होटल के बाहर चोदने का इंतजाम खड़ा था

Antarvasna, desi kahani: मैं अपने काम से घर लौटा ही था कि मैंने देखा सुरभि के चेहरे पर कुछ ज्यादा ही परेशानी थी मैंने सुरभि से पूछा कि आखिर तुम परेशान क्यों हो। वह मुझे कहने लगी कि अजीत पापा की तबीयत कुछ दिनों से खराब है और मैं पापा से मिलने के लिए जाना चाहती हूं, मुझे लगा था कि पहले शायद उन्हें बुखार होगा लेकिन जब मुझे मां ने बताया कि उनकी तबीयत काफी ज्यादा खराब है तो मैं सोच रही हूं कि हम लोग उनसे मिल आते हैं। मैंने सुरभि से कहा कि कल मैं अपने ऑफिस से छुट्टी ले लेता हूं और कल हम लोग तुम्हारे पापा मम्मी से मिल आते हैं तो सुरभि कहने लगी ठीक है। मैंने सुरभि से कहा कि तुम मेरे लिए चाय बना दो, सुरभि ने मेरे लिए चाय बनाई। मैंने सुरभि को कहा कि क्या पापा अभी तक नहीं लौटे हैं तो सुरभि कहने लगी कि नहीं पापा अभी तक वापस नहीं लौटे हैं।

मां अपने कमरे में थी मैं मां के कमरे में गया तो मैंने मां से पूछा मां तुम्हारी तबीयत तो ठीक है मां कहने लगी हां बेटा मेरी तबीयत ठीक है। थोड़ी ही देर बाद पापा भी घर आ गए पापा दुकान चलाया करते हैं हम लोगों ने साथ में डिनर किया तो डिनर करते वक्त मैंने पापा और मम्मी से कहा कि कल हम लोग सुरभि के घर जा रहे हैं पापा कहने लगे ठीक है बेटा तुम लोग कल वहां चले जाओ। पापा को भी यह बात पता थी की सुरभि के पापा की तबीयत ठीक नहीं है तो उन्होंने सुरभि से इस बारे में पूछा सुरभि ने कहा कि हम लोग इसी लिए पापा और मम्मी से मिलने जा रहे हैं। अगले दिन सुबह हम लोग जल्दी तैयार हो गए हम लोग जब सुरभि के माता-पिता के घर गए तो सुरभि के पिताजी काफी ज्यादा बीमार थे और वह बिस्तर पर ही लेटे हुए थे उनकी तबीयत काफी ज्यादा खराब लग रही थी और वह काफी कम बात कर रहे थे। मैंने उन्हें कहा आप आराम कर लीजिए और फिर वह आराम करने लगे हम लोग सुरभि की मां के साथ बात कर रहे थे सुरभि के अलावा उनका और कोई भी नहीं है वह काफी ज्यादा परेशान थे। सुरभि की मां कहने लगे की पहले तो हमें लगा था कि उन्हें बुखार होगा लेकिन डॉक्टर से जब उनका इलाज करवाया तो डॉक्टर ने कहा कि उन्हें कैंसर है और उनका ऑपरेशन करवाना पड़ेगा।

