किया  वह मेरे लंड को ऐसे ही चूसती रही और मेरा वीर्य उसके मुंह के अंदर गिरने लगा। अब मेरी बुआ मुझे कुछ भी नहीं बोलती है।