हचक के मारो चूत मेरे भाई

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दोस्तों मेरा नाम बंटी है और मैं राजस्थान का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 27 साल है मेरी शादी को अभी 2 महीने ही हुए हैं लेकिन मेरी बीवी मायके गई हुई है। इस वजह से मैं आजकल घर में अकेला ही हूं। मेरे साथ में मेरी दीदी और मेरी मां मेरे पिताजी हम लोग रहते हैं। क्योंकि मेरे पिताजी सरकारी कर्मचारी हैं तो उनकी पोस्टिंग इस समय मध्य प्रदेश में है। तो वह महीनों में ही घर आते हैं। घर का सारा काम में ही देखता हूं और मेरी बहन कॉलेज मैं पढ़ाती है। वह भी सुबह निकल जाती है और शाम को ही घर वापस लौटती है। लेकिन उसकी सहेलियां अक्सर हमारे घर पर आती रहती हैं। क्योंकि उनके कॉलेज में उन्हें कई तरह के प्रोजेक्ट मिलते हैं। उस के सिलसिले में वह मेरे घर पर आती रहती हैं। और कभी कबार वह पार्टी भी कर लेती हैं। मैं भी उनकी पार्टी में शामिल हो जाता हूं। मेरी दीदी की एक सहेली है उसका नाम माधुरी है माधुरी की शादी हो रखी है और उसका पति भी कॉलेज में पढ़ाता है। लेकिन उसकी गांड कुछ ज्यादा ही बाहर की तरफ उठी हुई है।

उसके गांड की लकीर साफ साफ दिखाई देती है। जिससे कि मेरा बहुत मन होता है कि मैं उसकी गांड लूं। लेकिन कभी ऐसा मौका ही नहीं मिलता जिससे कि मैं कभी ऐसा उसके साथ कर सकू। मैं भी अपनी जिंदगी में बहुत व्यस्त हूं। मैं भी काम के सिलसिले में इधर-उधर रहता हूं मेरी बीवी मायके गई हुई है तो मेरा मन बहुत होता है सेक्स करने का लेकिन मैं कुछ कर ही नहीं सकता। एक दिन मेरी दीदी घर आई वह लोग भीगे हुए थे। तो मैंने देखा कि दीदी की सहेली लोग भी बहुत भीगे हुए हैं। मेरी दीदी ने मुझे कहा जा कर तोलिया ले आ मैं तोलिया लेकर उनको देने आया। तो मैंने देखा माधुरी के स्तन और उसकी गांड एकदम बाहर आ रखी है। ऐसा लग रहा था मानो उसके कपड़े फाड़ कर वह बाहर आ जाएगी। मैंने उन्हें तोलिया लाकर दिया और मेरी दीदी कपड़े बदल लिए थे। माधुरी ने अभी कपड़े चेंज नहीं किए थे। उसके बाद मेरी दीदी ने थोड़ा सा काम किया और वह आराम करने लगी। उसके बाद माधुरी भी नहाने के लिए बाथरूम में गई। जैसे ही वह बाथरुम से बाहर आई तो मैंने उसे देखा उसके बदन के एक-एक अंग साफ साफ झलक रहे थे। क्योंकि बाथरुम मेरे ही कमरे में था।

मैंने उसे देखा और मेरा मन पूरी तरीके से खराब हो गया। मैंने माधुरी को कहा दीदी आप बैठना मेरे बगल में तो वह बैठ गई। उसके बाद मैंने माधुरी से कहा दीदी आप की गांड मुझे बड़ी अच्छी लगती है। वो कहने लगी क्यों ऐसा क्यों उसमें ऐसा क्या खास है। मैंने कहा दीदी बहुत बहुत बड़ी बड़ी है और गोल-गोल भी है मुझे बहुत मज़ा आता है जब भी मैं देखता हूं। यह कहते हुए मैंने माधुरी को कसकर पकड़ लिया और मेरे अंदर से सेक्स हिलोरे मार रहा था। मुझे लग रहा था कि बस ऐसे ही मैं जल्दी से जल्दी माधुरी की गांड मारू और अपनी प्यास बुझाऊ। तो मैंने माधुरी को कसकर पकड़ने के बाद उसके जांघों को सहलाने लगा और काफी देर तक सहलाते-सहलाते मैंने उसके स्तनों को पकड़ लिया और माधुरी भी मेरी तरफ आकर्षित हो गई थी। और वह सेक्स करने के लिए तैयार हो गई। मैंने माधुरी को कहा मुझे तुम्हारी सबसे पहले गांड मारनी है। वो कहने लगी ठीक है चलो फिर तुम आ जाओ। अब मैंने अपने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और वह मुझे कहने लगी कि अपनी दीदी से मत बताना कि हम दोनों के बीच में क्या हुआ है। मैंने कहा ठीक है मैं किसी से नहीं बोलूंगा।

