मैं तड़प रही हूं चुदाई के लिए

Hindi sex story, Kamukta मैं दिल्ली का रहने वाला हूं दिल्ली में मेरे पिताजी प्रॉपर्टी का काम करते हैं और मैं कॉलेज में पढ़ाई कर रहा हूं यह मेरे कॉलेज का आखिरी वर्ष है कॉलेज में सब मुझे कहते हैं कि तुम बहुत ही हैंडसम हो। मेरी पर्सनैलिटी सबको बहुत अच्छी लगती है जिस वजह से कॉलेज की कई लड़कियां मेरे पीछे पड़ी हुई है लेकिन मैं उन लोगों को कभी देखता ही नहीं हूं क्योंकि मुझे लड़कियों के साथ बात करना अच्छा नहीं लगता था इसलिए मैं उन लोगों से बहुत कम बातें किया करता। उसी दौरान मेरे कॉलेज के एग्जाम नजदीक आने वाले थे और मैं तैयारी कर रहा था जब मेरे एग्जाम हुए तो उसके कुछ दिनों बाद ही मेरे मामा जी के लड़के की शादी थी और हम लोगों को उस के सिलसिले में चंडीगढ़ जाना था।

पापा ने कहा कि हम लोग कुछ दिनों के लिए चंडीगढ़ चले जाते हैं हमारी पूरी फैमिली हमारे साथ में चंडीगढ़ चली गई मेरे दादा और दादी जी मुझे बहुत प्यार करते हैं वह लोग मुझे कहने लगे बेटा आर्यन यहां पर कोई शरारत मत करना। वह लोग मुझे हमेशा ही समझाते रहते हैं लेकिन मेरे पिताजी मुझसे बहुत कम बात करते हैं और मम्मी मेरी गलतियों को हमेशा छुपाती रहती है। जब हम लोग मामा जी के घर पहुंचे तो मामा जी और मामी कहने लगे की आप लोगों ने अच्छा किया जो पूरा परिवार आ गया उन लोगों ने हमारे लिए घर में ही सारी व्यवस्थाएं की हुई थी। शादी की तैयारियां बड़े ही धूमधाम से हो रही थी घर की सजावट का काम चल रहा था लेकिन मैं चंडीगढ़ में काफी अकेला था मैं किसी से बात भी नहीं कर रहा था उसी दौरान मुझे एक लड़की मिली जो कि मेरे मामा जी के पड़ोस में ही रहती है। वह मुझे देख कर मुस्कुरा देती मैं जब भी उसे देखता तो मुझे उसे देख कर बहुत अच्छा लगता उसका नाम राधिका है मैं जब राधिका से बात करता तो मुझे बहुत अच्छा लगता और हम दोनों एक दूसरे से बात करने लगे थे। राधिका से मेरी अच्छी दोस्ती हो चुकी थी और जिस दिन शादी थी उस दिन राधिका बहुत ज्यादा सुंदर लग रही थी वह डांस भी कर रही थी मैं तो सिर्फ राधिका को ही देखे जा रहा था। शादी के दौरान शायद मुझे राधिका अच्छी लगने लगी थी जब मैं दिल्ली लौटा तो मेरे सामने सिर्फ राधिका का चेहरा था मैं उसे भूला ही नहीं पा रहा था इसीलिए मैंने राधिका को फोन किया।

