मोहनी के हुस्न का जलवा

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मेरा नाम संजय है मैं मुंबई का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 28 वर्ष है और मैं घूमने का बहुत शौकीन हूं, मुझे जब भी समय मिलता है तो मैं जरूर घूमने के लिए जाता हूं, काफी समय से मैं कहीं घूमने भी नहीं गया था और मैं सोचने लगा कि मुझे कुछ समय के लिए अपने गांव चले जाना चाहिए। मैंने अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली और अपने गांव घूमने के लिए चला गया, मुझे गांव में रहना बहुत अच्छा लगता है लेकिन मेरी फैमिली मुंबई में ही सेटल हो गई है इसलिए मेरा ज्यादा गांव जाना नहीं हो पाता। जब मैं अपने गांव पहुंचा तो मैं अपने चाचा के घर पर ही रुका, वह लोग गांव में ही रहते हैं और अपना खेती-बाड़ी कर गुजारा करते हैं, गांव में हमारे भी आम के काफी बगीचे हैं जो कि हमारे चाचा ही देखते हैं। मैं जिस वक्त अपने गांव गया हुआ था उस वक्त वहां पर बहुत आम थे, मैं जब अपने चाचा के साथ बगीचों में गया तो वह कहने लगे इस वक्त आम की अच्छी पैदावार हुई है और इस बार अच्छी कमाई हो जाएगी।

हम दोनों काफी देर तक वहीं बैठे हुए थे, जब मैं घर लौट रहा था तो मेरे चाचा मुझसे पूछने लगे तुम्हारा काम कैसा चल रहा है, मैंने चाचा से कहा काम कैसा चलेगा, चाचा बस नौकरी कर रहे हैं और उसी में अपनी दो वक्त की रोटी का गुजारा कर लेते हैं, चाचा कहने लगे तुम कुछ अपना काम क्यों नहीं देख लेते, मैंने उनसे कहा यह तो संभव नहीं है क्योंकि मुंबई में बहुत खर्चे हैं और मैं अपना काम कैसे खोलू, मेरे पास मेरी सेविंग भी नहीं है, वह कहने लगे हां बेटा यह तो सही बात है। हम दोनों बातें करते हुए चल रहे थे तभी मैंने आगे से एक लड़की को आते हुए देखा, उसने व्हाइट कलर का टॉप और नीले कलर की जींस पहनी हुई थी,  वह बहुत ही अच्छी लग रही थी और वह भी मुझे बहुत घूर कर देख रही थी, मैंने अपने चाचा से पूछा यह कौन है, चाचा कहने लगे कि यह लड़की भी मुंबई में रहती है और कुछ समय से हमारे पड़ोस के घर में रह रही है, वह उनके रिश्तेदार है इससे ज्यादा तो मुझे इसके बारे में नहीं पता लेकिन मैं उस लड़की की तरफ बहुत ही अट्रैक्ट हो गया था और उससे बात करना चाहता था इसीलिए मैंने भी उससे बात करने की ठान ली थी।

वह मुझे जब भी देखती तो मैं उसे देख कर मुस्कुरा देता और वह भी मुझे स्माइल पास करती थी, मुझे लगा कि अब मुझे उससे बात करनी चाहिए। एक दिन मैंने उससे बात करते हुए पूछ ही लिया कि क्या आप मुंबई में रहती हैं, वह मुझे कहने लगी हां मैं मुंबई में रहती हूं, आपको यह बात कैसे पता चली, मैंने उसे कहा गांव में इतनी ज्यादा लोग तो है नहीं कि मुझे यह भी पता ना चले कि आप कहां रहती हैं। इस बात से वह बड़ी जोर से हंसने लगी, मैंने उसे हाथ मिलाते हुए अपना इंट्रोडक्शन दिया, उसने भी मुझे अपना नाम बताया उसका नाम मोहनी है, मैंने मोहनी से कहा कि मैं भी मुंबई में रहता हूं, जब उसने मुझे बताया कि वह हमारे घर के पास ही रहती है तो मैं और भी खुश हो गया, मैंने उसे कहा कि यह भी बड़ा अजीब इत्तेफाक है कि हम लोग एक ही शहर में रहते हुए एक दूसरे को नहीं पहचानते, वह कहने लगी मुंबई में किसी के पास इतना वक्त कहां है कि लोग एक दूसरे के बारे में बात कर सके, मैंने उससे कहा हां यह तो तुम बिल्कुल सही कह रही हो। मेरी भी मोहनी के साथ अच्छी बातचीत होने लगी थी और हम दोनों गांव में साथ ही घूमने के लिए निकलते, जब भी हम लोग घूमने निकलते तो सब लोग हमें देखा करते थे, मैंने एक दिन उससे कहा कि क्यों ना हम लोग कहीं दूर घूमने चलें लेकिन वह कहने लगी कि यहां पर कन्वेंस की बहुत प्रॉब्लम है और तुम्हें तो पता ही है कि हम लोग यहां से कैसे जाएंगे, मैंने उससे कहा मैं अपने चाचा से बाइक ले लूंगा और फिर हम लोग कहीं घूमने चलेंगे, उसने कहा ठीक है। अगले दिन मैंने अपने चाचा से बाइक ले ली और मैं मोहनी को लेकर अपने गांव से दूर घूमने के लिए चला गया, मेरे पास मेरा कैमरा भी था मुझे जो भी चीज अच्छी लगती तो मैं उसे अपने कैमरे में कैद कर लेता हूं, मुझे फोटोग्राफी करने का तो पहले से ही शौक था।

