मेरी प्यास बुझा दी

Antarvasna, sex stories in hindi: कुछ वर्षों पहले की ही बात है जब मेरी शादी तय हो गई थी मुझे देखने के लिए रोहन घर पर आए हुए थे जब मैं पहली बार रोहन से मिली थी तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा था मेरे माता-पिता बहुत खुश थे। पिताजी भी अपनी नौकरी से कुछ समय पहले ही रिटायर हुए थे पिताजी का रिटायरमेंट होने के बाद ही मेरी शादी तय हुई थी हमारे घर में कभी भी किसी चीज की कोई कमी नहीं थी मेरे पिताजी मुझे बहुत प्यार करते थे और मां से भी मुझे हमेशा बहुत दुलार मिला था। मेरी शादी हो जाने के बाद मैं अपने ससुराल चली गई कुछ सालों तक तो सब कुछ ठीक रहा मेरी दो बेटियां भी हैं लेकिन अब मेरे जीवन में कुछ भी ठीक नहीं है जब से मेरे पति ने मुझे डिवोर्स दिया है उसके बाद से मैं जैसे पूरी तरीके से टूट चुकी हूं। मैं जब वापस अपने मायके लौटी तो उस वक्त मेरे लिए सब कुछ बदल चुका था मेरे भैया और भाभी भी पूरी तरीके से बदल चुके थे माता पिता के देहांत के बाद मेरे लिए मायके में भी जगह नहीं थी क्योंकि अब मेरा उस घर पर कोई अधिकार नहीं था।

भाभी के साथ हमेशा मेरी अनबन रहती थी लेकिन फिर भी मैं उन्हें कुछ नहीं कहती वह तो चाहती थी कि मैं घर छोड़कर चली जाऊं लेकिन मैं घर छोड़कर जाती भी कहा ना तो मेरे पास रहने के लिए कोई छत थी और ना ही मेरे पास इतने पैसे थे कि मैं घर छोड़कर कहीं चली जाऊं। एक दिन भाभी कमरे में आई और कहने लगी कि महिमा तुम घर खाली कर दो भाभी के ऐसा कहने पर मैं उनके चेहरे की तरफ देखती रही मेरे लिए तो घर की छत ही सब कुछ थी और अब वह छत भी जाने वाली थी। भाभी के ऐसा कहने पर मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं हुआ कि मेरी भाभी मुझे कभी ऐसा कह भी सकती हैं उन्होंने मुझे कहा कि अब तुम अपने लिए कहीं और घर देख लो मैंने भाभी से कहा भाभी लेकिन मैं कहां जाऊंगी और मेरे साथ मेरी दोनों बेटियां भी तो हैं। भाभी कहने लगी कि देखो महिमा मुझे यह सब नहीं पता और ना ही मैं कुछ सुनना चाहती हूं अब तुम्हारा इस घर पर कोई भी अधिकार नहीं है तुम्हारी शादी हो जाने के बाद तुम्हारे पति की ही जिम्मेदारी थी लेकिन उसने तुम्हें छोड़ दिया इसमें हमारी कोई भी गलती नहीं है हमसे जितना हो सकता था हमने उतना तुम्हारे लिए किया है और तुम्हारे भैया जितना भी कमाते हैं वह सब खर्च हो जाया करता है अब तुम ही बताओ कि हम लोगों को क्या करना चाहिए।

