होटल मे जमकर चुदाई का आंनद लिया

Antarvasna, desi kahani: महेश मुझे कहने लगा कि गौतम हम लोगों को कितना समय हो चुका है और अब तो हमारी जिंदगी पूरी तरीके से बदल चुकी है मैंने महेश को कहा हां महेश तुम ठीक कह रहे हो। महेश और मैंने करीब 10 वर्ष पहले एक साथ ही कंपनी शुरू की थी और अब हमारी कंपनी इस मुकाम पर पहुंच चुकी थी कि हम लोग बहुत ही खुश थे यह सब मेरी और महेश की मेहनत की वजह से हुआ था। इस बीच हम लोगों ने शादी भी की और शादी हो जाने के बाद मैंने और महेश ने पूरी मेहनत से काम करना शुरू किया आज हम दोनों ही अपने काम से बहुत खुश हैं। महेश मुझे कहने लगा कि क्यों ना कुछ दिनों के लिए हम लोग कहीं हो आते मैंने महेश को कहा क्यों ना हम लोग कुछ दिनों के लिए शिमला हो आए। शिमला के पास ही मैंने एक प्रॉपर्टी खरीदी थी और उसे कुछ समय पहले ही मैंने तैयार करवाया था तो कुछ दिनों के लिए महेश और मैं वहां जाने के लिए तैयार हो चुके थे।

हम लोग अपने परिवार के साथ वहां जाना चाहते थे और कुछ दिनों के लिए हम लोग शिमला चले गए शिमला की वादियों में घूम कर हमें बड़ा अच्छा लग रहा था और मौसम भी बहुत सुहावना था। काफी समय बाद अपने काम से मैं और महेश फ्री हो पाए थे जिसके बाद ही हम लोग घूमने के लिए शिमला गए थे। हम लोग काफी दिनों तक शिमला में रुके और उसके बाद हम लोग दिल्ली लौट आए जब मैं दिल्ली लौटा तो उसी वक्त मैंने अपनी पत्नी से कहा कि क्या हम लोग आज बाहर से ही खाना मंगवा ले। मेरी पत्नी कहने लगी कि हां गौतम आज आप बाहर से ही खाना मंगवा लीजिए और मैंने बाहर से खाना मंगवा लिया था हम लोगों ने खाना खाया और अब हम लोग सो चुके थे। अगले दिन मैं जल्दी तैयार होकर ऑफिस के लिए निकल चुका था महेश भी ऑफिस पहुंच चुका था हम लोगों को अपने बिजनेस टूर के सिलसिले में जाना था तो हम लोग अहमदाबाद के लिए फ्लाइट से निकल चुके थे। जब मैं अहमदाबाद के लिए निकल रहा था तो उस वक्त मुझे मेरी पत्नी ने कहा था कि तुम अहमदाबाद में मेरी बहन से भी मिल लेना मैंने अपनी पत्नी से कहा ठीक है मैं तुम्हारी बहन से भी मुलाकात कर लूंगा।

हम लोग अहमदाबाद पहुंच चुके थे मैं और महेश एक होटल में रुके हुए थे अहमदाबाद में ही मेरा एक पुराना दोस्त भी रहता है मैंने सोचा कि क्यों ना उससे भी मुलाकात कर लूँ। मैंने जब उसको फोन किया तो उसने फोन उठाते हुए मुझे कहा कि तुम अहमदाबाद कब आए मैंने उसे कहा मैं अहमदाबाद कल ही तो आया हूं। वह मुझे कहने लगा तुमने बहुत ही अच्छा किया जो मुझे फोन कर लिया। इतने समय बाद मैं अपने दोस्त को मिलने वाला था वह जब मुझे मिला तो महेश भी मेरे साथ था महेश उससे पहली बार ही मिल रहा था मेरे दोस्त का नाम राकेश है। राकेश से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा वह मुझसे पूछने लगा तुम इतने सालों बाद मिल रहे हो तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मैंने उसे कहा तुमसे भी तो मैं इतने सालों बाद मिल रहा हूं। हम दोनों साथ में बैठे हुए थे मैंने राकेश को कहा मैंने सुना है कि तुम ने दूसरी शादी कर ली वह मुझे कहने लगा गौतम मैं तुम्हें क्या बताऊं बस कुछ ऐसी ही परिस्थितियां बन गई थी जिस वजह से मुझे दूसरी शादी करनी पड़ी। मैंने उसे कहा लेकिन तुमने तो लव मैरिज की थी वह कहने लगा कि हां मैंने लव मैरिज की थी हम दोनों के बीच में दरार पैदा होने लगी थी और मुझे लग रहा था कि हम दोनों के जीवन में कुछ भी अच्छा नहीं चल रहा है इसी वजह से मैं बहुत ज्यादा परेशान हो चुका था। मैंने जब यह बात सुनी तो मैंने राकेश को कहा लेकिन तुम तो अपनी पत्नी से बहुत प्यार करते थे और आखिरकार तुम्हारे बीच में झगड़े की क्या वजह थी। वह मुझे कहने लगा कि हमारे बीच में झगड़ों की ना जाने कितनी ही वजह थी और मुझे लगा कि हम दोनों को डिवोर्स ले लेना चाहिए फिर मैंने उसे डिवोर्स दे ही दिया और अब मैंने दूसरी शादी कर ली है और मैं अपनी शादीशुदा जीवन से बहुत ही खुश हूं। मैंने उसे कहा चलो यह तो बड़ी खुशी की बात है राकेश कहने लगा कि तुम लोग मेरे घर पर चलो मैंने उसे कहा आज तो आना मुश्किल हो पाएगा लेकिन अभी हम लोग यहां कुछ और दिन रुकने वाले हैं मैं तुमसे जरूर मिलने के लिए आऊंगा। राकेश कहने लगा मैं भी अभी चलता हूं और तुमसे बाद में मुलाकात करता हूं राकेश जा चुका था और हम लोग अपने जिस बिजनेस टूर के सिलसिले में आए थे वह बड़ा ही अच्छा रहा और हमें काफी काम अहमदाबाद से मिल चुका था।

मैंने महेश को कहा क्यों ना हम लोग मेरी पत्नी सुधा की बहन के यहां हो आए तो महेश कहने लगा कि ठीक है हम लोग भाभी की बहन के यहां हो आते हैं और हम लोग उस दिन सुधा की बहन से मिलने के लिए चले गए। सुधा की बहन का नाम सरिता है मैं जब सरिता से मिला तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा और सरिता मुझे कहने लगी कि इतने समय बाद आप मिल रहे हैं मैंने उनसे कहा कि आप लोग तो कभी दिल्ली आते ही नहीं है। सरिता कहने लगी कि हम लोगों का दिल्ली आना हो ही नहीं पाता है। हम लोगों ने उस दिन डिनर सरिता के घर पर ही किया और उसके बाद हम लोग वापस होटल में चले गए। जब हम लोग वापस होटल में पहुंचे तो महेश अपनी पत्नी से फोन पर बात कर रहा था मैंने भी सोचा कि मैं भी सुधा को फोन कर देता हूं और मैंने भी सुधा को फोन किया। मैंने जब सुधा को फोन किया तो वह मुझे कहने लगी कि आप अहमदाबाद से वापस कब लौट रहे हैं तो मैंने सुधा को कहा हम लोग बस कुछ दिनों बाद ही वापस लौट आएंगे। सुधा मुझे कहने लगी कि क्या आप दीदी से मिले थे तो मैंने सुधा को कहा हां मैं दीदी से मिला था और मैं आज ही उनके घर गया था।

सुधा कहने लगी कि तुमने बहुत ही अच्छा किया जो तुम दीदी से मिल आये, हम फोन पर बात कर रहे थे तो मैंने सोचा कि मैं बाहर टहल आता हूं मैंने महेश को कहा मैं बाहर से टहल आता हूं। महेश टीवी देखने लगा था और मैं बाहर टहलने के लिए चला गया मैं होटल से बाहर लॉन की तरफ था बाहर काफी ज्यादा अंधेरा भी था। मैं काफी देर तक बाहर टहलता रहा फिर मैं होटल के अंदर आ रहा था जब मैं होटल के अंदर आ रहा था तो मैं एक महिला से टकरा गया जैसे ही मैं उस महिला से टकराया तो मैंने उसकी तरफ देखा और उन्हें मैंने बड़ी शालीनता से कहा मुझे माफ कर दीजिए मेरा ध्यान फोन की तरफ था। वह महिला मुझे कहने लगी कोई बात नहीं, उन्होंने मुझे पूछा क्या आप भी इसी होटल में रुके हुए हैं? मैंने उन्हें कहा मैं भी इसी होटल में रुका हूं मैंने उनसे उनका नाम पूछा तो उन्होंने अपना नाम मुझे बताया उनका नाम रवीना है और वह अपने किसी काम के सिलसिले में  अहमदाबाद आई हुई थी। मैंने उनसे कहा रवीना जी मैं आपसे कल मिलता हूं और अगले दिन मैं उनसे मिला। हम लोगों ने उस दिन लंच साथ मे किया लेकिन मुझे नहीं पता था कि इतने कम समय में ही हम दोनों एक दूसरे के नजदीक आ जाएंगे कि वह मुझे अपने रूम में बुला लेंगी। उन्होंने मुझे जब अपने कमरे में बुलाया तो उस वक्त वह कमरे में अकेले ही थी उन्होंने नाइटी पहनी हुई थी। उस नाइटी में बहुत बड़ी ही सुंदर लग रही थी और उन्हें देखकर मैं अपने अंदर की आग को ना रोक सका मैं उनके साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो चुका था। हम दोनों एक दूसरे की बाहों मे थे हम दोनों बिस्तर पर लेट चुके थे। मैंने उनके होंठों को चूमना शुरू किया तो उनके होंठो से मैने खून भी निकाल दिया और वह अपने पैरों को खोल कर मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए तैयार बैठी थी। मैंने उनके कपड़े उतार दिए और मैंने उनकी चूत को देखा तो  उनकी चूत पर हल्के भूरे रंग के बाल थे, उनकी चूत को देखकर मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू किया।

मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उनकी चूत का रसपान कर रहा था तो वह बहुत उत्तेजित हो चुकी थी। मैंने उनकी चिकनी और मुलायम चूत को चाटा वह अपने आपको रोकी ना सकी और मेरे बालों को पकड़कर वह कहने लगी थोड़ा और अंदर अपनी जीभ को डाल दो। मैंने उनकी चूत के अंदर तक अपनी जीभ को डाल दिया फिर मैंने उनकी चूत के अंदर अपनी उंगली घुसानी शुरू की और अपनी उंगली को अंदर-बाहर करने लगा तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था वह भी बड़ी खुश थी। उन्होंने मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर तक समा लिया था वह मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर बड़े अच्छे से कर रही थी। जिस प्रकार से वह सकिंग कर रही थी उससे मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था और मैं बहुत ज्यादा खुश था। उन्होंने बहुत देर तक मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर किया अब मैं उनके स्तनों को चूसने लगा था धीरे धीरे मैंने अपने लंड को उनकी चूत के अंदर घुसाना शुरू किया और उनके स्तनों का रसपान कर के मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मेरा लंड एकदम से तन कर खड़ा हो रहा था।

मैं उन्हें बड़ी तेज गति से धक्के मारने लगा था और उन्हें चोदने में मुझे बहुत आनंद आ रहा था उनकी चूत के अंदर बाहर मेरा लंड होता तो वह बड़ी तेजी से चिल्लाती और मुझे कहती तुम ऐसे ही मुझे चोदते रहो। मैंने उनकी चूत बहुत देर तक मारी और फिर उन्होंने कहा तुम मुझे डॉगी स्टाइल में चोदो। मैंने उनसे कहा आपको डॉगी स्टाइल बहुत ही पसंद है? वह मुझे कहने लगी हां मुझे डॉगी स्टाइल बहुत ही पसंद है मैंने उन्हें बड़ी तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए। मैं जिस प्रकार से धक्के मार रहा था उससे वह बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी। मैंने उन्हें कहा लगता है मेरा वीर्य जल्द ही बाहर गिरने वाला है। वह मुझे कहने लगी कोई बात नहीं तुम अपने वीर्य को मेरी चूत में गिरा दो। मैंने अपने वीर्य को उनकी चूत के अंदर गिराया तो वह खुश हो गई और मुझे कहनी लगी मैं आपसे मिलने के लिए दिल्ली भी आती रहूंगी। उस दिन के बाद वह मुझे मिलने के लिए दिल्ली भी आती है और हम दोनों जमकर चुदाई करते हैं।