मायके में प्रेमी संग रास लीला

Antarvasna, hindi sex story: मैं अपने घर की बालकनी में खड़ी थी तभी मेरे फोन पर बड़ी तेज घंटी बजने लगी मैं रूम में गई तो मैंने देखा मेरे पति का फोन था मैंने उनका फोन उठाया और कहा क्या कुछ जरूरी काम था आपने अभी दोपहर में फोन किया। वह मुझे कहने लगे कि हां जरूरी काम था इसीलिए तो मैंने फोन किया था मैंने उन्हें कहा लेकिन ऐसा क्या जरूरी काम आन पड़ा तो वह मुझे कहने लगे कि मामा अभी थोड़ी देर बाद घर पहुंचते ही होंगे तो मैंने सोचा तुम्हें फोन कर दूं। मैंने सुबोध से कहा कि लेकिन मुझे आपने सुबह नहीं बताया तो सुबोध मुझे कहने लगे कि सुबह मैं तुम्हें बताना तो चाहता था लेकिन मेरे दिमाग से बात निकल गई और अभी मामा जी का मुझे फोन आया तो वह कहने लगे कि मैं रेलवे स्टेशन पहुंच चुका हूं। मैंने सुबोध से कहा कोई बात नहीं जब मामा जी घर आएंगे तो मैं देख लूंगी सुबोध कहने लगे मामा जी के लिए तुम खाना बना देना मैंने सुबोध से कहा हां मैं अभी खाना बना देती हूं।

मैंने मामा जी के लिए खाना बनाना शुरू कर दिया जब मैंने मामाजी के लिए खाना बनाना शुरू किया तो कुछ देर बाद ही मामा जी घर पहुंच गए। जब वह घर आए तो वह मुझे कहने लगे कि आरती बेटा तुम क्या कर रही थी तो मैंने उन्हें कहा मामा जी सुबोध ने मुझे फोन कर दिया था और उन्होंने कहा कि आप आने वाले हैं। मामा जी से मैंने जब यह बात कही तो वह कहने लगे कि हां मैंने सुबह उसको फोन कर दिया था और वह मुझे कह रहा था कि मैं आरती को बता देता हूं। मैंने मामा जी को पानी दिया और उन्हें कहा मामा जी मैं आपके लिए खाना लगा देती हूं मामा जी कहने लगे कि बेटा मैं नहा लेता हूं गर्मी बहुत ज्यादा हो रही है। मैंने मामा जी से कहा ठीक है मामा जी आप नहा लीजिए और वह नहाने के लिए बाथरूम में चले गए थोड़ी देर बाद जब वह नहा कर आए तो मैंने उनके लिए खाना लगा दिया था। मामा जी कहने लगे कि बेटा मेरा मन खाना खाने को तो नहीं हो रहा है मैंने मामा जी से कहा आप खाना खा लीजिए वैसे भी थोड़ा सा ही मैंने बनाया है ज्यादा नहीं है। मामा जी कहने लगे चलो थोड़ा सा खाना लगा ही दो मामा जी ने ज्यादा खाना तो नहीं खाया और उसके बाद वह आराम करने के लिए रूम में चले गए शाम हो गई थी और सुबोध भी अपने ऑफिस से लौट आए थे।

