मम्मी और आंटी के साथ मेरी चुदाई

हैल्लो दोस्तों, कैसे हो आप? आप लोगों ने मेरी पिछली कहानी को बहुत ज्यादा पसंद किया, क्योंकि मुझे उसके लिए आप लोगों के बहुत सारे मैल मिले. मुझे आपका इतना प्यार अच्छा लगा और मेरी कहानी को इतना पसंद करने के लिए आप सभी लोगों को दिल से बहुत बहुत धन्यवाद. दोस्तों अब में आप लोगों के सामने अपनी दूसरी कहानी को पेश करने जा रही हूँ और में उम्मीद करती हूँ कि यह भी आप लोगों को जरुर अच्छी लगेगी, ऐसी में आशा करती हूँ.

दोस्तों मुझे शकुंतला आंटी और मेरी मम्मी के साथ चुदाई करने में बहुत मज़ा आता है, जिस दिन चुदाई ना हो उस दिन मुझे बिल्कुल भी चैन नहीं आता में पागल सी हो जाती हूँ. दोस्तों एक दिन हम तीनों रात को करीब 9 बजे कमरे में गये और हम सभी तुरंत अपने अपने पूरे कपड़े उतारकर नंगी हो गयी और फिर हम तीनों एक दूसरे को किसी भूखे शेर की तरह चूमने चाटने लगी, में अपनी सेक्सी आंटी को चूम रही थी और मेरी मम्मी मेरी गांड और चूत को चाट रही थी.

तभी आंटी रसोईघर में चली गई मैंने देखा कि जब वो वापस आई तब उनके हाथ में मक्खन था. उन्होंने मेरी चूत पर वो मक्खन लगा दिया और उसके बाद वो मेरी चूत को ज़ोर से चाटने लगी और में आंटी की चूत और कभी गांड को चाटने लगी. फिर मेरी मम्मी यह सब देखकर अपनी ही चूत में रबर के लंड को डालकर अपनी चूत को चोदने लगी और उनके मुहं से बहुत अजीब सी आवाज़ निकल रही थी वो अब जोश में आकर उफफफ्फ़ माँ औूऊऊऊऊउ आह्ह्हह्ह करने लगी और वो बहुत ज़ोर से उस लंड को अपनी चूत के अंदर बाहर कर रही थी आख़िर में वो कुछ देर बाद ज़ोर से झड़ गई और उसके बाद उन्होंने मुझसे कहा कि मेरी प्यारी बेटी तू मेरी चूत को चूस, आ जा जल्दी से इसको चाट ले, पी ले मेरा पूरा रस.

दोस्तों सच पूछो तो में भी यही करना चाहती थी, इसलिए में तुरंत उनके यह सब कहते ही मैंने अपनी मम्मी के पास जाकर उनके दोनों पैरों को फैला दिया और में उनकी चूत का रस चाटने लगी. मुझे उसकी चूत में से निकलता पानी चूसना बहुत अच्छा लग रहा था, क्योंकि में आज पहली बार उनका वो पानी पी रही थी.

तभी आंटी ने पीछे से आकर मेरी चूत में वो रबर का लंड डाल दिया और मेरे मुहं से आह्ह्ह उूउईईईई माँ की आवाज़ निकल गयी. फिर शकुंतला आंटी अब ज़ोर से उस लंड को मेरी चूत के अंदर डाल रही थी और में उस दर्द से करहा उठी मुझे बहुत दर्द हो रहा था, लेकिन शकुंतला आंटी मेरे दर्द की परवाह किए बिना उस लंड को और ज़ोर से मेरी चूत के अंदर बाहर कर रही थी और अब मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था और मेरे साथ साथ आंटी भी पूरे मज़े ले रही थी, वो जोश में आकर अपनी चूत में अपने ही हाथ की उंगलियां डालकर लगातार अंदर बाहर कर रही थी और कुछ देर बाद आंटी ने कहा आह्ह्ह्हह माँ उफफफफ्फ़ में अब झड़ने वाली हूँ.

