मुझे पति के रूप मे स्वीकार कर लिया

Antarvasna, desi kahani: मैं अपने ऑफिस में बैठा हुआ था तो मेरा दोस्त सुरेश मेरे पास आकर मुझे कहने लगा कि रोहन काफी समय हो गया है हम लोगों ने कहीं घूमने का प्लान भी नहीं बनाया है। सुरेश और मैं एक साथ कॉलेज में पढ़ा करते थे और अब हम दोनों साथ में ही जॉब कर रहे हैं। मैंने सुरेश को कहा कि क्यों ना हम लोग अपने कॉलेज में पढ़ने वाले और लोगों से भी इस बारे में बात करें और एक गेट टू गेदर पार्टी रखे। सुरेश मुझे कहने लगा कि हां तुम यह तो बिल्कुल ठीक कह रहे हो अब मैंने ही यह जिम्मेदारी संभाली कि मैं सब लोगों को पार्टी के लिए मनाऊँ। कॉलेज खत्म हो जाने के बाद जैसे सब लोग अपने कामों में इतना व्यस्त हो गए थे कि हम लोगों का मिलना भी नहीं हो पाया था। मैं और सुरेश चाहते थे कि हम लोग गेट टुगेदर पार्टी करें और फिर मैंने अपने क्लास में पढ़ने वाले दोस्तो से कहा कि हम लोग एक गेट टूगेदर पार्टी करवाना चाहते हैं।

सब लोग इसके लिए तैयार हो चुके थे सुरेश और मैंने इसकी पूरी व्यवस्था की हम लोगों ने गेट टुगेदर पार्टी पूरी तरीके से मैनेज की और जब उस दौरान सब लोग मिले तो सब बहुत ही खुश थे। काफी सालों बाद हम सब लोग एक दूसरे को मिल रहे थे कॉलेज के करीब 5 साल बाद हम लोगों की एक साथ मुलाकात हुई थी सब अपने कामों में इतना व्यस्त हो चुके थे कि एक दूसरे से मिलने तक का समय नहीं था लेकिन पार्टी के लिए सब लोगों ने समय निकाला और यह बहुत ही बड़ी बात थी। मैंने जब बबीता से उस दिन बात की तो बबीता मुझे कहने लगी कि रोहन इतने समय बाद तुमसे मिलकर अच्छा लग रहा है। बबीता से मेरी मुलाकात काफी टाइम बाद हो रही थी बबीता और मेरे बीच कॉलेज में काफी अच्छी दोस्ती थी लेकिन कॉलेज खत्म हो जाने की वजह से हम दोनों का मिलना ही नहीं हो पाया। मैंने बबीता से पूछा कि बबीता आजकल तुम क्या कर रही हो तो उसने मुझे बताया कि वह अपना ही एक बुटीक चला रही है। मैंने बबीता को कहा कि चलो यह तो बड़ी अच्छी बात है कि तुमने अपना काम शुरू कर लिया है।

बबीता मुझे कहने लगी कि यह सब पापा और मम्मी की वजह से हुआ है उन्होंने ही मुझे काफी सपोर्ट किया, मैंने जॉब छोड़ दी थी तो उसके बाद मैंने अपना बुटीक खोल लिया मेरा बुटीक काफी अच्छा चल रहा है और मैं अपने काम से बहुत खुश हूं। मैं और बबीता एक दूसरे से बात कर रहे थे तो सुरेश भी हमारे पास आया और कहने लगा कि रोहन पार्टी तो अच्छे से हो चुकी है और काफी समय भी हो चुका है मुझे लगता है कि अब हम लोगों को चलना चाहिए। मैंने सुरेश को कहा हां तुम ठीक कह रहे हो मैंने बबीता को पूछा कि तुम कैसे घर जाओगी तो बबीता कहने लगी कि मैं टैक्सी ले लूंगी। मैंने बबीता को कहा कि कोई बात नहीं मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूं और मैंने उस दिन बबीता को उसके घर तक छोड़ दिया बबीता मुझे कहने लगी कि रोहन हम लोग अब मुलाकात करते रहेंगे। उस दिन मुझे बबीता ने अपना नंबर दिया उसके बाद मैं बबीता से बातें करने लगा हम लोगों की बातें अब कभी कबार हो जाया करती थी लेकिन मैं अपने ऑफिस के चलते कुछ ज्यादा ही बिजी था इसलिए मैं बबीता से ज्यादा बात नहीं किया कर पाता था। एक दिन बबीता ने मुझे फोन कर के कहा कि उसकी इंगेजमेंट हो चुकी है मैंने बबीता से कहा कि लगता है अब तुम्हें मिलना ही पड़ेगा। उस दिन मैं बबीता को मिलने के लिए चला गया जब मैं बबीता को मिलने के लिए गया तो बबीता अपनी इंगेजमेंट से बहुत खुश थी। वह मुझे कहने लगी कि मैं जिस लड़के से प्यार करती थी उसी से मेरी सगाई हो गई है मैं बहुत ही ज्यादा खुश हूं। मैंने बबीता को कहा कि लेकिन तुमने मुझे अपने रिलेशन के बारे में तो कुछ भी नहीं बताया था तो बबीता मुझे कहने लगी कि अब मैं तुम्हें अपने रिलेशन के बारे में क्या बताती। मैंने बबीता को कहा कि लेकिन फिर भी तुम्हे अपने रिलेशन के बारे में मुझे बताना तो चाहिए था। बबीता कहने लगी अब तुम तो जानते ही हो की मैं मनोज को बहुत प्यार करती हूं और मैंने तुम्हें मनोज के बारे में तो बता ही दिया था हम लोगों की मुलाकात हमारे ऑफिस के दौरान ही हुई थी मैं और मनोज एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और मनोज के परिवार वालों ने भी मुझे पसंद कर लिया था इसलिए मनोज और मैंने पूरा मन बना लिया था कि हम लोगों को शादी कर लेनी चाहिए।

उस दिन बबीता और मैं काफी देर तक साथ में बैठे रहे बबीता मुझे कहने लगी कि रोहन अब मैं चलती हूं मैंने बबीता से कहा ठीक है और उसके बाद बबीता भी चली गई और मैं भी अपने घर लौट आया। अगले दिन जब मैं ऑफिस गया तो मैंने यह बात सुरेश को बताई सुरेश मुझे कहने लगा कि लेकिन बबीता ने तो इस बारे में हमें कुछ भी नहीं बताया था। मैंने सुरेश को कहा मैं तो हैरान ही हो गया था म जब बबीता ने मुझे अपनी शादी के बारे में बताया उसने कहा कि उसकी शादी जल्द ही होने वाली है और उसकी सगाई भी हो चुकी है। सुरेश मुझे कहने लगा चलो यह तो बड़ी खुशी की बात है मैं भी उसकी सगाई के लिए उसे बधाई दे देता हूं। उस दिन जब मेरी बात बबीता से शाम के वक्त हुई तो बबीता काफी ज्यादा परेशान लग रही थी मैंने उससे कहा आखिर तुम परेशान क्यों हो तो वह मुझे कहने लगी कि बस ऐसे ही आज मेरी तबीयत ठीक नहीं है। मैंने बबीता को कहा कि लेकिन तुम्हारी तबीयत को क्या हुआ तो वह मुझे कहने लगी कि आज मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा। मैंने बबीता को कहा कि क्या तुम्हारा आज मनोज के साथ झगड़ा हुआ है तो वह मुझे कहने लगी नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं है और फिर बबीता ने मेरा फोन रख दिया। उसने मेरा फोन रख दिया था और उसके बाद मेरी बबीता से काफी दिनो तक कुछ भी बात नहीं हो पाई थी क्योंकि मैं अपने ऑफिस के टूर से दिल्ली गया हुआ था।

