जब भी मिलता तो बोलती मुझे चोदो ना

Antarvasna, desi kahani: पापा का ट्रांसफर अब पुणे हो चुका था और हम लोग पुणे आ चुके थे पुणे आए हुए हमें करीब दो महीने ही हुए थे लेकिन हमारे पड़ोस में रहने वाले मोहन अंकल के परिवार के साथ हम लोगों के काफी अच्छे संबंध हो चुके थे। वह लोग अक्सर हमारे घर पर आया करते थे और हम लोग उनके घर पर जाते थे मैं पुणे के ही कॉलेज में पढ़ने लगा था और अपनी एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के कुछ समय बाद मैंने पुणे के ही एक प्रतिष्ठित कंपनी में जॉब करना ठीक समझा और वहीं पर मैं जॉब करने लगा। हालांकि मुझे मुंबई से भी कई ऑफर आए थे लेकिन मैंने पुणे में ही जॉब करना ठीक समझा क्योंकि मेरा परिवार भी पुणे में ही रहता था। पापा भी अब कुछ समय बाद रिटायर होने वाले थे हम लोग चाहते थे कि अब हम लोग पुणे में ही कोई घर खरीद ले। पापा ने मुझसे इस बारे में कहा तो मैंने पापा से कहा कि हां पापा यह बिल्कुल ठीक है हम लोगों को यहीं रहना चाहिए।

अब हम लोगों ने पुणे में ही अपने लिए घर तलाशना शुरू कर दिया हम लोग कई बिल्डरों से मिले लेकिन अभी तक हमें कोई अच्छा घर नहीं मिल पाया था। काफी तलाश करने के बाद हम लोगों को मोहन अंकल ने एक बिल्डर से मिलवाया और जब हम लोग उनसे मिले तो उन्होंने हमें जो फ्लैट दिखाया वह हमे काफी पसंद आया और हम लोगों ने उन्हें उसका बुकिंग अमाउंट दे दिया। बुकिंग अमाउंट देने के बाद कुछ समय बाद हम लोगों ने वह फ्लैट खरीद लिया। हम लोगों ने अपना फ्लैट खरीद लिया था इसलिए हम लोग अब दूसरी सोसायटी में रहने के लिए आ चुके थे लेकिन मोहन अंकल से हम लोगों का मिलना जुलना अभी भी लगा रहता था। वह हो कुछ दिनों में हम से मिलने आ ही जाते थे मोहन अंकल के काफी रिश्तेदारों से हमारी जान पहचान भी हो चुकी थी क्योंकि हम लोग उनके घर के सामने ही रहते थे इसलिए उनके रिश्तेदार जब भी आते तो अंकल हम लोगों से भी उनका परिचय करवाया करते थे।

मैं अब अच्छा कमाने लगा था और मेरा प्रमोशन भी हो चुका था। पापा भी रिटायर होने वाले थे पापा जिस दिन रिटायर हुए उस दिन पापा काफी उदास थे वह कहने लगे कि कितने सालों से मैं हर रोज ऑफिस जाता था और ऑफिस से घर लौटता था लेकिन अब मैं ऑफिस नहीं जा पाऊंगा इस बात से पापा बहुत दुखी थे। मैंने पापा से कहा कि पापा एक ना एक दिन तो आपको रिटायर होना ही था अब आप मां के साथ समय बिताइए तो पापा कहने लगे आकाश बेटा तुम यह तो ठीक कह रहे हो इतने साल नौकरी करने के बाद तुम्हारी मां ने घर की सारी जिम्मेदारियों को बड़े अच्छे से निभाया है। अब पापा ज्यादातर घर पर ही रहते थे कभी कबार मोहन अंकल उनसे मिलने के लिए आ जाते थे। एक दिन मैं अपने ऑफिस से घर लौट रहा था तो मैंने देखा कि रास्ते में काफी ज्यादा भीड़ थी हमारी सोसाइटी के बिलकुल बाहर ही बहुत ज्यादा भीड़ थी मैंने वहां देखा तो कुछ लोग एक लड़के को बहुत ज्यादा पीट रहे थे मैं बीच में गया और मैंने उसे बचाने की कोशिश की तो मुझे सारा माजरा समझ आया। उन्होंने कहा कि यह एक चोर है और यह यहां से चोरी कर के भाग रहा था मैंने उन्हें कहा कि आप लोगो को इसकी पुलिस में कंप्लेंट करवानी चाहिए। जब पुलिस को मैंने इस बारे में जानकारी दी तो कुछ ही देर बाद पुलिस भी वहां पर पहुंची और उस चोर को पकड़ कर अपने साथ ले गए। मैं भी अपने घर आ चुका था जब मैं घर पहुंचा तो मां ने मुझे बताया कि बेटा यही पास में चोरी हुई थी तो मैंने मां को सारी बात बताई और मां को कहा कि कुछ लोग उस चोर को गेट के बाहर बहुत मार रहे थे तो मैंने पुलिस को इस बारे में जानकारी दी और पुलिस उसे अपने साथ उसे ले गई। मैं और मां साथ में बैठे हुए थे तो मैंने मां से कहा मां आज पापा नहीं दिखाई दे रहे तो मां कहने लगी कि बेटा वह मोहन अंकल से मिलने के लिए गए हैं मैंने मां से कहा लेकिन पापा उनसे मिलने कब गए थे। मां कहने लगी कि वह उनसे मिलने के लिए दोपहर में ही चले गए थे और अभी तक वह लौटे नहीं है मैंने पापा को फोन किया लेकिन पापा का फोन लग नहीं रहा था मैंने दोबारा से उन्हें कॉल किया तो उन्होंने फोन उठाया और कहा कि बेटा बस मैं घर पहुंचने वाला हूं।

वह थोड़ी देर बाद घर पहुंच गए थे हम लोग उस दिन रात में साथ में ही डिनर कर के कुछ देर बैठे हुए थे और अगले दिन मैं अपने ऑफिस चला गया। सुबह मैं अपने ऑफिस के लिए घर से निकला ही था कि मेरी कार में कुछ खराबी हो गई जिस वजह से मैं अपने घर के पास ही एक मोटर मैकेनिक के पास में चला गया। उसने जब गाड़ी देखी तो उसने कहा कि साहब आज आपको गाड़ी यहीं छोड़नी पड़ेगी मैं इसे शाम तक ही ठीक कर पाऊंगा। मैंने उसे कहा ठीक है मैं गाड़ी तुम्हारे पास ही छोड़ देता हूं और शाम को मैं कार लेने के लिए आऊंगा। मैं उस दिन ऑटो से ही अपने ऑफिस गया और जब मैं अपने ऑफिस पहुंचा तो उस दिन ऑफिस में काफी ज्यादा काम था इसलिए मुझे उस दिन घर लौटने में बहुत देर हो गई थी। जिस कॉलोनी में मैं रहता था उसी कॉलोनी में मुझे एक लड़की दिखी वह मुझे काफी पसंद आने लगी थी मैं उसे अक्सर आते जाते देखता वह कुछ समय पहले ही वहां रहने के लिए आई थी शायद वह कॉलेज की पढ़ाई करती थी। एक दिन मैंने उसे देखा कि वह किसी लड़की के साथ है तो मुझे लगा कि वह शायद उसका बॉयफ्रेंड होगा इसलिए मैंने उसके बारे मे सोचना ही छोड़ दिया था।

एक दिन वह लड़की मुझसे खुद ही आकर बात करने लगी जब उसने मुझसे बात की तो उसने मुझे अपना परिचय दिया और कहा मेरा नाम मेघना है। मेघना दिखने में बहुत ज्यादा सुंदर है उसने मुझे बताया वह अकेली रहती है। मेघना को जब भी कोई जरूरत होती तो वह मुझे फोन कर लिया करती और मैं उसकी मदद पल भर में ही कर लिया करता जिससे कि मेघना मुझसे काफी करीब आने लगी थी। एक शाम हम दोनों साथ में बैठे हुए थे हम लोग उसके घर पर ही थे मैंने उस दिन मेघना से उसके रिलेशन के बारे में पूछा तो मेघना ने बताया कि वह सिंगल है। मैंने उससे कहा क्या तुम अभी सिंगल हो या कुछ दिनों पहले सिंगल हुई हो? वह मुझे कहने लगी आकाश में तुम्हारी बात का कोई मतलब नहीं समझी मैंने उसे कहा मैंने तुम्हें एक दिन एक लड़के के साथ देखा था। वह मुझे कहने लगी वह मेरा दोस्त है इस से ज्यादा हम लोगों के बीच में कोई भी रिश्ता नहीं है। मैंने मेघना की जाघ पर हाथ को रखा और जब मैंने मेघना की जाघ पर हाथ रखा तो वह मेरी तरफ देखने लगी थी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने मेघना से कहा मेघना मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता हूं मेघना ने मेरी तरफ देखा और मैंने उसके होठों को चूम लिया। उसके नरम होठों को मैंने चूमा तो मैंने उसकी चूत के अंदर अपने हाथ को डालना शुरू किया मैं जब उसकी चूत को सहलाने लगा तो उसकी चूत से पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा था। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मैंने अब उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया था। मैं जब उसके होंठों को चूसकर उसके स्तनों को दबाता तो मुझे बहुत ही मजा आता और उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने काफी देर तक उसके होंठों को चूमा जिससे कि वह पूरी तरीके से उत्तेजीत हो गई थी और अपने आपको बिल्कुल रोक नहीं पा रही थी। हम दोनों ने अपने कपड़े उतार दिए थे अब हम दोनों के नंग धड़ंग बदन एक-दूसरे से टकराने लगे थे जिससे कि हम दोनों को ही गर्मी महसूस होने लगी। मुझे साफ तौर पर महसूस हो रहा था कि मेरा बदन बहुत ज्यादा गर्म हो चुका है और शायद मेघना भी अपनी गर्मी को रोक नहीं पा रही थी इसलिए वह भी अपनी चूत में उंगली डालने की कोशिश कर रही थी। मैंने उसकी चूत की तरफ देखा तो उसकी चूत से पानी निकाल रहा था और मुझे उसकी चूत को चाटने का मन हुआ।

मैंने बहुत देर तक उसकी चूत को चाटा तो वह पूरी तरीके से उत्तेजीत हो गई और मेरे लंड को वह चूत मे लगाने लगी। ऐसा काफी देर तक उसने किया उसके बाद मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह मुझे कहने लगी तुमने मेरी चूत में दर्द कर दिया है। मैंने उसे तेजी से धक्के मारने शुरु कर दिए तो वह भी मेरा साथ देने लगी थी उसकी सिसकियां बढ़ने लगी थी। उसकी सिसकियां इतनी अधिक होने लगी थी कि मुझे मजा आने लगा था और उसे भी बड़ा अच्छा लग रहा था काफी देर तक मैंने उसे अपने नीचे लेटाकर चोदा और फिर मैंने जब उसे डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू किया उसकी चूतड़ों को देखकर मैंने उसकी चूतड़ों को बहुत देर तक प्रहार किया मुझे मजा आने लगा था। मैं अपने लंड को अंदर बाहर करता तो वह मजे मे आ जाती वह मेरा साथ बड़े अच्छे से दे रही थी। वह मुझे कहने लगी तुम मुझे ऐसे ही बस चोदते रहो मैं बहुत ज्यादा खुश था। मैने उसे कहा कि मुझे इतना आनंद आ रहा है कि मैं तुम्हें शब्दों में बयां नहीं कर सकता वह कहने लगी मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा है।

अब वह मुझसे अपनी चूतड़ों को मिलाए जा रही थी उसने अपनी चूतडो को मुझसे मिलाया और जब मै अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करता तो वह जोर से चिल्लाती और मुझे कहती मुझे बहुत अच्छा लग रहा है और ऐसे ही काफी देर तक मैने उसे चोदा। उसके बाद मैंने उसकी इच्छा पूरी तरीके से शांत कर दी थी वह भी ज्यादा देर तक मेरा साथ दे नही पाई और मुझे कहने लगी मैं तुम्हारा साथ बिल्कुल भी नहीं दे पाऊंगी। मैंने उसकी चूत के अंदर अपना वीर्य को गिराकर उसकी इच्छा को शांत कर दिया था वह बड़ी खुश थी। उसके बाद मेघना से मिलने के लिए मैं अक्सर जाता रहता। जब भी मै उसे मिलने जाता तो वह मुझसे कहती जानेमन मुझे चोदो ना मेरा सेक्स करने का बहुत मन है और मैं उसके साथ सेक्स कर लिया करता।