मोहनी भी मुझे ऐसी चीजें दिखाती जो कि बिल्कुल अलग होती उसे भी मैं अपने कैमरे में कैद कर लेता,  मोहन भी बहुत खुश थी, हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिता कर बहुत खुश थे। मैंने सोचा नहीं था कि मोहनी से मेरी इतनी अच्छी दोस्ती हो जाएगी, हम दोनों एक जगह पर बैठे हुए थे वहां पर वह मुझसे कहने लगी कि तुम्हें जब भी समय मिले तो तुम मुंबई में मुझसे जरूर मिलना, मैंने उससे कहा कि अब तो मैं तुमसे जरूर मिलूंगा तुम अब मेरी इतनी अच्छी दोस्त बन चुकी हो। मैंने मोहनी से पूछा कि तुम क्या करती हो तो वह कहने लगी कि मैंने अभी कुछ समय पहले ही अपना कॉलेज पूरा किया है और अभी फिलहाल तो मैं घर पर ही रहती हूं लेकिन अब मैं कुछ काम करने की सोच रही हूं। हम दोनो सुनसान जगह पर बैठे थे, मेरा मन मोहनी को गले लगाने का हुआ, मैंने उसे अपने गले लगा लिया। जब मैंने उसे अपने गले लगाया तो वह भी मुझसे लिपट कर बैठ गई, उसके स्तन मुझसे टकराते तो मेरे अंदर से उत्तेजना पैदा हो जाती, जैसे वह मुझे इशारे कर रही हो और कह रही हो आओ मेरी चूत मारो। मैंने भी ज्यादा देर नहीं की, मैंने उसके होंठो को किस कर लिया, मुझे ऐसा लगा जिसे मैं चाय की चुस्की ले रहा हूं, उसके होंठ बड़े ही गरम और मजेदार थे, मेरे अंदर से भी गर्मी निकलने लगी। मैं उसे वहीं पास की झाड़ियों में लेकर चला गया, मैंने मोहनी को नंगा कर दिया, मैंने अपने लंड को बाहर निकाला। मोहनी ने मेरे लंड को हिलाना शुरू कर दिया, जैसे ही उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लिया तो मैं समझ गया, मोहनी मेरे लंड का जूस निकलने वाली है, पहले वह मेरे लंड के टोपे को अपने मुंह में ले रही थी लेकिन उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेना शुरू कर दिया। जब वह मेरे लंड को अपने मुंह मे लेने लगी तो मेरा वीर्य अपने आप लंड से निकलने लगा।

हम दोनों पूरे जोश में आ चुके थे, मुझे नहीं पता था कि मैं उसके स्तनों को काफी देर चूसता रहूगा, मैंने उसके स्तनों को बहुत देर तक चुसा, जब उसके स्तन लाल हो गए तो मुझे लगा अब मुझे उसकी योनि के अंदर लंड को डाल देना चाहिए। मैंने जब उसकी चूत पर अपनी उंगली फेरी तो उसकी चूत मे एक भी बाल नहीं था वह बहुत ज्यादा चिकनी थी। मुझसे बिल्कुल भी उसक चूत देखकर रहा नहीं जा रहा था, मैंने जब अपने लंड को उसकी चूत पर सटाया तो वह दर्द से करहाने लगी। मैंने धीरे धीरे अपने लंड को उसकी योनि के अंदर प्रवेश करवाने की कोशिश की, लेकिन मरा लंड उसकी चूत मे नहीं जा रहा था। उसने भी अपने हाथों से अपनी योनि को सहलाना शुरू किया जिससे उसकी चूत चिकनी होने लगा। मैंने भी एक ही झटके में अपने लंड को उसकी चूत में घुसा दिया, जितनी तेजी से मैंने उसकी चूत में अपने लंड को घुसाया, उतनी ही तेजी से उसका भी खून बाहर की तरफ को निकल आया। मुझे नहीं पता था कि वह वर्जन माल है लेकिन उसका बदन वाकई में बड़ा टाइट था, मैंने उसकी गांड को पकड़ कर रखा था। उसकी लंबी टांगो को मैने अपने कंधे पर रखा था, मै मोहनी को तेजी से चोद रहा था। उस चोदने में मुझे बहुत मजा आ रहा था, मैंने कुछ देर उसके साथ ऐसे ही संभोग किया। जब मैंने उसको घोडी बनाया तो मैंने उसे घोड़ी बनाते ही मैंने अपने लंड को उसकी योनि में डाला तो वह मुझे कहने लगी तुम्हारा लंड तो बहुत ही मोटा है मुझे बहुत दर्द हो रहा है। मैंने उसे कहा जानू तुम चिंता मत करो, मैं तुम्हरी चूत धीरे से मारूंगा। मैंने उसे घोड़ी बनाया हुआ था और मैं उसे तेजी से चोदे जा रहा था, वह अपने मुंह से अलग अलग प्रकार के मादक आवाज निकाल रही थी, जिससे मैं और भी उत्तेजित होने लगा था। मुझे उसको चोदने में बड़ा मजा आ रहा था, मैंने उसके साथ बहुत देर तक सेक्स किया, जब मेरा वीर्य गिरा तो जैसे मेरी इच्छा पूरी हो गई हो, हम दोनो उसके बाद अपने गांव लौट आए।