मैंने उन्हें कहा कि ठीक है तो फिर हम लोग उनका ऑपरेशन करवा देते हैं सुरभि की मां काफी ज्यादा परेशान थी तो मैंने उन्हें कहा कि आप परेशान मत होइए सब कुछ ठीक हो जाएगा। सुरभि के पापा का हम लोगों ने ऑपरेशन करवा दिया ऑपरेशन सफल रहा और सुरभि के पापा भी अब धीरे-धीरे ठीक होने लगे थे। इस बात को करीब एक वर्ष बीत जाने के बाद सुरभि के पापा पूरी तरीके से ठीक हो चुके थे और अब सुरभि और मैं उनसे मिलने के लिए अक्सर उनके घर जाया करते हैं। इस बीच मुझे एक दिन अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में दिल्ली जाना था तो मैं उस दिन अपने ऑफिस से घर लौटा तो मैंने सुरभि से कहा की सुरभि मैं दो दिनों बाद दिल्ली जाने वाला हूं तो तुम मेरा सामान पैक कर देना। सुरभि कहने लगी ठीक है मैं आपके कपड़े रख देती हूं, सुरभि कहने लगी कि लेकिन दिल्ली में तो काफी ठंड होगी। हम लोग अहमदाबाद में रहते हैं अहमदाबाद में इतनी ठंड नहीं होती  मैंने सुरभि से कहा कि हां तुम मेरे कपड़े रख देना। मैं बाथरूम में नहाने के लिए चला गया सुरभि सामान पैक करने लगी मैं जब बाथरूम से नहा कर निकला तो मैंने सुरभि से कहा हम लोग कुछ देर एक दूसरे से बैठ कर बात कर लेते हैं और फिर हम दोनों एक दूसरे से बात करने लगे। कुछ दिनों से मैं सुरभि को बिल्कुल भी समय नहीं दे पा रहा था इसलिए मैं और सुरभि एक दूसरे से बात कर रहे थे मैंने सुरभि से कहा कि क्या तुम्हारी मम्मी से बात हुई थी। वह कहने लगी हां मम्मी और पापा से मेरी आज ही बात हुई थी पापा अब ठीक हैं और मैं सोच रही हूं कि जब आप दिल्ली चले जाएंगे तो मैं भी उनसे मिलने आऊंगी मैंने सुरभि से कहा हां तुम उनसे मिल आना। अब मैं अपने ऑफिस के टूर से दिल्ली जाने वाला था जिस वक्त मैं दिल्ली के लिए घर से निकला उस वक्त सुबह के 6:00 बज रहे थे और 6:00 बजे मैंने अपने घर के बाहर से टैक्सी ली और मैं एयरपोर्ट चला गया। एयरपोर्ट से मैंने अपनी फ्लाइट ली और जब मैं दिल्ली पहुंचा तो दिल्ली में काफी ज्यादा ठंड थी, मैंने एयरपोर्ट से टैक्सी ली उसके बाद मैं अपने होटल चला गया।

जिस रूम में मैं रुका हुआ था उस रूम के बिल्कुल बगल में कुछ और लोग रुके हुए थे लेकिन वह काफी ज्यादा शोर कर रहे थे जिससे कि मुझे बिल्कुल भी ठीक नहीं लग रहा था तो मैंने होटल के रिसेप्शन में फोन कर के इस बारे में मैनेजर से बात की तो मैनेजर ने उन्हें शांत होने के लिए कहा और वह लोग चुप हो गए। मैं भी अगले दिन अपने ऑफिस की मीटिंग के लिए सुबह होटल से निकल चुका था और शाम के वक्त मैं लौट आया। जब मैं शाम को वापस लौटा तो मैंने सुरभि से फोन पर बात की सुरभि से मैंने उस दिन काफी देर तक फोन पर बात की उसके बाद मैंने फोन रख दिया था। अगले दिन जब मैं अपने होटल की तरफ लौट रहा था तो मैंने अपने होटल के बाहर ही एक लड़कियों को खड़े देखा उसने मैंने स्कर्ट पहनी हुई थी और वह दिखने में बडी ही सुंदर थी। मैं उसकी तरफ देख रहा था वह मेरी तरफ आई और कहने लगी क्या आप मुझे ही देख रहे थे तो मैंने भी उसे अपने बेबाक अंदाज में कहा हां मैं तुम्हें ही देख रहा था। मुझे नहीं पता था कि वह एक कॉल गर्ल है वह मुझे कहने लगी लेकिन तुम मुझे ऐसे घूर रहे थे जैसे कि मुझे तुम अपने साथ कहीं लेकर जाना चाहते हो।

उसकी बातें मुझे बड़ी खुशी हुई और मैंने उसे अपने होटल में अपने साथ आने के लिए कहा वह मेरे साथ आ गई जब वह मेरे साथ आई तो उसने मुझे कहा मुझे कुछ पैसे चाहिए मैंने उसे पैसे दिए और मैंने उसे कहा लेकिन पैसे के बदले मुझे भी कुछ चाहिए। वह कहने लगी क्यों नहीं अब उसने अपने कपड़े उतारने शुरू किए वह मेरे सामने नंगी खड़ी थी मैं उसके नंगे बदन को देख रहा था ऊपर से लेकर नीचे तक उसके बदन को देखकर मेरी आंखें फटी की फटी रह गई क्योंकि उसका बदन बडा ही लाजवाब था मैंने उसे अपने नीचे लेटा दिया और उसके होठों को चूमने लगा उसके होंठों को चूमने के बाद मै उसके स्तनों को दबाने लगा उसके स्तनों को दबाने में मजा आ रहा था मैंने उसके निप्पल को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो उसके निप्पल खड़े होने लगे थे। वह मुझे कहने लगी कि तुम मेरी चूत के अंदर अपनी उंगली घुसा दो मैंने अपनी उंगली घुसा दी मैंने जैसे ही उसकी चूत के अंदर अपनी उंगली को डाला तो वह जोर से चिल्लाई और कहने लगी चलो अब हम लोग सेक्स का मजा लेते हैं मैंने उसे कहा पहले तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो। उसने भी मेरी पैंट की चैन को खोली और मेरे लंड को बाहर निकाला तो मेरा लंड पानी छोड़ रहा था उसने जैसे ही मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समाया तो उसे बड़ा मजा आने लगा और वह बड़े अच्छे तरीके से मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर करने लगी। मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर चूस रही हो उससे मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा है तो वह खुश हो गई और वह बडे अच्छे से सकिंग करने लगी उसने मेरे अंदर की गर्मी को तो बढा ही दिया था मेरे अंदर इतनी अधिक गर्मी बढ़ चुकी थी कि मैं चाहता था उसकी चूत के अंदर जल्दी से जल्दी अपने लंड को घुसा दूं लेकिन उसने मुझे कहा कि पहले आप अपने कपड़े उतार लो। मैंने अपने कपड़े उतार लिए और उसने मेरे लंड पर कंडोम चढ़ा दिया कंडोम चढ़ाने के बाद मैने अपने लंड को मैं उसकी चूत पर रगड़ने लगा तो मुझे मजा आने लगा।

उसकी चूत पर जब मैं अपने लंड को रगड रहा था तो मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी और वह बडी खुश हो गई थी उसके अंदर की उत्तेजना भी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी मैंने एक ही झटके में उसकी चूत के अंदर लंड घुसा दिया मेरा लंड उसकी योनि के अंदर जाते ही वह जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी कि आपने तो मेरी चूत को फाड़ कर रख दिया है। मैंने उसे कहा मुझे तुम्हारी चूत मारने में बड़ा मजा आ रहा है और जिस प्रकार से मैं तुम्हारी चूत का मजा ले रहा हूं मेरे अंदर एक अलग फीलिंग पैदा हो रही है। वह अपने पैरों को चौड़ा करने लगी जब वह ऐसा कर रही थी तो मेरा अंदर की आग और भी ज्यादा बढ़ रही थी मेरा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था तो उसकी सिसकारियां बढ़ती ही जा रही थी थोड़ी देर बाद उसने मुझे अपने पैरों के बीच में जकडना शुरू कर दिया जब उसने मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ना शुरू किया तो मुझे और भी ज्यादा मजा आने लगा।

अब मुझे इतना अधिक मज़ा आने लगा था कि मैंने उसे कहा मैं तुम्हारे दोनों पैरों को अपने कंधे पर रखकर तुम्हें चोदना चाहता हूं मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया और उसे मैंने चोदना शुरू किया तो मुझे और भी ज्यादा मजा आने लगा अब उसकी सिसकारियां और भी ज्यादा बढ़ चुकी थी। मैंने उसे खड़े होने के लिए कहां और वह घोड़ी बन चुकी थी जब वह घोड़ी बन गई तो मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर लगाया तो मै उसे बडी तेज गति से चोदने लगा था। मैं जब उसे चोद रहा था तो कहीं ना कहीं वह गर्म हो रही थी और मेरा लंड जब उसकी चूतड़ों से टकरा रहा था तो मुझे बहुत ही मजा आता। वह भी अपनी चूतड़ों को मुझसे और भी तेजी से टकराए जा रही थी जिससे कि उसकी गर्मी तो बढ ही चुकी थी लेकिन मेरी गर्मी अब और भी अधिक बढ़ चुकी थी इसलिए मेरा वीर्य जल्दी ही बाहर आ गया और मेरा वीर्य बाहर आते ही उसने मेरे लंड से कंडोम को निकाला और मेरा लंड को चूसती रही। रात भर मैंने उसके साथ चूत चुदाई का मजा लिया और सुबह वह चली गई।