मैंने जब राधिका को फोन किया तो वह मुझे कहने लगी आखिरकार तुमने मुझे फोन कर ही दिया मैंने राधिका से कहा क्यों तुम क्या चाहती थी कि मैं तुम्हें फोन ना करूं राधिका कहने लगी नहीं। मैंने राधिका से कहा यार जब से मैं दिल्ली आया हूं तब से मेरा मन ही नहीं लग रहा है तो राधिका कहने लगी कि तुम चंडीगढ़ आ जाओ। मैंने उसे कहा चंडीगढ़ आना इतना भी आसान नहीं है तुम्हें क्या लगता है, मैं चंडीगढ़ में क्या करूंगा और वहां आकर मैं ऐसा क्या करने वाला हूं राधिका कहने लगी कि यह तो तुम ही सोचो कि तुम्हारा मन क्यों नहीं लग रहा है। मैंने राधिका से कहा शायद मुझे तुमसे प्यार हो गया है राधिका कहने लगी लेकिन मुझे तुमसे प्यार नहीं हुआ है और फिर राधिका ने फोन रख दिया। मैं राधिका को फोन करे जा रहा था लेकिन उसने फोन उठाया ही नहीं और जब उसने फोन नहीं उठाया तो मैंने उसे मैसेज किया और कहा जब तुम्हें समय हो तो तुम फोन पर बात करना। रात के वक्त मुझे राधिका का फोन आया मैंने फोन रिसीव किया और उसे कहा जब मैं तुम्हें फोन कर रहा था तो तुमने मेरा फोन क्यों नहीं उठाया वह मुझे कहने लगी कि उस वक्त मम्मी आ गई थी और मम्मी के सामने मैं कैसे बात करती। मैंने राधिका से कहा अच्छा तो तुम अपनी मम्मी से भी डरती हो वह कहने लगी हां मैं मम्मी से भी डरती हूं मैंने राधिका से पूछा तुम्हारे पापा क्या करते हैं वह कहने लगी मेरे पापा बैंक मैनेजर है। जब मैंने राधिका से बात की तो मुझे उससे बात करना अच्छा लग रहा था और हम दोनों की बातें ऐसे ही बढ़ती रही धीरे धीरे राधिका भी मेरे लिए तड़पने लगी। मैं जब उसे फोन नहीं करता तो उसे बहुत ही बुरा लगता हम दोनों के बीच अब प्यार बढ़ने लगा था लेकिन मैं दिल्ली में रहता था और राधिका चंडीगढ़ में रहती थी। कुछ समय बाद मैंने राधिका से मिलने के बारे में सोचा लेकिन मेरे पापा ने कहा कि बेटा अब तुम बड़े हो चुके हो अब बिजनेस को तुम्हे ही संभालना है इसलिए अब तुम मेरे साथ आया करो।

मैं पापा की बात कैसे टाल सकता था उसके बाद मैं पापा का बिजनेस संभालने लगा धीरे धीरे मैं भी प्रॉपर्टी का काम सीखने लगा था पापा काफी बरसों से प्रॉपर्टी का काम कर रहे हैं जिस वजह से उन्हें काफी लोग जानते हैं। राधिका मुझे हर रोज फोन किया करती और कहती कि तुम चंडीगढ़ कब आ रहे हो मैंने उसे कहा मैं चंडीगढ़ कैसे आऊं पापा के साथ मुझे हर रोज ऑफिस जाना पड़ता है। वह कहने लगी कि इसका मतलब तुम मुझसे प्यार नहीं करते हो मैंने राधिका से कहा ऐसा कुछ भी नहीं है तुम अपने दिमाग में बेवजह की बातें मत लाओ लेकिन राधिका और मेरे बीच में शायद दूरियां पैदा होने लगी थी और हम दोनों एक दूसरे से दूर होने लगे थे। राधिका और मेरी अब फोन पर बहुत कम बातें होती थी लेकिन मैं चाहता था कि राधिका से मेरी बात होती रहे, मैं उसे हर रोज फोन करने की कोशिश करता पर वह मुझ से कम बातें किया करती थी। एक दिन मैंने राधिका से कहा राधिका क्या तुम्हें लगता है मैं तुमसे प्यार नहीं करता हूं वह कहने लगी हां मुझे अब पूरी तरीके से यकीन हो चुका है कि तुम मुझसे प्यार नहीं करते हो और तुमने कोई और ही लड़की पसंद कर ली है। मैंने उसे कहा राधिका मैं तुमसे ही प्यार करता हूं तुम्हारे सिवा मेरे दिल में किसी भी लड़की का ख्याल नहीं आता है वह कहने लगी तो फिर तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रहे थे।

