मेमसाब काजू बादाम खिलाने लगी

hindi sex stories, antarvasna मेरे पिताजी घर में कमाने वाले सिर्फ इकलौते ही थे परन्तु जब से उनकी मृत्यु हुई है तब से यह सारा दारोमदार मेरे कंधों पर आ गया, मैं ज्यादा पढ़ा लिखा तो नहीं था और ना हीं मुझे कुछ आता था मेरी उम्र भी कम थी लेकिन मुझे ही घर की सारी जरूरतों को पूरा करना पड़ता था। एक दिन मेरी मां मुझे कहने लगी बेटा अब तुम्हें ही कुछ करना पड़ेगा नहीं तो हम लोगों को बहुत सी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। पिताजी की मृत्यु के बाद तो कुछ दिनों तक हमारे पास कुछ पैसे थे लेकिन धीरे-धीरे वह पैसे भी खत्म होने लगे, मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर मुझे करना क्या चाहिए, मैं काम के लिए दर-दर भटकता  परन्तु मुझे जहां काम मिलता वहां पैसे बहुत कम मिलते।

कुछ दिनों तक मैंने अपने पड़ोस के एक दुकानदार के यहां पर काम किया और उस दौरान मुझे आसपास के लोग अच्छे से पहचानने लगे थे, मैं वहां पर बहुत ज्यादा मेहनत करता लेकिन मैं जब वहां पर काम करता था तो वह मेरा बहुत ज्यादा शोषण करते थे और मुझसे देर रात तक काम करवाते थे, मैं जब शाम को घर लौटता तो मैं बहुत थक चुका होता था जिससे कि मैं कई बार तो बिना खाना खाए ही सो जाया करता लेकिन मेरे घर पर मेरे घर की जिम्मेदारी थी जिस वजह से मुझे वहां पर नौकरी तो करनी ही थी और मैं मजबूरी में वहां पर नौकरी करता रहा लेकिन मुझे ना तो मेरे काम के बदले अच्छा पैसा मिलता था और ना ही मुझे वहां पर इज्जत मिलती थी जिससे कि मैं बहुत ज्यादा परेशान होने लगा था और मैं किसी और जगह भी काम के लिए देखने लगा था लेकिन मुझे ना तो कहीं काम मिल रहा था और ना ही मुझे कुछ समझ आ रहा था क्योंकि मेरे जीवन में सब कुछ गलत ही हो रहा था, मैं अपने जीवन को खोजता रहता हूं। मैं हमेशा यही बात सोचता कि यह तो बहुत ज्यादा गलत हुआ है लेकिन अब मुझे तो इस बात का सामना करना ही था और मैंने सोच लिया था कि मुझे अब अपने जीवन में कुछ अच्छा करना ही है, फिर मैं अच्छी नौकरी की तलाश में था लेकिन ना तो कहीं मुझे अच्छी नौकरी मिल रही थी और ना ही कहीं मेरे जीवन में ऐसा कोई बदलाव आ रहा था जिससे कि मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधर पाती।

एक दिन मैं अपने ही मोहल्ले के नाई के यहां पर बाल कटवा रहा था, मैंने उससे बात की कि भैया यदि कहीं नौकरी हो तो तुम मुझे बताना, वह मुझे कहने लगा तुम अखबार में क्यों नहीं देख लेते उसमें बहुत सारी नौकरियों के बारे में होता है, मैंने उसे कहा कि क्या तुम्हारे यहां पर भी अखबार आता है? वह कहने लगा कि हां मेरे यहां पर भी अखबार आता है यदि तुम्हें देखना है तो तुम देख सकते हो। उसने मुझे अखबार दिया और मैं अखबार में नौकरी की तलाश करने लगा, मैं जहां भी फोन करता तो वहां पर वह लोग मुझे मना कर देते, मैंने एक दिन देखा कि घर में नौकर की आवश्यकता है तो मैंने वहां पर फोन कर दिया, वहां पर मैंने जब फोन किया तो सामने से एक बड़ी ही कड़क आवाज आई, मैंने कहा साहब नमस्कार, वह कहने लगे हां कौन बोल रहा है, मैंने उन्हें कहा कि मेरा नाम सोनू है और मुझे नौकरी की तलाश है, मैंने आपका इस्तेहार अखबार में देखा था तो वह देख कर मैंने आपको फोन किया, वह कहने लगे सोनू क्या तुमने इससे पहले भी कहीं काम किया है? मैंने उन्हें कहा नहीं मैंने इससे पहले तो कहीं काम नहीं किया लेकिन मैं आपके घर का सारा काम कर दूंगा।

वह कहने लगे कि ठीक है तुम मुझसे कल मिलना आज तो मैं मिल नहीं पाऊंगा। मैंने सोचा कि चलो कम से कम किसी व्यक्ति ने मुझे मिलने के लिए तो बुलाया नहीं तो सब लोग मुझे फोन पर ही मना कर देते, मैं अगले दिन ही उनसे मिलने के लिए चला गया उनके साथ उनकी पत्नी भी थी और उनकी बूढ़ी मां भी उनके साथ रहती थी उन्होंने मुझे कहा देखो सोनू मेरे पास तो वक्त नहीं होता है और मैं बहुत व्यस्त रहता हूं तुम्हें मेरी मां की देखभाल करनी है क्योंकि उनकी उम्र काफी है इसलिए तुम्हें उनकी देखभाल करनी है, मैंने उन्हे कहा साहब मैं पूरी मेहनत से काम करूंगा, वह कहने लगे मैं तुम्हें पहले एक दो दिन देखूंगा यदि मुझे लगा कि तुम्हें रखना चाहिए तो मैं तुम्हें काम पर रख लूंगा नहीं तो मैं तुम्हें काम पर नहीं रखूंगा। वह बड़े ही सीधे तरीके से बात करने वाले व्यक्ति हैं, मैंने कहा साहब यदि आपको लगेगा तो ही आप मुझे काम पर रखना, मैंने एक-दो दिन तक उनके घर पर काम किया और उन्हें मुझसे कोई भी शिकायत नहीं हुई, मेम साहब भी मुझे काम अच्छे से समझा दिया करती इसीलिए साहब मेरे काम से खुश हो गये और उन्होंने मुझे काम पर रख लिया। वह कहने लगे कि मैंने अपनी पत्नी से तुम्हारे बारे में पूछा तो वह कह रही थी कि तुमने बहुत ही अच्छे से घर का काम किया और मेरी मां भी तुम्हारे काम से बहुत खुश है इसलिए मैं तुम्हें काम पर रखता हूं, जब उन्होंने यह बात कही तो मैं बहुत खुश हो गया और उन्होंने मुझे कुछ पैसे भी दिए, वह बड़े ही दिलदार व्यक्ति हैं उन्होंने कहा की यह पैसे तुम अपने पास रख लो इन पैसों से तुम अपने लिए कुछ कपड़े खरीद लेना, उन्होंने जब मुझे पैसे दिए तो मैं उस दिन उन पैसो से अपने घर पर राशन लेकर गया क्योंकि हमारे घर की राशन भी खत्म होने वाली थी, मेरी मां ने पूछा सोनू क्या तुम्हारी नौकरी लग चुकी है? मैंने अपनी मां से कहा कि हां मेरी नौकरी लग गई है। मैंने उन्हें बताया कि मेरे साहब का नाम गौतम है और उनकी पत्नी का नाम सुधा है वह लोग बड़े ही अच्छे हैं, उनकी एक बूढ़ी मां है वह भी बहुत अच्छी हैं और मुझे जाकर उनका ही ख्याल रखना पड़ता है, मेरी मां पूछने लगी कि क्या उन लोगों के बच्चे नहीं हैं, मैंने अपनी मां से कहा कि उनके बच्चे हैं लेकिन वह लोग हॉस्टल में ही रहते हैं और वह छुट्टियों में ही घर आते हैं, मैंने उन्हें बताया कि वह बहुत बड़े लोग हैं उनके घर को देख कर तो मैंने उनकी रईसयत का अंदाजा लगा लिया था उनका बहुत ही बड़ा घर है और वह बहुत पैसे वाले हैं।

मेरी माँ मुझे कहने लगी बेटा तुम वहां अच्छे से काम करना और उन्हें कभी कोई शिकायत का मौका मत देना, मैंने अपनी मां से कहा कि उन्हे मैं कभी भी कोई शिकायत का मौका नहीं दूंगा और अगले दिन से मैं उनके घर समय पर पहुंच जाता मेरे काम से उन्हें कोई भी शिकायत नहीं थी और मैं उनकी बूढ़ी मां की देखभाल भी बहुत अच्छे से करता, वह लोग बहुत खुश रहते क्योंकि घर का सारा काम मैं ही किया करता था एक दिन गौतम जी मुझसे कहने लगे कि सोनू तुम घर का सारा काम संभालते हो मुझे घर के बारे में सोचने की जरूरत नहीं है और मैं फ्री होकर अपना काम कर सकता हूं, मैंने उन्हें कहा साहब आपने तो मुझ पर एहसान किया है मैं तो कितने समय से कोई नौकरी देख रहा था लेकिन मुझे कोई नौकरी नहीं मिल रही थी परंतु आपने मुझ पर बहुत बड़ा एहसान किया है। गौतम जी का व्यवहार मुझे बहुत अच्छा लगा। एक दिन मुझे आने में देर हो गई गौतम जी कहने लगे तुम आज बड़ी देरी से आए मुझे कहीं जाना था। मैंने उन्हें कहा साहब मुझे आने में देर हो गई क्योंकि घर पर कोई जरूरी काम था।

उन्होंने कहा चलो कोई बात नहीं मैं अभी निकलता हूं तुम घर की देखभाल करना वह यह कह कर चले गए। मैं घर का काम करने लगा सुधा जी कहने लगे तुम मेरे सर की मालिश कर दो मेरे सर में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है। मैंने उन्हें कहा क्यों नहीं वह तेल ले आई मैं उनके सर की मालिश करने लगा उन्होंने अपने सर को मेरे दोनों पैरों के बीच में रखा हुआ था जब उनका सर मेरे लंड से टकराता तो मेरा लंड खड़ा हो जाता मेरा लंड उनके सर पर टकराने लगा था। वह कहने लगी तुम्हारा क्या टकरा रहा है उन्होंने जब मेरे लंड पर अपने हाथ को रखा तो मेरा लंड एकदम से तन कर खड़ा हो गया। उन्होंने मेरे पैंट को खोल कर मेरे लंड को बाहर निकाल लिया जब उन्होंने मेरे मोटे लंड को देखा तो वह कहने लगी तुम्हारा लंड तो बड़ा ही मोटा है मैंने उन्हें कहा लेकिन मैं आपके साथ कुछ नहीं कर सकता। वह कहने लगी क्या मैं तुम्हारी मालकिन नहीं हूं जो मैं तुम्हें कहूंगी वह तुम्हें करना पड़ेगा। उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग करना शुरू कर दिया है वह मेरे लंड को बड़े अच्छे से चूस रही थी मैंने जब उनसे कहा कि आप तो बड़े अच्छे से मेरे लंड को अपने मुंह में ले रही हैं तो वह कहने लगी मैंने तो और लोगों के लंड भी लंड अपने मुंह में लिए हैं। उन्होने जब मेरे लंड पर तेल मालिश की तो मेरा लंड चिकना हो गया। उन्होंने अपनी साड़ी को ऊपर करते हुए अपनी पैंटी को उतार दिया उन्होंने अपने दोनों पैरों को मेरे सामने चौड़ा कर लिया। मैंने भी अपने लंड को उनकी चूत में धकेलते हुए अंदर घुसा दिया जैसे ही मेरा लंड उनकी चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो उनके मुंह से चीखने की आवाज निकल पडी। मैंने उन्हें बड़ी तेज गति से धक्के दिए मैने उनकी चूत क बुरे हाल कर दिए वह अपने मुंह से मादक आवाज ले रही थी और मेरा पूरा साथ देती जाती जब उनकी इच्छा भर गई तो उन्होंने मेरे लंड को दोबारा से मालिश करते हुए चिकना बना दिया और अपनी गांड को मेरे सामने किया। मैंने उनकी गांड के मजे 2 मिनट तक लिए उन 2 मिनट में मुझे उनकी गांड मारने में बड़ा मजा आया। उनके साथ उस दिन सेक्स करने मे मुझे बहुत अच्छा लगा उसके बाद तो जब भी गौतम जी कहीं बाहर जाते तो मैं सुधा मैडम की इच्छा पूरी किया करता। उन्होंने मुझे अपना सब कुछ सौप दिया था वह मेरा बड़ा ध्यान रखती और कहती तुम अच्छे से खाया पिया करो वह मेरे लिए बादाम और काजू भी लेकर आती जिससे कि मेरी ताकत बढ़ जाती।