मुमताज ने बुझवाई मेरी प्यास-2

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हेलो दोस्तों, मैं फिर से हाजिर हूँ अपनी चुदाई की कहानी लेकर की कैसे मेरी दोस्तने मेरी चूत की प्यास बुझवाने में मेरी मदद की।  चलिए अब सीधा कहानी पर आती होऊं। ललित मेरी चूत को चाटते हुए चूत के दाने को भी चूसने लगा तो मैं और जोर से आआ हाआह ऊ उन्न् आहा हाह ऊउ म्म्म ऊनंह अआ हा आअह्ह्हा अ अहहहः अहहा आअ ऊउन्न ऊउ म्म्ह आआ नाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहा हाहा ऊनंह ऊउम्ह आहा हहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआ हाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहह करते हुए मचलने लगी।

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था।  मैं  तुरंत बोली – सुनो, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा, सीधा अपना लंड मेरी चूत में डालो और चोदना शुरू करो। वो मान गया। उसने अपने लंड को मेरी चूत पर टिकाया और एक ही झटके में अंदर कर दिया। मुझे दर्द हो रहा था लेकिन मजा भी आ रहा था। मैं आआ हाआह ऊउन्न् आहा हाह ऊउम्म्म ऊनंह अआ हा आअ ह्ह्हा अ अहहहः अह हाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआ नाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहा हाहा ऊनंह ऊउम्ह आ हाहहा ऊउन्न्ह ऊउ  म्म्ह अहहहः आआ हाआह ऊउन्न् आहा हाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहा आअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआ नाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहह करने लगी।  फिर उसने अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ा दिया और जोर जोर से चोदने लगा।

मेरी चुत से माल निकल गया और रास की धार बह निकली।  वो अभी भी थका नहीं था।  मैं बोली – अब छोड़ भी दो।  वो बोला – क्यों, अभी तो मेरा निकला भी नहीं।  मैंने मुमताज़ को आवाज़ दी।  वो आयी तो मैंने उठ  खोला।  ललित अभी भी नंगा ही लेता था।  मुमताज़  मोटा लंड देखा तो उसकी मुंह में पानी आ गया। मैं बोली – तेरे मुंह में पानी आ रहा है तो तू भी चुदवा ले।  वो मान गयी।  उसने सीधा अपने कपडे उतारे और ललित के लड पर जाकर बैठ गयी।  ललित ने उसकी कमर को  छूट को चोदने लगा।  मुमताज़ भी उछाल उछाल आकर मजे लेने लगी। ललित ने धक्के तेज कर दिए तो मुमताज़ जोर जोर से मुंह से आ आहा आह ऊउन्न् आ हाहा ह ऊउ म्म्म ऊनंह अआ हा आअ ह्ह्हाअ अह हहः अह हाआअ ऊ उन्न ऊउ म्म्ह आआ नाहा ऊउ न्न्ह ऊम्म्ह आहा हाहा ऊनंह ऊ उम्ह आहा हहा ऊउन्न्ह ऊ उम्म्ह अहहहः आआ हाआह ऊउन्न् आहा हाह ऊउ म्म्म ऊनंह अआ हा आअ ह्ह्हाअ अ हहहः अह हाआअ ऊ उन्न ऊ उम्म्ह आआ नाहा ऊ उन्न्ह ऊम्म्ह आहा हाहा ऊनंह ऊ उम्ह आहा हहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहह की सिस्कारिया निकलने लगी।

अब ललित ने मुमताज़ को घोड़ी बनने के लिए कहा।  मुमताज तुरंत बन गयी।  उसने मुमताज़ की छूट में एक ही झटके में लैंड डाला और चोदने लगा तो वो आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहह करके छुड़वाने लगी।  मैं ये सब देख रही थी।  ये देख कर मेरा मन फिर से चुदाई के लिए करने लगा।

मैं इंतजार करने लगी की कब मुमताज़ थक जाये क्यूंकि मुझे पता था की ललित तो इतनी  जल्दी नहीं थकेगा।  मुमताज़ छुड़वाए जा रही थी और आ आ हाआ ह ऊ उन्न् आहा हाह ऊउ म्म्म ऊ नंह अ आहा आअ ह्ह्हाअ अ ह हहः अहहा आअ ऊ उन्न ऊ उम्म्ह आआ नाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आ हाहाहा ऊनंह ऊ उम्ह आहा हहा ऊउ न्न्ह ऊउ म्म्ह अह हहः आआ हाआह ऊउन्न् आहा हाह ऊउ म्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहह किये जा रही थी। काफी इंतजार के बाद आखिर वो थक ही गयी।

अब मैंने तुरंत अपनी टाँगें फैलाई और ललित को चोदने को कहा।  उसने लंड घुसाया और चोदने लगा।  मेरी चूत लगभग फट चुकी थी।  मैं जोर जोर से तो वो आआ हा आ ऊ ऊन्न्ह ऊ ऊम्म्ह ऊ उम्म ऊउ न्न्ह अह हाआअ हा अ   अह ह हा  ह ह हा आ अ  अहह हाआ   ऊउ न्न्ह ऊ उम्म्ह ऊ नंह  ऊ उम्म्म्ह  अ ह हहाआआ अ आ हा आआ उ न्ह  ऊ उन्न्ह ऊउम्म्ह  आहा आआआहा ऊउ म्म्ह ऊउ न्न्ह आअहा आअ कर के चिल्लनि लगी। अब मैं फिर से झड़ने वाली थी और इस बार ललित भी झड़ने वाला था।  मेरा मन तो उसका माल चूत में  लेकिन बच्चा होने के दर से मैंने उससे मेरे पेट पर निकालने को बोला। इधर मेरी  चूत से मेरा माल निकल रहा उधर ललित मेरे पेट पर अपना माल निकाल रहा था। फिर हम दोनों लेट गए।

तो दोस्तों, ये थी मेरी कहानी।  मैं उम्मीद करती हूँ कि आप सभी को मेरी कहानी ये कहानी जरुर पसंद आई होगी।