भाभी की यह बात सुनकर मुझे भी लगा कि मुझे अब घर छोड़ देना चाहिए और मैं घर छोड़कर चली गई लेकिन मेरे पास तो कहीं भी कोई छत नहीं थी। मैंने उसके बाद अपने भैया से भी कभी कोई संपर्क नहीं किया और ना ही मैं उनसे कोई संपर्क रखना चाहती थी मेरे लिए जैसे मेरे सारे रिश्तेदार मुझसे दूर हो चुके थे और मेरे पास मेरी दोनों लड़कियों के सिवाय और कोई भी नहीं था लेकिन तभी मुझे मेरी सहेली संजना का साथ मिला। जब उसे यह बात पता चली तो वह मुझे कहने लगी कि तुम्हारे भैया और भाभी ने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया मैंने संजना से कहा देखो संजना अब उन्होंने जो भी किया मैं उस बात को भूल चुकी हूं लेकिन तुमने मुझे रहने के लिए जगह दी यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। संजना ने मुझे रहने के लिए अपने घर पर जगह दी थी लेकिन मैं ज्यादा दिनों तक उसके घर पर भी नहीं रह सकती थी क्योंकि उसके बच्चे और पति भी तो घर पर थे और मैं नहीं चाहती थी कि मैं अब किसी पर बोझ बनूं इसलिए मैं जल्द से जल्द अपने लिए कोई काम ढूंढना चाहती थी। मैंने संजना से इस बारे में कहा कि तुम मेरी मदद कर दो तो संजना कहने लगी की महिमा मैं तुम्हारी मदद जरूर करूंगी। उसने अपने पति से कहकर मेरे लिए नौकरी की तलाश शुरू कर दी मेरे लिए अब वह लोग नौकरी ढूंढ रहे थे आखिरकार मुझे एक कंपनी में नौकरी मिल ही गई। मुझे जब उस कंपनी में नौकरी मिली तो मैंने वह कंपनी ज्वाइन कर ली और मैं वहां काम करने लगी मैंने जल्दी अपने लिए किराए का मकान ले लिया हालांकि वह इतना बड़ा तो नहीं था लेकिन फिर भी मुझे और मेरे बच्चों के रहने के लिए काफी था। मैं अब अपनी जिंदगी में अकेली ही थी और मैं ज्यादा किसी से भी संपर्क में नहीं रहती थी सिर्फ संजना ही थी जो कि मुझसे मिलने के लिए कभी कबार आ जाया करती थी क्योंकि संजना का मुझ पर काफी एहसान था संजना की वजह से ही मैं नौकरी कर पाई थी और उसने कुछ दिन मुझे अपने घर पर भी रखा था इसलिए मैं उसके एहसानों के बोझ तले दबी हुई थी यदि कभी भी मुझे मदद की जरूरत होती तो संजना ही मदद किया करती।

मैंने अपने बच्चों को स्कूल में भेजना शुरू कर दिया था हालांकि मेरी तनख्वाह इतनी ज्यादा नहीं थी फिर भी मैं अपने बच्चों को स्कूल में पढ़ाना चाहती थी और अब मेरा जीवन जैसे पटरी पर लौटने लगा था मेरे जीवन में सब कुछ ठीक तो नहीं हुआ था लेकिन फिर भी थोड़ा बहुत मेरी जिंदगी सामान्य होती जा रही थी। मैं सुबह अपने ऑफिस चली जाती और शाम को अपने ऑफिस से घर लौटती तो मेरे बच्चे भी घर आ चुके होते थे मेरी बड़ी बेटी की उम्र 10 वर्ष की हो चुकी है और वह अब घर का सारा काम संभाल लेती है इसलिए मुझे बच्चों के बारे में सोचने की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती और वही घर की सारी देखभाल कर लिया करती है। अब सब कुछ ठीक होने लगा था और एक दिन मुझे संजना मिलने के लिए आई और वह कहने लगी की महिमा आज मेरी बेटी का जन्मदिन है तो तुम्हें भी घर पर आना है मैंने संजना को कहा हां क्यों नहीं मैं जरूर अपने बच्चों को लेकर तुम्हारे घर पर आऊंगी। संजना कुछ देर मेरे साथ बैठी रही मैंने संजना को कहा कि मैं तुम्हारे लिए चाय बना देती हूं और अब मैंने संजना के लिए चाय बना दी मैंने जब संजना के लिए चाय बनाई तो उसके बाद कुछ देर तक हम लोग साथ में बैठे रहे और बात करते रहे फिर संजना यह कहते हुए चली गई कि उसे घर में काम भी करना है।

