माही मुझे चूत दे

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मेरा नाम रवि है मैं 11वीं कक्षा में पढ़ता हूं। जिस स्कूल में मैं पढ़ता हूं। मेरे पिताजी भी उसी स्कूल में अध्यापक है। और मेरी मां एक ग्रहणी है। मैं पुणे का रहने वाला हूं। और मैं स्कूल का सबसे अच्छा स्पोर्ट्स प्लेयर हूं। हमारी क्लास में 55 बच्चे हैं, जिनमें से सबसे शरारती मैं हूं । मै हर मैडम के नाम से मुठ  मारता हूं जो हमारे स्कूल में हैं। मैं पढ़ाई में बहुत अच्छा हूं। जितना मैं पढ़ाई में अच्छा हूं। उससे कई ज्यादा मेरा ध्यान शैतानियों पर रहता है। टीचर के क्लास में पढ़ाते समय मे चुपके से क्लास से बाहर चले जाता था। और टीचर को पता भी नहीं लगता था। मेरी इन शैतानियों की वजह से एक टीचर ने मेरे पापा से शिकायत कर दी, और फिर मुझे बहुत डांट पड़ी।

फिर भी मेरी शैतानियां कुछ कम नहीं हुई। एक बार हमारी क्लास में एक नई लड़की ने दाखिला लिया। वह दूसरे स्कूल से 10वी पास करके आई थी। उस के दूसरे दिन टीचर ने लड़की का परिचय करवाया। लड़की आगे से अपने बारे में बताने लगी। उसके पापा एक बिजनेसमैन थे, और वह दूसरे शहर से आई थी। उसका नाम रिया था। रिया बहुत ही शांत स्वभाव की थी। और उतनी ही सुंदर भी थी। मेरा तो उसको देखकर चोदने का मन कर रहा था। रिया भी स्पोर्ट्स की  बैडमिंटन प्लेयर थी। और मैं फुटबॉल प्लेयर। उसका एक छोटा भाई भी हमारे स्कूल में पढ़ता था। उसका नाम समीर था। फिर एक दिन हमारा कॉन्पिटिशन दूसरे स्कूल में था। हम खूब मेहनत कर रहे थे। मुझे स्पोर्ट्स में बिल्कुल भी इंटरेस्ट नहीं आ रहा था। लेकिन जब से रिया आई तब से मेरा भी स्पोर्ट्स में खूब मन लगने लगा। और मैं हमेशा उसकी वजह से अपनी क्लास में ही रहता था। वह मुझे अच्छी लगने लगी थी। रिया एक बहुत अच्छी प्लेयर थी। जब भी समय मिलता मैं रिया के साथ समय बिताता। रिया का कोई भी दोस्त नहीं था, क्योंकि उसका अभी न्यू एडमिशन था इसलिए लंच के समय मैं ही रिया के साथ लंच करने बैठता। मुझे रिया के साथ बैठकर लंच करना अच्छा लगता था। मैं अधिकतर रिया के भाई समीर से बातें करता था। धीरे धीरे उसी की वजह से मैं रिया से बाहर भी मिलने लगा।

एक बार हम स्कूल की तरफ से पिकनिक पर गए। मैं रिया के साथ ही बैठा था। जब हम पिकनिक पर गए तो हम दोनों अलग से एक पेड़ के नीचे बैठे थे। जहां कोई नहीं था सिर्फ मैं और रिया थी। उस समय मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि रिया से क्या बात करूं। उस समय मैं कुछ नहीं बोल पाया और रिया  भी शर्माती हुई उठ कर अपने नए दोस्तों के साथ चली गई। रिया को भी कुछ समझ नहीं आया कि वह क्या करें। फिर वह अपने कुछ दोस्तों के साथ जाकर बैठ गई। मैं उसे देखता रहा। मुझे वह अच्छी लगने लगी थी। पर मैं उसे उस समय तो बोल नहीं पाया।

दूसरे दिन क्लास में मैं रिया से बातें करने लगा। आगे से टीचर पढ़ा रहे थे। लेकिन हम दोनों का ध्यान पढ़ाई को छोड़कर बातों पर था। टीचर ने सिर्फ रिया को बात करते हुए देख लिया और टीचर ने रिया को डांटकर क्लास से बाहर कर दिया। मुझे यह सब देख कर बहुत बुरा लगा कि मेरी वजह से रिया को डांटकर क्लास से बाहर कर दिया गया। फिर मैं भी टीचर के पढ़ाते पढ़ाते चुपके से क्लास से बाहर चले गया। और फिर मैंने देखा तो रिया बाहर रो रही थी।

फिर मैंने उसे चुप कराते हुए अपने गले से लगा लिया और फिर उससे धीरे से सॉरी कहा। और उसके बाद वह हंसने लगी फिर हम दोनों बातें करने लगे। जैसे ही मैं उसे अपने दिल की बात बताता तब तक लंच की बेल बज चुकी थी। फिर हम दोनों ने साथ मिलकर लंच किया। रिया को एक ट्यूशन टीचर की जरूरत थी। उसने यह बात मुझे बताई तो मैंने उसे अपने पापा के बारे में बताया की मेरे पापा इसी स्कूल में अध्यापक हैं, और वह घर पर भी ट्यूशन पढ़ाते हैं। रिया ने मेरे पापा से ट्यूशन  के बारे में बात की रिया दूसरे दिन से मेरे घर आ ट्यूशन आने लगी मैं बहुत खुश हुआ मैं भी वहां उनके साथ पढ़ने बैठ जाता। और रिया को देखता रहता। ट्यूशन खत्म होने पर मैं रिया को छोड़ने भी जाता फिर ऐसे ही 1 दिन मैं रिया को उसके घर छोड़ने गया, और मैंने उसे अपने दिल की बात बताएं वह शर्माती हुई चली गई पर उसने मेरे बात का जवाब नहीं दिया। अगले दिन जब रिया स्कूल आई तो मैंने उससे दोबारा वही सवाल पूछा। फिर उसने जवाब में हां बोला। मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा। मैं रिया को ट्यूशन के बाद घुमाने ले कर जाता हम दोनों को इंजॉय करते।

