काश कोई मिल पाता

Antarvasna, hindi sex kahani: मीना अपने कमरे में सामान पैक कर रही थी मैं भी दुकान से लौटा ही था भैया ने मुझे कहा था कि तुम घर जल्दी चले जाओ। हम लोग हार्डवेयर की दुकान चलाते हैं और पिछले कई वर्षों से मैं और भैया साथ में मिलकर काम कर रहे हैं यह काम भैया ने ही शुरू किया था और उसके बाद जब काम अच्छा चलने लगा तो मैंने भी भैया के साथ ही काम करने का फैसला कर लिया था उन्हें भी मुझसे कोई आपत्ति नहीं थी। मेरी भाभी भी दिल की बहुत अच्छी है और वह हमेशा ही चाहती थी कि हमारा परिवार एक साथ जुड़ा रहे और इसी वजह से तो आज तक हमारा परिवार एक साथ ही रहता है। कभी भी हम लोगों के बीच में आपस में कोई मनमुटाव की स्थिति पैदा नहीं हुई भैया के कहने पर मैं घर चला आया था और भैया दुकान में ही थे मैंने मीना से पूछा तुमने सामान तो पैक कर लिया है। मीना मुझे कहने लगी हां मैंने सामान तो पैक कर लिया है बस तुम थोड़ा सा मेरी मदद कर दोगे तो जल्दी से हम लोग पूरा सामान भी पैक कर लेंगे।

मैंने मीना के साथ मदद किया और सामान पैक कर लिया मैं भाभी के पास गया तो भाभी कहने लगे देवर जी जरा मेरी भी मदद कर दो तो मैंने भाभी की भी मदद की। हम लोग शादी के लिए इंदौर जाने वाले थे इंदौर में मेरा ननिहाल है और वही मेरे मामाजी के लड़के की शादी होने वाली थी इसीलिए हम लोग कुछ दिनों के लिए इंदौर जाने की तैयारी कर रहे थे। पापा मम्मी ने भी अपना सारा सामान पैक कर लिया था अब सामान काफी ज्यादा हो चुका था क्योंकि सब लोग एक साथ  ही जा रहे थे। हम लोग करीब 10 दिनों के लिए इंदौर जाने वाले थे इसलिए सब के पास सामान काफी ज्यादा हो चुका था भैया ने मुझे कहा था कि तुम घर जाकर सब कुछ देख लेना। हम लोगों की ट्रेन सुबह की थी और भैया देर रात से घर लौटे भैया जब घर लौटे तो उन्होंने भी खाना खा लिया था। भौया ने मुझे कहा कि राजेश कल सुबह हमें जल्दी निकलना है तो तुमने टैक्सी वाले को कह दिया था ना वह सुबह समय पर तो आ जाएगा। मैंने भैया से कहा हां मैंने उसे कह दिया था वह हमें सुबह रेलवे स्टेशन तक छोड़ देगा भैया अब निश्चिंत हो चुके थे और सुबह सब लोग जल्दी उठ चुके थे।