मैं शाम के वक्त संजना के घर गई और उसके बच्चे की बर्थडे पार्टी को हम लोगों ने बहुत अच्छे से सेलिब्रेट किया वह बहुत ही ज्यादा खुश थी। एक दिन मेर बेटी की तबियत काफी खराब थी उस दिन मैं बहुत ज्यादा घबरा गई थी हमारे पड़ोस में रहने वाले ललित ने उस दिन मेरी काफी मदद की। ललित ने उस दिन मेरी बेटी को अस्पताल तक पहुंचाने मे मदद की और उसके बाद डॉक्टरों ने उसे देखा तो मुझे थोड़ा राहत मिली। ललित ने मुझे कहा आप चिंता मत कीजिए हालांकि ललित के साथ मेरी इतनी बातचीत तो नहीं थी लेकिन उस दिन के बाद से हम लोगों के अच्छे बातचीत होने लगी। मुझे भी किसी ऐसे की जरूरत थी जो कि मेरा साथ दे सके और ललित हमेशा मेरा साथ देता मुझे जब भी कोई मुसीबत होती तो ललित मेरा हमेशा ही अच्छे से साथ दिया करता हालांकि ललित उम्र मे मुझसे छोटा है। एक दिन ललित ने मुझे बताया कि उसकी शादी तय हो चुकी है और वह जल्दी शादी करने वाला है। ललित के लिए मेरे दिल में एक अलग ही फीलिंग थी मैं चाहती थी कि ललित के साथ मै सेक्स करूं और मैंने ललित के साथ सेक्स करने के बारे में सोच लिया था। ललित मेरे घर पर आया हुआ था जब वह घर आया था तो मैं उसे अपने स्तनों को दिखा रही थी। मैं जब उसे अपने स्तनों को दिखाती मुझे लगा कहीं ना कहीं ललित के दिल मे भी मेरे साथ सेक्स के बारे में चल रहा था और ललित मेरे साथ सेक्स करना चाहता था। मैने उसे अपनी बाहों मे लिया और उसने मुझे अपनी बाहों मे ले लिया मैं काफी समय बाद किसी की बाहों मे थी। वह मेरी चूत मारना चाहता था उसने मेरी गर्मी को पूरी तरीके से बड़ा कर रख दिया था। उसने मेरे अंदर की गर्मी को इस कदर बढा दिया था कि मैंने ललित से कहा तुम मेरे होठों को चूम लो।

वह मेरे होठों को बड़े अच्छे से चूम रहा था उसने मेरे बदन की गर्मी को पूरी तरीके से बड़ा कर रख दिया था। उसने मेरे बदन से सारे कपड़े उतार दिए थे और मेरे बदन को वह जिस प्रकार से महसूस कर रहा था। मैने उसे कहा कितने सालों बाद मेरे बदन की गर्मी को किसी ने बुझाने की कोशिश की है। मैंने ललित के लंड को अपने मुंह के अंदर तक ले लिया और उसे बड़े अच्छे से सकिंग करने लगी। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था मैं उसके मोटे लंड को अपने मुंह मे लेकर सकिंग कर रही थी वह बहुत ही ज्यादा खुश था। वह मुझे कहने लगा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। वह मेरे साथ सेक्स करने का नाम से ही खुश था अब उसने मेरी चूत को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया मेरी चूत पर उसने अपनी जीभ को लगाया तो मेरी चूत से पानी बाहर निकलने लगा था।

मैंने उसे कहा मैं अपने आपको बिल्कुल भी नहीं रोक पा रही हूं उसने अपने मोटे लंड को मेरी चूत पर लगाते हुए अंदर की तरफ धकेलना शुरू किया। जब उसने मेरी चूत के अंदर अपने लंड को धकेलना शुरू किया तो मैंने उसे कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है तुम ऐसे ही मेरी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करते रहो। वह मेरी चूत कि चिकनाई को  बढ़ा रहा था काफी देर तक उसने मेरी चूत की गर्मी को पूरी तरीके से बुझा कर रख दिया था। मेरे अंदर की गर्मी शांत होने लगी थी मैंने ललित से कहा तुमने मेरी चूत कि गर्मी को पूरी तरीके से शांत कर दिया है। अब वह मुझे घोड़ी बनाकर चोदने लगा वह मुझे घोड़ी बनाकर चोदा रहा था। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था मैंने उसका साथ बड़े अच्छे से दिया। मै अपनी चूतड़ों को ललित से टकराने लगी वह मुझे कहता मुझे आज आपके साथ सेक्स करने में बहुत अच्छा लग रहा है। ललित ने मेरी गर्मी को पूरी तरीके से बुझा दिया था मेरी चूत मारकर उसने मुझे खुश कर दिया था। उस दिन के बाद तो ना जाने कितनी बार मेरे और ललित के बीच सेक्स संबंध बनते रहे हालांकि अब ललित की शादी हो चुकी है लेकिन उसके बावजूद भी वह मेरे साथ सेक्स करता है।