मैं जब दिल्ली से वापस लौटा तो एक दिन मुझे बबीता मिली और वह मुझे कहने लगी कि रोहन यह भी अजीब इत्तेफाक है मैं तुम्हारे बारे में ही आज सोच रही थी और देखो तुम से मेरी मुलाकात हो गई। मैंने बबीता को कहा कि चलो हम लोग कहीं बैठते हैं और हम लोग वहीं पास के एक रेस्टोरेंट में बैठ गए। वहां पर हम दोनों साथ में बैठे हुए थे और बातें कर रहे थे तो बबीता और मैं एक दूसरे से बातें कर के काफी खुश थे उस वक्त बबीता के चेहरे पर खुशी थी। बबीता बहुत ज्यादा खुश थी। बबीता मुझे कहने लगी मेरे और मनोज के बीच अब सब कुछ ठीक हो चुका है। मैंने बबीता को कहा लेकिन उस दिन तुमने मुझे बताया नहीं था क्या हुआ क्या था। बबीता ने मुझे बताया मनोज और मेरे बीच झगड़ा हो गया था मनोज ने मुझे सगाई तोड़ने की धमकी दी थी। मैंने बबीता से कहा क्या तुम मनोज के साथ खुश रह पाओगे। वह मुझे कहने लगी मैं मनोज के साथ बहुत खुश हूं। उस दिन हम लोग काफी देर तक बैठे लेकिन मुझे लग रहा था कि शायद मनोज और बबीता के बीच रिलेशन ज्यादा समय तक चलने नहीं वाला है। उन दोनों की शादी हो जाने के बाद उनके बीच जल्द ही तलाक हो गया। मैं भी बबीता की शादी में गया था बबीता की शादी के 6 महीने बाद ही उसका डिवोर्स हो गया। अब बबीता का मुझसे काफी कम मिलना होने लगा था लेकिन मैं चाहता था कि मैं बबीता से मिलूं। मैं उससे काफी समय बाद मिला वह बहुत ज्यादा उदास थी मैंने उसे समझाने की कोशिश की तो वह मुझे कहने लगी मैं बहुत अकेली हो गई हूं, बबीता अकेला महसूस कर रही थी। मैं उससे बातें कर रहा था तो उसे भी अच्छा लगता और मुझे भी काफी अच्छा लगता। बबीता को किसी के कंधे की जरूरत थी तो उसे मेरा कंधा मिल चुका था वह अपनी हर एक बात मुझसे शेयर करने लगी थी।

उसने मुझे अपने पति के रूप में स्वीकार कर लिया था और वह मेरे लिए कुछ भी करने को तैयार थी। एक दिन बबीता ने मुझे अपने घर पर बुला लिया उस दिन वह घर पर अकेली थी शायद उसके दिल में कुछ चल रहा था लेकिन मैं इस बात से अनजान था कि वह क्या सोच रही है। जब हम दोनों साथ में बैठे थे तो वह मेरी गोद में बैठ गई मैंने उसे कहा तुम यह क्या कर रही हो? बबीता की आंखों में देखकर मुझे लग चुका था कि वह मेरे लिए तड़प रही है अब मैं भी उसकी गर्मी को शांत करने के लिए तैयार था। उसने मेरे लंड को बाहर निकाला और उसे अपने मुंह के अंदर समा लिया। जैसे ही उसने अपने मुंह में मेरे लंड को लेकर चूसना शुरु किया तो उसे बहुत अच्छा लग रहा था थोड़ी देर तक उसने ऐसा ही किया फिर मैंने बबीता के कपड़े उतार दिए और उसका नंगा बदन मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रहा था। मैंने उसके स्तनों को बहुत देर तक चूसा उसके बाद मैंने उसकी गर्मी को बढ़ा दिया।

वह मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है मैंने बबीता की चूत मे अपने लंड को घुसाया और उसे तेजी से चोदना शुरू कर दिया। मैं जब उसे चोद रहा था तो उसको मजा आ रहा था और मुझे भी बड़ा आनंद आ रहा था वह मुझे पूरी तरीके से मजे दे रही थी। वह जिस मादक आवाज मे सिसकियां ले रही थी उससे मेरे अंदर की आग और भी ज्यादा बढ़ती जा रही थी। अब मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुका था मैंने जैसे ही उसकी योनि के अंदर अपने वीर्य को गिराया तो वह खुश हो गई और मुझे कहने लगी मुझे मजा गया। उसने मेरे लंड को दोबारा से चूसना शुरू किया और दोबारा से वह मेरे लंड को अपनी चूत मे लेने के लिए उतावली थी। मैंने भी अपने लंड को उसकी चूत में घुसा दिया और उसे तब तक चोदा जब तक वह थक कर चूर नहीं हो गई और मेरे अंदर के गर्मी अब पूरी तरीके से शांत हो चुकी थी। बबीता भी अब बहुत ज्यादा खुश हो गई थी।