मेरा माल चूत को नहलाकर माना

Antarvasna, desi kahani: मैं जब हैदराबाद में जॉब करने लगा तो मेरे लिए सब कुछ नया ही था क्योंकि हैदराबाद में मुझे अभी कुछ दिन ही हुए थे। हैदराबाद में मैं जिस सोसाइटी में रहता था वहां पर मेरी दोस्ती रवीश के साथ काफी अच्छी थी इसलिए रवीश और मैं हर रोज साथ में ही बस से ऑफिस जाया करते थे। हालांकि मेरे पास मोटरसाइकिल भी थी लेकिन मेरे ऑफिस के बाहर तक बस जाती थी इसलिए मैं बस में ही जाया करता था और रवीश भी मेरे ऑफिस के सामने ही एक गारमेंट शॉप चलाते हैं तो हम दोनों साथ में जाया करते हैं। मैं घर वापस रवीश से जल्दी आ जाता था क्योकि रवीश दुकान से लेट में ही आया करते थे। एक दिन मैं अपने ऑफिस से वापस लौट रहा था तो उस दिन मेरी बगल वाली सीट में एक लड़की बैठी हुई थी वह काफी ज्यादा घबराई हुई थी और वह रो भी रही थी मुझे कुछ समझ नहीं आया तो मैंने उससे पूछ ही लिया की आखिर आप क्यों परेशान है। उसने मुझे बताया कि वह अपने पापा और मम्मी से बहुत ज्यादा परेशान है मैंने जब उससे उसका नाम पूछा तो उसने मुझे अपना बताया उसका नाम कविता है।

कविता के बारे में मुझे ज्यादा तो पता नहीं था लेकिन मुझे उसने इतना ही बताया कि उसके मम्मी पापा उसकी शादी जबरदस्ती किसी लड़के से करवा रहे हैं और वह बिल्कुल भी नहीं चाहती थी कि उसकी शादी हो। मैंने कविता से कहा कि लेकिन तुम क्या चाहती हो तो कविता कहने लगी कि मैं अपने तरीके से अपनी जिंदगी जीना चाहती हूं और मैं अभी से शादी नहीं करना चाहती। मैंने कविता से कहा कि तुम अपने मम्मी पापा से इस बारे में बात करो तो कविता कहने लगी कि उन्हें समझाने का कोई फायदा नहीं है वह लोग मेरी बात कभी नहीं मानने वाले। मेरे पास भी किसी बात का कोई जवाब नहीं था क्योंकि मैं कविता के परिवार वालों को तो जानता नहीं था। उस दिन मैं जब अपने घर आया तो मुझे बार-बार कविता का चेहरा याद आ रहा था कविता का चेहरा बार-बार मेरे सामने आ रहा था तो मुझे भी कुछ ठीक नहीं लग रहा था। उसका नंबर भी मैंने लिया नहीं था लेकिन अगले ही दिन मेरी कविता से मुलाकात हो गई मैं जब कविता को मिला तो मुझे कविता से मिलकर काफी अच्छा लगा और हम दोनों एक दूसरे के साथ अब बातें करने लगे। कविता को मेरा साथ पाकर अच्छा लगा और कविता को जब भी कोई परेशानी होती तो वह मुझसे अपनी बातें शेयर कर लिया करती।

