कच्ची कलियों की चुदाई-39

indian sex stories चाची जोर से हंस पड़ी …अरे भई, राजेश … क्या बच्चों जैसे खेल कर रहे हो … चोद डालो मेरी बच्ची को … फ़ाड़ दो इसकी प्यारी मुनिया को।

‘तो ये लो … यशोदा की चाची … आखिर कब तक खैर मनायेगी।’

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फिर उसने अपने शॉट तेज कर दिये। लण्ड को चूत पर भींच भींच कर मारने लगा।

‘आह्ह्ह्ह … और जोर से अंकल … मारो ना … उफ़ चोद डालो … चाची … हाय मर गई रे …’

अंकल मुझे अपने नीचे दबा कर जोर जोर से चोद रहे थे था। जाने इस जवान चूत में कितनी मस्ती थी जो पिटी जा रही थी और जितना पिटती थी उतनी ही और जोर से लण्ड खाना चाह रही थी।
मेरे चुदने की तमन्ना चाची ने पूरी करवा दी थी।

फिर तो जी भर कर मैंने अंकल का लण्ड खाया और फिर अपने आप को रोक नहीं पाई … एकदम से झड़ने लगी।

मेरे झड़ते ही अंकल ने अपना लण्ड मेरे मुख में ठूंसने की कोशिश की। पर मैंने अपना मुख इधर उधर करके बचा लिया। पर तभी चाची ने जल्दी से अंकल का लण्ड अपने मुख में लेकर जो तीन चार बार कस कर मुठ्ठ मारा, अंकल ने सारा का सारा वीर्य चाची के मुख में दान कर दिया।

मैंने बैठ कर अपनी चूत का गीलापन साफ़ किया और शमीज को नीचे सरका दी।

‘चलो अब भोजन कर लें?’ चाची बोली।

‘मेरा तो हो गया ना भोजन !’ मैंने कुछ इठलाते हुये और कुछ ठसकते हुये कहा।

उंहु, ये तो चोदन था, भोजन वहाँ मेज पर !’ चाची ने शरारत से मेरी चूची दबा कर बाहर की ओर इशारा किया।

वहाँ सभी ने बैठ कर एक एक व्हिस्की का पेग और पी लिया। इसी दौरान चाची ने मुझे अंकल का लण्ड भी चुसवाया… अंकल ने मेरी चूत चूसी। फिर हमने अपना रात्रि भोज किया।

‘अच्छा तो मैं चलता हूँ…’ राजेश उठते हुये बोले।

‘चाची, रोकिये ना इन्हें… मेरे मुख से अपने आप निकल पड़ा। फिर एक दम से शरमा गई।

‘देखो, क्या कह रही है आपकी यशोदा… ‘ चाची ने राजेश को आँख मारते हुये कहा।

‘फिर रात अधिक हो जायेगी।’ राजेश ने अपनी मजबूरी जताई।

‘तो क्या हुआ, घर में ही तो है न… चलो ना अन्दर कमरे में… ‘ मेरे मुख से निकल पड़ा।

‘अब आपको तो मैं मना तो नहीं कर सकता हूँ ना।’

हम सभी बेड रूम में आ गये थे। चाची ने भी बस एक चड्डी पहन ली और हम तीनों बिस्तर पर आ गये।

‘चाची अंकल से दूर रहो ना ।’ मैंने चाची से जलते हुये कहा।

‘चिपकी तो तू जा रही है और मुझ से कह रही है… ‘ चाची ने ताना मारा।

‘तो चिपकने दो ना चाची… मेरा तो यह पहली बार…!’ मैंने शरमा कर अंकल की छाती में सर छुपा लिया।

‘तो चिपको ना… ‘ चाची चिढ़ कर बोली… ‘समझ लो हम तो जैसे यहाँ है ही नहीं।’

‘सॉरी चाची, ये लो बस…’ मैंने दूर हटते हुये कहा।

मैंने दूसरी ओर करवट ले ली और सोने का प्रयत्न करने लगी। पर नींद तो आँखों से कोसों दूर थी। एक लण्डधारी मर्द मेरी बगल में लेटा था और दो दो जवानियाँ उससे चुदने को बेताब थी।

जैसे तैसे मेरी आँख लग गई थी। पर फिर जाने कब मेरी आँख खुल गई। अंकल मेरी पीठ से चिपके थे। उनका सख्त लण्ड मेरी गाण्ड की फ़ांकों में फ़ंसा हुआ था।

‘नंगा लण्ड… नग़ी गाण्ड… ‘ उफ़ ! कैसा लग रहा था।

‘श श श… बोलना मत… ‘ प्रियंका जाग जायेगी।

मैंने अपने आप को और व्यवस्थित करके उसके लण्ड को और भी गाण्ड के छेद से सटने का मौका दिया। अंकल ने प्यार से अपनी बाहें मेरे तन के इर्द गिर्द डाल दी और मुझे कस लिया। वे मेरे गालों को चूमने लगा फिर मुझे अपनी गाण्ड के छेद में उसका लण्ड घुसता सा लगा। मैंने अपनी गाण्ड और ढीली छोड़ दी। वो और अन्दर घुस गया।

‘ओह… अन्दर गया।’

‘हाँ अन्दर तो घुस गया है… पर बहुत अजीब सा लग रहा है, मोटा बहुत है।’

‘श श… अब सब ठीक है !’

फिर उसने धीरे से और जोर लगाया। लण्ड उस छोटे से छेद के लिये बहुत मोटा था। मैंने जैसे तैसे सहन कर लिया। उसने फिर दबाव डाल दिया। लण्ड और अन्दर घुस गया। दर्द के कारण मेरे मुख से चीख निकल गई। चाची की नींद खुल गई।

‘अरे, क्या हुआ मेरी यशोदा को?’
‘चाची, देखो ना ! अंकल ने मेरी गाण्ड मार दी।’

‘आय हाय, साले मरे ने बच्ची की गाण्ड मार दी… चल निकाल अपना लौड़ा बाहर !’
‘अरे, बस हो गया प्रियंका।’