माधुरी मुझे कहने लगी मेरा भी मन बहुत होता है गांड मरवाने का क्योंकि मुझे भी बहुत शौक है। मैंने पूछा तो क्या तुम्हारा पति तुम्हारे साथ सेक्स करता है। उसने कहा हां सेक्स तो करता ही है और मैं उसे गांड मरवाती हूं। और बाहर से भी मरवाती हूं। क्योंकि मेरी प्यास मेरे पति से नहीं बुझती इसीलिए तुमने देखा होगा कि मेरी गांड इतनी बड़ी हो रखी है। अब मैंने माधुरी के कपड़े निकाल दिए। जैसे ही मैंने उसके कपड़े निकाले उसकी पैंटी से उसकी गांड देखकर मे एकदम पागल हो उठा। मैंने कहा यह क्या है इतनी बड़ी गांड कम से कम 40 की रही होगी। मैं पहले तो उसकी गांड को सहलाने लगा और फिर उसके बाद मैंने धीरे-धीरे अपने हाथ से दबाने लगा जैसे-जैसे में दबाता जाता वह मस्त होती जाती। मैंने उसकी पैंटी को खोल दिया जैसे ही मैंने उसकी पैंटी को खोला। तो मैंने देखा उसी गांड एकदम लाल है और मैंने उसकी गांड को अपने मुंह पर लगाया और उसके छेद को चाटना शुरु कर दिया। मैंने उस को छेद को 10 से 15 मिनट पर चाटा मुझे काफी आनंद आने लगा। वह भी धीरे-धीरे आवाज निकाल रही थी। उसके बाद उसने कहा यहां पर तेल पड़ा हुआ है मैंने देखा था उसको उठा लो और अपने लंड पर लगा लो मैंने अपने लंड पर तेल लगाया। और उसकी गांड के छेद में अपने लंड को धीरे-धीरे से उतारना शुरू किया। वह बहुत टाइट थी क्योंकि गांड तो गांड होती है। और धीरे-धीरे मेरे लंड अंदर होता चला गया। अब जैसे ही पूरा अंदर मेरा लंड घुसा और उसकी चूतड़ों से टच हुआ। तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। मुझे एक अच्छी फीलिंग आने लगी।

अब मैं जैसे जैसे अंदर बाहर करना जाता तो उसके चूतड़ मेरे लंड से टकराते और मुझे काफी अच्छा लगता। पहले मैं धीरे धीरे करता रहा जैसे-जैसे मेरा सेट हो गया उसकी गांड में उसके बाद मैंने तेजी पकड़ ली और काफी तेज तेज करने लगा। ऐसा करते-करते तो मेरा जल्दी ही झड़ने को हो गया पहली बार तो मैंने एक ही बार में उसके अंदर गिरा दिया। और वह अपने मुंह से आवाज निकालती और कहती और तेज करो मैं और तेज तेज करता। ऐसा करते करते मेरा माल गिर गया उसकी गांड में फिर मैंने कपड़े से साफ किया और दोबारा से अपने लंड पर तेल लगा कर उसकी गांड में घुसा दिया। इस बार मैंने काफी देर तक किया। जब जब मेरा अंदर बाहर होता तो उसकी गांड का गूदा भी मेरे लंड के साथ बाहर आता और मुझे यह देखकर काफी अच्छा लगता। मुझे काफी मजा आने लगा था। ऐसा करते करते माधुरी भी बहुत ज्यादा खुश थी। वह कह रही थी मैं तेरे घर इतने दिन से आती हूं। लेकिन कभी भी मुझे पता नहीं था कि तेरा भी मन मेरे लिए इतना मचलता है। मैंने माधुरी को कहा मैं तो कब से तुम्हारी गांड देखकर अपनी बीवी को चोदता हूं और उसी से गुजारा चलाता हूं। लेकिन मुझे तुम्हारी गांड में पता नहीं क्यों मजा आता है। मैं उसको ही कब से देखता आ रहा हूं और ऐसा ही करता हूं। यह सुनकर माधुरी बहुत खुश हो गई वह कहने लगी क्या वाकई में तुम मेरी गांड मारना चाहते थे। अब मैं इतनी तेजी पकड़ चुका था कि वह दीवार से जाकर चिपक गई। मैं उसको इतनी तेज तेज धक्के मार रहा था। वह तो अपने मुंह से थोड़ी सी आवाज निकालती और फिर रुक जाती।

अब मेरा माल निकलने वाला था। तो मैंने दोबारा से उसकी गांड में अपना वीर्य गिरा दिया। इस बार जब मैंने लंड बाहर निकाला तो मेरा माल उसकी बड़ी सी गांड से टपक रहा था। उसने अपना हाथ लगाया और मेरे माल को चाटने लगी और कहने लगी मजा आता है। मुझे ऐसा करने में उसने कहा हो गया क्या मैंने कहा अभी नहीं हुआ मेरा उसके बाद मैंने दोबारा से उसकी टपकती हुई चुतड़ को साफ किया और दोबारा से अपने लंड पर तेल लगा कर उसकी गांड में घुसेड़ दिया। ऐसा करते करते मुझे आधा घंटा हो गया। अब तो उसकी आंखों से भी आंसू आने लगे थे। वह कहने लगी मैंने तेरा जैसा कोई नहीं देखा है। मुझे मालूम होता तो मैं पहले ही तेरे पास आ जाती। क्योंकि तूने आज पहली बार मुझे संतुष्ट किया है। इतना संतुष्ट मुझे किसी ने भी नहीं किया मेरे जीवन में वह बहुत खुश थी। मुझे ऐसा लग रहा था उसे देखकर ऐसा करते-करते मेरा दोबारा से गिरना को हो गया और मैंने अपना वीर्य इस बार उसके मुंह में गिरा दिया। जिसको कि उसने निगल लिया। उसके बाद हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने और मैंने दरवाजा खोला। जैसे ही मैंने दरवाजा खोला तो बाहर देखा मेरी दीदी खड़ी हो रखी थी। वह कहने लगी तुम लोग अंदर क्या कर रहे थे। मैंने कहा कुछ नहीं दीदी दरवाजा अंदर से ना जाने कैसे बंद हो गया। यह खुली नहीं रहा था। मैं तो अंदर सो रहा था। मेरी दीदी ने कहा ठीक है चलो कोई बात नहीं इस को दिखा देना क्या इसमें खराबी आई है। मैंने कहा ठीक है मैं दिखा दूंगा। उसके बाद मैं माधुरी के साथ हर हफ्ते उसकी गांड मारता हूं।