मेरी खुशी में आरोही ने चार चांद लगा दिए

kamukta, antarvasna

मेरा नाम संजीव है मैं दिल्ली का रहने वाला हूं,  मेरी उम्र 24 वर्ष है, मेरा कॉलेज पिछले वर्ष ही पूरा हुआ है। मेरे घर की आर्थिक स्थिति कुछ ठीक नहीं है क्योंकि मेरे पिताजी एक प्राइवेट नौकरी करते थे और जब से उनकी तबीयत खराब हुई है उसके बाद से वह काम पर नहीं जाते हैं, मेरे मामा ही हम लोगों की मदद करते हैं। मेरे मामा ने ही मुझे बहुत सपोर्ट किया है, मुझे जब किसी चीज की जरूरत पड़ती है तो वह हमेशा ही मेरी मदद करते हैं। मेरे पिताजी भी उनका बहुत एहसान मानते हैं क्योंकि जिस प्रकार से मेरे पिताजी की तबीयत खराब हो गई थी उसके बाद से मेरे मामा ने ही हमारे घर की सारी जिम्मेदारी उठाई है। थोड़ा बहुत पैसा हमारे किराए से आ जाता है, हमने अपने घर का एक सेट किराए पर दिया हुआ है, उससे ही हमारा थोड़ा बहुत गुजारा चल जाता है और थोड़ी बहुत मदद मेरे मामा कर देते हैं। मेरी मम्मी हमेशा ही मामा की बहुत तारीफ करती हैं और कहती है कि उसने हमें कितने अच्छे से संभाला है यदि वह हमारा साथ नहीं देता तो हम लोग कब के रोड पर आ चुके होते।

मेरे मामा हमारे घर हर हफ्ते आ जाते हैं क्योंकि वह ज्यादा दूर नही रहते हैं और उनका घर हमारे घर से कुछ दूरी पर ही है। वह एक अच्छी जॉब पर हैं, उनकी सैलरी भी बहुत अच्छी है, उन्होंने ही मुझे कहा कि तुम रेलवे की तैयारी करो,  यदि तुम रेलवे में निकल जाते हो तो तुम्हारा भविष्य ही बदल जाएगा इसीलिए मैं रेलवे की तैयारी करने लगा। मैं अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान देता हूं और मैं अपने दोस्तों से ज्यादातर संपर्क में नहीं हूं क्योंकि वह लोग घर से संपन्न है लेकिन मुझे तो अपने घर की जिम्मेदारियों को उठाना है  और अपनी बहन की भी शादी करवानी है इसीलिए मैं अपने दोस्तों से कम ही संपर्क में हूं। मैंने कुछ समय पहले ही रेलवे का फॉर्म भरा था लेकिन मेरा सेंटर लखनऊ में पड़ा, उसके बाद मैं लखनऊ जाने की तैयारी करने लगा। मेरे मामा भी उस समय हमारे घर पर आ गए, मेरे मामा हब घर पर आये तो उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम कहां जा रहे हो, मैंने उन्हें बताया कि मैंने कुछ समय पहले रेलवे में फॉर्म भरा था और मेरा सेंटर लखनऊ में पड़ा है तो मैं वही जा रहा हूं।

मामा कहने लगे तुम आज से पहले लखनऊ गए हो, मैंने कहा कि नहीं मैं आज से पहले कभी भी लखनऊ में नहीं गया। मेरे मामा ने अपने एक मित्र को फोन कर दिया और वह कहने लगे कि वहां पर तुम्हारे रहने का पूरा बंदोबस्त हो जाएगा और तुम्हें कुछ भी तकलीफ नहीं होगी। वह मेरी मम्मी के साथ ही बैठे हुए थे उन्होंने अपनी जेब से कुछ पैसे निकाल कर मुझे दे दिए और कहने लगे यह पैसे तुम अपने पास रखो, मैंने वह पैसे अपने पास रख लिए  मेरे मामा कहने लगे पेपर तुम अच्छे से देना, उसमें तुम किसी भी प्रकार की ढील मत करना और अपनी तैयारी पूरी रखना। उस दिन मामा काफी देर तक हमारे घर पर ही थे, वह मम्मी के साथ बात कर रहे थे, मैं भी अपने कमरे में चला गया और अपना सारा सामान मैंने अच्छे से रख दिया था क्योंकि मुझे पता था कि कम से कम चार पांच दिन तो मुझे लखनऊ में रखना ही पड़ेगा। मैं जब अगले दिन ट्रेन से जा रहा था तो मैं जिस सीट में बैठा हुआ था उसके सामने वाली सीट में एक लड़की बैठी हुई थी, वह मुझे अच्छी लग रही थी लेकिन वह अपने फोन में ही लगी हुई थी और किसी के साथ भी बात नहीं कर रही थी। मैंने सोचा शायद अब मेरी दाल नहीं गलने वाली, मैं चुपचाप ऊपर वाली सीट में जाकर बैठ गया। मैं जब ऊपर वाली सीट में बैठा तो मैं भी लेटा हुआ था और अपनी पढ़ाई करने लगा, उसके बाद वह लड़की भी ऊपर वाली सीट में आ गई और अपने मोबाइल में लगी हुई थी। जब उसने मेरी तरफ देखा तो मैं बड़े ध्यान से उसकी आंखों में देख रहा था, उसकी आंखों का रंग भूरा था और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे उसकी आंखों में एक अलग ही प्रकार की चमक है, मुझसे भी नहीं रहा गया और मैंने उसकी आंखों की तारीफ कर दी। मैंने उसे कहा तुम्हारी आंखें बहुत ही सुंदर हैं, पहले कुछ देर तक उसने मुझसे बात नहीं की, वह मुझे एकटक नजरों से देखती रही लेकिन जब उसने मुझे कहा कि मेरी आंखों की तो सब लोग तारीफ करते हैं, उसके बाद उसने भी मुझसे बात करनी शुरू कर दी और अब हम दोनों के बीच में बातें शुरू हो चुकी थी।