मैंने उनसे कहा कि आंटी आप मेरे मुहं में झड़ना और आप आपका रस भी मुझे पिला देना. फिर उसके बाद में आंटी की चूत पर अपना मुहं लगाकर अपनी जीभ को अंदर डालने लगी और कुछ ही देर के बाद वो मेरे मुहं में ज़ोर से झड़ गयी. मैंने उनकी चूत का एक भी कतरा नीचे नहीं गिरने नहीं दिया और में आंटी की चूत को ज़ोर से चाटने लगी उन्होंने मुझे अपना पूरा रस उसके साथ मूत भी पिलाया और मैंने उसका कुछ मूत अपने मुहं में वैसा ही रखा और में उठकर खड़ी हो गयी और अब में आंटी को किस करने लगी तो मैंने वो मूत आंटी के मुहं में भी डाल दिया, क्योंकि वो भी बहुत प्यासी थी इसलिए वो उसको पी गयी. अब हमारे साथ मम्मी भी आ गई.

अब शकुंतला आंटी मेरी चूत को चाट रही थी और में मम्मी की चूत को चाट रही थी. आंटी कभी कभी मेरे बूब्स भी दबा देती तो मुझे और भी अच्छा लगता. अब मम्मी ज़ोर से बोल रही थी उफ्फ्फ्फ़ हाँ और ज़ोर से चूस अपनी माँ की चूत और ज़ोर से चूस जहाँ से तू बाहर आई थी खा जा आज तू उस जगह को, इसने मुझे बड़ा दुःख परेशान किया है. फिर में अपनी मम्मी की चूत को और ज़ोर से चूस रही थी मम्मी भी अपनी चूत को ज़ोर से ऊपर नीचे कर रही थी उसके साथ साथ आंटी भी मेरी चूत को ज़ोर से पूरे जोश में आकर चूस रही थी.

तभी अचानक से आंटी उठी और अब वो मेरे छोटे छोटे बूब्स को ज़ोर से मसलने लगी जिसकी वजह से में एकदम मचल उठी क्योंकि आज पहली बार कोई औरत मेरे बूब्स को दबा रही थी उनका रस निचोड़ रही थी और वो लगातार दबाती जा रही थी उस दर्द की वजह से में ज़ोर से चिल्ला रही थी उफ्फ्फ्फ़ हाँ और ज़ोर से दबाओ शकुंतला आंटी हाँ मुझे बहुत मज़ा आ रहा है आह्हह थोड़ा ज्यादा ज़ोर लगाओ.

दोस्तों वैसे मैंने भी आंटी के बड़े बड़े बूब्स को पहले भी कई बार दबाया था इसलिए अब उनको बताने के लिए दोबारा से उनके बूब्स को हाथ में लेकर मैंने दबाना शुरू किया. दोस्तों आंटी के बूब्स क्या मस्त थे? बड़े आकार के मुलायम और उनकी गहरे काले रंग की निप्पल बहुत अच्छी लगती थी.

फिर आंटी कभी मेरे निप्पल को अपने मुहं में लेकर चूसती तब वो मेरे निप्पल को अपने दांत से काटती भी थी और उस दर्द की वजह से में चिल्ला उठती. वैसे आंटी मेरे बूब्स को आज पहली बार दबा रही थी और किसी औरत से अपने बूब्स को दबवाना यह मेरा पहला अनुभव था और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, आंटी पूरी मस्ती जोश में आकर और ज़ोर से दबाती वो मुझे बहुत अच्छा लगता और में उफफफ्फ़ माँ मर गई कहने लगी. दोस्तों यह सब हमारे बीच बहुत देर तक चलता रहा जिसकी वजह से हम तीनों अब थक गयी थी.

