जब उसकी चूत में दर्द होने लगा

Antarvasna, hindi sex kahani: मैं अपने घर से बाहर निकला, जब मैं अपने घर से बाहर निकला तो वहां पर मेरी मुलाकात रोहन से हुई रोहन काफी दिनों बाद मुझे मिला था। उस दिन मेरी ऑफिस की छुट्टी थी इसलिए रोहन ने मुझे कहा कि चलो आज कहीं घूम आते हैं। मैं और रोहन उस दिन मूवी देखने के लिए सिनेमा हॉल में चले गए और जब हम लोग मूवी देख कर घर वापस लौटे तो रोहन ने मुझसे कहा कि राकेश हम लोग जल्द ही मुलाकात करेंगे और फिर रोहन अपने घर चला गया था। रोहन मुझे काफी दिनों के बाद मिला था रोहन से मिलकर मुझे काफी अच्छा लगा लेकिन उसके बाद मैं अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में काफी ज्यादा बिजी रहने लगा जिससे कि मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता था और मैं रोहन से काफी समय तक मुलाकात नहीं कर पाया। एक दिन रोहन मुझे मिला उस दिन वह अपने ऑफिस से घर लौट रहा था और मैं भी अपने ऑफिस से घर लौटा ही था तभी रोहन ने मुझे बताया कि वह हमारी क्लास में पढ़ने वाली मालती के साथ सगाई करने जा रहा है।

मैंने रोहन से पूछा लेकिन तुम तो मालती से कभी बात किया ही नहीं करते थे और अब तुम्हारी सगाई उससे होने जा रही है। रोहन ने मुझे बताया कि वह मालती को कुछ महीनों पहले मिला था उसके बाद उन दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई और वह दोनों सगाई करने के लिए तैयार हो चुके हैं। मैंने रोहन को उसकी सगाई की बधाई दी और रोहन से कहा कि चलो यह तो बड़ी खुशी की बात है कि तुम मालती के साथ में सगाई करने जा रहे हो। रोहन बहुत ज्यादा खुश था और मैं भी बहुत ज्यादा खुश था। रोहन से थोड़ी देर तक मैंने बात की और फिर मैं अपने घर लौट आया। कुछ ही समय बाद रोहन की सगाई मालती के साथ होनी थी और मैं भी रोहन की सगाई में गया हुआ था। जब मैं रोहन की सगाई में गया तो वहां पर मेरी मुलाकात मालती के साथ हुई मालती से मिलकर मैं बहुत खुश था और मैंने मालती और रोहन को उन दोनों की सगाई की बधाई दी वह दोनों बड़े ही खुश है। रोहन और मालती की सगाई हो चुकी थी उन दोनों की सगाई के दौरान मेरी मुलाकात महिमा से हुई महिमा को मैं पहले से ही जानता था वह मालती के साथ मुझे एक दो बार मिली भी थी और महिमा से मेरी बात हुई थी।

महिमा के साथ  उस दिन बात कर के मैं बहुत ज्यादा खुश था और मुझे अच्छा भी लगा। हालांकि काफी लंबे समय तक मैं महिमा को मिल नहीं पाया था लेकिन एक दिन हम दोनों की मुलाकात इत्तेफाकन एक पार्टी में हो गई। जब हम दोनों की मुलाकात हुई तो मुझे महिमा से मिलकर बहुत ही अच्छा लगा और महिमा को भी मुझसे मिलकर बड़ा अच्छा लगा। हम दोनों ने उस दिन साथ में काफी अच्छा समय बिताया और एक दूसरे के साथ में समय बिताने से हम दोनों बड़े ही खुश थे। मैं और महिमा बहुत ही ज्यादा खुश थे महिमा और मेरी मुलाकात उसके बाद होती ही रहती थी। हम दोनों एक दूसरे को ज्यादा से ज्यादा मिलते हैं और एक दूसरे के साथ समय बिताने की कोशिश किया करते हम दोनों को एक दूसरे के साथ में समय बताने में बहुत ही अच्छा लगता। जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ होते तो हम दोनों बड़े ही खुश होते थे। एक दिन महिमा और मैंने साथ में समय बिताने के बारे में सोचा और उस दिन हम दोनों डिनर करने के लिए एक साथ गए। जब हम दोनों ने उस दिन डिनर किया तो हम दोनों के बीच की नज़दीकियां उस दिन काफी बढ़ती चली गई थी। हम दोनों एक दूसरे से उस दिन के बाद बहुत ज्यादा मिलने लगे थे मैं और महिमा एक दूसरे को जब भी मिलते तो हम दोनों को बड़ा ही अच्छा लगता था।

