गोल्डी की किस्मत -1

desi sex stories प्रिय मित्रो, आज मैं आपको एक बहुत ही मज़ेदार बात बताने जा रहा हूँ। किसी किसी इंसान पर उसकी किस्मत इतनी मेहरबान होती है के वो खुद हैरान होता है, और उसकी किस्मत को देख कर और लोग जलते हैं।
ऐसी ही किस्मत पाई है, मेरे मित्र गोल्डी ने… उसने मुझे खुद ये बात बताई थी, और मैं खुद भी उन दोनों लड़कियों को अच्छे से जानता हूँ, अब तो खैर दोनों लड़कियों की शादी भी हो चुकी है, दोनों लड़कियां बाल बच्चेदार हो चुकी हैं, इसलिए उन दोनों लड़कियों के नाम बदल कर कहानी लिख रहा हूँ, कहानी के सभी पात्र और घटनाएँ बिल्कुल सच हैं।

दोस्तो, मेरा नाम गोल्डी है, बात तब की है, जब हम लोग अपने नए बने मकान में शिफ्ट हुये थे। मकान शहर से बाहर बनी एक नई कॉलोनी में बनाया था, इसलिए आस पास बहुत से प्लॉट खाली थे, घर भी दूर दूर थे।
हमारे घर से एक गली छोड़ कर आगे एक मकान बना हुआ था। उस घर में माँ बाप के अलावा सिर्फ दो लड़कियां थी, दोनों पढ़ती थी. मैं भी पढ़ता था मगर हमारे स्कूल अलग अलग थे।
बड़ी बहन का नाम रानी और छोटी की राजकुमारी था, मगर सब छोटी को राजू राजू ही कहते थे।

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एक दिन मैं अपनी साइकल पर उनके घर के पास से गुज़रा तो रानी छत पर खड़ी थी, हम दोनों के नैन मिले और वो हल्के से मुस्कुराई, मुझे लगा ‘यार, ये लड़की तो लाइन दे रही है।’
मैं फिर से साइकल घुमा कर लाया, इस बार मैंने रानी को बड़े ध्यान से देखा, और उसे स्माइल पास की तो बदले में वो भी मुस्कुरा दी।
मेरे मन में तो लड्डू फूट पड़े कि ये तो सेट ही हो गई।
बस अगले दिन दोस्ती करने का एक छोटा सा कार्ड मैंने उसके घर में फेंक दिया।

अगले दिन जब मैं उसके घर के सामने से निकला तो उसने भी कागज़ का एक टुकड़ा बाहर को फेंका, जैसे को रद्दी का टुकड़ा हो मगर मेरे लिए वो रद्दी नहीं था। मैंने वो कागज़ उठाया और आगे चला गया, थोड़ी दूर जा कर मैंने मैंने वो मुड़ा तुड़ा कागज़ खोल कर देखा, उसमें अँग्रेजी में बड़ा सा ‘यस’ लिखा था।
मैं तो झूम उठा।

उसके बाद अक्सर मैं अपनी छत से उसको इशारेबाज़ी करता, वो भी जवाब देती.
धीरे धीरे बात बढ़ने लगी, इशारों से आगे मैंने उसे मिलने के लिए कहा। मगर इस इशारेबाज़ी और चिट्ठी पत्री में ही एक साल गुज़र गया।
हम दोनों अब फर्स्ट इयर में थे, हम दोनों खुश कि हमारे पास भी अपना प्यार है, मगर प्यार से मुलाक़ात नहीं हो पा रही थी। वो अपने घर वालों से डरती ही बहुत थी, इसलिए घर से बाहर ही नहीं निकलती थी।

बड़ी मुश्किल से एक दिन मैंने उसे मनाया, वो स्कूल से सीधी मेरे पास आई। वो भी साइकल पर थी, पीछे उसकी छोटी बहन बैठी थी।
उस दिन रानी के मुझसे मिल कर सिर्फ इतना कहा कि वो दिन में बाहर मिलने नहीं आ सकती इसलिए मैं उसे मिलने के लिए मजबूर न करूँ।

मुझे बड़ी मुश्किल हुई कि ऐसी गर्लफ्रेंड का क्या फायदा जो मिल भी नहीं सकती वो!
मैंने एक दिन उसको कहा- तुम मुझे मिलने नहीं आ सकती, तो क्या मैं तुमसे मिलने आ सकता हूँ?
वो बोली-कैसे?
मैंने कहा- बस तुम अपने रूम का दरवाजा खुला रखना।

उस दिन रात को मैं अपनी घड़ी में अलार्म लगा कर सोया।
1 बजे अलार्म बजा, मैं उठा, अपने बाल वाल सेट किए और चुपचाप से अपने घर की दीवार फांद कर चल पड़ा।
आस पास सब घर वाले सो रहे थे।

मैंने धीरे से उसके घर की दीवार फाँदी, अंदर जा कर उसके कमरे का दरवाजा हल्के से धकेला।
दरवाजा खुला था, हल्की सी चरमराहट की आवाज़ से दरवाजा खुल गया।

मैंने अंदर देखा, अंदर नाइट लैम्प की मधम रोशनी में दोनों बहनें कम्बल ओढ़े सो रही थी।
मैंने पास जा कर रानी को हिलाया।

वो जाग गई और मुझे देख कर हैरान हो गई- अरे तुम यहाँ कैसे आ गए?
मैंने कहा- तेरे घर की दीवार फांद कर!
वो दबी सी हंसी हंस कर बोली- मरवाओगे क्या?
मैंने कहा- नहीं, मैं तो मारने आया हूँ।
वो बड़े हैरान हो कर बोली- मुझे मारने आए हो क्या?
मैंने कहा- नहीं मेरी जान, तुझे नहीं, तेरी मारने आया हूँ।

वो फिर दबी सी हंसी हंस पड़ी।