मैडम ने मुझे अच्छे से समझाया

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प्रीति अपना स्कूल पूरा करके अब कॉलेज जाने लगी थी। उसने 12वि की पढ़ाई पूरी कर ली थी। प्रीति ने 12वी कक्षा राजस्थान से पूरी की। अब वह कॉलेज की पढ़ाई के लिए किसी अच्छे कॉलेज में जाना चाहती थी। प्रीति ने मुंबई के कॉलेज में दाखिला ले लिया था। प्रीति ने अब कॉलेज जाना शुरू कर दिया था। वह खूब मन लगाकर पढ़ाई करती थी। प्रीति एक बहुत ही होनहार लड़की थी। अब उसके कॉलेज में बहुत से नए दोस्त बन गए थे। वह ज्यादातर समय उन्हीं के साथ बिताती थी। प्रीति अब मुंबई में ही रहने लगी थी। वह अपने दोस्त के साथ वहां रहती थी। दोनों एक साथ रहते थे। कॉलेज में प्रीति को टीचर भी बहुत पसंद करते थे। क्योंकि वह पढ़ने में बहुत होशियार थी। इसलिए सब उसकी तारीफ ही किया करते थे।  एक दिन अचानक कॉलेज से घर जाते समय वह एक लड़के से टकराती है। जिसका नाम अमर था।

प्रीति हड़बड़ी में उसे सॉरी बोलती हुई आगे निकल गई। और उसका फोन वही रह गया फिर दूसरे दिन कॉलेज में अमर ने प्रीति को उसका फोन लौटाया और मुस्कुराते हुए चला गया। वह यही सोचती कि कहीं उसने मेरे फोन में मेरी नंगी फोटो तो नहीं देख ली कहीं वह वाली फोटो तो नहीं देख ली जिसमें मैंने अपनी योनि में उंगली डाली हुई है। प्रीति सारे दिन भर उसी के बारे में सोचने लगी, लगता था जैसे प्रीति अमर को पसंद करने लगी है। लेकिन उसने यह बात किसी को नहीं बताई थी। दोनो एक ही क्लास में पढ़ते थे। फिर कुछ समय बाद अमर भी प्रीति को पसंद करने लगा। दोनों एक दूसरे को छुप छुप कर देखते लेकिन सामने बोलते नहीं।

प्रीति ने यह बात अपने दोस्त को बताई। तो वह खुशी से झूम उठी। प्रीति की दोस्त ने अमर को मिलने बुलाया और उससे प्रीति के बारे में बात की और कहां की प्रीति तुम्हें पसंद करती है। क्या तुम भी प्रीति को पसंद करते हो? उसने मुस्कुराते हुए कहां हां मुझे भी प्रीति बहुत अच्छी लगती है। मैंने यह बात प्रीति को बताई तो वह बहुत खुश हुई। कुछ दिन बाद वह अमर से मिलने लगी। दोनों ने एक दूसरे के बारे में पूछा। अमर मुम्बई का ही रहने वाला था। और बातें करने लगे। धीरे धीरे वह दोनों रोज मिलने लगे थे। दोनों साथ में घूमने जाया करते थे। अमर कॉलेज के काम के बहाने प्रीति से मिलने उसकी दोस्त के घर जाया करता था। दोनों वहां बैठकर ढेर सारी बातें करते। जैसे जैसे समय बीतता गया उनका आपस में प्यार भी बढ़ता गया। फिर एक दिन उनका कॉलेज पूरा होने वाला था तो सारे दोस्त एक दिन घूमने चले गए। सारे दोस्तो ने खूब एन्जॉय किया। कॉलेज पूरा होने के बाद वह सब एक दूसरे को बहुत याद करते थे। कॉलेज पूरा होते ही वह सारे दोस्त अपने अपने शहर चले गए। एक दूसरे को बहुत याद करने लगे। कभी कभी अमर मुम्बई से प्रीति को मिलने उसके शहर आया करता था। दोनो वहां भी मिलने लगे।

प्रीति बहाना करके अमर से मिलने जाया करती थी। वह दोनों एक दूसरे से घरवालों से छुपकर मिलने लगे। कुछ समय बाद प्रीति ने भी मुंबई जाने का फैसला किया। मुंबई जाकर वह जॉब करना चाहती थी। लेकिन उसके घरवालों ने उसे भेजना सही नहीं समझा। लेकिन वह जीद कर कर मुंबई के लिए जाने को तैयार हो ही गई। उसने अपने घर वालों को मना लिया मुंबई जाने के लिए। उसके पिताजी ने कहा मैं तुम्हें वहां छोड़ने आऊंगा और जहां तुम रहती हो वहां पर तुम्हारे लिए पूरी व्यवस्था कर लूंगा। उसके बाद ही मैं वहां से लौटूंगा। उसने कहा ठीक है आप मेरे साथ चलना और आपको जैसा भी लगता है। उस तरीके से वहां पर मेरा सामान सेट कर कर आप वापस आ जाना। अब वह प्रीति के साथ ही रुक गए।  प्रीति ने भी जॉब की ट्राई की और उसकी जॉब एक कंपनी में लग गई। वह वहां जॉब करने लगी कुछ ही दिनों बाद उसके पिताजी ने कहा अब मैं घर चले जाता हूं। अब तुम्हें कोई समस्या नहीं होगी यहां पर मैंने सब बंदोबस्त कर दिया है। प्रीति ने कहा ठीक है पिताजी आप घर चले जाइए। जितने दिनों तक उसके पिताजी वहां पर रहे तो वह भी अमर से नहीं मिली। उसके बाद वह अमर से लगातार मिलने लगी पहले वह दोनों बाहर मिला करते थे। जब प्रीति को ऑफिस छूट जाता था। उसके बाद वह दोनों अब प्रीति के ही घर पर मिलने लगे। जहां पर उसके पिताजी ने उसके लिए घर लिया था। क्योंकि बाहर बैठना भी अच्छा नहीं था इसलिए वह दोनों वहीं मिलने लगे। जब भी प्रीति अपने ऑफिस से आती तो अमर उसके इंतजार में वहां खड़ा रहता। उसके घर पर ही मिलने लगा।