मैंने राधिका से कहा मैंने तुम्हें बताया तो था कि मैं पापा के साथ ही काम करने लगा हूं मुझे बहुत कम समय मिल पाता है इसलिए मेरी बात तुमसे नहीं हो पाती लेकिन इसका यह मतलब तो नहीं है कि मैं तुमसे प्यार नहीं करता। राधिका कहने लगी मुझे तुमसे मिलना था क्या तुम मुझे से मिलने के लिए आ सकते हो मैंने राधिका से कहा ठीक है मैं कोशिश करता हूं राधिका मुझे कहने लगी कोशिश नहीं मुझे तुमसे मिलना है तुम यह बताओ कि तुम मुझसे मिलने कब आ रहे हो। मैंने राधिका से कहा मैं तुम्हें आज शाम को फोन करता हूं उसके बाद मैं पापा के साथ चला गया मैंने जब पापा को कहा कि मैं कुछ दिनों के लिए चंडीगढ़ जा रहा हूं तो पापा मुझे कहने लगे तुम चंडीगढ़ जा कर क्या करोगे। मैंने उन्हें बताया कि मैं चंडीगढ़ जाना चाहता हूं मुझे कुछ काम है वह कहने लगे ठीक है तुम चले जाओ, मै बहुत खुश था क्योंकि मैं चंडीगढ़ जाने वाला था। मैं जब चंडीगढ़ पहुंचा तो मैंने राधिका को फोन किया राधिका मुझे कहने लगी क्या तुम चंडीगढ़ आ चुके हो मैंने उसे कहा हां लेकिन मैं मामा जी के घर नहीं आ रहा हूं मैं होटल में ही रुकने वाला हूं मैं तुम्हें होटल में पहुंच कर फोन करता हूं। राधिका कहने लगी ठीक है तुम मुझे होटल पहुंच कर फोन करना मैं जब होटल में पहुंचा तो मैंने राधिका को फोन किया और हम दोनों ने मिलने का फैसला किया। मैं जब राधिका से मिला तो वह बहुत ज्यादा खुश थी मैं भी बहुत खुश था हम दोनों की खुशी का कारण यही था कि इतने समय से हम लोग एक दूसरे को नहीं मिले थे। जब हम दोनों एक दूसरे से मिले तो हम दोनों के अंदर एक दूसरे को मिलने की खुशी बहुत ज्यादा थी मैंने उसे गले लगाया और उसे किस करने लगा। वह मुझे कहने लगी तुम पब्लिक प्लेस में कहां किस कर रहे हो मैंने उसे कहा तुम्हे देखकर मै रह ही नहीं पा रहा हूं।

मैं उसे अपने साथ होटल में ले आया जब मैं राधिका को अपने साथ होटल में लाया तो वह बहुत ज्यादा खुश थी मैंने उसके नरम होंठो को अपने होंठो में लिया और उन्हें चूसने लगा। मैंने उसके होठों से खून भी निकाल कर रख दिया था जब मैंने उसके कपड़े उतारे तो उसने पिंक कलर की पैंटी और ब्रा पहनी हुई थी जिसमें कि उसका फिगर बड़ा ही लाजवाब लग रहा था। मै उसे देखकर अपने आप पर बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं कर पाया और मैंने उसके स्तनों का रसपान करना शुरू किया मैंने उसके स्तनों से भी खून निकाल कर रख दिया वह उत्तेजीत हो जाती  और जैसे ही मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ को रगडना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगी आर्यन मुझसे अब नहीं रहा जाएगा। मैंने उसे कहा बस कुछ देर की बात है मैंने जैसे ही अपने लंड को उसकी योनि पर सटाया तो वह उत्तेजित होने लगी मैंने धीरे धीरे अपने लंड को उसकी योनि के अंदर प्रवेश करवा दिया जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह चिल्ला उठी। मैं उसे तेज गति से धक्के मारता रहा मै उसे इतनी तेजी से धक्के मारता की उसका पूरा शरीर हिल जाता।

मैंने जब उसकी योनि की तरफ देखा तो उसकी योनि से खून का बहाव बड़ी तेजी से हो रहा था वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी वह मेरा साथ बड़े अच्छे से देती उसने अपने पैरों के बीच में मुझे जकड़ लिया था लेकिन उसकी योनि से लगातार खून का बहाव हो रहा था और उसकी उत्तेजना में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हो गई थी। उसके मुंह से इतनी तेज आवाज निकल रही थी कि मैंने उसके मुंह पर अपने हाथ को रखा और उसे तेजी से धक्के देने शुरू किए। उसकी योनि से जो गरम पानी बाहर निकल रहा था वह कुछ ज्यादा ही तेजी से निकलने लगा जैसे ही मेरा वीर्य पतन राधिका की योनि में हुआ तो मुझे बड़ा अच्छा लगा और वह भी बहुत खुश हो गई। हम दोनों ने एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स का आनंद लिया और कुछ दिनों तक मैं चंडीगढ़ में रुका और फिर वापस दिल्ली लौट आया राधिका बहुत खुश है क्योंकि उसकी चूत के मजे में ले चुका था।