जब बुर मिले तब लंड खिले

hindi porn kahani, indian sex stories

यह कहानी विजय नाम के एक लड़के की है। उसके पिताजी एक बड़े घर के टैक्सी ड्राईवर थे। वह अपने मालिक की बेटी पूजा को हमेशा कॉलेज छोड़ा करते थे और कॉलेज से घर लाया करते थे। जब विजय के पापा की तबीयत खराब होती तो विजय ही ड्राइवर का काम करता। वह ही उसे लाने, ले जाने का काम करता। कुछ समय से विजय ही अधिकतर पूजा को कॉलेज छोड़ा करता था और कॉलेज से घर लाया करता था। क्योंकि विजय के पिताजी की तबीयत बहुत खराब थी। इस वजह से उनका सारा काम विजय ही करता। कुछ दिन तक ऐसे ही वह पूजा को कॉलेज छोड़ा करता था। इसी बीच विजय को पूजा पसंद आने लगी। अब वह अपने पिता की जगह खुद ही यह काम करने लगा था।

विजय हमेशा समय से पहले ही पूजा के घर पहुंच जाता और कॉलेज जाते समय दोनों खूब सारी बातें करते और कॉलेज से घर आते समय भी वह पूजा को घुमाने ले जाता था। दोनों में अच्छी बातचीत होने लगी दोनों एक दूसरे के साथ खूब घुल मिल गए थे। विजय तो पूजा को पसंद करता ही था लेकिन अब पूजा भी विजय को पसंद करने लगी। दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे थे। अब पूजा और विजय दोनों कॉलेज जाने के बहाने कहीं और घूमने चले जाते और वहां खूब मस्ती करते दोनों बहुत खुश थे। एक दिन विजय ने अपने और पूजा के बारे में अपने पिताजी को बताया तो उसके पिताजी विजय से बहुत नाराज हुए उन्होंने विजय को समझाया की उनमे और हममे बहुत अंतर है। वह तुम्हारी शादी पूजा से कभी नहीं करवाएंगे इसलिए तुम पूजा से मिलना छोड़ दो। विजय को यह बात पसंद नहीं आई। उसने भी कह दिया शादी करूंगा तो पूजा से ही करूंगा और वह वहां से चला गया। फिर दूसरे दिन वह पूजा को छोड़ने उसके कॉलेज गया। विजय बहुत परेशान था वह अपने और पूजा के बारे में सोचने लगा। फिर कुछ दिन तक वह दोनों ऐसे ही मिलते रहे और फिर एक दिन अचानक पूजा के पिताजी ने विजय और पूजा को मिलते हुए देख लिया और फिर गुस्से से घर चले गए।

दूसरे दिन उन्होंने विजय को अपने घर बुलाया और दोनों को खूब डांट लगाई। लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं था फिर उन्होंने विजय को नौकरी से निकाल दिया। कुछ टाइम तक पूजा कॉलेज जाने लगी और विजय से मिलने लगी इस बात का पता पूजा के पिताजी को लगा तो उन्होंने पूजा का कॉलेज जाना बंद कर दिया और उसे घर पर ही एक कमरे में बंद रखा। जिससे वह दोनों आपस मे मिल ना सके। उनको पूजा और विजय का मिलना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था क्योंकि वह एक ड्राइवर का बेटा था। वह ड्राइवर जो उन्हीं के घर का ड्राइवर था। उनको यह बात बिल्कुल हजम नहीं हुई। उन्होंने विजय के पापा से बात की कहां की विजय को समझाने की कोशिश करें और कहां की विजय आज से ड्राइवर का काम नहीं करेगा। मैंने उसे नौकरी से निकाल दिया है। यह सुनकर विजय के पिताजी बहुत दुखी हुए और विजय को समझाने की लाख कोशिश की लेकिन वह किसी की कहां सुनने वाला था।

विजय ने भी मन बना लिया था कि वह पूजा से मिलकर ही रहेगा फिर उसने एक प्लानिंग करी और किसी तरीके से उसने पूजा को घर के बाहर बुला लिया। पूजा भी उससे मिलकर बहुत खुश हुई और वह उसके गले लग गई। अब विजय पूजा को लेकर वहां से कहीं दूर निकल पड़ा। वह अपने दोस्त के यहां पर रुक गया। उसके दोस्त ने उनके लिए पूरा बंदोबस्त कर रखा था। वह दोनों एक दूसरे का साथ पाकर बहुत खुश हो गए और गले मिलकर एक दूसरे के रोने लगे। अब रात को पूजा और विजय के बीच सेक्स संबंध बन गए। वह दोनों सोए हुए थे सोते-सोते विजय के मन में भी ना जाने क्या ख्याल आया। उसने पूजा के स्तनों पर हाथ रख दिया और उनको दबाने लगा। पूजा भी मस्त हो गई और उसने भी विजय के लंड पर हाथ रख दिया बहुत जोर से दबाने लगी और धीरे-धीरे दोनों एक दूसरे के प्यार में मदहोश हो गए थे। उन्होंने किस करना शुरू कर दिया और एक दूसरों के होठों को काट लिया। जैसे ही उन्होंने यह किया उसके बाद विजय ने भी उसके स्तनों को बाहर निकालकर मुंह से चूसने लगा। जैसे जैसे वह होता जाता उससे पूजा भी मजे में आ जाती और वह भी अपनी योनि में अपने हाथ से उंगली घुसेड़ देती। पूजा को बहुत अच्छा लग रहा था और विजय भी काफी खुश हो रखा था।

अब विजय के लंड पर हाथ रखते हुए उसको तेज तेज हिलाने लगी कभी उसको आगे कभी कभी पिछे करती थी। विजय भी मस्त हो रहा था। विजय ने पूजा को कहा तुम इसे अपने मुंह में ले लो और सेक्स करो पूजा ने भी उसके लंड को अपने मुंह में ले लिया और ओरल सेक्स करने लगी। उसके लंड को बहुत अच्छे से चूस रही थी और अपने गले में भी ले रही थी।  विजय पूजा के मुंह को पकड़ कर अपने लंड को अंदर बाहर करता। दोनों ही मस्त हो चुके थे तो दोनों ने फैसला किया कि अब वह एक दूसरे को साथ सेक्स करेंगे। विजय ने जैसे ही उसकी पिंक योनि को अपने हाथ से छुआ तो मस्त हो गई। अब विजय ने भी उसकी योनि में अपनी उंगली डाल दी और उसे अंदर बाहर करने लगा। जैसे ही उसकी योनि गीली हो गई उसने अपनी उंगली वहां से निकाली और उसके उंगली पर जो गीला पदार्थ लगा हुआ था। उसको उसने चाट लिया और अब उसने पूजा की चूत गांड को चाटना शुरु कर दिया। जैसे-जैसे वह चाटता जाता पूजा को आनंद आता था और वह अपने मुंह से हलकी सी आवाज निकालती। पूजा का पूरी तरीके से गिला हो चुका था और उसका पानी बाहर बह रहा था।

यह देखते हुए विजय ने अपने लंड को पूजा की योनि से टच करवा दिया। जैसे ही विजय ने अपने लंड को पूजा की योनि से टच किया, वह मचलने लगी अब उसको विजय ने कस कर पकड़ लिया और धीरे-धीरे उसकी योनि में अपना लंड डाल दिया। जिससे कि वह चिल्ला पड़ी क्योंकि विजय का लंड बहुत ही मोटा और बड़ा था पूजा ने पहली बार ही किसी का लंड अपनी योनि में लिया था। वह एक वर्जिन लड़की थी। जैसे-जैसे पूजा उसके लंड को अपने चूत के अंदर लेती रही तो उसकी सील टूटने की आवाज विजय को महसूस हुई जैसे ही पूजा की सील टूटी तो वह बड़ी तेज चिल्लाई। विजय ने उसके मुंह पर अपने हाथों से दबा दिया जिससे उसकी चीख बाहर उसका दोस्त ना सुन पाए। अब वह उसे बड़ी अच्छे से चोदता कभी वह अंदर धक्का मारता तो कभी वह बाहर की तरफ निकालता। ऐसा करते-करते वह काफी तेजी से उसके साथ सेक्स करने लगा वह धीरे-धीरे चिल्लाने लगी और उसकी उंगली को अपने मुंह से दबा लेती।

विजय को पूजा की नाक की रिंग देख कर उसे अच्छा लगने लगा क्योंकि वह उसमे बड़ी ही सेक्सी लगती थी। अब वह उसके स्तनों से स्तनपान करने लगा जैसे-जैसे विजय स्तनपान करता वैसे ही पूजा को भी अच्छा लगने लगता है। वह काफी तेजी से चिल्लाती विजय फिर से उसके मुंह पर अपने हाथ से दबा देता और उसे चुप होने के लिए बोलता। वह बोलती मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है जब तुम मुझे चोद रहे हो मैं कैसे चुप रह सकती हूं। अपनी फीलिंग को भी दबा दूं क्या बोलो। विजय बोला कोई बात नहीं तुम और तेज से चिल्लाओ जैसा तुम्हें लगता है। विजय ने बड़े तेज तेज झटके मारने शुरू किए। जैसे जैसे बहुत तेज झटके मारता जाता उसी प्रकार पूजा की भी आवाज निकल पड़ती। वह आवाज उसके दोस्त को सुनाई पड़ती जिससे कि वह बाहर बैठकर मुठ मारता। ऐसा करते हुए काफी समय हो जाने के बाद विजय ने उसकी पिंक चूत मे अपना तरल पदार्थ गिरा दिया। उन दोनों ने वहां पड़े खून को साफ किया और वह दोनों एक दूसरे की बाहों में लेटे रहे और बातें करने लगे पिताजी क्या बोलेंगे। वह मानेंगे या नहीं विजय ने पूजा को सांत्वना दी और कहा कोई बात नहीं हम देख लेंगे। उसके कुछ समय बाद विजय अपने दोस्त के यहां से कहीं और चला गया।

कुछ समय बाद विजय की नौकरी भी लग गई थी और पूजा भी कुछ काम करने लगी थी और उन दोनों का बच्चा भी हो गया था। अब उन दोनों ने एक दिन फैसला किया कि अपने बच्चे को लेकर घर चलते हैं। क्या पता शायद पिताजी मान ले अब वह अपने घर के लिए गए। उन्होंने देखा वहां उनके पिताजी बैठे हुए हैं। उन दोनों को पूजा के पिताजी ने गले लगाया और उन दोनों को एक्सेप्ट कर लिया।