फिर हम तीनों ने अपने कपड़े पहने और उसके बाद हमने खाना खाया और उसके बाद हम सभी बाहर घूमने चले गये और रात को वापस घर पर आकर हमने एक बार फिर से खाना खाया और उसके बाद थोड़ी देर तक हमने टीवी देखी और फिर आंटी मम्मी मेरे पास बैठकर मेरे बूब्स को दबाने लगी, जिसकी वजह से में एक बार फिर से मस्ती में आने लगी.

उस समय शकुंतला आंटी तो मुझे पूरे जोश में दिख रही थी और आंटी ने जल्दी से अपने खुद के पूरे कपड़े उतारे और उन्होंने मेरे भी पूरे कपड़े उतार दिए और उन्होंने मुझे पूरा नंगा कर दिया. अब आंटी और मम्मी दोनों ने अपनी अपनी चूत पर वो रबर के लंड बांध लिए और मम्मी ने एक जोरदार धक्का देकर मेरी चूत में उनका लंड डाल दिया उस दर्द की वजह से में करहा उठी मेरे मुहं से आह्ह्ह्हह उफफफ्फ़ उूईईईईइ निकल गई. फिर मम्मी ज़ोर से बोल रही थी ले पूरा अंदर ले, बहुत आग है ना तेरी चूत में. आज में तेरी पूरी आग को शांत कर दूंगी, तुझे बहुत लंड लेने का शौक है ना और आज में वो सब पूरा कर दूंगी.

अब शकुंतला आंटी ने मेरे मुहं में अपना लंड डाल दिया और वो अंदर बाहर कर रही थी. दोस्तों अब मेरे दोनों छेद में लंड थे और मुहं में लंड होने की वजह से मेरी आवाज भी बाहर नहीं आ रही थी और अब हम तीनों पूरी मस्ती जोश में थे और मम्मी भी मुझे पूरी स्पीड से धक्के देकर चोद रही थी और वो मुझसे अब बहुत गंदी गंदी गालियाँ भी बक रही थी. में भी उनको बेटी चोद बोल रही थी और मैंने उनसे मुझे ज्यादा ज़ोर से धक्के देकर चोदने के लिए कह रही थी.

अब आंटी भी मेरे मुहं में अपने लंड को बहुत ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे कर रही थी. में उस बीच कितनी बार झड़ी यह बात मुझे ठीक तरह से मालूम भी नहीं था, लेकिन मेरी चूत अंदर बाहर से पूरी गीली हो चुकी थी. फिर मम्मी ने अपने लंड को मेरी चूत से बाहर निकाला तो आंटी की जीभ ने मेरी चूत पर अपना कब्जा कर लिया और वो मेरी चूत का बाहर बहता हुआ पूरा पानी चाटने लगी चूसने लगी और में अपनी मम्मी की चूत का पानी पी रही थी मम्मी ने मेरे मुहं में अपना गरम मूत छोड़ दिया और उसको में बड़े प्यार से पी गयी.

अब आंटी ने मेरी गांड चाटना शुरू किया और वो मुझसे कह रही थी कि निशा तेरी गांड है या मक्खन? वो मेरी गांड के छेद में अपनी उंगली को डालकर उसे अंदर बाहर कर रही थी और अपनी जीभ से चाट भी रही थी, मुझे यह सब बहुत अच्छा लग रहा था. अब आंटी ने एकदम से मेरी गांड में अपना लंड डालने की कोशिश की तो में उस दर्द की वजह से ज़ोर से चिल्ला उठी नहीं आईईइ में मर गई कुतिया साली हरामी शकुंतला आंटी, मेरे साथ ऐसा मत करो.

फिर वो और भी ज्यादा कोशिश करने लगी वो अपना आधा लंड मेरी गांड में डालने में कामयाब हो गयी और फिर वो मेरी मम्मी को कहने लगी कि तुम इसकी चूत में अपना लंड डालो और इसको आज ज़ोर ज़ोर से चोदो इतना कहकर आंटी ने अपनी स्पीड को बढ़ा दिया था.

