मेरी पत्नी बन मुझे खुश कर दिया

Antarvasna, hindi sex stories: मैंने अपनी पढ़ाई विदेश से की है और उसके बाद मैं जॉब भी विदेश में ही कर रहा था। पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद मैं कुछ समय तक घर पर ही रहा लेकिन घर पर मेरा बिल्कुल भी मन नही लग रहा था। मेरे पिताजी ने मुझसे कहा कि बेटा तुम भी अब मेरे बिजनेस में मेरे हाथ बटाओ मैंने पिताजी से कहा कि पिताजी मैं वापस विदेश जाना चाहता हूँ यहां मेरा मन बिल्कुल भी नही लग रहा है। पिताजी कहने लगे कि यदि तुम मेरे साथ काम मे ध्यान दो तो तुम्हारा मन अपने आप लगने लगेगा परन्तु मैंने पिताजी को मना कर दिया। मेरे पिताजी का अपना बिजनेस है जिसे वह कई वर्षों से सम्भाल रहे है वह चाहते थे कि मैं ही उनके काम को आगे बढाऊँ। मैं बैंगलुरु का रहने वाला हूँ बैंगलुरु में ही पिताजी का बिजनेस है पिताजी ने मुझे पढ़ाई के लिए विदेश भेज दिया था ताकि मैं अच्छी शिक्षा और जानकारी प्राप्त कर सकूं। कुछ दिन घर पर रहने के बाद मैं विदेश जाने की तैयारी करने लगा जब मैं विदेश गया तो मैं वहीं जॉब करने लगा। विदेश में जॉब करते हुए मुझे काफी समय हो चुका था, विदेश में जॉब करते हुए काफी समय हो जाने के बाद मैं छुट्टी लेकर कुछ दिनों के लिए घर आया था।

जब मैं उस दौरान घर आया तो घर मे सब कुछ ठीक था मैं करीब बीस दिन घर पर रहा। घर पर बीस दिन कब बीत गए कुछ पता ही नही चला उसके बाद मैं वापस विदेश चला गया। जब मैं विदेश गया तो उसके कुछ ही दिनों में मुझे मेरी मां का फोन आया वह कहने लगी कि तुम्हारे पिताजी की तबियत कुछ ठीक नही है। मैंने मां से कहा कि पिताजी को क्या हो गया कुछ समय पहले तो वह ठीक थे अचानक से ऐसा क्या हो गया। मां कहने लगी कि बेटा तुम्हारे पिताजी अपने काम पर जा रहे थे तभी अचानक उनका एक्सीडेंट हो गया और वह अस्पताल में भर्ती है बस रम जल्दी से घर आ जाओ। मैं मां की बाते सुनकर घबरा गया मेरे दिमाग मे ना जाने क्या क्या चल रहा था उस दिन मैंने तुरन्त अपना सामान पैक किया और मैं घर वापस लौट आया। जब मैं घर लौटा तो मैंने देखा कि पिताजी की हालत काफी खराब है माँ भी काफी डरी हुई थी। मां अकेले ही पिताजी के साथ थी हालांकि हमारे रिश्तेदार भी पिताजी को देखने आते लेकिन उनकी देखभाल तो माँ को ही करनी थी।

