मुझे अपनी बाहों में लेकर चोदो

Antarvasna, hindi sex kahani: मैं अपनी शादीशुदा जिंदगी से बिल्कुल भी खुश नहीं था मेरी पत्नी और मेरे बीच आए दिन झगड़े होते रहते थे झगड़ों का कारण सिर्फ यही था कि मैं अपनी पत्नी की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा था क्योंकि काफी समय से मेरी जॉब भी छूट चुकी थी और मेरे पास कोई नौकरी भी नहीं थी इसी वजह से हम दोनों के बीच आए दिन झगड़े होते रहते थे। अब हमारे झगड़े कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगे थे मैंने अपने रिश्ते को कई बार संभालने की कोशिश की लेकिन रिश्ता टूटता हुआ नजर आ रहा था। मेरी पत्नी ने मुझे डिवोर्स देने का फैसला कर लिया था और आखिरकार वह दिन आ ही गया जब हम दोनों का डिवोर्स हो गया। मैंने अपनी पत्नी को डिवोर्स दे दिया मेरी पत्नी मेरी जिंदगी से दूर जा चुकी थी और अब मैं अकेला अपनी जिंदगी में संघर्ष कर रहा था उसी बीच मेरे पिताजी की तबीयत भी खराब रहने लगी और मैं पूरी तरीके से टूट चुका था। मुझे कोई भी रास्ता नजर नहीं आ रहा था मेरे पास अब कोई भी रास्ता नहीं बचा था जिससे कि मैं अपनी जिंदगी को पहले की तरह पटरी पर ले आता। मेरी जिंदगी अब पूरी तरीके से बदल चुकी थी सब कुछ बदलता हुआ नजर आ रहा था।

मेरे जीवन में रोशनी की किरण तब जगी जब पहली बार मुझे मनीषा मिली मनीषा से मैं पहली बार ही मिला था जब मनीषा से मेरी मुलाकात हुई तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा। मनीष और मेरी मुलाकात एक दिन एक इंटरव्यू के दौरान हुई मनीषा भी उसी कंपनी में इंटरव्यू देने के लिए आई हुई थी और हम दोनों रिसेप्शन पर ही बैठे हुए थे मैं बार-बार मनीषा की तरफ़ देख रहा था और मनीषा मेरी तरफ देख रही थी। पहली ही नजर में मुझे ऐसा लगा कि जैसे मनीषा को मैं कई वर्षों से जानता हूं और मनीषा बहुत ही अच्छी है। उससे मेरी बात उस वक्त होनी शुरू हुई जब हम दोनों की जॉब लगी अब हम दोनों की जॉब लग चुकी थी मनीषा और मैं एक ही ऑफिस में जॉब कर रहे थे अब हम दोनों की बात होने लगी थी और मनीषा को मैं अपनी जिंदगी के बारे में बता चुका था। उसे मेरे और मेरी पत्नी के डिवोर्स के बारे में पता था लेकिन उसके बावजूद भी मनीषा ने मेरा बहुत साथ दिया।

