लंड का मजा एक चूत ने लिया

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मेरा नाम मुकेश है और मेरी उम्र 35 वर्ष है। मेरे घर में मेरी पत्नी और मेरे तीन छोटे बच्चे हैं। मेरे माता-पिता कभी कबार हमारे पास रहने के लिए आ जाते हैं। नहीं तो अधिकांश वह अपने गांव में ही रहते हैं। मैं आगरा शहर में रहता हूं और एक सरकारी कर्मचारी हूँ। मुझे घर में रहने का मौका बहुत कम मिलता है। क्योंकि अधिकांश हमारे ऑफिस में काम रहता है इसकी वजह से मैं ज्यादातर व्यस्त ही रहता हूं। जिसकी वजह से कई बार मेरी पत्नी भी मुझे कहती थी कि थोड़ा समय हमें भी दे दिया करो लेकिन उन्हें मेरी मजबूरी पता थी कि मैं उन्हें ज्यादा समय नहीं दे सकता। इसलिए मेरी पत्नी भी इन बातों को समझती है और वह मुझे ज्यादा नहीं बोलती लेकिन जब भी मेरी छुट्टियां होती थी तो मैं अपने परिवार के साथ कहीं घूमने निकल जाता था। या फिर घर पर ही हम लोग बहुत इंजॉय करते थे।

मुझे मेरे परिवार से बहुत ज्यादा लगाओ और प्रेम है  हमारे पड़ोस में शुक्ला जी रहते हैं शुक्ला जी भी एक सरकारी कर्मचारी हैं और उनके घर में उनकी पत्नी और एक लड़का और एक लड़की है। उनकी उम्र भी 40 वर्ष के आसपास की है। लेकिन ना जाने वह लोग हमसे किस बात में आगे जाने की कोशिश करते रहते हैं। मैं कुछ भी नया सामान लेकर आता था तो वह भी कुछ दिनों में अपने घर पर नया सामान ले आते थे। कुछ दिनों पहले ही मैंने एक नई कार खरीदी। तो वह भी एक नई गाड़ी ले आए। पर बातें वह हमसे बहुत अच्छी करते हैं और हर बात में यही दिखाने की कोशिश करते हैं कि हम तुम्हारे साथ हैं और हम एक अच्छे पड़ोसी हैं लेकिन मुझे उन्हें देखकर कहीं से भी ऐसा नहीं लगता कि वह एक अच्छे पड़ोसी हैं। उनके अंदर सिर्फ जलन की भावना है और इससे अधिक कुछ भी नहीं। लेकिन मैं भी इन बातों को इग्नोर कर देता था। अब मैं ज्यादातर अपने काम में ही व्यस्त रहता हूं। इस वजह से अपनी पत्नी को समझाता हूं कि इन लफड़ों में ना पड़े और अपने घर पर ही ध्यान दें। मेरी पत्नी बहुत समझदार है। वह ज्यादा इन लफड़ो में नहीं पड़ती और ना ही उनके घर पर उतना अधिक जाती है, लेकिन शुक्ला जी की पत्नी का हमारे घर पर अधिकांश आना जाना होता ही था। उनका नाम प्रीति था।

हमे ऐसा लगता था कि शायद वह हमारी जासूसी करने के लिए आती होंगी। या फिर जानकारी इकट्ठा करने के लिए कि हम लोग क्या कर रहे हैं या फिर हमारे घर पर कुछ नया सामान तो नहीं आ गया। वह हमारे पड़ोस में रहते हैं तो इस वजह से हम उन्हें इग्नोर भी नहीं कर सकते। जब भी उनकी पत्नी हमारे घर पर आती हैं तो हम काफी खातिरदारी करते हैं। उनकी पत्नी किसी ना किसी बहाने से हमारे घर पर आ ही जाती हैं। उनके बहाने इस तरीके के होते हैं कि आज हमारे घर पर चीनी खत्म हो गई है, कभी हमारे घर पर टमाटर नहीं है। इस तरीके के बहाने लेकर वह हमारे घर पर सामान लेने आ जाती हैं। मेरी पत्नी भाभी को कभी भी मना नहीं करती है और वह उन्हें सामान दे ही देती है। मेरी पत्नी और प्रीति भाभी किटी पार्टीयो  में भी जाते हैं। क्योंकि इसे मेरी पत्नी का मन भी थोड़ा बहल जाता है और वह हर किटी पार्टी में चली जाती है। अभी कुछ दिनों पहले ही मैंने एक नया घर खरीद लिया। तो ना जाने प्रीति भाभी को हमारे नए घर के बारे में कहां से जानकारी मिल गई और वह तुरंत ही हमारे घर पर पहुंच गई और मेरी पत्नी से सारी जानकारी लेने लगी कि आपने नया घर  कितने में लिया है और कहां पर लिया है। मेरी पत्नी ने उन्हें सब कुछ बताया।

