कोमल बदन चुदने के लिए तैयार था

Antarvasna, desi kahani: सुबह के 9:00 बज रहे थे और घर की डोर बेल कोई काफी देर से बजा रहा था उस वक्त मैं बाथरूम में था। मैंने अपनी पत्नी को आवाज देते हुए कहा कि घर की डोर बेल कोई काफी देर से बजा रहा है। उसने जब दरवाजा खोला तो मैं भी नहा कर बाथरूम से बाहर निकल रहा था तभी मैंने देखा कि महेश घर पर आया हुआ है, मैंने महेश को कहा कि मैं बाथरूम में था इसलिए दरवाजा नहीं खोल पाया महेश कहने लगा कोई बात नहीं। मेरी पत्नी भी तब तक पानी ले आई और वह कहने लगी कि मैं किचन में थी इसलिए मुझे सुनाई नहीं दिया। कुछ दिनों से डोरबेल काफी धीमी आवाज में बज रही थी इस वजह से हम डोर बेल की आवाज ढंग से सुन नहीं पाए। मैंने महेश को कहा आज तुम सुबह के वक्त घर पर आ गए क्या कोई जरूरी काम है तो महेश कहने लगा कि हां रोहित मुझे कुछ जरूरी काम था मुझे तुमसे मिलना भी था और तुमसे मुझे यह पूछना था कि क्या तुम कुछ दिनों के लिए मेरे साथ चंडीगढ़ चल सकते हो। मैंने महेश को कहा लेकिन चंडीगढ़ में भला मैं क्या करूंगा। महेश का परिवार चंडीगढ़ में रहता है और वह अपनी पत्नी के साथ दिल्ली में रहता है।

महेश ने मुझे अपने साथ चलने के लिए कहा तो मुझे भी उसकी बात माननी पड़ी और मैं महेश के साथ चंडीगढ़ जाने को तैयार हो गया। मैं महेश के साथ चंडीगढ़ चला गया महेश मेरा अच्छा दोस्त है इसलिए मैं उसकी बात भी नहीं टाल सकता था। जब मैं उसके साथ चंडीगढ़ गया तो महेश की पूरी बात मुझे तब समझ आई जब हम लोग चंडीगढ़ गए। महेश के पापा की तबीयत ठीक नहीं थी और उनकी एक प्रॉपर्टी को लेकर उसके चाचा ने उन पर केस कर दिया था इसलिए महेश मेरी मदद चाहता था। चंडीगढ़ में ही मेरे मामाजी ही रहते हैं वह एक बड़े वकील हैं इस वजह से मैंने उन्हें ही मदद के लिए कहा। उन्होंने हमारी मदद की और महेश को उनकी प्रॉपर्टी का पूरा हिस्सा मिल चुका था, उसके चाचा ने उन पर जो केस किया था वह बेबुनियाद था उस केस में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं थी। उसके चाचा काफी ज्यादा लालची किस्म के हैं और वह लोग महेश के परिवार को बिल्कुल भी पसंद नहीं करते इसी वजह से उन्होंने उन पर झूठा केस किया था परन्तु अब सब कुछ ठीक हो चुका था तो महेश और मैं वापस दिल्ली लौट आए।

जब हम लोग दिल्ली वापस लौटे तो महेश ने मुझे कहा कि रोहित यह सब तुम्हारी वजह से ही हुआ है मैंने उसे कहा ऐसा कुछ भी नहीं है तुम मेरे अच्छे दोस्त हो और यदि तुम मुझे यह बात पहले ही बता देते तो मैं मामा जी से फोन पर बात कर लेता। महेश मुझे कहने लगा कि मैं चाहता था कि तुम भी मेरे साथ चंडीगढ़ चलो। हम लोग कुछ दिन चंडीगढ़ में रहे और फिर वापस दिल्ली लौट आए थे मैं जब दिल्ली वापस लौटा तो पापा को भी यह बात पता चल चुकी थी। पापा और मम्मी भी अब गांव से वापस लौट चुके थे वह कुछ दिनों के लिए गांव गए हुए थे, जब वह वापस लौटे तो उन्होंने मुझसे कहा कि रोहित क्या तुम चंडीगढ़ गए थे तो मैंने पापा से कहा हां मैं चंडीगढ़ गया हुआ था। मैंने उन्हें बताया कि मैं महेश के साथ चंडीगढ़ गया था मैंने उन्हें सारी बात बताई तो वह मुझे कहने लगे कि बेटा हमे पता है हमें तुम्हारे मामा जी ने सारी बात बता दी थी। मेरा प्रॉपर्टी का काम है और मैं पिछले 10 वर्षों से प्रॉपर्टी का ही काम कर रहा हूं मेरा काम काफी अच्छे से चल रहा है और मैं अपने काम से बहुत खुश हूं। एक दिन मैं अपने ऑफिस में बैठा हुआ था उस दिन मेरे पास एक व्यक्ति आए उन्होंने मुझसे कहा कि उन्हें एक घर खरीदना है। मैंने उनसे कहा कि हां आपको मैं घर दिखा दूंगा उन्होंने मुझे कहा ठीक है आप मुझे कल घर दिखा दीजिएगा। मैंने उन्हें एक प्रॉपर्टी दिखाई और उन्हें वह पसंद आ गई उसके बाद उन्होंने वहां घर खरीद लिया। वह उस घर को खरीद चुके थे और कुछ दिनों बाद वह लोग मेरे पास आये उनके साथ उनकी पत्नी भी थी, उन व्यक्ति का नाम रमेश है और उनकी पत्नी का नाम आशा है। वह लोग मेरे पास आये तो उन्होंने मुझे कहा कि हमें वह घर बेचना है मैंने उनसे जब इसका कारण पूछा तो उन्होंने मुझे बताया कि जो हमारे पड़ोस में रहते हैं वह बिल्कुल भी ठीक नहीं है और कई बार उनका हमसे झगड़ा हो चुका है इसलिए हम उस प्रॉपर्टी को बेचना चाह रहे थे। मैंने भी उनसे कहा कि ठीक है आप कुछ दिन का इंतजार कीजिए जैसे ही मुझे वहां पर रहने के लिए कोई अच्छे लोग मिल जाते हैं तो मैं आपकी प्रॉपर्टी बिकवा दूंगा। वह कहने लगे कि आप जल्दी से हमारी प्रॉपर्टी बिकवा दीजिए।

वह उस घर को बेचना चाहते थे और उन्होंने अपना पूरा मन बना लिया था कि वह उस घर को बेच देंगे। जल्द ही उस प्रॉपर्टी की डील हो गई और उनका घर बिक चुका था। अब मैंने ही उन्हें दूसरा घर दिलवाया उन लोगों का मुझसे काफी अच्छा संबंध हो गया था और वह लोग मेरे घर पर भी आने लगे थे। रमेश और आशा जब भी हमारे घर पर आते तो मेरी पत्नी को भी काफी अच्छा लगता क्योंकि उन लोगों के व्यवहार से मेरी पत्नी भी बहुत खुश थी। उनके पास कभी भी कोई व्यक्ति अगर कोई घर खरीदने या फिर किसी प्रॉपर्टी को लेकर पूछता तो वह मुझे बता दिया करते उनसे हम लोगों का संबंध काफी अच्छा होने लगा था इसलिए उन लोगों का हमारे घर पर भी अक्सर आना-जाना होने लगा था। एक दिन मैंने रमेश और आशा को घर पर डिनर के लिए इनवाइट किया उस दिन मैंने अपनी पत्नी महिमा को इस बारे में बता दिया था तो वह रात का डिनर बना रही थी थोड़ी ही देर बाद रमेश और आशा भी घर पर आ गए जब वह लोग घर पर आए तो मैं उन लोगों के साथ ही बैठा हुआ था। आशा महिमा की मदद करने के लिए किचन में चली गई और वह महिमा के साथ ही खाना बनाने लगी मैं और रमेश साथ में बैठे हुए थे और हम लोग बातें कर रहे थे। मैंने रमेश से कहा कि आपकी जॉब कैसी चल रही है तो वह मुझे कहने लगे कि मेरी जॉब तो अच्छी चल रही है उन्होंने मुझे बताया कि उनका प्रमोशन भी कुछ दिनों पहले ही हुआ है वह एक अच्छी मल्टीनैशनल कंपनी में जॉब करते हैं।

उनका प्रमोशन कुछ दिनों पहले हुआ था तो मैंने उन्हें उसके लिए बधाई दी उस दिन हम लोगों ने साथ में डिनर किया और उसके बाद वह लोग अपने घर चले गए। रमेश और आशा डिनर करने के बाद घर चले गए उसके बाद भी वह लोग अक्सर हमारे घर पर आते थे और हम लोग भी उनके घर पर जाते थे। एक दिन मैं रमेश को मिलने के लिए घर पर गया था उस दिन आशा घर पर थी आशा ने मुझे कहा रमेश घर पर नहीं है। मैंने आशा से पूछा लेकिन रमेश कब तक आएंगे? वह मुझे कहने लगी वह बस थोड़ी देर बाद आते ही होंगे। आशा मुझे कहने लगी मैं आपके लिए चाय बना कर ले आती हूं। वह मेरे लिए चाय बना कर ले आई लेकिन जब वह मेरे लिए चाय बना कर लाई तो आशा का पैर स्लिप हो गया और वह मेरी बाहों में आ गई। जब वह मेरी बाहों में आई तो उसके स्तन मुझसे टकराने लगे मेरे अंदर की आग उसने पूरी तरीके से बढा कर रख दी थी। मेरी बढ़ती हुई गर्मी अब इतनी बढ़ चुकी थी कि मैं आशा के गोरे बदन को महसूस करना चाहता था मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया और उसके स्तनों को दबाना शुरू किया तो आशा को भी इस से कोई एतराज नहीं था उसे मजा आ रहा था। आशा के स्तनो को दबाकर मुझे अब मजा आने लगा था और मुझे तो बड़ा अच्छा लगा था जब मैं उसके होठों को चूम रहा था और उसके स्तनों को मैं दबा रहा था। मैं और आशा एक दूसरे के बदन की गर्मी को बढ़ाते ही जा रहे थे हम दोनों ने अब एक दूसरे की गर्मी को इतना बढ़ा दिया था कि मैंने जब आशा के बदन से उसके कपड़ों को उतारना शुरू किया तो वह मेरे लिए बहुत ज्यादा तड़पने लगी थी।

वह मुझे कहने लगी मुझे अच्छा लग रहा है मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो आशा ने उसे अपने मुंह में लेकर सकिंग करना शुरू कर दिया था। जब आशा ने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग करना शुरू कर दिया और वह जिस प्रकार से मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर उसे अच्छे से चूस रही थी तो मुझे बहुत मजा आ रहा था। उसने मेरे अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढा दिया था लेकिन आशा की गर्मी भी अब बहुत ही ज्यादा बढ़ चुकी थी ना तो मै रह पा रहा था और ना ही आशा अपने गर्मी को बर्दाश्त कर पाई। मैंने जब आशा से कहा अब मैं तुम्हारी चूत में लंड डालने के लिए तडकने लगा हू। आशा भी इस बात के लिए तैयार थी आशा की योनि को मैंने बहुत देर से चाटा और उसकी योनि को चाटकर मैंने उसकी चूत से निकलते हुए पानी में बढ़ोतरी कर दी थी। उसकी चूत से निकलता हुआ पानी इतना ज्यादा बढ़ चुका था कि अब वह मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए तडपने लगी थी। वह अपने पैरों को आपस में मिलाती जब मैं उसकी चूत को चाट रहा था तो वह मेरे बालों को खिंच रही थी मैं समझ चुका था कि वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी है इसलिए मैंने अपने मोटे लंड को आशा की योनि पर लगाया।

जब मैंने अपने मोटे लंड को आशा की योनि पर लगाया तो आशा की चूत के अंदर तक मैं अपने लंड को डालने लगा। आशा की चूत के अंदर तक मेरा लंड जा चुका था उसे भी मजा आने लगा था और मुझे भी बड़ा ही आनंद आने लगा था। मुझे इतना मजा आ रहा था कि वह जोर से चिल्ला कर मुझे कहती ऐसे ही मुझे बस धक्के मारते रहो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। मेरे अंदर की गर्मी बढ़ चुकी थी मैं आशा की चूत के अंदर बाहर लंड को किए जा रहा था और मै अपने अंदर की गर्मी को बढ़ा रहा था। आशा की योनि से निकलती हुई गर्मी ज्यादा बढ चुकी थी अब मेरा माल बाहर की तरफ आने लगा था। हम दोनों ने एक दूसरे के साथ काफी देर तक सेक्स संबंध बनाए लेकिन जैसे ही मेरा वीर्य पतन बाहर की तरफ हुआ तो आशा खुश हो गई। वह कहने लगी मुझे मजा आ गया आशा को तो मजा आ चुका था। मुझे उसे दोबारा से चोदना था इसलिए मैंने उसे घोड़ी बनाकर धक्के मारने शुरू किए मुझे आशा को घोड़ी बनाकर चोदने में जो मजा आ रहा था वह मेरे अंदर की गर्मी को बढ़ा रहा था। मैंने अपने वीर्य को जब आशा की कोमल चूत मे गिराया तो वह खुश हो गई और बोली आज के बाद तुम अपने लंड की गर्मी से मुझे म खुश कर दिया करना। मैं जब भी आशा को चोदता तो वह खुश हो जाती।