मनीषा और मैं चाहते थे कि हम दोनों एक दूसरे के साथ शादी के बंधन में बंध जाएं लेकिन यह सब इतना आसान भी नहीं होने वाला था क्योंकि मनीषा के पिताजी का देहांत काफी वर्षों पहले ही हो गया था और मनीषा को मनीषा के बड़े भैया ने ही पाला था जिस वजह से मनीषा उनकी बहुत इज्जत करती है। जब मनीषा ने इस बारे में अपने भैया से बात की तो उसके भैया बिल्कुल भी इस बात के लिए तैयार नहीं हुए उन्होंने कहा कि क्या तुम एक डिवोर्स हुए व्यक्ति से शादी करोगी क्या वह तुम्हें खुश रख पाएगा, ना जाने उनके कितने ही सवाल थे और वह सवाल बिल्कुल जायज भी थे क्योंकि मेरा डिवोर्स भी तो हो चुका था और उनको भी अपनी बहन की चिंता थी। मनीषा ने मुझसे कहा कि भैया इस बात के लिए बिल्कुल भी नहीं मानने वाले मैंने मनीषा को कहा मनीषा यदि तुम्हारे भैया इस रिश्ते को स्वीकार नहीं करना चाहते तो कोई बात नहीं हम लोग अब एक दूसरे से दूरी बना लेते हैं यह हम दोनों के लिए ठीक रहेगा। मनीषा चाहती थी कि वह मेरे साथ ही शादी करें मैंने मनीषा को समझाने की कोशिश की परंतु मनीषा मेरी एक बात ना मानी और कहने लगी कि रोहित जब पहली बार मैं तुमसे मिली थी उसी वक्त मैंने तुम्हें पसंद कर लिया था और मैंने यह सोच लिया था कि तुमसे ही मैं शादी करुंगी। मैंने मनीषा को कहा मनीषा मैं भी तुम्हारे साथ अपना जीवन बिताना चाहता हूं लेकिन यह सब इतना आसान भी नहीं होने वाला है तुम तो जानती हो कि तुम्हारे भैया इस रिश्ते को कभी स्वीकार नहीं करने वाले। मुझे ही अब कुछ करना था इसलिए मैंने मनीषा के भैया से बात करने का फैसला किया मनीषा के भैया से जब मैं पहली बार मिला तो उनसे बात करने की मेरी हिम्मत बिल्कुल भी नहीं हो रही थी लेकिन मेरे सामने बार-बार मनीषा का चेहरा आ रहा था फिर मैंने हिम्मत करते हुए उनसे बात कर ही ली। मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन वह मेरी बात नहीं माने और कहने लगे कि देखो रोहित मुझे पता है कि तुम्हारे साथ इससे पहले क्या हुआ लेकिन मुझे भी चिंता है कि क्या तुम मनीषा का ध्यान रख पाओगे मनीषा को मैंने बहुत प्यार से पाला है और मनीषा को कभी भी मैंने किसी चीज की कोई कमी महसूस नहीं होने दी पिताजी की मृत्यु के बाद मैंने सारी जिम्मेदारियां खुद ही उठाई और मैंने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया है आज जो कुछ भी मैंने हासिल किया है वह सब मेरी मेहनत की बदौलत है।

मैंने उन्हें कहा आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं लेकिन मनीषा मेरी जिंदगी में बहुत ही जरूरी है। इस बात को शायद वह समझ चुके थे कि हम दोनों की शादी कराना ही अब ठीक रहेगा लेकिन उन्हें थोड़ा समय चाहिए था और वह सोचना चाहते थे उन्होंने अपने रिश्तेदारों से इस बारे में बात की शायद सब लोग हमारे रिश्ते को स्वीकार कर चुके थे। मनीषा इस बात से बहुत खुश थी और मैं भी इस बात से बहुत खुश था कि मनीषा के साथ मेरी सगाई होने वाली है हम दोनों ने सगाई कर ली थी हम दोनों अब सगाई कर चुके थे। मनीषा मेरे साथ मेरे ऑफिस में थी लेकिन थोड़े ही समय बाद ना जाने हम दोनों के बीच किस बात को लेकर झगड़े शुरू हो गए मुझे भी यह पता नहीं चला मनीषा और मेरे बीच में हर रोज झगड़े होने लगे। हम लोग फोन पर थोड़ी देर बात करते तो हम दोनों के झगड़े हो जाया करते लेकिन मुझे अपनी पुरानी जिंदगी की याद आने लगी थी कि कैसे मेरे और मेरी पत्नी के बीच झगड़े होते थे और हमारा रिश्ता टूट गया लेकिन मैं मनीषा के साथ अपने रिश्ते को खत्म नहीं करना चाहता था।

