हम दोनो एक कमरे मे बंद थे

Antarvasna, hindi sex kahani: आकांक्षा की जिद के आगे मेरी एक ना चली और कुछ दिनों के लिए मुझे आकांक्षा के साथ उसके घर पर जाना पड़ा। आकांक्षा के घर पर जब मैं गया तो उसके पापा और मैं साथ में बैठे हुए थे वह मुझे कहने लगे कि बेटा मैं कुछ दिनों बाद रिटायर होने वाला हूं। आकांक्षा के सिवा उनका इस दुनिया में कोई भी नहीं था और आकांक्षा की मां भी कहने लगी की बेटा हम लोग चाहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद हम लोग गांव चले जाएं। मैंने उन्हें कहा कि लेकिन आपको यहां रहने में क्या परेशानी है तो वह कहने लगे कि बेटा अब हमारा यहां रहने का बिल्कुल मन नहीं करता और  इतनी भीड़ भाड़ में हम लोग बिल्कुल भी एडजेस्ट नहीं कर सकते इसलिए हम लोग गांव जाना चाहते है, मैंने भी उन्हे ज्यादा कुछ नहीं कहा। हम लोग उनके घर पर पर करीब दो दिन तक रुके और फिर हम लोग वापस अपने घर लौट आए।

आकांक्षा कहने लगी कि मनोज तुम पापा मम्मी को समझाओ कि वह गांव जा कर क्या करेंगे मैंने आकांक्षा को कहा देखो आकांक्षा यह उनका खुद का फैसला है और अब यदि उन लोगों ने यह फैसला कर लिया है तो उन्हें उनके हाल पर छोड़ दो। मैंने जब आकांक्षा को यह बात कही तो आकांक्षा कहने लगी शायद तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो। जल्द ही आकांक्षा के पिताजी रिटायर हो गए और जब उसके पापा रिटायर हुए तो उसके बाद वह लोग गांव चले गए। जब वह लोग गांव गए तो उसके बाद गांव में ही वह लोग रहने लगे थे और उन्होंने अपने घर को किराए पर दे दिया था। अब सब कुछ ठीक ही चल रहा था आकांक्षा को मैंने कभी किसी प्रकार की कोई कमी महसूस नहीं होने दी और ना ही आकांक्षा ने मुझे कभी कोई कमी महसूस होने दी। सब कुछ मेरी जिंदगी में ठीक चल रहा था लेकिन अचानक से एक दिन मैं जब घर की तरफ लौट रहा था तो उस दिन रास्ते में मेरा एक्सीडेंट हो गया जिस वजह से मुझे कुछ दिनों के लिए घर पर ही रेस्ट लेना पड़ा। करीब एक महीना हो चुका था और एक महीने की मैंने अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी लेकिन उसके बाद से मेरी जिंदगी में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था।

