जीजा जी मेरी लो ना

Hindi sex kahani, antarvasna मैं अपने ऑफिस से घर लौट चुका था मैंने दरवाजा खोला तो मैंने देखा नमिता अभी अपने टीवी सीरियल में खोई हुई है मैं अपने बेडरूम में चला गया और आराम से वही लेटा रहा। मेरी पत्नी का सीरियल ख़त्म ही नहीं होने वाला था वह सीरियल में इस कदर घुसी हुई थी कि वह मुझे आते हुए भी नहीं देख सकी लेकिन जब उसका सीरियल खत्म हो गया तो वह जब रूम में आई वह मुझे कहने लगी आप कब आए। उसने बड़े ही चौकते हुए मुझे कहा कि मैंने तो आपको देखा ही नहीं मैंने नमिता से कहा मुझे आए हुए करीब आधा घंटे से ऊपर हो चुका है लेकिन तुम तो अपने सीरियल में खोई हुई थी। नमिता मुझे कहने लगी मैं आपके लिए अभी पानी ले आती हूं वह फ्रिज से मेरे लिए ठंडा पानी ले आई लेकिन मैंने उसे कहा मैंने तो पानी पी लिया है परंतु फिर भी मैंने पानी पी लिया। मैंने जब पानी पिया तो नमिता मुझसे कहने लगी आज मेरी मम्मी का फोन आया था और मम्मी कह रही थी कि तुम कुछ दिनों के लिए घर आ जाओ। मैंने नमिता से कहा तुम देख लो यदि तुम्हें घर जाना है तो तुम हो आओ मै नमिता को कभी भी कुछ मना नहीं करता था और वह अपने मायके चली गई।

जब वह अपने मायके गई तो मुझे खाने की थोड़ा परेशानी होने लगी लेकिन मैं भी अपने भैया भाभी के घर चले जाया करता था भैया भाभी अब हमारे साथ नहीं रहते वह लोग अलग ही रहते हैं लेकिन फिर भी मेरा प्यार उनके प्रति उतना ही है और वह भी मुझे काफी मानते हैं। मैं जब नमिता को लेने के लिए गया तो वह मुझे कहने लगी आज आप यहीं रुक जाइये ना मैंने नमीता से कहा लेकिन मैं यहां रुक कर क्या करूंगा हम लोग अभी घर चलते हैं लेकिन नमिता ने मुझे उस दिन रोक लिया। मेरी सासू मां भी कहने लगी कि बेटा तुम लोग यहीं रुक जाओ मैं उस दिन अपने ससुराल में ही रुक गया मेरी सासू मां ने मेरी बडे अच्छे से खातेदारी की और अगले दिन हम लोग अपने घर चले आये। जब हम लोग अपने घर आए तो नमिता मुझे कहने लगी आपको तो मेरे घर रुकना बिल्कुल भी पसंद नहीं है। मैंने नमिता से कहा नहीं नमिता ऐसा कुछ भी नहीं है दरअसल मुझे अपने काम के सिलसिले में कुछ दिन के लिए बाहर जाना पड़ेगा इसलिए मैं चाहता था कि तुम घर पर आ जाओ और मम्मी पापा भी गांव से आने वाले हैं। मैंने जब नमिता से यह बात कही तो नमिता कहने लगी क्या आप मुझे यह बात पहले नहीं बता सकते थे मैने नमिता से कहा उसके लिए मैं तुमसे माफी मांगता हूं।

 नमिता गुस्से में हो चुकी थी लेकिन उसने मेरे लिए रात का डिनर बना दिया और हम डिनर करके सो चुके थे। नमिता रात को टॉयलेट में गई जब वह टॉयलेट से बाहर आ रही थी तो उसका पैर स्लिप हो गया जिस वजह से उसे काफी चोट आई। जब उसे चोट आई तो मैं उसे रात के वक्त अपने घर के पास के ही क्लीनिक में लेकर गया क्योंकि वह डॉक्टर मुझे अच्छी तरीके से पहचानते हैं इसलिए मैंने उन्हें फोन कर के बुला लिया था जिससे कि उन्होंने रात के वक्त नमिता के हाथ पैरों पर लगे चोट पर मरहम पट्टी कर दी थी। नमिता को उन्होंने कुछ दिनों के लिए आराम करने के लिए कहा लेकिन मुझे भी अपने काम के सिलसिले में जाना था मैंने अपने बॉस से कहकर अपने जाने का प्लान कैंसिल करवा लिया। उसी दिन दोपहर के वक्त मेरे माता-पिता भी आ गए और जब वह लोग आए तो उन्होंने नमिता को देखा नमिता के हाथ पैरों पर जख्म थे और उसकी मरहम पट्टी देखकर मेरी मां की आंखे भर आई। वह कहने लगी बेटा यह सब कैसे हुआ मैंने उन्हें सारी बात बताइ और वह उसके बाद काफी डर गई थी लेकिन मैंने अपनी मां को शांत करवाते हुए कहा घबराने की कोई बात नहीं है बस थोड़ी सी चोट है कुछ दिनों बाद जख्म भर जाएंगे। नमिता को डॉक्टर ने आराम करने के लिए कहा था तो वह अब आराम कर रही थी मैं भी कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी ले चुका था। नमिता के सीरियल के प्रति प्रेम को मैं अच्छे से जानता हूं हालांकि वह चोटिल थी परंतु उसके बावजूद भी उसका सीरियल से मोह भंग नही हो पाया था नमिता सीरियल देखने में व्यस्त रहती थी।

अब वह थोड़ी बहुत ठीक होने लगी थी और उसके जख्म भी भरने लगे थे लेकिन अभी भी वह सीरियल में खोई रहती थी नमिता की मानसिकता भी अब बदलने लगी थी यह सब उसके सीरियलो का ही असर था। मुझे कई बार लगता कि जैसे वह सीरियल देख कर ही बदलने लगी है और वह मेरे साथ भी कई बार ऐसे ही व्यवहार किया करती थी। अब नमिता के जख्म बजी भरने लगे थे मेरी मां नमिता को काफी अच्छा मानती थी और उन्होंने उसे हमेशा अपनी बेटी की तरह ही समझा नमिता भी मम्मी की बहुत इज्जत किया करती थी। मेरे भैया भाभी जब भी घर पर आते तो मेरे मम्मी पापा हमेशा खुश रहते मेरे मम्मी पापा मेरे भैया भाभी के घर कम ही जाया करते थे क्योंकि उन्हें मेरी भाभी का नेचर बिल्कुल पसंद नहीं था इसलिए वह लोग उनके घर पर कम ही जाया करते थे। एक दिन नमिता की मम्मी का फोन मुझे आया और वह कहने लगे कि दामाद जी आप हमारे घर पर आ जाइए मैंने उन्हें कहा ठीक है सासू मां हम लोग आज शाम को आ जाएंगे। हम लोग शाम के वक्त उनसे मिलने के लिए चले गए उनसे जब हम लोग शाम के वक्त मिले तो मुझे नहीं मालूम था कि मेरी साली भी आई हुई है उसकी शादी दुबई में हुई है और वह भी आई हुई थी।

नमिता तो खुश हो गई और कहने लगी काफी समय बाद संजना से मिल रही हूं वह दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे मैं और संजना के पति कुलदीप एक दूसरे को सिर्फ देख रहे थे हम दोनों ज्यादा बात नहीं कर रहे थे लेकिन तभी संजना ने मुझसे कहां जीजू आप तो मुझे फोन ही नहीं करते। मैंने संजना से कहा नहीं संजना ऐसा तो कुछ भी नहीं है मैंने तुम्हें फोन किया तो था वह कहने लगी आपने तो मुझे 6 महीने पहले फोन किया था तभी नमिता कहने लगी कि तुम्हारे जीजू के पास समय ही कहां होता है वह तो मेरे लिए भी समय नहीं निकाल पाते हैं। मैंने संजना से कहा तुम्हारी बहन तो सीरियल में ही खोई रहती है और उसने तो अपनी एक दुनिया ही बना रखी है वह उससे बाहर ही नहीं आना चाहती। नमिता गुस्सा हो गई लेकिन मैंने उसे मना लिया और उसके बाद  हम सब लोगों ने साथ में डिनर किया नमिता की मम्मी बहुत खुश थी क्योंकि काफी समय बाद उनका पूरा परिवार एक साथ था। नमिता के पिताजी की कार एक्सीडेंट में मृत्यु हो चुकी थी और उसकी मां ने ही उनको अच्छे से संभाला था और उस दिन वह बहुत खुश थी। नमिता भी खुश थी उसकी बहन से काफी समय बाद उसकी मुलाकात हुई थी। मुझे क्या मालूम था अब संजना पूरी तरीके से बदल चुकी है संजना के पति उसे वो खुशी नहीं दे पाते थे तो वह मुझसे अपनी इच्छा पूर्ति के लिए देखने लगी। मैंने जब संजना कि इच्छा को पूरी करने की बात कही तो उस रात उसने अपनी प्यासी नजरों से मुझे काफी देर तक देखा। हम दोनों की सेक्स को लेकर सहमती बन चुकी थी साली भी तो आधी घरवाली होती है। संजना के साथ उस रात मैंने जो सेक्स का अनुभव लिया वह मेरे लिए भी बड़ा अच्छा था। संजना ने मुझे अपने रूम में बुला लिया उसके पति बड़ी गहरी नींद में सो रहे थे उसने मेरे कान में धीमी सी आवाज में कहां जीजा जी चलो ना शुरू करते हैं। मैंने उसे कहा ठीक है यह कहते ही उसने अपने कपड़े उतारने शुरू किए उसकी पिंक कलर की पैंटी ब्रा को देखकर मैं और भी ज्यादा जोश में आने लगा।

 मैंने उसके स्तनों को दबाना शुरू किया तो उसे बड़ा मजा आने लगा काफी देर तक मैं उसके स्तनों को दबाता रहा। जब मैंने उसकी ब्रा को खोलते हुए उसके स्तनों को अपने मुंह में लिया तो वह मुझे कहने लगी जीजा जी ऐसे ही चूसते रहो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है। मैंने उसके निप्पल को अपने मुंह में ले लिया और उन्हें काफी देर तक चूसता रहा वह पूरी तरीके से जोश में आ चुकी थी। उसकी उत्तेजना पूरी चरम सीमा पर थी जैसे ही मैंने अपने लंड को हिलाना शुरू किया तो संजना मुझे कहने लगी जीजाजी  मुझे क्यों तड़पा रहे हो। यह कहते ही संजना ने मुझे कहा मैं आपके लंड को अपने मुंह में लेना चाहती हूं। उसने जब यह इच्छा जाहिर की तो मैंने भी अपने लंड को उसके मुंह के अंदर डाल दिया। वह अच्छे से मेरे लंड को सकिंग करने लगी वह मेरे लंड को बड़े अच्छे से चूस रही थी जिससे कि हम दोनों की उत्तेजना बढ़ने लगी थी।

उसने मेरे लंड को चूस चूस कर मेरे लंड से पानी निकाल दिया था। संजना ने अपनी पैंटी को उतारते हुए मेरे सामने अपनी योनि को दिखाया तो मैंने भी उसकी योनि को चाटना शुरू कर दिया। उसकी योनि को चाटकर मुझे बड़ा मजा आ रहा था उसकी लंबी टांगे तो मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। मैंने उसकी लंबी टांगों को अपने कंधों पर रखा और उसे पूरी ताकत के साथ चोदना शुरू कर दिया। मेरा लंड उसकी योनि के अंदर तक जा रहा था और मेरे अंडकोष उसकी चूत की दीवार से टकरा रहे थे। यह सिलसिला करीब 2 मिनट तक चला लेकिन जब मैंने उसे डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू किया तो उसकी लंबी टांगे मुझे और भी आकर्षित कर रही थी। मैंने उसे कहा अब तुम घोड़ी बन जाओ। मैंने उसे घोड़े बनाते हुए चोदना शुरू किया मेरे अंडकोष उसकी चूत की दीवार से टकरा कर धराशाई हो जाते। मेरे अंदर और भी ज्यादा उत्तेजना पैदा होने लगती मेरी उत्तेजना इतनी ज्यादा बढ़ने लगी कि उसकी योनि से भी चिपचिपा पदार्थ बाहर की तरफ को निकलने लगा। मेरा लंड भी पूरी तरीके से गर्म हो चुका था मेरे शरीर से पसीना बाहर की तरफ निकलने लगा था मुझे भी एहसास हो गया कि अब मैं ज्यादा समय तक संजना की चूत के मजे नहीं ले पाऊंगा। मैंने उसकी योनि के मजे 2 मिनट और लिए उसके बाद मेरे वीर्य की पिचकारी उसकी योनि के अंदर बड़ी तेज गति से गई जिसके बाद उसकी इच्छा पूरी हो चुकी थी।

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