दोस्तों सच कहूँ तो अब वो मेरी गांड को फाड़ रही थी और थोड़ी देर बाद मेरा दर्द कुछ कम हुआ और मुझे उनके साथ सेक्स में मज़ा आ रहा था, मम्मी भी अब पूरी स्पीड से मेरी चूत को चोद रही थी और मेरे लिए यह बहुत अच्छा समय था कि में एक साथ आगे से और पीछे से चुद रही थी. मुझे दर्द तो हो रहा था, लेकिन सुख उससे ज़्यादा मिल रहा था में मस्ती में उऊफफफफफ आह्ह्ह्हह हाँ थोड़ा और ज़ोर से चिल्ला रही थी, वो दोनों तो मेरी जमकर चुदाई कर रही थी और में भी उस समय पूरी तरह मस्ती में थी.

अब आंटी रुक गयी थी और आंटी ने अपना लंड मेरी गांड से बाहर निकाल लिया और वो खुद उस लंड को अपने मुहं में लेकर बड़े प्यार से चूस रही थी उनको देखकर मेरी मम्मी ने भी ठीक वैसा ही किया वो दोनों अपने अपने लंड को अपने मुहं में लेकर चूस रही थी. दोस्तों सच पूछो में तो अब बहुत थक चुकी थी, लेकिन तभी आंटी की रसभरी गीली चूत को देखकर मेरी पूरी थकान दूर भाग गयी और में आंटी की चूत को चूसने लगी जिसकी वजह से वो कामवासना से सिहर उठी और वो मेरा सर अपनी चूत पर ज़ोर से दबाने लगी उूह्ह्ह्हह्ह आह्ह्ह्हह्ह हाँ ज़ोर से तेज़ी से चूसो निशा, तुम बिल्कुल भी मत रूको, आज तुम मेरा पूरा पानी बाहर निकाल दो आईईईईई निशा तुम बहुत अच्छी हो, तुम हर चूत को बहुत प्यार से चूसती हो, आज तक मेरी चूत को किसी ने भी इस तरह से नहीं चूसा तुम्हारी तरह मुझे ऐसा मज़ा नहीं दिया हाँ और जाने दो अंदर वाह मज़ा आ गया, तुम बहुत समझदार लड़की हो.

फिर में भी अपनी पूरी जीभ को उनकी चूत के अंदर तक गहराई में डालकर चूस रही थी. मुझे उससे पहले मालूम नहीं था कि में भी इतनी अच्छी तरह से किसी की चूत को चूस सकती हूँ जिसकी वजह से कोई मेरी इतनी तारीफ भी कर सकता है? और अब मम्मी मेरी गांड को चाट रही थी.

मम्मी ने मेरी गांड में मक्खन भी डाल दिया था और कुछ मक्खन उन्होंने आंटी को भी दे दिया था तो आंटी ने उसको अपनी चूत पर लगा दिया और मुझसे दोबारा अपनी चूत को चाटने चूसने के लिए कहा. में अब मस्ती में आकर सिहर उठी मैंने कहा कि शकुंतला आंटी तुम्हारी चूत भी क्या गजब की है? वाह मुझे तो मज़ा आ गया उहह्ह्ह्हह्ह और मैंने आंटी से कहा कि आंटी अब तुम दोनों ने मुझे जी भरकर चोद लिया, अब मुझे आप दोनों को चोदना है और इतना कहने के बाद मैंने उनके ही लंड से उन दोनों को बारी बारी से एक एक करके बड़े मज़े लेकर चोदा. उनकी चुदाई करने में मुझे बहुत मज़ा आया और में वो सब किसी भी शब्द में लिखकर नहीं बता सकती और उस दिन हम तीनों ने एक दूसरे की चुदाई करके बड़े मज़े लिए.