रिया और मैं बहुत अच्छे से रहते। हम दोनों एक दूसरे के लिए हमेशा तैयार रहते कुछ भी काम के लिए ऐसे ही समय बीतता गया। एक दिन हम लोगों का कॉन्पिटिशन दूसरे स्कूल में था। हम लोगों को कंपटीशन के लिए वहां पर जाना था। यह 10 दिन का कंपटीशन था तो सब लोगों को वहीं पर रुकना था। वहीं पर हॉस्टल था जहां की अगल-बगल ही रिया और में रुके हुए थे। पहले दिन हम लोगों का मैच हुआ उसमें हम लोग जीत गए और सब लोग खुशी से इंजॉय करने लगे शाम को रिया मुझे मिली।

हरिया मेरे पास आए और बोलने लगी तुमने आज अच्छा खेला मुझे बहुत खुशी हुई है। तुम्हारा खेल देखकर मैंने भी उसको उसके कल के लिए शुभकामनाएं दी बैडमिंटन के लिए  मैंने रिया को किस कर दिया। जिससे वह थोड़ा शर्माती हुई वहां से चली गई। अगले दिन रिया का मैच भी था तो वह भी आज जीत चुकी थी। शाम को हम लोग दोबारा से वहीं पर मिले रिया ने मुझे कहा कल तूने मुझे किस किया। तो मुझे कुछ अच्छा महसूस हुआ। यह कहते हुए उसने भी मुझे जोर से किस कर लिया। मेरे होठों को चूसने लगी यह देखते हुए मैं भी उसकी तरफ आकर्षित हो गया। मैंने भी उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया। मैंने रिया से पूछा क्या हम दोनों सेक्स कर ले। रिया का भी पानी निकल रहा था। तो उसने मुझे मना नहीं किया। हम दोनों ने वहां पर एक कमरे में चले गए। जिस का ताला खुला हुआ था। वहां पर कोई नहीं था। वह कोई क्लासरूम थी वहां सिर्फ रिया और मैं थे। मैंने रिया को किस करने लगा। उसके पतले पतले होठ मुझे बहुत ही अच्छे लगते थे।

मैं उनको अच्छे से ही चूस रहा था। उसको भी अच्छा लग रहा था। उसके बाद मैंने उसके टी-शर्ट से उसके बूब्स बाहर निकाल लिए और अपने हाथों से दबाने लगा। सिर्फ जैसे ही मैंने उसके बूब्स अपने मुंह में लिया और चूसना शुरू किया। वह मस्त हो गई थी और जैसे-जैसे मैं उसे चूसता जाता उसकी सिसकियां निकलती जाती। वह थोड़ा शर्म आती रही थी लेकिन उसे मजा भी आ रहा था। मुझे उसके चेहरे पर साफ साफ दिखाई दे रहा था। मैंने उसकी स्कर्ट भी उतार दी और उसकी टी-शर्ट को भी उतार दिया। उसने पिंक कलर की फूल वाली पैंट पहनी हुई थी। जिसको देख कर मेरा मन बहुत ही खुश हो रहा था। अब जैसे ही मैंने उसकी बिना बाल वाली पिंक चूत मैं उंगली डाली वह थोड़ा-थोड़ा हिचकिचाने लगी पर मैं ऐसा करता ही रहा और उसकी चूत गीली हो गई। वह भी मस्त हो गई थी। मैंने उसको वहीं बेंच पर लिटा दिया। मेरा भी यह पहला अवसर ही था। इससे पहले मैंने कभी कुछ भी नहीं किया था।

मैंने उसकी पिंक मुलायम चूत को चाटना भी शुरू कर दिया। जिससे कि वह मादक आवाज निकालने लगी। मुझसे भी कंट्रोल नहीं हो रहा था। मैंने भी अपने लंड को अपनी पैंट से बाहर निकाल दिया। और उसकी नरम चूत पर धीरे-धीरे रगडने लगा जैसे-जैसे रगडता जाता वैसे-वैसे अंदर से पानी गिरता जाता। अब वह काफी चिपचिपा हो गया था। मैंने धीरे धीरे प्रयास किया अंदर डालने का परंतु हम दोनों का पहली बार ही था। इस वजह से मुझ से हो नहीं पाया फिर भी मैंने प्रयास किया और ना जाने इस बार कहां से मैंने इतने जोर के धक्का मारा की धीरे धीरे मेरा उसकी चूत मे चला गया। हम दोनों को ही बड़ी तेज दर्द हुआ और अच्छा भी लगा। फिर मैंने अंदर बाहर करना शुरू किया जैसे ही मैं यह करता। रिया दर्द से चिल्लाती परंतु मुझे अच्छा लगने लगा था। ऐसा करते करते काफी समय बाद ना जाने मेरा गीला पदार्थ निकलने लगा और मेरा झड़ गया। उसके साथ ही मेरा कड़क लंड पतला सा हो गया। मैंने लंड बाहर निकाला तो देखा उसमें खून लगा हुआ है। मैं डर गया काफी दिनों तक तो हम दोनों ही डरे रहे। पर जब हमें पता चला कि वह वर्जिन लड़की की चूत से निकलता है। तब हम दोनों खुश हुए और बीच-बीच में जब भी हमें मौका मिलता है हम दोनों सेक्स कर लेते हैं।