मां के कहने पर भाभी और मीना ने टिफिन भी पैक कर लिया था और जैसे ही टैक्सी वाला आया तो हम लोगों ने बच्चों से कहा कि चलो बेटा जल्दी से तुम लोग बैठ जाओ। वह लोग भी जल्दी से कार में बैठ गए हम सब लोगों ने अपना सामान गाड़ी में रख लिया और वहां से हम लोग रेलवे स्टेशन के लिए निकल पड़े। हमारे घर से रेलवे स्टेशन की दूरी करीब 12 किलोमीटर है हम लोग जब रेलवे स्टेशन पहुंचे तो ट्रेन बिल्कुल सही समय पर थी। हम लोगों ने अपना बोगी नंबर देखा और मैंने भैया से कहा कि भैया सामान रखवा देते हैं भैया और मैंने सामान रख दिया मीना और भाभी ट्रेन में बैठ चुके थे और पापा मम्मी को भी हमने बैठा दिया था। भैया मुझे कहने लगे कि मैं अभी आता हूं और भैया बाहर स्टेशन पर ही टहल रहे थे मैं भी भैया के साथ चला गया मैंने भैया से कहा भैया क्या आप चाय पिएंगे। वह कहने लगे हां राजेश चाय पीने का तो मन हो रहा है चलो आओ चाय पी लेते हैं हम लोगों ने चाय के लिए कहा तो उस स्टॉल वाले ने हमारे लिए चाय बना दी। भैया और मैंने चाय पी उसके बाद हम लोग ट्रेन में बैठ गए जब हम लोग ट्रेन में बैठे तो कुछ ही देर बाद ट्रेन के हॉर्न के साथ ही धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी। अब ट्रेन ने अपनी गति पकड़ ली थी और हम लोग आपस में बात कर रहे थे इतने लंबे अरसे बाद सब लोग साथ में कहीं जा रहे थे तो इस बात की खुशी तो सब लोगों को थी। बच्चे भी बहुत खुश थे और वह लोग भी आपस में खेल रहे थे ट्रेन में सब लोग उन्ही की तरफ देख रहे थे क्योंकि उन्होंने काफी शोर शराबा मचाया हुआ था। भैया मुझे कहने लगे राजेश तुम बच्चों का भी ध्यान रखते रहना मैंने उन्हें कहा जी भैया। भैया सोने के लिए ट्रेन के सबसे ऊपर वाली बर्थ में चले गए थे मुझे नींद नहीं आ रही थी मैंने अपने कान में हेडफोन लगाए और नए गाने सुनने लगा।

मीना और भाभी के आंखों में भी नींद साफ दिखाई दे रही थी वह लोग भी नींद की झपकियां ले रहे थे और पापा मम्मी भी सो चुके थे। कुछ ही देर बाद अगला स्टेशन आने वाला था और जब ट्रेन रुकी तो सब लोग उठ गए भैया ने कहा कि राजेश मुझे बड़ी भूख लग रही है और भाभी ने कहा हां नाश्ता भी कर लेते हैं अब समय भी काफी हो चुका है। मैंने जब अपनी घड़ी में टाइम देखा तो उस वक्त 10:30 बज रहे थे हम सब लोगों ने साथ में नाश्ता किया और उसके बाद ट्रेन भी तेजी से चल रही थी। हम लोग जब इंदौर पहुंच गए तो वहां पर मेरे मामा जी ने बड़ा ही जबरदस्त बंदोबस्त करवा रखा था और वह सब देख कर हम लोग खुश हो गए। मामा जी कहने लगे मुझे इस बात की खुशी है कि सब लोग एक साथ आये और इससे बढ़कर मेरे लिए क्या हो सकता है। मामा जी से बातों में जीत पाना तो बहुत ही मुश्किल था और उन्होंने उसके बाद मुझे कहा कि राजेश बेटा पास में ही एक होटल करवा रखा है मैं तुम्हारे साथ किसी को भिजवा देता हूं वह तुम्हें होटल दिखा देगा तुम वहां पर अपना सारा सामान रखवा देना। हम लोगों ने होटल में सारा सामान रखवा दिया मामाजी के घर से बस कुछ दूरी पर ही वह होटल था।

हम सब लोग होटल चले गए और हमने अपना सामान रखा। सब लोग बारी बारी से बाथरूम में फ्रेश हो रहे थे मैं जब नहा कर बाहर निकला तो मैंने सोचा सिगरेट पी आता हूं। मैं भैया के सामने तो कभी भी सिगरेट नहीं पीता था इसलिए उनसे चोरी छुपे ही मुझे सिगरेट पीया करता। मैं जब बाहर गया तो मैंने सिगरेट ले ली और मैं सीढ़ियों से ऊपर आ रहा था लेकिन मुझे ध्यान आया कि मैं तो माचिस लेकर ही नहीं आया था। तभी सामने एक महिला सिगरेट पीती हुए मुझे दिखाई दे गई उनके लाल होठों को देखकर मेरा लंड हिलोरे मार रहा था। मैं उनके पास चला गया मैं उनके पास गया और मैंने उनसे कहा कि क्या आपके पास लाइटर होगा तो उन्होंने मुझे लाइटर दिया और कहा आप भी मुझे ज्वाइन कर लीजिए। उनकी नशीली आंखें देखकर मैं उन्हे ही देखे जा रहा था मैंने उन महिला से कहा आपका क्या नाम है? वह मुझे कहने लगी मेरा नाम रेखा है मैं उनकी आंखों की मदहोशी में डूब गया और रेखा मुझे अपने साथ अपने कमरे में आने का न्योता देने लगी। मैं भी उनके साथ उनके रूम में चला गया हम दोनों साथ में बैठे हुए थे और आपस में बातें कर रहे थे तभी मेरे अंदर से सेक्स भावना उफान मारने लगी और मैंने रेखा के होठों को चूम लिया। ऐसा करने के कुछ देर के बाद ही हम दोनों एक दूसरे की बाहों में आ गए और हम दोनों ही अब एक दूसरे के बदन की गर्मी को महसूस करने लगे। मैंने रेखा के स्तनों को दबाया और उन्हें मैंने अपना बना लिया काफी देर ऐसा करने के बाद जब रेखा ने मेरी पैंट को खोलकर मेरे लंड को बाहर निकाला तो मैं पूरी तरीके से मचलने लगा और रेखा ने जैसे ही मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लिया तो अब मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। रेखा मेरे लंड का रसपान बड़े मजेदार अंदाज में कर रही थी रेखा ने मेरे लंड से पानी भी बाहर निकाल कर रख दिया था और मेरी उत्तेजना को पूरी तरीके से बढ़ा दिया था। अब बारी मेरी थी मेरे पाले में अब गेंद थी तो मैं रेखा की चूत को चाटकर बेहाल करना चाहता था मैंने रेखा के कपड़ों को उतार कर उसकी पिंक रंग की पैंटी को उतारते हुए रेखा की योनि को चाटना शुरू कर दिया।

रेखा की चूत को चाटकर मुझे मजा आ रहा था और रेखा को भी बड़ा आनंद आ रहा था वह मुझे कहने लगी थोड़ा और अंदर चाटो ना मैं उसकी चूत को बहुत देर तक चाटता रहा। मैंने उसकी चूत को चाटकर पूरा गीला कर दिया था अब वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी। रेखा ने मुझे कहा की अलमारी में कंडोम रखा हुआ है मैंने उसे कहा मैं तो तुम्हें ऐसे ही चोदूंगा लेकिन वह नहीं मानी और मैंने अपने लंड पर कंडोम चढ़ाते हुए रेखा की चूत पर सटाया। जैसे ही मैंने अंदर की तरफ धक्का दिया तो धीरे धीरे मेरा लंड अंदर की तरफ को घुसने लगा। अब मेरा लंड अंदर जा चुका था रेखा के मुंह से मादक आवाज निकलने लगी थी और मुझे बढ़ा अच्छा लग रहा था। रेखा अपने पैरों को खोलकर मुझे कहती तुम और तेज करो ना मैंने रेखा को उल्टा लेटा दिया।

जब उसकी गांड पर मैंने अपनी उंगली लगाई तो उसका चेहरा मुझे अपनी ओर खींचने लगा। मैंने उसकी गांड के छेद के अंदर अपने लंड को घुसा दिया जब मेरा मोटा लंड उसकी गांड के छेद के अंदर गया तो वह मुझे कहने लगी मुझे बड़ा दर्द हो रहा है और कंडोम भी फट चुका था। मैंने रेखा कि चूतडो को कसकर पकड़ लिया था अब मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था और वह मुझे कहने लगी कि मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। वह मुझसे अपनी चूतडो को टकराने लगी और कंडोम फट कर बुरा हाल हो चुका था। जैसे ही मेरे लंड से वीर्य की बूंदे अब बाहर की तरफ को निकलने लगी तो रेखा मुझे कहने लगी तुम्हारा वीर्य तो गिर चुका है मैंने उसे कहा क्या तुम्हारी इच्छा अभी तक नहीं भरी है। वह कहने लगी नहीं मेरी इच्छा तो पूरी हो चुकी है लेकिन आज इत्तेफाक से तुम मुझे मिल गए मैं अपने मन में सोच ही रही थी कि काश कोई मुझे मिल पाता।