लंड ने चूत को अपना लिया

Antarvasna, desi kahani: मेरे और राजेश भैया के बीच में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था भैया पैसे के इतने ज्यादा लालची हो चुके थे कि वह पूरी तरीके से बदल चुके थे। जब से भैया की शादी हुई थी भैया और भाभी चाहते थे कि वह लोग अलग रहने के लिए चले जाएं मैं उनकी इस बात से बिल्कुल भी खुश नहीं था। अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर के घर लौटा तो मुझे भैया और भाभी के विचार बिल्कुल भी ठीक नहीं लगे लेकिन मैं कुछ कर भी नहीं सकता था। वह लोग हमारी पुरानी प्रॉपर्टी को बेचकर नया घर खरीदना चाहते थे और भैया और भाभी अलग रहना चाहते थे। इस बात से मां बहुत ही ज्यादा नाराज थी क्योंकि पापा का देहांत भी कुछ समय पहले ही हुआ था और वह लोग अलग रहने के बारे में सोच रहे थे इससे घर का माहौल बिल्कुल भी ठीक नहीं था। घर में भाभी और मां की कई बार इस बात को लेकर झगड़ा भी हो जाया करता था। मैंने मां को समझाया हमारी पुरानी प्रॉपर्टी को भैया और भाभी को बेचने दो और वह लोग अलग चले जाए तो ही ठीक रहेगा। मां मेरी बात मान चुकी थी और उसके बाद भैया और भाभी ने दूसरा घर खरीद लिया और वह अलग रहने लगे।

भैया कभी कबार घर आ जाया करते थे लेकिन उसके बाद कभी भी भाभी घर पर नहीं आई इस बात से मां बहुत ही ज्यादा नाराज थी। मैं ही मां की देखभाल कर रहा था भैया से उम्मीद करना शायद ठीक नहीं था इसी वजह से मैं भैया से सारी उम्मीदें छोड़ चुका था और मैं बहुत ही ज्यादा परेशान भी था क्योंकि मां की तबीयत भी कुछ दिनों से खराब थी। मैंने मां को डॉक्टर के पास जाने के लिए कहा लेकिन वह डॉक्टर के पास ही नहीं जाती थी। एक दिन मैं मां को डॉक्टर के पास ले गया तो डॉक्टर ने उनका चेकअप किया और पता चला कि उनको बी.पी की बहुत ज्यादा परेशानी है। वह बहुत ज्यादा टेंशन लेने लगी थी जिससे कि उनका बी.पी अब बहुत ज्यादा बढ़ने लगा था और कई बार वह बहुत ही ज्यादा टेंशन में आ जाया करती थी। मैं और भैया अब एक दूसरे से कम ही बात किया करते थे मैं भी नौकरी करने लगा था लेकिन मुझे भी लग रहा था कि मां को किसी ऐसे की जरूरत है जो कि उनकी देखभाल कर सकें। मैं चाहता था कि मैं अब शादी कर लूं लेकिन मैं किसी समझदार लड़की से शादी करना चाहता था जो कि घर को अच्छे से संभाल पाए और मां की भी देखभाल कर पाए। जब मैं पहली बार सुनीता को मिला तो सुनीता से मिलकर मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लगा।

सुनीता से मेरी मुलाकात मेरे दोस्त ने करवाई और सुनीता से जब मेरी मुलाकात हुई तो हम दोनों एक दूसरे को बहुत ही अच्छे से समझने लगे थे। सुनीता भी कई बार मेरे घर पर आने लगी थी मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि हम दोनों एक दूसरे के इतने नजदीक आ जाएंगे कि हम दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगेंगे। मैंने सुनीता को अपने बारे में सब कुछ बता दिया था और सुनीता को मेरे बारे में सब कुछ मालूम था इस बात से मैं बड़ा खुश था और सुनीता भी बहुत ज्यादा खुश थी कि वह मेरे साथ अपना आगे का जीवन बिताएगी। उसके परिवार वालों को भी इससे कोई आपत्ति नहीं थी और उसकी फैमिली ने हम दोनों के रिलेशन को स्वीकार कर लिया था। मैं इस बात से बड़ा खुश था और मां को भी सुनीता से कोई एतराज नहीं था। मां सुनीता को अपनी बहू के रूप में देखना चाहती थी और मैं इस बात से खुश था कि मां ने सुनीता और मेरे रिश्ते को पसन्द किया है। हम दोनों चाहते थे की हम दोनों कुछ महीनों में ही शादी कर ले मैंने सुनीता को भैया और भाभी के बारे में सब कुछ बता दिया था इसलिए सुनीता भी चाहती थी कि हम लोग जल्द से जल्द शादी कर ले। हम दोनों की सगाई तो हो गई थी और उसके बाद हम दोनों साथ में ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की भी कोशिश करने लगे।

जब भी हम दोनों साथ में होते तो हम दोनों को बहुत ही ज्यादा अच्छा लगता और मुझे इस बात की बड़ी खुशी होती कि हम दोनों साथ में ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश कर रहे हैं। हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थे और सब कुछ हमारी जिंदगी में अब ठीक चलने लगा था। जल्द ही हम दोनों की शादी का दिन भी तय हो गया और हम दोनों की शादी हो गई। जब सुनीता से मेरी शादी हुई तो उसके बाद सुनीता मां की देखभाल बड़े अच्छे से करती और मां भी इस बात से बड़ी खुश थी। मैं सुनीता को अपनी पत्नी के रूप में पाकर बड़ा खुश था और वह घर की जिस तरीके से देखभाल कर रही थी और उसने घर को जिस तरीके से संभाल लिया था उससे मैं बहुत ही ज्यादा खुश था और मां को भी यह बात बहुत ही अच्छी लगती थी। सुनीता मां की हर बात माना करती और वह मां के साथ बहुत ही अच्छे से रहती जिससे कि मुझे बहुत ही खुशी थी। मैं अपनी जॉब पर पूरी तरीके से ध्यान दे रहा था और मेरी जिंदगी में अब सब कुछ अच्छे से चल रहा था। सुनीता के साथ मैं जब भी होता तो मैं उसके साथ में समय बिताने की कोशिश जरूर किया करता क्योंकि मुझे सुनीता के साथ में काफी अच्छा लगता था और उसे भी मेरे साथ बड़ा अच्छा लगता था। जब भी हम दोनों साथ में होते तो हम दोनों एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश किया करते थे।

मैं नहीं चाहता था कि सुनीता को मैं किसी भी प्रकार की कोई कमी करूँ या फिर उसे कभी कोई कमी हो इसलिए मैंने उसे हमेशा ही वह प्यार दिया जिससे कि उसे कभी भी ऐसा न लगे कि मैं उससे दूर हूं। हालांकि मैं अपनी जॉब में बहुत बिजी था फिर भी मैं सुनीता के लिए समय निकाल ही दिया करता था। एक दिन सुनीता ने मुझसे कहा रजत मैं चाहती हूं हम लोग कुछ दिनों के लिए कहीं घूमने के लिए चले जाएं। मैंने सुनीता से कहा क्यों ना हम लोग कुछ दिनों के लिए जयपुर चले जाएं क्योंकि जयपुर में मामा जी रहते हैं उनके बेटे की शादी भी नजदीक आने वाली थी। मैंने सुनीता से जब यह बात कही तो सुनीता भी मेरी बात मान गई और वह कहने लगी फिर तो मां भी हमारे साथ चलेगी। मैंने सुनीता को कहां मां भी हमारे साथ चलेंगी और हम लोग अब जयपुर जाने की तैयारी में थे। जब हम लोग जयपुर गए तो जयपुर में हम लोगों ने मेरे मामा जी के लडके रोनक की शादी अटेंड की और वहां पर कुछ दिनों तक हम लोग रहे फिर हम लोग वापस लौट आए। जब हम लोग वापस लौटे तो उस दिन मुझे काफी ज्यादा थकान महसूस हो रही थी मैं और सुनीता लेटे हुए थे। कुछ देर तक मैं और सुनीता एक दूसरे से बातें कर रहे थे लेकिन फिर मुझे नींद आ गई और मैं सो गया लेकिन जब मेरी आंख खुली तो मैंने सुनीता को कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया। वह मुझे कहने लगी रजत क्या हुआ? मैंने सुनीता के होठों को चूम लिया और उसके बाद में उसको किस करने लगा।

जब मै उसको किस करने लगा तो उसकी गर्मी बहुत ही ज्यादा बढ चुकी थी। वह बिल्कुल भी अपने आपको रोक नहीं पा रही थी मुझे भी बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था जिस तरीके से मैं और सुनीता एक दूसरे की गर्मी को बढ़ाए जा रहे थे। हम दोनों ने एक दूसरे को काफी देर तक किस किया अब सुनीता इतनी ज्यादा गर्म हो चुकी थी वह अपने कपड़े उतारने लगी थी। वह अपने कपड़े उतार कर जब मेरे सामने नग्न अवस्था में थी तो मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरू कर दिया। उसके स्तनों को चूसकर मुझे मजा आ रहा था जिस तरीके से मैं उसके स्तनों का मजा ले रहा था उस से वह पूरी तरीके से गर्म होती जा रही थी और मैं भी बहुत ज्यादा गरम हो गया था।

हम दोनों की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी अब मैंने सुनीता की योनि पर अपने लंड को लगा दिया मैंने सुनीता की चूत पर जब अपने लंड को लगाया तो वह उत्तेजित हो गई थी। वह मुझे कहने लगी रजत अब तुम मेरी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दो। जैसे ही मैंने सुनीता की योनि के अंदर अपने लंड को डाला तो सुनीता को मजा आने लगा और धह बहुत जोर से सिसकारियां लेने लगी। अब वह बड़ी तेज आवाज में सिसकारियां ले रही थी मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था जिस तरीके से सुनीता और मैं एक दूसरे की गर्मी को बढ़ाए जा रहे थे। हम दोनों ने एक दूसरे की गर्मी को बहुत ज्यादा अच्छे से बडा दिया था। मैंने सुनीता की चूत का मजा काफी देर तक लिया जब वह पूरी तरीके से गर्म होने लगी थी तो मैंने सुनीता को कहा मेरा वीर्य बाहर की तरफ निकलने वाला है।

सुनीता की चूत मे मै अपने वीर्य को गिरा चुका था लेकिन अभी भी मेरी इच्छा पूरी नहीं हुई थी और मैं दोबारा से उसे चोदना चाहता था। मैंने जब सुनीता से कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो तो उसने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया था। वह जिस तरीके से मेरे लंड को चूस रही थी उसको बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था और मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था। सुनीता की गर्मी बढ गई थी। हम दोनों की गर्मी बहुत ही ज्यादा बढ़ रही थी मैंने अब सुनीता की चूत में अपने लंड को घुसा दिया। सुनीता की योनि में मेरा लंड जाते ही वह बहुत जोर से चिल्ला कर मुझे बोली मेरी चूत में दर्द होने लगा है। मुझे बहुत मजा आने लगा था मै और सुनीता एक दूसरे के साथ में सेक्स के मज़े ले रहे थे।

हम दोनों एक दूसरे के साथ बड़े अच्छे से मजे ले रहे थे मैं सुनीता की चूत बड़े अच्छे से मार रहा था। उसकी चूतड़ों को मैंने अपनी तरफ कर लिया था उसकी चूत के अंदर आसानी से मेरा लंड जा रहा था। मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था जब मैंने और सुनीता ने एक दूसरे के साथ में सेक्स संबंध बनाए और उसकी चूत में मैंने अपने माल को गिरा दिया था और अपनी गर्मी को शांत कर दिया था। सुनीता के ऊपर में अभी भी लेटा हुआ था वह मुझे कहने लगी रजत अपने लंड को बाहर निकाल लो। मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया और सुनीता के साथ में सो गया था। हम दोनो लेटे हुए थे सुनीता की चूत से पानी बाहर आ रहा था।