जब हम दोनों बातें कर रहे थे तो उसने मुझसे पूछा कि तुम कहां जा रहे हो, मैंने उसे बताया कि मैं लखनऊ जा रहा हूं मेरा वहां पर पेपर है। मैंने उसे पूछा क्या तुम दिल्ली रहती हो वह कहने लगी नहीं मैं लखनऊ में ही रहती हूं और मैं अपने घर जा रही हूं, मैं दिल्ली अपने किसी रिश्तेदार के घर आई हुई थी। वह मुझसे बड़ी खुल कर बात कर रही थी और मुझे भी उससे बात करना अच्छा लग रहा था, उसने मुझे अपना नंबर दे दिया और मुझे कहने लगी वैसे तो मैं किसी को अपना नंबर नहीं देती लेकिन तुम मुझे अच्छे लगने लगे इसलिए मैंने तुम्हें अपना नंबर दे दिया। मैं बड़े जोर से हंसने लगा और कहने लगा तुम्हें कैसे पता कि मैं अच्छा लड़का हूं, उसने उस बात का कुछ भी जवाब नहीं दिया और फिर हम दोनों बातें करते रहे। जब लखनऊ आ गया तो वह भी अपने घर चली गई और मैं भी अपने मामा के दोस्त के घर चला गया। अगले दिन मैंने पेपर दिया, मेरा पेपर बहुत अच्छा हुआ था, मैंने अपने मामा को फोन किया और कहा कि मेरा पेपर बहुत ही अच्छा हुआ है। मैंने जब आरोही को फोन किया तो आरोही मुझे कहने लगी तुम मेरे घर पर ही आ जाना। मैंने उससे कहा मैं तुम्हारे घर पर कैसे आ सकता हूं वहां पर सब लोग होंगे। वह कहने लगी नहीं तुम मेरे घर पर आ जाओ आज हमारे घर पर कोई भी नहीं है।

मैं जब आरोही के घर गया तो आरोही ने छोटी सी निक्कर पहनी हुई थी और उसने जो टीशर्ट पहनी थी उससे उसके स्तनों के ऊभार साफ दिखाई दे रहे थे। मैं आरोही के साथ ही बैठ गया, मेरी और आरोही की बात हो रही थी मैं उसकी जांघों की तरफ घूर कर देख रहा था। वह मुझसे कहने लगी तुम मुझे ऐसे क्यों कर रहे हो। मैंने उसे कहा मैं तुम्हारे फिगर को देख रहा था, तुम्हारी जांघ बहुत ही सेक्सी हैं और तुम बहुत हॉट हो। जब मैंने उससे यह बात कही तो वह मेरे पास आकर बैठ गई और कहने लगी क्या वाकई में बहुत हॉट हू। हम दोनों साथ में ही बैठे हुए थे जब मैंने आरोही के स्तनों पर हाथ रखा तो वह भी पूरी उत्तेजित हो गई थी। जैसे ही मैंने उसकी निककर को खोला तो उसने लाल रंग की पैंटी पहनी हुई थी। मैंने उसकी योनि के अंदर अपने हाथ को डाल दिया अब वह पूरी मूड में थी। मैंने उसे पूरा नंगा किया तो वह मचलने लगी और मुझे कहने लगी मैं आज तक किसी के सामने भी नंगी नही हुई हूं। मैंने उसके स्तनों और उसके होठों का जमकर रसपान किया, जब मेरी इच्छा भर गई तो मैंने उसे घोड़ी बना दिया और घोड़ी बनाते ही मैंने उसकी योनि को कुछ देर तक सहलाया। जब उसकी योनि मेरा लंड लेने के लिए तैयार हो गई थी तो मैंने भी जैसे ही उसकी नाजुक योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया। मेरा लंड उसकी योनि के अंदर घुसा गया वह चिल्लाने लगी और कहने लगी तुम्हारा लंड तो बहुत ही मोटा है मेरी योनि से खून निकल आया है और मुझे बहुत दर्द हो रहा है। मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और बड़ी तेज गति से उसे चोदना शुरू कर दिया। मैं उसे इतनी तेज गति से धक्के मार रहा था कि वह भी पूरे मूड में आने लगी और अपनी चूतडो को मुझसे मिलाने लगी। उसकी चूतडे पूरी लाल हो चुकी थी और जब उसकी चूतडे मुझसे टकराती तो वह पूरी उत्तेजित हो जाती। वह मुझे कहने लगी मैं झड़ने वाली हूं उसने  अपनी योनि को बहुत टाइट कर लिया। जब मेरा वीर्य पतन उसकी योनि के अंदर हुआ तो वह बहुत ही खुश थी। उसने मुझे किस कर लिया वह मेरी गोदी में आकर बैठ गई। उस दिन मैं उसके घर पर ही रुक गया और यह मेरे लिए बहुत ही खुशी की बात थी क्योंकि मेरा पेपर भी अच्छा गया था और मैंने आरोही की चूत भी मार ली थी।