दो तीन दिन बाद हम लोग पिताजी को अस्पताल से घर ले आये थे पिताजी के काफी चोट आई थी जिस वजह से वह चल भी नही पा रहे थे पिताजी को चले में काफी दिक्कत हो रही थी। फिलहाल डॉक्टर ने उन्हें आराम करने के लिए कहा था उन्हें कुछ भी कम करने से डॉक्टर ने मना किया था इसलिए पिताजी घर पर ही आराम कर रहे थे। एक दिन पिताजी मुझे कहने लगे कि रोहन बेटा मुझे तुमसे कुछ बात करनी है मैंने पिताजी से कहा हां पिताजी कहिए आपको क्या बात करनी है। पिताजी कहने लगे कि बेटा यदि मैं ऑफिस नही गया तो मेरा बहुत बड़ा नुकसान हो जाएगा। पिताजी एक प्रोजेक्ट पर काम करवा रहे थे जिसे की उन्हें जल्द से जल्द पूरा करना था नही तो पिताजी को बहुत बड़ा नुकसान भी हो सकता था। पिताजी कहने लगे कि बेटा मैं चाहता हूँ कि मेरी जगह तुम ऑफिस जाओ और उस प्रोजेक्ट को पूरा करो मैंने पिताजी से कहा पिताजी मुझे तो इसके बारे में कोई जानकारी नही है। पिताजी कहने लगे कि कोई बात नही तुम ऑफिस जाओगे तो तुम्हे सब पता चल जाएगा तुम बस मन लगाकर काम करना। मैं भी उनकी बात मान गया और अगले दिन से मैं ऑफिस जाने लगा जब मैं ऑफिस गया तो पहले दिन मुझे कुछ अच्छा नही लगा लेकिन धीरे धीरे मैं सब काम सम्भालने लगा था और मुझे आदत सी हो चुकी थी। पिताजी भी अब ठीक होने लगे थे परन्तु वह अभी ऑफिस जाने के लिए पूरी तरीके से ठीक नही हुए थे मैं ही उनका काम सम्भाल रहा था। मेरे काम करने से पिताजी बहुत खुश थे जब पिताजी पूरी तरीके से ठीक हो गए और अपने ऑफिस जाने लगे तो वह मुझे कहने लगे कि बेटा तुमने मेरी गैर मौजूदगी में काम को बड़े अच्छे से सम्भाला है यदि तुम नही होते तो मुझे काफी बड़ा नुकसान झेलना पड़ता। मैंने पिताजी से कहा पिताजी आप यह कैसी बात कर रहे है मैं आपके काम मे आपकी मदद नही करूँगा तो फिर और कौन करेगा। पिताजी मुझे कहने लगे कि बेटा यदि तुम विदेश जाना चाहते हो तो तुम जा सकते हो अब मैं बिल्कुल हूँ और काम को भी अब मैं अच्छे से देख सकता हूँ। मैंने पिताजी से कहा नही पिताजी अब मैं आप लोगो के साथ ही रहना चाहता हूँ और आपके बिजनेस को औऱ आगे बढ़ाना चाहता हूँ।

मैंने फैसला कर लिया था कि मैं अब बैंगलुरु में रहकर ही पिताजी के बिजनेस को संभालूंगा और अपने मां और पिताजी की देखभाल करूँगा। उस एक्सीडेंट के दौरान मैं काफी घबरा गया था इसलिए मैं उनको छोड़कर कहीं नही जाना चाहता था। कभी कभी मैं सोचता हूँ कि यदि मैं समय पर ना आ पाता तो मेरे पिताजी और माँ को कौन सम्भलता मैं यही सोचकर काफी घबरा जाता हूँ। मैं और पिताजी हमेशा सुबह साथ मे ऑफिस जाते और साथ मे ही शाम के वक्त घर लौटते। समय ऐसे ही धीरे धीरे बिता जा रहा था और मेरी भी उम्र शादी की होने लगी थी मेरे घर वाले मेरे लिए अब लडक़ी देखने लगे थे। मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं उनके दोस्त की बेटी से शादी करूँ भले ही मैं कभी उनके दोस्त की बेटी को मिला नही था लेकिन फिर भी मैं तैयार हो चुका था। मैं वहीं शादी करना चाहता था जहाँ मेरे मां और पिताजी कहते मैं उन्ही की मर्जी की लड़की से शादी करना चाहता था।

एक दिन पापा के दोस्त ने हमे अपने घर डिनर के लिए बुलाया जब हम उनके घर पर गए तो तभी मैं उन लोगो से मिल रहा था उनसे मिलकर मुझे काफी अच्छा लगा। जब मैं उन अंकल की बेटी से मिला तो मुझे वह काफी पसंद आई उसका नाम नीलम है नीलम दिखने में काफी सुंदर थी और उतना ही अच्छा उसका व्यवहार भी था। उसी दिन हम दोनों ने एक दूसरे को पसन्द कर लिया था पहली ही मुलाकात में हमारी बातचीत अच्छी होने लगी थी। हम दोनों की मुलाकात हर रोज होने लगी थी नीलम और मै फोन पर ज्यादा से ज्यादा बात करने की कोशिश करने लगे। नीलम को अच्छा लगने लगा था हम दोनों एक दूसरे से बातें करते। नीलम और मैं एक दूसरे से बात कर के बहुत ज्यादा खुश थे। एक दिन नीलम से मैंने उसका फिगर पूछा तो उसने मुझे अपना फिगर बता दिया। मैं अब चाहता था कि मैं उसके साथ अंतरंग संबंध बनाऊ लेकिन नीलम चाहती थी कि हम लोग यह सब शादी के बाद करे।  मैंने नीलम की बात का सम्मान किया  जब मेरी नीलम से शादी हो गई तो मैंने और नीलम ने शारीरिक संबंध बनाने का फैसला किया। मैं और नीलम एक दूसरे की बाहों मे थे यह हमारी पहली रात थी उस रात मैं बड़े अच्छे से नीलम के साथ एंजॉय करना चाहता था। मैंने नीलम के स्तनो को अपने हाथों में लेकर हिलाना शुरू किया उसके बाद वह बिल्कुल भी रह नही पाई। उसने मेरे लंड को मुंह के अंदर लेकर उसे चूसना शुरू कर दिया मुझे अच्छा लग रहा था। नीलम ने कुछ देर तक मेरे लंड को चूसा उसके बाद जब नीलम ने अपने पैरो को मेरे सामने खोला तो मैंने उसकी चूत की तरफ देखा मैं अब उसकी गुलाबी चूत को चाटना चाहता था उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था मैने पहली बार ही नीलम की चूत को देखा था मैंने उसकी योनि से निकलते हुए पानी को और भी ज्यादा बढ़ा दिया। मै अपनी जीभ से उसकी चूत को चाट रहा था नीलम बहुत ज्यादा खुश हो गई थी वह मुझे कहने लगी मैं अब तड़पने लगी हूं। नीलम बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी और मैं भी बिल्कुल नहीं रह पा रहा था मैं और नीलम एक दूसरे का साथ बड़े ही अच्छे से दे रहे थे।

हम दोनों ही एक दूसरे के साथ अब सेक्स करना चाहते थे मैंने अपने लंड को नीलम की चूत पर सटाया तो उसकी चूत के अंदर जैसे ही मेरा लंड घुसा तो वह बहुत जोर से चिल्लाई और कहने लगी आज मुझे अच्छा लग रहा है। मैंने उसे कहा मुझे भी बड़ा अच्छा लग रहा है और यह कहते ही मैंने एक जोरदार धक्के के साथ नीलम की चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया जिस से मुझे मजा आने लगा था। नीलम सिसकिया लेने लगी थी और नीलम की चूत से खून निकल रहा था। उसकी गर्मी बढ़ती जा रही थी मेरे अंदर की आग बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी लेकिन नीलम की चूत से निकलता हुआ खून अब कुछ ज्यादा ही अधिक हो चुका था इसलिए मैं और नीलम एक दूसरे का साथ अच्छे से देना चाहते थे। हम दोनों एक दूसरे के बिना बहुत ज्यादा तड़पने लगे थे मैं और नीलम एक दूसरे के साथ सेक्स कर के बहुत ज्यादा खुश हो गए थे मैंने नीलम को घोड़ी बना दिया।

नीलम घोड़ी बनकर मेरे सामने खड़ी थी मैंने उसकी चूत के अंदर उंगली में डाल दी मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दिया मेरा लंड जैसे ही नीलम की योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह बहुत जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी तुमने तो मेरी चूत में बहुत दर्द कर दिया है। मैंने नीलम से कहा मैं तुमसे शादी से पहले भी बातें किया करता था उस वक्त ही मैंने तुम्हें कह दिया था कि मेरा लंड बहुत ज्यादा मोटा है। नीलम मुझे कहने लगी तुम बस मुझे चोदते ही रहो। मैने नीलम की चूतड़ों को कसकर पकड़ा हुआ था जिससे कि मेरा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था उसकी चूत से पानी लगातार बह रहा था मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था। मैं नीलम की चूत के मजे ले रहा था और नीलम की चूत के मजे लेने में मुझे इतना अच्छा लग रहा था कि मैंने नीलम से कहा अब तुम नीचे लेट जाओ। मैंने नीलम को बिस्तर पर लेटा दिया मेरे लंड से निकलती हुई आग बाहर की तरफ निकलने लगी थी। जैसे ही मैं माल गिराया तो नीलम भी बड़ी खुश थी। मैंने उसके साथ सेक्स का जमकर मजा लिया उसकी चूत की आग को मैंने मिटा दिया। नीलम और मेरी शादीशुदा जिंदगी अच्छे से चल रही है और हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं।