लंड मे हलचल होने लगी

Antarvasna, hindi sex stories: मैं अपने दोस्त महेश की शादी में चंडीगढ़ गया हुआ था मैं जब महेश  की शादी में गया तो महेश काफी खुश था महेश और मैं साथ में कॉलेज में पढ़ा करते थे। महेश की शादी में मैं दो दिनों तक चंडीगढ़ में रुका महेश की शादी हो जाने के बाद मैं वापस मुंबई लौट आया था। मैं जब वापस मुंबई लौटा तो उसके बाद मैंने अपने ऑफिस से रिजाइन दे दिया, मैं अपने ऑफिस से रिजाइन दे चुका था क्योंकि मैं अपना ही नया स्टार्टअप खोलना चाहता था। मैंने अपना नया स्टार्टअप खोलने के बारे में पूरा मन बना लिया था और थोड़े समय मे मैंने अपना नया स्टार्टअप शुरू कर दिया लेकिन मुझे उसमें काफी नुकसान हुआ मुझे उम्मीद नहीं थी कि मुझे इतना बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा। मैं काफी ज्यादा टूट चुका था आर्थिक रूप से मैं काफी ज्यादा परेशान होने लगा था और मानसिक रूप से भी मैं बहुत परेशान हो चुका था। मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ऐसी स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए मैं अधिकतर समय घर पर ही रहता था। एक बार मुझे महेश का फोन आया तो महेश ने मुझे समझाया और कहा कि अजीत जिंदगी में ऐसा होता रहता है तुमने अपनी पूरी मेहनत के साथ काम किया है तुम घबराओ मत जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा। महेश की बात सुनकर मुझे भी अच्छा लगा और मैंने दोबारा से काम शुरू किया धीरे-धीरे मेरा काम अच्छा चलने लगा और मैं काफी खुश भी था कि मेरा काम अच्छे से चलने लगा था।

पापा और मम्मी मेरे लिए रिश्ता भी ढूंढने लगे थे तो मैं जब पहली बार कविता से मिला तो मुझे कविता से मिलकर काफी अच्छा लगा कविता एक बड़ी बिंदास लड़की है। जब पहली बार मैं कविता से मिला तो मुझे ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगा की मैं उससे पहली बार मिल रहा हूँ। उसके बाद से मैं कविता से मिलने लगा क्योंकि हमारे परिवार वालों ने हम दोनों के रिश्ते की बात कर ली थी इसलिए हम दोनों की सगाई जल्दी होने वाली थी। जब कविता के साथ मेरी सगाई हुई तो मैं बहुत खुश था कि कविता के साथ मेरी सगाई हो चुकी है, कविता के साथ मेरी सगाई हो जाने के बाद हम दोनों का एक दूसरे से मिलना कुछ ज्यादा ही होने लगा था हम दोनों एक दूसरे को काफी मिलने लगे थे। एक दिन हम लोग मूवी देखने के लिए गए तो उस दिन कविता ने मुझे अपने रिलेशन के बारे में बताया कविता चाहती थी कि वह मुझसे कुछ भी ना छुपाए इसलिए उसने मुझसे अपने रिलेशन के बारे में बताया।

मैंने कविता को कहा मुझे इससे कोई भी फर्क नहीं पड़ता है। कविता मेरी इस बात से बड़ी खुश थी और जल्द ही हम दोनों की शादी का दिन भी तय हो गया उसके बाद हम दोनों की शादी होने वाली थी। जब हम दोनों की शादी का दिन तय हो गया तो उसके बाद कविता और मैंने साथ में ही शॉपिंग की। हम दोनों शादी की शॉपिंग कर चुके थे और कविता चाहती थी कि हम दोनों की शादी बड़े ही अच्छे से हो उसके लिए कविता ने अपनी एक फ्रेंड को ही सारे अरेंजमेंट की जिम्मेदारी सौंप दी। उसकी फ्रेंड जो कि एक वेडिंग प्लानिंग की बड़ी कंपनी चलाती है उसने ही हम दोनों की शादी का सारा अरेंजमेंट किया। कविता और मेरी शादी हो चुकी थी हम दोनों की शादी बहुत ही धूमधाम से हुई पापा और मम्मी भी बहुत खुश थे कि मेरी शादी कविता से हो चुकी है। कविता से मेरी शादी हो जाने के बाद हम दोनों ने मेरे बिजनेस को आगे बढ़ाने की सोची और हम दोनों बिजनेस में पूरी तरीके से मेहनत करने लगे। कविता चाहती थी कि वह भी अपनी जॉब छोड़ दे कविता ने अपनी जॉब नहीं छोड़ी थी लेकिन अब कविता ने अपने ऑफिस से रिजाइन दे दिया और वह मेरे साथ बिजनेस में पूरा मन लगाकर काम करने लगी। हम दोनों का काम अच्छे से चलने लगा था और अब मैं काफी खुश था कि मैं अपनी जिंदगी में वह मुकाम हासिल कर पा रहा हूँ जिसे कि मैं चाहता था। काफी समय बाद मेरी महेश से उस दिन फोन पर बात हुई महेश ने मुझे कहा कि अजीत मुझे तो हमेशा से तुम्हारे काबिलियत पर पूरा भरोसा था और मैं तुम्हें कहता ना था कि जल्द ही तुम्हारी जिंदगी में सब कुछ ठीक हो जाएगा। मैंने महेश से कहा कि क्यों ना हम लोग कुछ दिनों के लिए कहीं साथ में चलें महेश कहने लगा कि ठीक है।

मैंने और महेश ने कुछ दिनों के लिए शिमला जाने के बारे में सोचा मैंने इस बारे में कविता को कुछ बताया नहीं था मैं चाहता था कि कविता को मैं सरप्राइज दूंगा। जब हम दोनों ने सारी प्लानिंग कर ली तो उसके बाद मैंने कविता को इस बारे में बताया और वह इस बात से काफी खुश थी। महेश और मैं काफी समय बाद मिलने वाले थे जब महेश की पत्नी और महेश शिमला आए तो मैं और कविता भी शिमला पहुंच चुके थे हम लोग शिमला में ही मिले। कुछ दिनों तक हम लोग शिमला में रहे कविता और मैं भी काफी खुश थे कि हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिता पा रहे हैं। हम दोनों काम में इतना बिजी रहते थे कि हम दोनों के पास एक दूसरे के लिए बिल्कुल भी समय नहीं हो पाता था लेकिन उस वक्त मैं और कविता बड़े खुश थे कि हम दोनों एक दूसरे के साथ अच्छा समय बिता पा रहे हैं।

हम लोग शिमला में करीब 5 दिन तक रुके और उसके बाद हम लोग वापस लौट आए। हम लोग वापस लौट आए थे और वापस आने के बाद हम दोनों अपने काम में ध्यान देने लगे। एक रात हम दोनो डिनर करने के बाद साथ मे लेटे हुए थे जब हम लोग साथ मे लेटे थे तो मैने कविता से कहा मुझे आज सेक्स करने का मन है कविता भी मेरी बात मान गई थी। मैंने कविता को अपनी बांहो मे लिया। मैं कविता को महसूस करने लगा था मैंने उसके बदन को महसूस किया और कविता के होंठों को मैं अच्छे से चूमने लगा। मैं कविता के गुलाबी होठों को जिस प्रकार से चूम रहा था उससे मुझे बड़ा मजा आ रहा था। मैने कविता के होंठो को काट दिया था वह बहुत उत्तेजित होती जा रही थी। कविता की उत्तेजना बढ़ने लगी थी मैं रह नहीं पा रहा था और ना ही कविता रह पा रही थी। हम दोनों एक दूसरे के लिए तड़पने लगे थे मैंने कविता ओ कस कर पकड लिया था। मैंने कविता की नाइटी को उतारकर उसक ब्रा को खोल दिया था अब कविता के स्तनों को मैंने अपने हाथों से दबाया तो वह उत्तेजित होने लगी थी।  कविता की उत्तेजना बहुत ज्यादा बढने लगी थी। मैंने कविता के स्तनों को अपने मुंह में ले लिया था और मैं उसके स्तनो को बड़े अच्छे से चूसने लगा था। मैने उसके स्तनों को अच्छे से चूसा वह बहुत ही ज्यादा गरम हो चुकी थी। मैंने कविता से कहा तुम्हारी चूत के अंदर लंड को डाल देता हूं। कविता बोली मै तुम्हारी ही तो हूं। मैंने अब अपने लंड को पजामे से बाहर निकाला। कविता ने उसे अपने मुंह मे लिया और वह मेरे लंड को चूसने लगी उसको मजा आने लगा था और मुझे भी मजा आने लगा। मैने कविता से कहा तुम बहुत अच्छी हो वह अब मेरे लंड को चूसने लगी थी। मेरे लंड ने पानी छोड दिया था। मै अब उसकी चूत पर अपने लंड को रगडा और उसे मज़ा आने लगा। मेरे लंड से पानी बाहर आ रहा था और कविता की चूत भी पानी छोडने लगी थी। मेरा लंड अब पूरी तरीके से गर्म हो गया था। कविता की योनि से पानी निकाल रहा था मैं बिल्कुल भी अपने आपको रोक नहीं पा रहा था। मैंने कविता को कहा लगता है अब मेरा लंड तुम्हारी चूत के लिए तडप रहा है। मैने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर डालना शुरू किया तो मेरा लंड कविता की चूत के अंदर तक चला गया था।

मेरा मोटा लंड कविता की चूत को फाडता हुआ अंदर की तरफ घुस चुका था और कविता की चूत मे हलचल मच गई थी वह बहुत जोर से चिल्ला रही थी। कविता की तडप अब बढ चुकी थी वह बहुत ज्यादा तड़पने लगी थी। कविता मुझे बोली और तेजी से चोदो अब वह मुझे अपने पैरों के बीच मे जकड़ने लगी। मैं उसको तेजी से चोद रहा था मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। मैंने कविता के स्तनों को चूसा अब मेरी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। मैंने कविता की चूत को फाड कर रख दिया था मुझे कविता को चोदना में बड़ा मजा आ रहा है। कविता की चूत से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर निकलने लगा था। मुझे कविता को धक्के मारने मे आनंद आता। मेरा लंड भी छिल चुका था। मुझे एहसास हो गया था मेरे अंडकोषो से मेरा वीर्य बाहर गिरने वाला है। जब मेरा माल बाहर गिरा तो मैंने अपने लंड को कविता की चूत से बाहर निकाला। कविता बोली आज तुमने मुझे पूरे मजे दे दिए। मैंने कविता से कहा मेरा मन भरा नहीं है मैने दोबारा से कविता की चूत मे लंड लगाया और उसकी चूत के अंदर लंड को घुसा दिया।

जब मैं कविता को धक्के मार रहा था तो मैंने कविता के पैरों को अपने हाथों से कस कर पकडा हुआ था। मैंने कविता की जांघो को कसकर पकड़ा हुआ था मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। कविता की चूत से मेरा लंड टक्करा रहा था। मेरी गर्मी बढती जा रही थी मुझे मजा आ रहा था। मैने कविता को उल्टा लेटा दिया मैंने उसे उल्टा लेटाया और उसकी चूत के अंदर बाहर लंड को तेजी से करने लगा था। उसकी चूत के अंदर बाहर मेरा लंड हो रहा था मुझे बहुत मजा आ रहा था। कविता मेरा साथ बड़े ही अच्छे से दे रही थी उसकी चूतड़ों को मैंने पूरी तरीके से लाल कर दिया था। कविता की चूतड़ों पर मुझे प्रहार करने मे मजा रहा था। मुझे कविता को चोदने मे मजा आ रहा था। मैंने उसे बहुत देर तक चोदा जब मुझे लगने लगा कि मैं अब अपने आपको रोक नहीं पाऊंगा तो मैंने  उसकी चूत के अंदर अपने वीर्य को गिराकर अपनी इच्छा को पूरा किया।हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा खुश है।