हम दोनों ने एक दूसरे से अपने नंबर शेयर कर लिए थे इसलिए अब हम दोनों एक दूसरे से फोन पर भी बातें करने लगे थे। मुझे नहीं पता था कि कविता और मेरी बातें इतनी आगे बढ़ जाएगी कि मैं भी कविता से प्यार कर बैठूंगा। अपना दिल मैं कविता को दे चुका था कविता बहुत ही सिंपल और साधारण लड़की है। कविता के पापा और मम्मी उसकी शादी मुझसे तो कभी करवाने वाले नहीं थे उन्होंने जिस लड़के से उसकी शादी तय करवाई थी उसी से उसकी शादी वह करवाना चाहते थे। कविता की सगाई हो चुकी थी कविता बहुत ज्यादा परेशान थी उस दिन वह मुझे मिली और कहने लगी कि राजेश अब तुम्हें कुछ करना पड़ेगा नहीं तो मेरी शादी मेरे पापा मम्मी उस लड़के से करवा देंगे और मैं नहीं चाहती कि उससे मेरी शादी हो इसलिए तुम कुछ करो। मैंने कविता से कहा कि हां मैं जरूर कुछ ना कुछ करूंगा तुम बिल्कुल भी फिक्र मत करो। मेरी तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा था क्योंकि मैं भी कविता से प्यार करने लगा था और मैं नहीं चाहता था कि कविता की शादी कहीं और हो इसलिए मेरी तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था की ऐसी स्थिति में मुझे करना क्या चाहिए। मेरे पास कोई जवाब नहीं था लेकिन मैंने यह तो मन बना लिया था कि मैं कविता से जरूर शादी करूंगा चाहे कुछ भी हो जाए। मैंने कविता से कहा कि क्यों ना हम लोग कोट मैरिज कर ले तो कविता कहने लगी राजेश तुम जो कहोगे मैं वही करूंगी मैं तुम्हारी हर एक बात मानने के लिए तैयार हूं। वह मुझसे शादी करने के लिए तैयार थी कविता ने मुझे कहा कि मैं तुम्हारे साथ कोर्ट मैरिज करने के लिए तैयार हूं। हम दोनों कोर्ट मैरिज करने के लिए तैयार हो चुके थे और हम लोगों ने कोर्ट मैरिज कर ली। कोर्ट मैरिज करने के बाद जब हम कविता के घर पर गए तो कविता के पापा और मम्मी ने कविता से कहा कि आज के बाद तुम हमारे घर पर कभी मत आना। कविता यह बात सुनकर रोने लगी और उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया, कविता के लिए उसके घर के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो चुके थे और मेरे ऊपर ही अब कविता की सारी जिम्मेदारी थी।

मैं कविता से शादी कर के बहुत खुश था हम दोनों अपनी शादीशुदा जिंदगी अच्छे से बिता रहे थे लेकिन मेरी नौकरी छूट जाने के बाद मुझे हैदराबाद से वापस पुणे लौटना पड़ा। पुणे में मैं अब एक मल्टीनैशनल कंपनी में जॉब करने लगा हालांकि काफी समय तक मैं खाली रहा लेकिन अब मैं जॉब करने लगा और मेरे पापा मम्मी भी कविता को स्वीकार कर चुके थे इसलिए मैं और कविता एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे। हम दोनों अपनी शादीशुदा जिंदगी अच्छे से पुणे में बिता रहे थे कविता ने भी अब जॉब करनी शुरू कर दी और वह भी एक कंपनी में जॉब करने लगी थी। हालांकि मैंने कविता को मना किया था लेकिन उसने मुझे कहा कि मैं भी जॉब करना चाहती हूं इसलिए कविता भी जॉब करने लगी थी। मैं काफी खुश था कि कविता भी अब जॉब करने लगी है कविता और मैं एक दूसरे के साथ बहुत ही ज्यादा खुश थे लेकिन हम दोनों को काफी दिनों से समय नहीं मिल पा रहा था इस वजह से मैंने एक दिन कविता से कहा कि क्यों ना हम लोग घूमने का प्लान बनाएं।

कविता कहने लगी कि हां यह ठीक रहेगा हम लोग पुणे से अब लोनावला जाना चाहते थे क्योंकि लोनावला पुणे से नजदीक है इसलिए हम लोग लोनावला कुछ दिनों के लिए चले गए। मैं जब लोनावला गया तो उसके बाद मुझे मेरे दोस्त का फोन आया जो कि मुंबई में रहता है उसने मुझे और कविता को मुंबई बुला लिया। हम लोग मुंबई चले गए क्योंकि हम दोनों ने करीब 10 दिनों के लिए ऑफिस से छुट्टी ले ली थी इसलिए हम दोनों लोनावला से मुंबई चले गए और मुंबई में ही कुछ दिनों तक हम लोग रहे फिर हम लोग वापस पुणे लौट आए। हम लोग अब आपस पुणे लौट आए थे कविता और मेरे बीच सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था। कविता मेरी हर एक जरूरतों को पूरा किया करती लेकिन उस दिन मेरा कविता के साथ सेक्स करने का बड़ा मन हो रहा था। मैंने कविता से कहा आज मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है कविता मेरी बातों को समझ गई उसने मेरे पजामे को नीचे करते हुए मेरे अंडरवेयर से मेरे लंड को बाहर निकाल लिया। जब उसने मेरे लंड को बाहर निकालकर अपने मुंह में उसे लेकर चूसना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा और मेरे अंदर की गर्मी बढा दी मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था मेरे लंड से पानी निकल रहा था उसे अब कविता ने अपने अंदर ही ले लिया। मैंने कविता के बदन से कपड़े उतारने के बाद उसके स्तनों को चूसना शुरु किया कविता ने मेरे लंड को चूसा तो मुझे मज़ा आ रहा था। मै कविता के स्तनों का जिस प्रकार से मजा ले रहा था उससे मेरे और कविता के अंदर की आग बढ़ती ही जा रही थी हम दोनों बिल्कुल भी रह नहीं पाए। कविता मुझे कहने लगी अब तुम्हारी चूत मार लू मैंने कविता के पैरों को खोल दिया था और जैसे ही मैंने कविता के पैरों को खोला तो मैं कविता की चूत के अंदर अपने लंड को डाल रहा था। जब उसकी चूत मे मेरा लंड गया तो मुझे मजा आने लगा मेरा लंड कविता की चूत के अंदर प्रवेश होते ही वह जोर से चिल्लाने लगी और मेरा लंड कविता की चूत में सेट हो चुका था।

मैं उसकी मोटी जांघ को अपने हाथों में उठा कर उसे बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था मेरे धक्के अब इतने तेज हो रहे थे कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था और ना ही कविता रह पा रही थी। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है तुम ऐसे ही बस मुझे चोदते जाओ। मैं कविता को चोदता जा रहा था कविता के अंदर से गर्मी बाहर निकल रही थी और उसकी चूत का पानी बहुत ज्यादा बढ़ चुका था वह मुझे कहने लगी मेरी चूत से निकलता हुआ पानी अधिक हो चुका है। जब मैंने कविता से कहा मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ चुकी है तो कविता और मैं एक दूसरे के साथ बड़े अच्छे तरीके से संभोग कर रहे थे। मैंने जैसे ही कविता को उल्टा लेटाकर उसे चोदना शुरू किया तो कविता अपनी चूतडो को मुझसे मिलाने की कोशिश करने लगी।

वह जब मुझसे अपनी चूतड़ों को मिला रही थी तो मेरे अंदर की आग बढ़ती ही जा रही थी और मैं कविता की चूतड़ों पर बड़ी तेजी से प्रहार कर रहा था। जब मैं उसकी चूतड़ों पर प्रहार करता तो वह मुझे कहती मुझे और भी तेजी से चोदो। मैंने कविता से कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है अब मैं और कविता एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स का मजा ले रहे थे। कविता की सिसकिया बढ़ती जा रही थी मेरे लंड से निकलता हुआ पानी बाहर की तरफ को आ चुका था। जैसे ही मैंने अपने वीर्य की पिचकारी से कविता की चूत का नहला दिया तो वह कहने लगी आज जाकर मेरी गर्मी शांत हुई है। हम दोनों ने करीब 15 मिनट तक चुदाई का मजा लिया उसके बाद मैं कविता को पकड़कर ऐसे ही लेटा हुआ था। वह भी बड़ी खुश हो रही थी उसकी चूत मार कर मैं तो बड़ा ही ज्यादा खुश हो गया था कविता के अंदर की गर्मी मैंने मिटा दी थी। मैं कविता को हर रोज चोदा करता हूं। कविता और मैं एक दूसरे के साथ अपने शादीशुदा जीवन को बड़े अच्छे से जी रहे हैं।