इत्तेफाक से उस दिन मेरी भी छुट्टी थी और मैं भी उनके पास में ही बैठ गया। अब प्रीति भाभी  मुझसे भी पूछने लगी कि आपने वह घर कितने में लिया है। तो मैंने उन्हें सारी जानकारियां दी। वह मुझसे पूछने लगी की यदि कोई दूसरा घर भी वहां आसपास बिकने के लिए हो तो हमें वह घर दिलवा दीजिएगा। हम लोग भी नया घर लेने की  सोच ही रहे थे।  मैं अपने पति से इस बारे में बात कर लूंगी। मैं तो यह सोच रहा था कि किसी तरीके से इनसे हमारा पीछा छूटा है। लेकिन वह तो हमारे पीछे मधुमक्खी की तरह  पढ़े हैं। इन्होंने तो जैसे सोच ही रखी होगी कि जहां जहां ये जाएंगे, वही इनके पीछे पीछे हम भी आएंगे। मैंने उन्हें कहा बिल्कुल जब भी वहां पर कोई घर खाली होगा तो मैं आपको बता दूंगा लेकिन ना जाने उन्होंने कहां से पता करवा लिया की यहां पर मैंने घर लिया है। उन्होंने उसके बगल में ही एक घर ले लिया। अब वह हमारे घर पर आए और और हमें मिठाई खिलाने लगे। मैंने उन्हें पूछा यह किस खुशी में है? तो वह कहने लगी कि हमने नया घर ले लिया है। मैंने उनसे पूछा कि आपने कहां पर है घर लिया है?  वो कहने लगी जहां पर आपने लिया है उसी के बगल में हमने भी ले लिया। मैं यह सुनकर थोड़ा हक्का-बक्का सा रह गया।  मैं कुछ ज्यादा बोल भी नहीं पाया और चुपचाप मिठाई खाई और उसके बाद मैं घर से अपने ऑफिस के लिए निकल पड़ा। मैं सारे दिन भर ऑफिस में यही सोच रहा था कि यह लोग किस तरीके से हमारा पीछा छोड़ेंगे और हम लोग कब सुकून से अपनी जिंदगी जी पाएंगे।

एक दिन प्रीति भाभी हमारे घर पर आई उस दिन मेरी बीवी घर पर नहीं थी। वह मुझसे पूछने लगी तुम्हारी बीवी कहां है। मैंने उनसे कहा कि वह घर पर नहीं है। आप बैठे कुछ काम था वो कहने लगी नहीं बस ऐसे ही बैठने के लिए आई थी। मैंने उनसे कहा कभी हमारे साथ भी बैठ जाया कीजिए।  प्रीति भाभी यह सुन कर मेरे पास ही बैठ गई और मैंने उन्हें कहा कि आप कुछ लेंगे। वह कहने लगी नहीं अभी नहीं लूंगी। मैंने भी उनसे ऐसे ही पूछ लिया क्या शुक्ला जी आपको अच्छे से  चोदते नही है। वह कहने लगी हां अब उनमें वह ताकत तो नहीं है पर फिर भी थोड़ा बहुत कर लेते हैं। मैंने उन्हें कहा कि कभी हमारे पास भी आ जाओ तो हम आपको अपनी ताकत दिखा देंगे। वो कहने लगी क्या सच में मैंने जैसे ही अपना लंड दिखाया तो वह कहने लगी कि आपका तो वाकई में बहुत ज्यादा मोटा है लगता है मुझे अपनी चूत मे लेना ही पड़ेगा। जैसे ही उसने अपनी सलवार को नीचे किया तो मैंने उसकी बड़ी सी गांड को अपने हाथ से दबाना शुरु कर दिया। प्रीति भाभी तुरंत ही जबरदस्त तरीके से मेरे लंड को अपने मुंह में लेते हुए चूसने लगी। वह जब भी मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले जाती तो बड़े ही अच्छे से उसे चुसती। उसने चूस चूस कर वह टमाटर जैसा लाल कर दिया था मैं उसे कहने लग प्रीति भाभी आप तो बड़ी ही अच्छे से चुसती हैं आपका तो कोई जवाब ही नहीं है।

आप तो मेरी पत्नी से भी अच्छा चूस रही हैं वह यह सुनकर तो अब मेरे लंड को दोबारा से चूसने लगी और उसने अपने पूरे गले तक ही मेरे लंड को उतार लिया। मैंने भी तुरंत उसके दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए अपने लंड को उसके चूत के अंदर घुसेड़ दिया। जैसे ही मैंने अपना लंड डाला तो वह बड़ी तेज चिल्लाई और कहने लगी अरे आपका तो कुछ ज्यादा ही मोटा है मुझसे बर्दाश्त ही नहीं हो रहा। मैंने उसे कहा यह तो अभी सिर्फ ट्रायल है अभी आप देखते रहो आगे क्या होगा। मै उसे बड़ी ही तेजी से झटके मारने लगा। जैसे ही मैं उसे झटके मारता तो उसका शरीर पूरा हिल जाता लेकिन मैं इतने में संतुष्ट नहीं हुआ। मैं उसे और भी ज्यादा चोदना चाहता था ऐसे ही मैं उसे काफी देर तक चोदता रहा तो मेरा वीर्य उसकी योनि में जाकर गिर गया। अब मैंने प्रीति भाभी को उठाया और अपने लंड पर तेल लगाते हुए उसकी गांड में घुसेड़ दिया। जैसे ही मैंने उसकी गांड में डाला तो मुझे बहुत ज्यादा शांति मिली और मैं ऐसे ही अब बड़ी तेजी से झटके मारने लगा। उसकी सांसे रुक जाती मै बड़ी तेजी से झटके मारता और वह मुझे कहने लगी अरे आप तो बड़े ही तेजी से करते जा रहे हैं। मैंने उसे कहा यही तो मेरा स्टाइल है करने का ऐसे शुक्ला जी भी करते हैं। जैसे ही मैंने उसे यह बात कही तो उसने भी अपनी चूतडो को मेरे लंड पर धक्के मारना शुरू कर दिया वह भी मेरा पूरा साथ देती। उसकी बड़ी-बड़ी चतडे मेरे लंड पर लगती तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। एक समय बाद मेरा वीर्य भी उसके चूतड़ों के अंदर ही गिर गया।