मैं सोचने लगा कि मैं कब ठीक हूंगा लेकिन अभी तक मेरी तबीयत पूरी तरीके से ठीक नहीं हुई थी और मैं अभी भी परेशान ही था धीरे-धीरे सब कुछ ठीक होने लगा था और अब मैं अपने ऑफिस को ज्वाइन कर चुका था। ऑफिस ज्वाइन करने पर सब कुछ बदल चुका था ऑफिस में नया स्टाफ भी आ चुका था। एक दिन मैं ऑफिस से जल्दी घर पहुंचा तो उस दिन आकांक्षा मुझे कहने लगी कि मनोज क्या आज हम लोग कहीं चलें। मैंने आकांक्षा को कहा कि लेकिन हम लोग कहां जाएंगे तो आकांक्षा मुझे कहने लगी कि चलो आज हम लोग अपनी कॉलोनी के पार्क में ही चलते हैं। हम दोनों उस दिन हमारी कॉलोनी के पार्क में ही चले गए जब हम लोग वहां पर गए तो आकांक्षा और मैं साथ में बैठे हुए थे हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे। कई दिन हो गए थे जब मैं आकांक्षा से अच्छे से बात भी नहीं कर पाया था क्योंकि कुछ दिनों से ऑफिस के काम के चलते मुझे आकांक्षा से बात करने का ज्यादा समय नहीं मिल पा रहा था। अंधेरा होने लगा था तो मैंने आकांक्षा को कहा कि चलो अब घर चलते हैं तो आकांक्षा कहने लगी कि ठीक है मनोज अब हम लोग घर चलते हैं। हम दोनों घर चले आए जब हम लोग घर आए तो मुझे मेरे पुराने दोस्त का फोन आया और वह कहने लगा कि मनोज तुम कहां हो। मैंने उसे कहा मैं तो यही हूं लेकिन आज तुमने मुझे फोन कैसे कर दिया तो वह मुझे कहने लगा कि मैं कुछ दिनों के लिए लखनऊ आया हुआ था तो सोचा कि तुमसे मिलकर जाऊं। मैंने उसे कहा कि लखनऊ क्या तुम कुछ जरूरी काम से आए थे तो वह कहने लगा कि हां मेरा एक जरूरी काम था इसलिए मैं लखनऊ आया था। मैंने उससे कहा कि ठीक है मैं तुमसे कल मिलता हूं कल अपने ऑफिस से फ्री हो जाने के बाद मैं तुमसे मिलने के लिए आऊंगा। उसके बाद मैंने फोन रख दिया तो आकांक्षा मुझसे पूछने लगी कि मनोज किसका फोन था। मैंने आकांक्षा को बताया कि मेरे पुराने दोस्त का फोन था वह कुछ दिनों के लिए लखनऊ आया हुआ है तो उसने मुझे फोन कर दिया था और वह मुझसे मिलने के लिए कह रहा था। आकांक्षा कहने लगी चलो ठीक है अब हम लोग खाना खा लेते हैं। हम लोगों ने डिनर किया और उसके अगले दिन मैं अपने ऑफिस चला गया ऑफिस से जब मैं फ्री हुआ तो मैं अपने दोस्त रजत को मिलने के लिए चला गया मैं रजत से मिलने के लिए उसके घर गया था।

जब मैं रजत को मिलने के लिए उसके घर पर गया तो वह घर पर ही था रजत मुझसे काफी समय बाद मिल रहा था मैंने रजत को कहा कि तुम काफी समय बाद लखनऊ आ रहे हो। वह कहने लगा कि हां मनोज मुझे समय ही नहीं मिल पाता है इसलिए मैं लखनऊ नहीं आ पाता हूं। रजत का पूरा परिवार अब दिल्ली में ही रहता है दिल्ली में रजत का बिजनेस है और वह कभी कबार ही लखनऊ आया करता है लेकिन मुझसे वह काफी समय बाद मिल रहा था। रजत और मैं साथ बैठे हुए थे और एक दूसरे के हाल-चाल पूछ रहे थे वह मुझसे पूछने लगा की तुम्हारी जॉब कैसी चल रही है। मैंने उसे बताया कि मेरी जॉब तो अच्छी चल रही है कुछ समय पहले मेरा एक्सीडेंट भी हुआ था। मैं और रजत एक दूसरे के साथ बैठे हुए थे मैंने उसको कहा मैं अब चलता हूं नही तो मुझे घर जाने में देर हो जाएगी आकांशा मेरा इंतजार कर रही होगी। रजत कहने लगा कि ठीक है मनोज हम लोग कभी और मुलाकात करते हैं और फिर मैं अपने घर वापस लौट आया था। मैं अपने घर लौटा तो आकांक्षा मेरा इंतजार कर रही थी वह कहने लगी मनोज आपको आने में बहुत देर हो गई तो मैने उसे बताया कि मैं रजत को मिलने के लिए चला गया था इस वजह से मुझे आने में देर हो गई आकांक्षा कहने लगी कोई बात नहीं।

काफी लंबे समय बाद मैने आकांक्षा के साथ सेक्स किया था तो मुझे बहुत ही मजा आया इतने लंबे अरसे बाद उसके साथ सेक्स करने में मुझे एक अलग ही फीलिंग आ रही थी। मैं अगले दिन अपने ऑफिस म गया मैंने देखा हमारे ऑफिस में एक लड़की आई हुई है वह दिखने में बडी ही सुंदर थी लेकिन वह किसी से भी ज्यादा बात नहीं कर रही थी समय बीतता गया करीब 2 महीने बाद में सुहानी से बातें करने लगा था। सुहानी दिखने में बहुत सुंदर है मैं जब भी उसके साथ होता तो मुझे काफी अच्छा लगता मेरा मन होता मैं उसे अपनी बाहों में भर लूं लेकिन वह समय भी आ ही गया जब मैं उसे अपनी बाहों में भरने वाला था। हम दोनों की रजामंदी से एक दिन हम दोनों एक होटल में चले गए सुहानी और मैं एक दूसरे की बाहों में थे। सुहानी अब मेरी बाहों में लेटी हुई थी मैं उसके होठों को चूसकर उसे अपना बनाने की कोशिश कर रहा था वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी और वह तड़पने लगी थी। मुझे बहुत मज़ा आने लगा था मेरे अंदर की गर्मी अब बढ़ने लगी थी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जिस प्रकार से वह मेरा साथ दे रही थी मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो सुहानी ने उसे लपकते हुए अपने हाथो मे लिया और कुछ देर हिलाने के बाद उसे मुंह के अंदर समा लिया। मेरे लंड को वह बडे अच्छे तरीके से चूसने लगी मेरा लंड वह जिस प्रकार से चूस रही थी उससे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था वह भी बहुत ज्यादा खुश हो गई थी उसने मुझे कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मेरे अंदर की आग अब बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। अब मैंने उसके कपडे उतारकर उसकी पैंटी को उतारा तो उसकी चूत से पानी निकल रहा था मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था।

मैने उसकी चूत को चाटकर पूरी तरीके से चिकना बना दिया था अब मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर सटाया तो उसकी चूत से पानी बाहर निकलने लगा। मुझे बहुत मजा आने लगा था उसकी चूत से इतना अधिक पानी निकलने लगा था मेरे अंदर की आग पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी। कुछ देर लंड उसकी चूत मे रगडने के बाद मैंने एक ही झटके में उसकी चूत के अंदर लंड को घुसाया मेरा लंड उसकी चूत में घुसा तो वह चिल्लाई मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था। मैं उसको बड़ी तेज गति से धक्के मारने लगा था मुझे उसको चोद कर बहुत मजा आ रहा था जिस प्रकार से मैं उसे चोद रहा था उससे मेरे अंदर की आग बढ़ती जा रही थी।

मेरे अंदर की गर्मी अब इतनी बढ चुकी थी कि मैंने उससे कहा मुझे बहुत मजा आ रहा है। मैंने उसको बहुत देर तक चोदा जब मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था मैने उसे कहा तुम्हारी चूत बडी कमाल की है मुझे एहसास होने लगा कि मैं ज्यादा देर तक उसकी चूत की गर्मी को झेल नहीं पाऊंगा उसने मुझे अपने पैरों के बीच में कसकर जकडना शुरू कर दिया उसकी चूत से गर्म लावा निकलने लगा था वह मेरे लंड को गर्म कर रहा था। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और उसके स्तनो पर पिचकारी मार दी। मैने उसे अब घोड़ी बनाया मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को बड़े अच्छे से करना शुरू कर दिया वह मेरे लिए तड़प रही थी इसलिए वह मुझसे अपनी चूतड़ों को बड़े अच्छे से टकराए जा रही थी तो मुझे बड़ा मजा आ रहा था और उसे भी बहुत ही अच्छा लग रहा था। मेरे अंदर की आग को उसने बहुत ज्यादा बढ़ा दिया था अब उसकी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर निकलने लगा था। मेरे लंड से भी बहुत पानी बाहर की तरफ को निकल आया था। मैं उसको जिस तरह से धक्के मार रहा था उससे मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था वह भी बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी। मुझे भी बड़ा मजा आने लगा था मेरा माल जब उसकी चूत के अंदर गिरा मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया।