जल्द ही बुला लिया चुदाई के लिए

Hindi sex story, kamukta मैं सरकारी स्कूल में अध्यापक हूं मुझे नौकरी करते हुए 6 वर्ष हो चुके हैं इससे पहले मैं रामपुर में पढ़ाया करता था और अभी हाल ही में मेरी पोस्टिंग लखनऊ के पास ही हो गई है। मैं लखनऊ में ही रहता हूं और मेरा परिवार भी लखनऊ में रहता है लखनऊ में हमारे काफी रिश्तेदार हैं और मेरे काफी पुराने दोस्त भी हैं क्योंकि मैंने अपने कॉलेज की पढ़ाई लखनऊ से पूरी की है। मैं एक दिन अपने स्कूल के लिए जा रहा था मैं अपने घर से सुबह के वक्त अपने स्कूल निकला था क्योंकि ठंड बहुत ज्यादा हो रही थी इसलिए मैंने सोचा आज अपनी कार से ही स्कूल चले जाता हूं। उसी दिन मेरी मुलाकात मेरे पुराने दोस्त मोहन से हुई मोहन से मेरी ज्यादा बातचीत नहीं हो पाई लेकिन मैंने उसे कहा कि मैं जिस दिन फ्री रहूंगा उस दिन तुम्हें जरूर मिलूंगा।

मुझे कुछ ही समय लखनऊ आए हुए थे लखनऊ से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर मेरा स्कूल था जहां मैं पढ़ाने जाया करता था मैं मोहन से काफी समय से नहीं मिल पाया था क्योंकि मैं पहले रामपुर में रहता था तो इसी वजह से मेरी मुलाकात मोहन से भी नहीं हो पाती थी। उस दिन मैंने मोहन का नंबर ले लिया था और उसे कहा कि मैं तुम्हें जरूर फोन करूंगा मैं अपने स्कूल पहुंच चुका था और स्कूल में सारे बच्चे मुझे देख कर बहुत डरते थे क्योंकि मैं थोड़ा सख्त मिजाज का हूं और इस वजह से बच्चे मेरी इज्जत भी करते थे। रविवार के दिन मेरी छुट्टी थी तो मैंने सोचा आज मोहन से मिल लेते हैं मैंने मोहन से फोन पर बात की तो मोहन कहने लगा हां सुरेश मैं आज फ्री हूं तुम यदि आज मुझसे मिलना चाहते हो तो तुम घर पर आ जाओ मैंने मोहन से कहा मैं तुमसे मिलने के लिए तुम्हारे घर पर आता हूं। मैं जब मोहन से मिलने उसके घर पर गया तो मोहन ने मुझे अपनी पत्नी से मिलाया उसकी पत्नी का नाम माधुरी है उसकी पत्नी का नेचर बड़ा ही अच्छा है मैं उसकी पत्नी से पहली बार ही मिला था क्योंकि इतने वर्षों बाद मैं लखनऊ में मोहन के घर गया था। मोहन ने जब मुझे अपनी पत्नी से मिलवाया तो वह कहने लगा तुम तो शादी में भी नहीं आ पाए थे मैंने मोहन से कहा उस वक्त दरअसल बच्चों के एग्जाम चल रहे थे इसलिए मुझे छुट्टी नहीं मिल पाई थी।

मैंने मोहन से कहा चलो वह बात छोड़ो तुम बताओ तुम्हारे जीवन में क्या चल रहा है मोहन मुझे कहने लगा यार क्या चलेगा वही स्वीट शॉप का काम संभाल रहे हैं तुम्हें तो पता है कि हमारा यह कितना पुराना काम है और उसे ही अब मैं संभाल रहा हूं। मैंने मोहन से कहा तो इसमें बुराई क्या है तुम्हारा काम बहुत अच्छा चलता है मोहन मुझे कहने लगा यार तुम्हें तो मालूम है कि मुझे यह सब काम नहीं करना था लेकिन शायद मेरी किस्मत में स्वीट शॉप ही संभालना लिखा था तो आब मैं यही काम कर रहा हूं। मोहन का परिवार पहले से ही स्वीट शॉप का काम संभालता आया है और उनकी दो तीन दुकानें हैं जो की बहुत अच्छी चलती हैं मोहन और मेरे बीच उस दिन काफी देर तक बात हुई तभी मोहन का फोन बजा मोहन ने जैसे ही फोन उठाया तो वह शायद मोहन के मामा का फोन था उन्होंने मोहन से कहा कि तुम घर पर आ जाओ। मोहन मुझे कहने लगा यार सुरेश हम लोग मेरे मामा के यहां चलते हैं उनसे कुछ जरूरी काम है हम लोग वहां ज्यादा देर नहीं रुकेंगे और कुछ ही देर बाद वापस आ जाएंगे मैंने मोहन से कहा ठीक है चलो फिर। हम दोनों वहां से मोहन के मामा के घर चले गए और जब मोहन ने मुझे अपने मामा से मिलवाया तो मुझे उनसे बात करना अच्छा लगा क्योंकि वह भी टीचर रह चुके हैं। उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम कौन से स्कूल में पढ़ा रहे हो तो मैंने उन्हें स्कूल का नाम बताया वह मुझे कहने लगे अरे हमारी बहू भी तो वही पढ़ाती थी कुछ समय पहले ही उसका ट्रांसफर हुआ है। उन्होंने जब अपनी बहू अंकिता से मिलवाया तो मुझे अंकिता ने बताया कि वह कुछ समय पहले तक उस स्कूल में पढ़ाती थी मैंने अंकिता से कहा मैंने भी कुछ समय पहले ही वहां जॉइनिंग की है अंकिता ने मुझसे वहां के टीचरों के बारे में पूछा तो मैंने अंकिता को उनके बारे में बताया।

हम लोग कुछ देर साथ में बैठे रहे और उसके बाद मैं और मोहन वहां से चले आए मैंने मोहन से कहा अब मैं घर चलता हूं क्योंकि मुझे देर हो रही है मोहन कहने लगा ठीक है तो फिर तुम्हें जब भी समय हो तो तुम मुझसे मिलना मैंने मोहन से कहा ठीक है मुझे जब भी टाइम मिलेगा तो मैं जरूर तुमसे मिलूंगा। मैं जब घर पहुंचा तो मेरी पत्नी मेरा इंतजार कर रही थी और वह कहने लगी आज तो आप काफी देर से घर आ रहे हैं मैंने अपनी पत्नी से कहा हां दरअसल मैं अपने पुराने दोस्त के घर पर गया था और आज वही पर पूरा दिन चला गया। मैं जब घर पहुंचा तो उसी वक्त हमारे पड़ोस में कुछ लोग सामान शिफ्ट कर रहे थे मैंने अपनी पत्नी से पूछा यहां पर कोई रहने आया है क्या तो वह कहने लगी हां यहां पर एक फैमिली रहने आई है और सुना है कि वह पुलिस में है। मैंने अपनी पत्नी से कहा तुम मेरे लिए खाना बना दो मुझे बहुत भूख लग रही है और सुबह मुझे जल्दी भी निकलना है, मै ज्यादातर बस से ही स्कूल जाया करता था। अगले दिन मैं सुबह घर से जल्दी निकल पड़ा मेरी यही दिनचर्या चलती आ रही थी कभी कबार मैं अपने पुराने दोस्तों से मिला करता था और उनके साथ समय बिता लिया करता था। जब भी हम लोग कॉलेज की बात किया करते तो सब लोग कहते यार कॉलेज के दिनों में तो कितने मजे थे और सब कुछ कितना अच्छे से चल रहा था लेकिन अब सब के कंधों पर जिम्मेदारी आ चुकी थी और लगभग सब की शादी हो चुकी थी। इतने वर्ष कैसे बीत गए कुछ पता ही नहीं चला सब कुछ बड़े ही अच्छे से भी चल रहा था मैं घर में इकलौता हूं इसीलिए मुझे शायद कभी भी उन चीजों का एहसास नहीं हुआ।

एक दिन मुझे मोहन ने फोन किया और कहने लगा मेरी बहन की शादी में तुम्हें आना है मैंने मोहन से कहा ठीक है मैं जरूर तुम्हारी बहन की शादी में आऊंगा। मोहन ने मेरे घर पर शादी का कार्ड भिजवा दिया कुछ समय बाद ही उसकी बहन की शादी थी। जब मैं मोहन की बहन की शादी में गया तो मुझे लगा कि मोहन के ऊपर काफी जिम्मेदारी है और वह उन जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रहा है उसने खुद ही शादी का अरेंजमेंट करवा रखा था और सब कुछ बहुत ही बढ़िया तरीके से उसने अरेंजमेंट किया था। मैंने मोहन से कहा यदि तुम्हें किसी भी चीज की आवश्यकता हो तो तुम मुझे बता देना लेकिन मोहन को तो जैसे अकेले ही काम करने में मजा आता है और वह सारी जिम्मेदारियों को खुद ही निभा रहा था। मैंने मोहन से कहा यार तुम तो अब काफी समझदार हो चुके हो और तुम्हारे ऊपर ही सारी जिम्मेदारियां हैं मोहन कहने लगा बस यार तुम्हें क्या बताऊं समय के साथ साथ सारी जिम्मेदारी को निभाना भी आ जाता है। जब शादी के समय मोहन और मैं साथ में बैठे हुए थे तो मोहन मुझे कहने लगा चलो कम से कम तुम मेरी शादी में नहीं आए लेकिन मेरी बहन की शादी में तो आए मुझे बहुत खुशी हुई। उसी दौरान मेरी मोहन के मामा से बात हुई उनसे बात कर के मुझे बहुत अच्छा लगा लेकिन उसी दौरान मेरी अंकिता से बात हुई वह उस दिन बड़ी हॉट लग रही थी और उसकी नजर मुझ पर थी। मुझे नहीं मालूम था कि वह मुझसे क्या चाहती है लेकिन जब वह मेरे साथ मे बैठकर मुझसे बात करती तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मैंने भी अंकिता से उस दिन बहुत देर तक बात की मैंने उसका नंबर ले लिया था।

एक दिन उसने मुझे अपने घर पर बुला लिया उस दिन घर पर कोई नहीं था अंकिता की प्यासी नजरे मेरी तरफ देख रही थी और मैं उसे देख रहा था। मैंने जैसे ही अपने हाथ को उसकी जांघ पर रखा तो वह मचल उठी और वह कहने लगी मैंने जब आपको पहली बार देखा था तो उसी दिन मैंने अपने दिल में आपके लिए एक अलग ही ख्याल पैदा हो गया था और जिस प्रकार से आपने उस दिन शादी में मुझसे बात की तो मुझे बहुत अच्छा लगा। हम दोनों ने एक दूसरे से बहुत देर तक बात की लेकिन जब मैंने उनके कपड़े उतारने शुरू किए तो उसे बहुत अच्छा लगने लगा। मैंने जब अंकिता को पैंटी ओर ब्रा में देखा तो मेरा लंड हिलोरे मारने लगा। मैंने एकदम से अपने लंड को बाहर निकालते हुए अंकिता के हाथों में दिया और उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया। उसने जब मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग करना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था वह बहुत ज्यादा खुश थी। मैंने जब अपने लंड को उसकी योनि पर सटाया तो वह उत्तेजित होने लगी उसकी योनि गिली हो चुकी थी मैं उसे तेजी से धक्के मार रहा था। काफी देर तक मैंने उसे अपने नीचे लेटा कर चोदना जारी रखा जब मैंने उसे घोड़ी बनाकर चोदना शुरू किया तो उसे और भी मजा आने लगा वह मेरा साथ बहुत अच्छे से दे रही थी।

मैं उसे तेजी से धकके दे रहा था लेकिन जब मैंने उसकी गांड के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह चिल्लाने लगी और कहने लगी आज पहली बार किसी ने मेरी गांड मारी है। मैंने उसे कहा लेकिन तुम्हारी गांड का मजा ही कुछ और है मैं उसे तेजी से धक्के दे रहा था वह अपनी चूतडो को मुझसे मिला रही थी। मैंने उसकी चूतड़ों की तरफ देखा तो उससे खून निकल रहा था लेकिन उसे बहुत अच्छा लग रहा था और वह मेरा साथ काफी देर तक देती रही। मुझे बहुत मजा आया जैसे ही मेरा वीर्य पतन अंकित की चूत मे हुआ तो हम दोनो साथ में बैठे रहे। वह कहने लगी आप कभी और घर पर आइएगा, मैंने उसे कहा क्यों नहीं आप जब बुलाएगे तो मैं आ जाऊंगा यह कहते हुए मैने अंकिता से कहा मैं अभी चलता हूं कभी और आपसे दोबारा मुलाकात होगी। जल्द ही उसने मुझे बुला लिया और उस दिन भी हम दोनों ने जमकर सेक्स का मजा लिया।

कृपया कहानी शेयर करें :