जब सुबोध घर लौटे तो उस वक्त सुबोध मुझे कहने लगे कि तुमने मामा जी को खाना तो खिला दिया था ना मैंने सुबोध से कहा हां मैंने मामा जी को दोपहर में खाना खिला दिया था। हम लोग आपस में बात कर रहे थे मामा जी भी बाहर हॉल में आ गये और कुछ देर तक वह सुबोध के साथ बैठे रहे जब वह सुबोध के साथ बैठे हुए थे तो थोड़ी देर बाद मामा जी कहने लगे कि मैं बाहर टहल आता हूं। मामा जी बाहर टहलने के लिए चले गए मैंने मामा जी से कहा मामा जी आप कब तक आएंगे तो वह मुझे कहने लगे बस थोड़ी देर बाद आ जाऊंगा। मामा जी को सुबह और शाम में टहलने की आदत है क्योंकि उन्हें डॉक्टर ने कहा है कि उन्हें चलते फिरते रहना चाहिए। कुछ समय पहले उनकी तबीयत खराब हो गई थी तो उनका इलाज भी काफी समय तक चला और अब वह ठीक हैं। मामा जी मुझे कहने लगे कि बेटा आ जाऊंगा मामा जी अब चले गए सुबोध और मैं आपस में बात कर रहे थे सुबोध मुझे कहने लगे कि मैं अपने ऑफिस का काम कर रहा हूं। मैंने सुबोध से कहा आपके पास तो मेरे लिए बिल्कुल भी समय नहीं हो पाता है तो सुबोध कहने लगे कि हां बाबा तुम्हारे लिए ही तो समय है। वह मेरे साथ बैठे और मुझसे बात करने लगे जब वह मुझसे बात कर रहे थे तो मैंने सुबोध से कहा मैं सोच रही थी कि कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली जाऊं। सुबोध कहने लगे कि यदि तुम्हें अपने मायके जाना है तो तुम चली जाओ इसमें पूछने वाली क्या बात है मैंने सुबोध से कहा कि लेकिन अभी तो मामा आए हुए हैं तो वह कहने लगे कि जब मामा चले जाएंगे तो उसके बाद तुम भी चले जाना। मैंने सुबोध से कहा ठीक है मैं कुछ दिनों के लिए अपने मायके हो आती हूं और मैं कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली गई। मामा जी के जाने के कुछ दिनों बाद ही मैं अपने मायके चली गई जब मैं अपने मायके में गई तो काफी समय बाद अपने माता पिता से मिलकर मैं खुश थी।

पापा मम्मी मुझे कहने लगे कि बेटा सुबोध कैसे हैं तो मैंने उन्हें कहा वह भी अच्छे हैं वह मुझसे पूछने लगे कि क्या सुबोध नहीं आए तो मैंने उन्हें कहा नहीं वह नहीं आ पाए उन्हें ऑफिस का कुछ ज्यादा ही काम है इसलिए वह नहीं आए। मैं अपने मायके में थी तो मुझे भी अच्छा लग रहा था लेकिन मुझे सुबोध की भी चिंता सता रही थी मैंने सुबोध को फोन किया और कहा आप खाना तो खा लेंगे ना तो वह कहने लगे कि हां मैं बाहर से ही आज खाना खा कर आ जाऊंगा। मैंने सुबोध से कहा लेकिन आप बाहर से खाना क्यों खा कर आएंगे वह कहने लगे कि मुझे आने में भी देर हो जाएगी इसलिए मैं सोच रहा हूं कि बाहर से ही मैं खाना खाकर आ जाऊं। मैं और सुबोध फोन पर बात कर रहे थे हम दोनों कि फोन पर काफी देर तक बात हुई उसके बाद मैंने फोन रख दिया था और मैंने सुबोध से कहा मैं आपको कल सुबह फोन करूंगी। वह कहने लगे कि ठीक है तुम मुझे कल फोन कर देना, मैंने अगले दिन सुबोध को फोन कर दिया और उनसे पूछा कि आपने नाश्ता तो कर लिया है ना। वह कहने लगे हां मैंने अपने लिए नाश्ता बना लिया था और अभी मैं अपने ऑफिस के लिए निकल रहा हूं।

सुबोध ने फोन रख दिया था मुझे सुबोध के साथ बात करनी थी परंतु उसके बाद सुबोध से बात नहीं हो पाई थी। मैं सुबोध से बात करने के लिए तड़प रही थी सुबोध से मैं दूर थी लेकिन मेरे दिल में हमेशा से ही सुबोध थे परंतु जब हमारे पड़ोस में रहने वाला सुनील मुझे दिखाई दिया तो मुझे अपने पुराने दिन याद आ गए। जिस प्रकार से सुनील और मेरे बीच में सेक्स संबंध बने वह सब मुझे याद आ गया सुनील की शादी हो चुकी है वह मुझे देखकर कहने लगा अरे यार तुम काफी समय बाद दिखाई दे रही हो। मैंने कहा मैं अपने घर कुछ दिनों के लिए आई हुई हूं काफी समय से मम्मी से मुलाकात नहीं हो पाई थी तो सोचा मिल आती हूं। सुनील मुझे कहने लगा तुमने बहुत ही अच्छा किया सुनील मुझसे मेरे जीवन के बारे में पूछ रहा था लेकिन मैंने जब सुनील से उसकी शादी शुदा के बारे मे पूछा तो वह कहने लगा बस यार ऐसे ही कट रही है कोई खास अंतर तो मुझे लग नहीं रहा। सुनील ने मुझसे जब यह बात कहीं तो मैंने सुनील से कहा क्या तुम मेरे साथ आज घूमने के लिए चलोगे काफी समय बाद में सुनील के साथ कहीं गई थी और उस दिन हम दोनों के बीच में किस हो गया और वही पुराने दिन मुझे याद आ गए लेकिन मुझे इस बात का डर था कि सुबोधा मेरी जिंदगी में है और सुनील मेरी जिंदगी से जा चुका था। फिर भी मैंने सुनील के साथ सेक्स करने के बारे मे सोचा मैने सुनील को रात के वक्त अपने घर पर बुला लिया। सुनील भी घर पर आ गया जब वह घर पर पहुंचा तो वह मुझे कहने लगा कि तुमने रात को मुझे बुला लिया। सुनील के चेहरे पर घबराहट थी लेकिन मैंने उसे कहा कि तुम घबराओ मत सुनील मुझे कहने लगा यार मुझे तो डर लग रहा है। सुनील मेरे कमरे में आ गया जब उसने मेरे बदन को अपनी बाहों में लिया तो मैं मचलने लगी और सुनील को भी अच्छा लग रहा था। जब सुनील ने मेरे होठों को किस किया तो मुझे भी बहुत अच्छा लगा और काफी देर तक मेरे होठों को चूमता रहा ऐसा उसने बहुत देर तक किया उसने मुझे जमीन पर लेटा दिया और मेरे कपड़े उतारकर मेरे स्तनों का रसपान किया।

उसके हाथ के स्पर्श से ही मै पूरी तरीके से मचल उठती और उसको भी मजा आ जाता काफी देर तक उसने ऐसा ही किया जब सुनील ने अपने लंड को बाहर निकाला तो उसका लंड आज भी वैसा ही था जैसा पहले था। उसका लंड फुफकार रहा था मैंने उसे अपने मुंह के अंदर लेकर चूसना शुरू कर दिया तो उसे अच्छा लग रहा था मुझे बड़ा मजा आता काफी देर तक मैंने उसके लंड को ऐसे ही चूसा लेकिन जब उसने मेरी योनि को चाटना शुरू कर दिया तो मुझे भी मज़ा आने लगा और उसे भी अच्छा लग रहा था। सुनील ने मेरी चूत को चाटा मैंने उसे कहा मुझसे रहा नहीं जाएगा तो वह कहने लगा बस थोड़ी देर और चाट लेने दो। सुनील ने मेरी चूत को चाटा तो उसने मेरी चूत से गरम पानी को बाहर निकाल दिया था उसने मेरी पतली कमर को पकड़ा और मेरी योनि में अपने लंड को अंदर की तरफ धकेलना शुरू किया तो मैं चिल्लाने लगी और धीरे-धीरे सुनील का लंड मेरी चूत मे प्रवेश हो चुका था।

सुनील मुझे पहले की तरह चोद रहा था मुझे उसके साथ संभोग करने में बड़ा आनंद आ रहा था। बहुत देर तक ऐसा करने के बाद जब उसने मुझे अपने ऊपर से आने के लिए कहा तो मैंने सुनील के लंड से अपनी योनि को बाहर निकाला और सुनील बिस्तर पर लेट चुका था। उसने मुझे कहा कि तुम अपनी योनि को मेरे लंड के ऊपर से लगा दो सुनील मुझे धक्का मार रहा था और उसने मेरे चूतड़ों को कसकर पकड़ा हुआ था। कुछ देर तक उसने ऐसे ही मुझे धक्के दिए जब मैं अपनी चूतडो को ऊपर नीचे करने लगी तो वह कहने लगा मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है काफी देर तक ऐसा ही हम लोगों ने किया और मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था। जब मेरी योनि में सुनील का वीर्य गिरने वाला था तो मैंने उसे कहा क्या मैं तुम्हारे लंड को मुंह में ले सकती हूं। सुनील कहने लगा लो बस गिरी गया और उसने अपने लंड को मेरे मुंह मे डालते हुए अपने वीर्य को अंदर गिरा दिया।