मैंने मनीषा को समझाया और कहा कि देखो मनीषा मैं तुमसे प्यार करता हूं और मैं नहीं चाहता कि हम दोनों का रिश्ता टूट जाए मनीषा ने भी मुझे कहा रोहित मैं भी कोशिश करूंगी कि आगे से हम लोगों के बीच कभी झगड़े ना हो। मनीषा और मैं यह बात अच्छे से समझ चुके थे और हम दोनों एक दूसरे को समय देने की कोशिश करते मैंने भी अपने आप को बदलने की कोशिश की और सब कुछ बदल चुका था। मनीषा और मेरे बीच सब कुछ ठीक हो चुका था हम दोनों एक दूसरे को मिलने की पूरी कोशिश करते। हालांकि हम दोनों एक ही ऑफिस में जॉब करते थे तो हम दोनों अब एक दूसरे को समय देने की कोशिश करते इसी बीच एक दिन मनीषा के भैया ने मुझे घर पर बुलाया और कहा कि रोहित मैं चाहता हूं कि तुम दोनों शादी कर लो। वह चाहते थे कि हम दोनों की जल्द से जल्द शादी हो जाए इसीलिए हम दोनों ने अब शादी करने का फैसला कर लिया था मनीषा भी इस बात से बहुत खुश थी और हम दोनों के बीच जो भी गलतफहमी थी वह सब दूर हो चुकी थी। हम दोनों की अब शादी हो चुकी थी हमारी शादी बड़े ही धूमधाम से हुई और मनीषा मेरी पत्नी बन चुकी थी। मैं बहुत ज्यादा खुश था मनीषा मेरी पत्नी बन चुकी है। मनीष और मेरे बीच इससे पहले सिर्फ एक बार किस हुआ था अब सुहागरात की पहली रात हम दोनों एक दूसरे के साथ एक ही बिस्तर पर थे मैंने दूध का गिलास पिया। मनीषा के बदन को मैंने महसूस करना शुरू किया मेरे अंदर मनीषा को चोदने की इच्छा जाग उठी थी मनीषा भी अपने बदन से सारे कपड़े उतार कर मेरे सामने नग्न अवस्था में लेटी हुई थी।। उसकी चिकनी चूत और उसके चिकने बदन को देखकर मैं अपने अंदर की आग को रोक ना रखा मैं मनीषा पर टूट पड़ा। मनीषा मेरी बाहों में थी मैंने मनीषा को अपनी बाहों में ले लिया था हम दोनों एक दूसरे के बदन को महसूस करते, मैं मनीषा के बदन को महसूस कर रहा था मैं उसकी गर्मी को बड़े ही अच्छे से महसूस करता। मेरा लंड तन कर खड़ा हो चुका था मेरा लंड मनीषा की चूत में जाने के लिए बेताब था मैंने मनीषा की चूत में लंड को डालना शुरू किया और जैसे ही उसकी चूत के अंदर मेरा लंड घुसा तो मनीषा की सील पैक चूत से खून आने लगा था मैं बहुत ही खुश था मै मनीषा के साथ में सेक्स कर रहा हूं। मनीषा एकदम फेस को टाइट माल है मनीषा की चिकनी चूत मर रहा था।

उसकी चूत से निकलता हुआ पानी मेरे अंदर की आग को और भी ज्यादा बढ़ा रहा था मेरे अंदर की गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ने लगी थी कि मैं बिल्कुल भी अपने आपको नहीं रोक पा रहा था मनीषा ने मुझे कहा कि मुझे डॉगी स्टाइल में चोदो। मनीषा को डॉगी स्टाइल में अपनी चूत मरवानी थी मैंने मनीषा को कहा तुम्हें यह सब कैसे पता। वह कहने लगी मेरी सहेली ने मुझे बताया था कि तुम इस तरह से अपनी चूत मरवाना मैंने मनीषा की चूत मारनी शुरु कि तो वह चिल्ला रही थी। मैं मनीषा को धक्के मार रहा था मनीषा को मैंने अच्छे तरीके से चोदा। अब वह बिस्तर पर लेट चुकी थी मनीषा की चूत में मेरा लंड से टकरा रही थी उसकी चूत इतनी ज्यादा टाइट है कि मैं मनीषा की गर्मी को बिल्कुल भी नहीं झेल पा रहा था मेरे अंदर से एक अलग प्रकार की गर्मी निकल रही थी मैं मनीषा को बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था।

मनीषा को धक्के मारने में मुझे जो आनंद आ रहा था वह मेरे लिए एक अलग ही फीलिंग थी मनीषा भी अपनी चूतड़ों को मुझसे टकरा रही थी। मैंने मनीषा को कहा मनीषा तुम अब मेरे नीचे से लेट जाओ मनीषा ने अपने दोनों पैर खोले और मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो मेरा लंड आसानी से उसकी चूत में जा चुका था वह अपने पैरों को चौड़ा करने लगी। मैं भी अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर आसानी से कर रहा था मेरा लंड मनीषा की चूत के अंदर तक जा रहा था मेरे अंडकोष मनीषा की चूत की दीवार से टकरा रहे थे आखिरकार वह क्षण भी आ ही गया जब हम दोनों एक दूसरे के बदन की गर्मी को ना झेल सके और मेरा वीर्य बाहर आने के लिए बेताब हो चुका था। मेरा वीर्य जैसे ही मनीषा की चूत के अंदर गिरा तो वह खुश हो गई और उस रात हम एक दूसरे की बाहों में लेट गए सुहागरात की पहली रात हम दोनों के लिए बड़ी यादगार रही उसके बाद तो हर रोज में मनीषा को चोदा करता और मनीषा चुदने के लिए मुझसे बड़ी बेताब रहती।