जब रविवार को प्रीति की छुट्टी रहती तो अमर सुबह ही पहुंच जाता। वह दोनों एक साथ नाश्ता बनाते और काफी इंजॉय करते। लेकिन आज अमर कुछ और ही इरादे से प्रीति के घर पर आया था। वह दनो बैठ कर बातें कर रहे थे। अमर ने प्रीति के कमर पर जोर से हाथ रखकर उसे अपनी तरफ खींचा और दबा लिया। अब वह दोनों शरारत करने लगे थे शरारत करते करते ना जाने कब वह दोनों एक दूसरे के ऊपर गिर गए उन दोनों को भी पता नहीं चला। जैसे ही वह एक दूसरे के ऊपर गिरे तो प्रीति के स्तन अमर के मुंह पर लगे। अमर ने प्रीति के स्तनों को अपने दांत से काट लिया और उनको चुसते चुसते सूट से बाहर निकालकर बहुत ही अच्छी से चूसने लगा। जैसे जैसे अमर चूसता जाता प्रीति खुश होती जाती और थोड़ी देर बाद प्रीति भी मदहोश हो गई और उसने अपना सूट उतार दिया जैसे ही प्रीति ने अपना सूट उतारा तो अमर ने उसको अपने नीचे लिटा लिया। लेटने के बाद अमर ने उसको किस करना शुरू किया और उसको होठों को चूसने लगा। थोड़ी देर बाद अमर ने उसके हाथों पर भी किस करने लगा और किस करते करते हो उसके पेट पर किस करने लगा।

अमर उसकी योनि की तरफ किस करने लगा। लेकिन प्रीति ने सलवार पहना हुआ था। अब अमर उसका सलवार उतार कर उसकी योनि को चाटना शुरू कर दिया। जिससे उसकी योनि मे झाग निकलता रहता। वह खुश हो जाती  प्रीति की योनि में थोड़े थोड़े बाल थे। जो कि अमर को बहुत ही अच्छे लगते थे और उन बालों को अपने मुंह में लेता और जोर से दबा लेता काफी समय तक ऐसा करने के बाद उसने अपने मुह को बाहर निकाला और उसकी योनि पर लंड टच करने लगा। वह अपने से लंड उसकी योनि को रगड़ता जिससे वह काफी खुश हो गई। जैसी ही अमर इस तरीके से करने लगा। तो उसकी योनि से चिपचिपा निकलने लगा अब अमर से नहीं रहा गया। उसकी दोनों टांगों को खोलते हुए उसकी योनि में अपना लंड प्रवेश करवा दिया जैसे ही उसने प्रीति की योनि में डाला तो वह कहीं खो सा गया जैसे मानो उसे दुनिया की सबसे अच्छी खुशी मिल गई हो।

जैसे जैसे उसका पूरा लंड अंदर तक चला गया। तो वह कहने लगा प्रीति आई लव यू यह सुनकर प्रीति भी बहुत खुश हो गई। अब अमर ने उसके हाथों को दबा लिया और हाथों को दबाने के बाद उसने बड़ी ही जोर से अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया। जिससे की प्रीति की योनि की गर्मी बाहर निकलने लगी। अमर ने कम से कम 200 शॉट लगाएं क्योंकि प्रीति की योनि से बहुत ज्यादा गर्मी निकलने लगी थी। जिसको अमर का लंड भी सहन नहीं कर पाया और उसका वीर्य वहीं अंदर पता नहीं कब गिर गया उसको मालूम ही नहीं पड़ा। प्रीति को भी मालूम ही नहीं पड़ा कि उसका कब झड़ गया लेकिन अमर का मन अभी भी नहीं भरा था और अमर ने दोबारा से प्रीति को कहा कि मुझे करना है प्रीति ने भी कहा ठीक है तुम दोबारा से कर लो। उसके बाद अमर ने प्रीति को पहले तो घोड़ी बनाया और ऐसे ही चोदता रहा। प्रीति जोर जोर से चिल्लाती अमर और जोर जोर के धक्के मारता रहता। ऐसा करते करते अमर को 10 मिनट बाद एहसास हुआ कि उसका दोबारा से वीर्य पतन होने वाला है। उसने इस बार प्रीति के मुंह में अपने वीर्य को गिरा दिया। प्रीति ने भी उसको अपने गले में धीरे-धीरे उतार लिया और वह अमर को कहने लगी। यह तो बड़ा ही स्वादिष्ट है। मुझे पहले अच्छा नहीं लगता था। पर अब अच्छा लग रहा है। इसकी खुशबू भी कुछ अलग ही तरीके की है।

अब यह सब होने के बाद वह दोनों एक दूसरे के प्रति और ज्यादा प्यार में पड़ गए। उसके बाद हर रविवार को प्रीति और अमर मिलते और वह दोनों ऐसे ही एक दूसरे के साथ सेक्स करते।