हम दोनों एक दूसरे के साथ में अच्छा समय बिताया करते लेकिन कुछ समय के लिए मुझे अपने काम से बेंगलुरु जाना था जिस वजह से मेरी मुलाकात महिमा से नहीं हो पाई थी और महिमा से मेरी फोन पर भी बात नहीं हो पाई थी। महिमा अपने ऑफिस के काम के चलते बिजी थी मैं भी अपने काम के चलते बिजी था इसलिए मैं महिमा से बात नहीं कर पाया था। जब मैं बेंगलुरु से वापस लौटा तो मैंने महिमा को मिलने के बारे में सोचा और मैं जब महिमा को मिला तो मुझे महिमा से मिलकर बड़ा ही अच्छा लगा। हम लोग काफी समय बाद एक दूसरे को मिल रहे थे तो एक दूसरे के साथ मिलकर हमे काफी अच्छा लगा जिस तरीके से हम दोनों ने एक दूसरे के साथ उस दिन समय बिताया। समय के साथ साथ हम दोनों की नज़दीकियां बहुत ज्यादा बढ़ती चली गई थी और हम दोनों एक दूसरे के बहुत ज्यादा ही करीब आ चुके थे यही वजह थी कि हम हम दोनों एक दूसरे के साथ में टाइम स्पेंट किया करते हैं। जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ में होते तो हम दोनों को बड़ा अच्छा लगता था। एक दिन मैं और महिमा साथ में बैठे हुए थे जब उस दिन हम दोनों साथ में बैठे थे तो हम दोनों ने फैसला किया कि हम दोनों आज कहीं शॉपिंग के लिए जाते हैं और हम दोनों उस दिन शॉपिंग के लिए चले गए।

हम दोनों शॉपिंग करने के बाद कुछ देर कॉफी शॉप में बैठे हम दोनों को पता ही नहीं चला कि कब वहां पर हम लोगों को 2 घंटे से ऊपर हो चुका है। महिमा मुझे कहने लगी कि मैं अब घर चलती हूं मैंने महिमा को कहा कि मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूं। महिमा ने कहा कि नहीं मैं चली जाऊंगी लेकिन मैंने महिमा से कहा कि मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूं और फिर मैंने महिमा को उसके घर तक छोड़ दिया था। महिमा को घर छोड़ने के बाद मैं अपने घर चला आया और जब मैं अपने घर पहुंचा तो उस दिन मैं बहुत ही ज्यादा खुश था। महिमा के साथ में समय बिताकर मुझे बड़ा ही अच्छा लगा था। मैं घर पहुंचा ही था कि तभी महिमा का फोन मुझे आया जब महिमा का फोन मुझे आया तो वह मुझसे बातें करने लगी और कुछ देर हम दोनों ने एक दूसरे से बातें की। थोड़ी देर बाद मैंने फोन रखा और मां मुझे कहने लगी कि राकेश बेटा तुम डिनर कर लो लेकिन मैंने मां से कहा कि नहीं मां मेरा मन डिनर करने का नहीं है परंतु मां के आगे मेरी एक ना चली और मुझे डिनर करना पड़ा। हालांकि मेरी इच्छा बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन फिर भी मुझे डिनर करना पड़ा। डिनर करने के बाद मैं अपने रूम में आ गया था।

जब मैं अपने रूम में आया तो मुझे बहुत ही गहरी नींद आ गई और अगले दिन सुबह मैं जल्दी अपने ऑफिस के लिए निकल पड़ा था। मेरे ऑफिस में काफी ज्यादा काम था इसलिए मैं उस दिन महिमा से मिल नहीं पाया था। महिमा ने मुझे फोन किया था परंतु मैंने उसे कहा कि मैं आज तुमसे मिल नहीं पाऊंगा। महिमा ने कहा कि कोई बात नहीं और फिर हम लोगों ने कुछ दिनों के बाद मिलने का फैसला किया। महिमा और मैं कुछ दिनो बाद मिले और हम दोनो एक दूसरे के गले मिले उस दिन हम दोनो एक दूसरे के लिए तडप रहे थे। महिमा मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए तड़प रही थी। वह मेरे साथ सेक्स करना चाहती थी। मैंने भी महिमा के साथ सेक्स करने का फैसला कर लिया था। मैं महिमा के साथ उस दिन अपने दोस्त के घर पर चला गया और वहां पर हम दोनो एक दूसरे के साथ बैठे हुए थे। मैं महिमा के साथ बैठा था वह बहुत ज्यादा तड़प रही थी। मैंने जब महिमा के होठों को चूम कर उसकी गर्मी को बढ़ाना शुरू किया वह मुझे कहने लगी मेरी गर्मी तुमने बढा दी है।

महिमा को कोई भी आपत्ति नहीं थी मैने महिमा के स्तनों को दबाना शुरू किया और मैं महिमा के स्तनों को हाथों से दबाता जा रहा था मुझे बहुत मजा आ रहा था और महिमा को भी मजा आ रहा था। लह गरम होती जा रही थी। हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बढा चुके थे। हम दोनों ने एक दूसरे की गर्मी को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया था। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो महिमा ने उसे अपने मुंह में ले लिया वह उसे चूसने लगी थी। महिमा जिस तरह से मेरे मोटे लंड को सकिंग कर रही थी उससे मुझे मज़ा आ रहा था और महिमा को भी बड़ा मजा आने लगा था। उसने मेरे लंड से पानी निकाल दिया था। वह मेरी गर्मी बढा चुकी थी। हम दोनों उत्तेजित हो चुके थे। मैंने महिमा को कहा मैं तुम्हारी चूत को चाटना चाहता हूं। महिमा की पैंटी उतारने के बाद मैंने महिमा के पैरों को खोल लिया और मैं उसकी चूत का रसपान करने लगा था। मैं जिस तरीके से उसकी चूत को चाट रहा था उससे मुझे मजा आ रहा था और उसकी चूत से निकलता हुआ पानी भी बहुत ज्यादा बढ़ चुका था। महिमा मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा है मुझे भी मजा आने लगा था।

हम दोनों गर्म हो चुके थे। महिमा की चूत से निकलती हुए गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी और उसकी चूत से बहुत ज्यादा पानी निकल आया था। मैंने महिमा की चूत पर अपने लंड को लगाकर कुछ देर रगडा और फिर अंदर की तरफ डालाना शुरू किया। जब मेरा लंड महिमा की चूत के अंदर मेरा चला गया तो वह जोर से चिल्लाई और मुझे बोली मेरी चूत मे दर्द होने लगा है। वह अपने पैरो को खोलने लगी उसकी चूत से पानी निकल आया था और मैं बहुत ज्यादा खुश था जब उसकी योनि मे मेरा लंड प्रवेश हुआ था। वह मेरा साथ अच्छे से दे रही थी। वह बड़ी तेज आवाज में सिसकारियां ले रही थी वह जिस तरीके से सिसकारियां लेकर मेरी गर्मी को बढ़ा रही थी उससे मेरी गर्मी बढ रही थी। वह मुझे कहने लगी तुम मुझे बस ऐसे ही धक्के मारते रहो। मैं महिमा के पैरो को खोलकर उसे तेजी से धक्के दे रहा था और मैंने उसे काफी देर तक चोदा। जब मेरा माल बाहर की तरफ गिरने को था मैंने उसे और तेजी से चोदा और उसकी भी बड़ा मजा आने लगा था। हम दोनों की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। मैंने महिमा की चूत के अंदर अपने माल को गिरा दिया था। मैंने जब महिमा की योनि से अपने लंड को बाहर निकाला तो महिमा की चूत से पानी निकल रहा था।