जिसका लंड चूत में लेना था उसका ले लिया

Antarvasna, sex stories in hindi: मैं अपनी मां के साथ घर का काम कर रही थी कि तभी दरवाजा कोई बड़ी जोर से खटका रहा था मां ने कहा कि बेटा जरा देखना दरवाजे पर कौन है। मैं दरवाजे पर गई तो मैंने देखा कि सामने हमारे पड़ोस में रहने वाले शुक्ला अंकल थे वह मुझे कहने लगे कि बेटा क्या तुम्हारे पापा घर पर हैं तो मैंने उन्हें कहा नहीं वह तो अभी घर पर नहीं है वह कहीं गए हुए हैं। मैंने उन्हें कहा की आप अंदर आ जाइए मम्मी घर पर ही हैं तो वह कहने लगे कि नहीं कोई बात नहीं बेटा मैं फिर दोबारा आ जाऊंगा। वह जैसे ही जाने लगे तो मां भी दरवाजे पर आ गई और मां ने शुक्ला अंकल से कहा कि भाई साहब क्या कोई जरूरी काम था। वह कहने लगे कि नहीं बस ऐसे ही सोहन जी से कुछ जरूरी काम था लेकिन अब वह घर पर नहीं है तो मैं शाम को आता हूं। मां ने कहा कि आप चाय पीते हुए जाइए तो वह कहने लगे नहीं मैं शाम को आऊंगा उसके बाद शुक्ला अंकल वहां से चले गए, मां मुझे कहने लगी कि बेटा चलो हम लोग नाश्ता बना लेते हैं। मैं मां के साथ नाश्ता बनाने के लिए रसोई में चली गई हम दोनों नाश्ता बना रहे थे और कुछ ही देर में हमने नाश्ता बना लिया था।

भैया भी अब अपने ऑफिस के लिए तैयार हो चुके थे उन्होंने नाश्ता किया और वह अपने ऑफिस चले गए। मैं और मां दोपहर में घर पर ही थे मां मुझे कहने लगी कि सरिता बेटा अब तुम बड़ी हो चुकी हो कई बार तुम्हारी शादी की भी चिंता सताती है। मैंने मां से कहा मां लेकिन अभी मेरी उम्र ही कितनी हुई है मैं बाद में शादी कर लुंगी लेकिन मां तो मेरी शादी को लेकर बहुत ही ज्यादा चिंतित रहती थी वह अक्सर मेरी शादी की बातें किया करती तो मैं मां से कहती कि मां तुम मेरी शादी की बात मत किया करो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। मां कहने लगी ठीक है बेटा आज के बाद तुमसे तुम्हारी शादी की बात नहीं करूंगी। मैं दोपहर के वक्त अपने कमरे में आराम कर रही थी तभी दरवाजे की डोर बेल बजने लगी, मैंने जैसे ही दरवाजा खोला तो सामने पापा खड़े थे।

पापा सुबह जल्दी चले गए थे और वह दोपहर में लौट आए मैंने पापा के हाथ से बैग लिया और कहा कि आज आप सुबह ही घर से चले गए थे तो पापा कहने लगे हां बेटा वह एक जरूरी काम था। पापा का प्रॉपर्टी का काम है और शायद उसी के लिए वह सुबह चले गए थे, पापा घर लौट आए थे तो मैंने उन्हें कहा कि क्या आपने खाना खा लिया है तो वह कहने लगे कि हां सरिता बेटा मैंने खाना खा लिया था। मैंने उन्हें बताया कि शुक्ला अंकल आए हुए थे तो वह मुझे कहने लगे की हां उनका मुझे फोन आया था उन्हें कोई प्रॉपर्टी चाहिए थी इसलिए वह मुझसे बात करना चाहते हैं। मैंने पापा से कहा कि मैं आपके लिए पानी ले आती हूं मैं पापा के लिए पानी ले आई पापा ने पानी पिया और वह कहने लगे कि बेटा मैं कुछ देर आराम कर लेता हूं। पापा कुछ देर आराम करना चाहते थे वह अपने कमरे में आराम करने चले गए शाम के वक्त शुक्ला अंकल घर पर आये और वह पापा के साथ बैठकर बातें करने लगे। पापा और शुक्ला अंकल आपस में बात कर रहे थे तो मैं भी वहीं बैठी हुई थी शुक्ला अंकल कोई प्रॉपर्टी लेना चाहते थे इसलिए उन्होंने पापा से बात की और जब पापा ने उन्हें कहा कि मैं आपको कल कुछ प्रॉपर्टी दिखा देता हूं तो वह कहने लगे ठीक है। मैं पापा और शुक्ल अंकल के लिए चाय बना कर ले आई थी उन्होंने चाय पी और उसके बाद वह चले गए। जब वह चले गए तो पापा मुझे कहने लगे कि सरिता बेटा मैं अभी थोड़ी देर में आता हूं। पापा भी चले गए थे और मैं और मां घर पर ही थे मां मुझे कहने लगी कि सरिता बेटा चलो हम लोग सब्जी ले आते हैं उसके बाद हम लोग सब्जी लेने के लिए चले गए। हम लोग सब्जी लेने के लिए गए और वहां से जल्दी ही लौट आए थे हम लोग जब सब्जी लेकर लौटे तो उसके बाद मैं और मां खाना बनाने की तैयारी करने लगे। मैं काम में बहुत ज्यादा व्यस्त रहती हूं इसलिए मुझे भी बिल्कुल समय नही मिल पाता है और ना ही मां को समय मिल पाता है। हम दोनों ही घर के काम में इतना व्यस्त रहते कि हम दोनों को बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता था। मेरे पापा और मां हमेशा ही मेरे लिए बहुत चिंतित रहते हैं लेकिन अब मैंने भी फैसला कर लिया था कि मैं अब जॉब करूंगी।

मैंने अपनी मां से इस बारे में बात की तो वह मुझे कहने लगी कि बेटा तुम जॉब कर के क्या करोगी तुम्हारे पापा भी तुम्हें जॉब करने के लिए मना कर देंगे। मैंने मां को कहा लेकिन मां मैं जॉब करना चाहती हूं मां कहने लगी कि बेटा तुम तुम्हारे पापा से इस बारे में बात कर लो। मैंने भी इस बारे में पापा से बात कर ली और जब मैंने पापा से इस बारे में बात की तो उन्होंने मुझे कहा कि बेटा यदि तुम्हें लगता है कि तुम्हें जॉब कर लेनी चाहिए तो तुम जॉब कर लो हमें इससे कोई एतराज नहीं है। मुझे तो लगा था कि पापा जॉब के लिए मना कर देंगे लेकिन उन्होंने मुझे जॉब करने के लिए कह दिया और अब मैं इंटरव्यू देने लगी। इंटरव्यू देने के बाद मेरी जॉब एक कंपनी में लग गई और वहां पर मैं अकाउंट का काम संभालने लगी, मैं काफी खुश थी और अपने काम पर पूरा ध्यान देने लगी। पापा और मां मेरे लिए ज्यादा चिंतित रहते थे इसलिए उन्होंने मेरी शादी के लिए लड़का देखना शुरू कर दिया लेकिन मैं शादी नहीं करना चाहती थी और मैंने इस बारे में पापा और मम्मी को कह दिया था परंतु वह है कि मेरी बात सुनने को तैयार ही नहीं थे। मेरी शादी के लिए उन्होंने अपने दोस्त के लड़के से बात की मैं रोहित से एक बार मिली भी थी लेकिन रोहित मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं आया। मैं चाहती थी कि मैं अपने पापा से इस बारे में बात करूं कि वह मेरे लिए लड़का ना देखें क्योंकि मैं अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती थी।

मैंने पापा और मम्मी को इस बात के लिए कहा तो वह कहने लगे कि बेटा हमें तो तुम्हारी चिंता हमेशा ही सताती रहती है और जल्द से जल्द तुम शादी कर लोगी तो तुम भी खुश रहोगी। मैं शादी करने के बिल्कुल भी पक्ष में नहीं थी। एक दिन मेरे साथ ऑफिस में जॉब करने वाली मेरी सहेली ने मेरी मुलाकात अपने भाई अविनाश से करवाई। अविनाश जब मुझे पहली बार मिले तो मुझे पता नहीं ऐसा क्यों लगा कि जैसे अविनाश को लेकर मेरे दिल में कुछ होने लगा है मै अविनाश के साथ में बात करना चाहती थी। मैं अविनाश से बातें करने लगी थी तो उन्हें भी बहुत अच्छा लगने लगा और अविनाश भी बहुत ही ज्यादा खुश थे। हम दोनों एक साथ समय बिताने लगे हम दोनों एक दूसरे को डेट करने लगे थे। यह सब बहुत ही जल्दी मे हुआ इस बात की भनक मैंने अपनी सहेली ममता को नहीं चलने दी अगर उसे इस बारे में कुछ पता चलता तो अविनाश और मेरे बीच कहीं कुछ प्रॉब्लम ना हो जाए इसलिए मैंने उसे कुछ नहीं बताया। अविनाश और मैं दूसरे से मिलने लगे एक दिन बारिश बहुत ज्यादा हो रही थी उस दिन बारिश इतनी तेज थी कि मैं पूरी तरीके से भीग चुकी थी और अविनाश और मैं साथ में थे। हम दोनों एक दूसरे के साथ थे हम लोग अविनाश के दोस्त के घर चले गए अविनाश और मैं साथ में बैठे हुए थे। मैने अविनाश का हाथ पकड़ लिया मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था लेकिन फिर अविनाश ने मुझसे कहा कि मैं अब तुम्हारे होठों को चूमना चाहता हूं। मैंने अविनाश को कुछ नहीं कहा और अविनाश ने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया। उसने मेरे होंठों को चूमना शुरू किया तो मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी और मेरी योनि से निकलता हुआ पानी भी कुछ ज्यादा ही अधिक होने लगा था।

मेरी चूत से निकलता हुआ पानी ज्यादा होने लगा था। अविनाश ने मेरे कपड़ों को उतारना शुरू किया तो मैं कुछ बोल ना सकी। अविनाश ने जब मेरी पैंटी को उतार कर मेरी चूत पर अपनी उंगली लगाई तो मुझे एक अलग फिलिंग महसूस होने लगी। मैं अपनी चूत मे अविनाश के मोटे लंड को लेने के लिए तडप रही थी मैंने अविनाश के लंड को बाहर निकाल कर उसे अपने हाथों में लेकर हिलाना शुरू किया तो मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा और अविनाश को भी अच्छा लगने लगा था। अविनाश को इतना मजा आ रहा था कि मैंने अविनाश को कहा मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाऊंगी। अविनाश को यह बात अच्छे से समझ आ चुकी थी अविनाश ने मेरी चूत पर अपनी जीभ लगाकर मेरी योनि को चाटना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा और अविनाश के अंदर की गर्मी भी अब बढ़ चुकी थी।

उसके अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि वह मुझे कहने लगा मैं तुम्हारी चूत मे लंड घुसाने के लिए तैयार हूं। मैंने अविनाश के सामने अपने पैरों को खोल लिया था और अविनाश ने जब मेरी योनि पर अपने लंड को लगाकर अंदर की तरफ डाला तो अविनाश तडपने लगा। मेरी चूत के अंदर तक अविनाश का लंड चला गया तो मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा। अब मैंने अविनाश से कहा तुम मुझे तेजी से चोदना शुरू कर दो अविनाश ने मुझे बहुत ही ज्यादा तेजी से चोदना शुरू कर दिया। अब मुझे बड़ा ही मजा आने लगा था मैं और अविनाश एक दूसरे का साथ बड़े ही अच्छे से दे रहे थे। मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था जब अविनाश मुझे चोदते। अब मेरे अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बाहर आ चुकी थी और अविनाश के अंदर की गर्मी भी बहुत ही ज्यादा बढ़ चुकी थी। अविनाश ने अपने माल को मेरी चूत में गिरा दिया और मेरी सील को तोड़कर अपना दीवाना बना लिया मैं अविनाश से चुदकर बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी।