गदराए बदन ने गदगद कर दिया

Desi kahani, antarvasna हमारा दूध बेचने का कारोबार मेरे दादाजी के समय से ही चला रहा था हमारी डेयरी का नाम दुबे डेयरी है और हमारी डेयरी में आसपास के काफी लोग आते हैं। हम लोग दूध में कभी पानी नहीं मिलाते थे इस वजह से हमारे पास आज भी कई सालों से हमसे जुड़े हुए लोग आते हैं जो कि मेरे दादाजी की बड़ी इज्जत करते हैं। वह लोग आज भी कहते हैं कि तुम्हारे दादा जी का पूरे जौनपुर में नाम था और दादा जी कि सब लोग बडी इज्जत करते हैं। मैंने भी अपने दूध के कारोबार को आगे बढ़ाया और मैं भी अपने पुश्तैनी डेयरी को संभालने लगा हमारे पास आस पड़ोस के लोग तो आते ही थे परन्तु दूर इलाके के लोग भी आकर दूध ले जाते थे।

एक दिन मैं डेयरी पर ही बैठा हुआ था तो उस दिन मेरी नजर एक तीखे नैन नक्श वाली सुंदर सी लड़की पर पड़ी मैं भी कुंवारा और जवान था तो मेरा दिल भी उसके लिए धड़कने लगा और मैंने उसे पाने की पूरी कोशिश की लेकिन वह मेरे हाथ ना आई। उसका नाम ममता है ममता किसी और से ही प्रेम करती थी इसलिए उसने मुझे साफ तौर पर मना कर दिया था मुझे उसके शब्दों में सच्चाई लगी इसलिए मैंने भी ममता के बारे में सोचना छोड़ दिया लेकिन समय को तो कुछ और ही मंजूर था। कुछ ही समय बाद ममता ने मेरी तरफ देखना शुरू कर दिया ममता की नजर जैसे मुझसे कुछ कहना चाह रही थी लेकिन मेरी अब सगाई हो चुकी थी और मैं अब ममता की तरफ देख भी नहीं सकता था। मैं नहीं चाहता था कि जिससे मेरी शादी होने वाली है उसे मैं कोई धोखा दूं इसलिए मैंने ममता से अब कोई भी संपर्क रखना उचित ना समझा। उससे मैंने दूरी बनानी शुरू कर दी परंतु ममता मेरे प्यार में अंधी हो चुकी थी और वह मेरे लिए कुछ भी करने के लिए तैयार थी क्योंकि ममता मुझे बहुत ज्यादा चाहती थी। एक दिन ममता ने मुझसे कहा अनिल क्या तुम से कुछ देर बाद हो सकती है मैंने ममता से कहा देखो ममता अब मेरी सगाई हो चुकी है और मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से आगे कोई भी परेशानी हो।

यदि किसी को यह मालूम चला कि मैं तुमसे बात करता हूं तो सब लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे मेरे दादाजी की हमारे पूरे इलाके में बड़ी इज्जत है और मैं नहीं चाहता कि उनकी इज्जत को मैं पानी में मिला दूं इसलिए तुम मुझसे दूर ही रहो। ममता को भी एहसास हो चुका था कि उसने बहुत बड़ी गलती कर दी है लेकिन मेरी भी अब सगाई हो चुकी थी इसलिए मैंने ममता से बात नहीं करने की कसम खाई थी परंतु मैं भी अपने दिल को ना समझा सका और मैं भी ममता की तरफ दोबारा से खींचा चला गया। मधु से मेरी सगाई हो चुकी थी और मधु के पिताजी गांव के सरपंच थे इसलिए मुझे इस बात का बहुत डर था कि यदि मधु के पिताजी को इस बात का पता चलेगा तो वह मुझ पर बहुत ज्यादा गुस्सा हो जायेंगे। मैं अपने परिवार की वजह से भी थोड़ा डरा हुआ था मेरे परिवार की जौनपुर में बड़ी इज्जत थी और मैं नहीं चाहता था कि मेरे दादाजी की इज्जत को किसी भी प्रकार की कोई ठेस पहुंचे। मैंने ममता को साफ शब्दों में कह दिया था कि अब तुम मुझसे दूर ही रहो लेकिन ममता भी अपने दिल के आगे विवश थी और वह मुझसे हर रोज मिलने की कोशिश किया करती। मैं उससे दूर जाने की कोशिश करने लगा और उसी बीच मेरी और मधु की शादी का दिन तय हो गया हम दोनों की शादी कुछ ही समय बाद होने वाली थी। ममता इस बात से बहुत ज्यादा दुखी हो चुकी थी और ममता को भी अब एहसास हो चुका था कि शायद मेरे और उसके बीच में अब कोई भी संबंध आगे नहीं बन सकता और उसने भी हमारे गांव के एक लड़के से शादी कर ली। मेरी भी शादी मधु से हो चुकी थी मैं मधु से शादी कर के बहुत खुश था क्योंकि वह मेरी हर एक जरूरत को पूरा कर रही थी और मैंने भी उसे कभी कुछ कमी नहीं होने दी। मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं कुछ दिनों के लिए मधु के साथ घूमने के लिए जाऊं तो हम लोगों ने घूमने का प्लान बना लिया। हम लोगों ने घूमने के बारे में एक दूसरे से बात की कि हमें कहां जाना चाहिए तो मधु ने मुझे कहा कि मुझे तो पहाड़ बहुत ज्यादा पसंद है हम लोगों को कहीं हिल स्टेशन पर जाना चाहिए।

मधु ने शहर से ही पढ़ाई लिखाई की थी इसलिए उसके तौर तरीके अलग है परंतु फिर भी मधु चाहती थी कि मैं भी उसी की तरह बनने की कोशिश करुं और फिर हम लोगों ने घूमने का प्लान बना लिया था। हम लोग घूमने के लिए मनाली चले गए जब हम लोग घूमने के लिए मनाली गए तो वहां पर मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था मैं अपने जीवन में पहली बार ही मनाली गया था इसलिए मनाली की वादियां और मनाली का सर्द मौसम मुझे अपनी ओर खींच रहा था। मैंने मधु से कहा क्या तुम इससे पहले भी यहां आई हो तो मधु कहने लगी हां मैं मनाली पहले भी आई हूं क्योंकि मधु अपने कॉलेज के टूर से ही मनाली आई थी। हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ही खुश थे मुझे बहुत अच्छा लग रहा था क्योंकि मैं मधु के साथ समय बिता पा रहा था ममता मेरे दिमाग से पूरी तरीके से निकल चुकी थी मुझे ममता का कोई ख्याल ही नहीं था।

हम लोग मनाली में करीब 5 दिन तक रुके और उसके बाद हम लोग वापस लौट आए जब हम लोग वापस लौट आए तो मेरे पिताजी ने हमसे पूछा की बेटा तुम लोगो का घूमने का टूर कैसा रहा। मैंने अपने पिताजी से कहा पिता जी बहुत ही अच्छा रहा और मौसम भी बड़ा सुहाना था मधु तो शर्मा कर कमरे में ही चली गई लेकिन मैं अपने पिताजी के साथ काफी देर तक बात करता रहा। तभी पिताजी कहने लगे बेटा तुम कुछ दिनों के लिए मुंबई चले जाओ मैंने पिताजी से पूछा मुंबई में क्या कोई जरूरी काम है। पिता जी कहने लगे हां बेटा मुंबई में मेरे पुराने मित्र रहते हैं उन्होंने मुझसे कुछ पैसे लिए थे तो तुम कुछ दिनों के लिए मुंबई चले जाओ वह तुम्हें पैसे लौटा देंगे, दरअसल वह मुझे मिलने के लिए बुला रहे थे लेकिन मैं वहां नहीं जा पाऊंगा मेरे पैर में कुछ दिनों से दर्द हो रहा है इसलिए तुम ही हो आओ। जब पिताजी ने मुझसे यह बात कही तो मैंने पिता जी से कहा ठीक है पिताजी मैं ही मुंबई चला जाता हूं और मैं कुछ दिनों के लिए मुंबई चला गया। मैं जैसे ही मुंबई पहुंचा तो मुझे पिताजी ने अपने मित्र का नंबर दिया मैंने उन्हें फोन करते हुए कहा तो उन्होंने मुझे अपने घर पर बुला लिया और कहने लगे बेटा तुम हमारे पास ही रुकोगे। मैंने उन्हें कहा नहीं रहने दीजिए मैं होटल में रुक जाऊंगा लेकिन उन्होंने बहुत जिद की और मैं उन्हीं के साथ उनके घर पर रुक गया। मेरी किस्मत में शायद ममता से दोबारा मुलाकात होने लिखा था और हम दोनो की इतने बड़े शहर मे मुलाकात हुई इतने वर्षों बाद मैं ममता से मिला तो मुझे उससे मिलकर अच्छा लगा। मैंने ममता से पूछा तुम्हारा जीवन कैसा चल रहा है? ममता ने मुझे कहा सब अच्छा चल रहा है ममता अपने पति के साथ मुंबई में ही रहती थी। मैने ममता से कहा चलो तुमने शादी कर ली तुमने बहुत अच्छा किया। ममता कहने लगी तुम इतने बरसों बाद मिले लेकिन अब भी मेरा दिल तुम्हारे लिए धड़कता है मुझे नहीं मालूम था कि ममता इतने बरसों बाद भी मुझे भूल नहीं पाई है और उसका दिल आज भी मेरे लिए धड़कता है।

मैं बहुत ज्यादा खुश था ममता मुझे कहने लगी चलो आज तुम मेरे साथ मेरे घर पर चलो। मैं भी ममता को मना ना कर सका मैं ममता के साथ उसके घर पर चला गया जब हम दोनों घर पर गए तो हम दोनों को इतने वर्षों बाद मौका मिला था। कहीं ना कहीं मेरे और ममता के दिल मे अब भी प्यार बचा था मेरे दिल की धड़कन तेज होने लगी। ममता मेरे पास बैठी हुई थी वह मुझसे चिपकने की कोशिश करने लगी जब ममता को मैंने सहलाना शुरु किया तो मुझे बड़ा अच्छा लगने लगा। मै उसकी जांघों को काफी देर तक सहलाता रहा ममता अपने आपको ना रोक सकी। जैसे ही ममता ने मेरे होठों को चूसना शुरू किया तो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था ममता भी पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी थी। मैंने ममता के कपडो को उतारना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगी अनिल मेरी शादी हो चुकी है। मैं भी अपने आपको ना रोक सका और मैंने ममता के होठों को चूमना शुरू किया और उसके बाद उसके बदन से सरे कपड़े उतार कर उसके स्तनों को मैंने काफी देर तक चूसना जारी रखा।

जिससे कि वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया वह अच्छे से मेरे लंड को सकिंग कर रही थी। मुझे बड़ा मजा आ रहा था काफी देर तक हम दोनो एक दूसरे को खुश करने की कोशिश करते रहे। जैसे ही मैंने अपने मोटे से लंड को ममता की चिकनी और मुलायम चूत के अंदर प्रवेश करवाया तो मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि उसकी योनि आज भी उतनी ही टाइट होगी हालांकि हम दोनों के बीच पहली बार शारीरिक संबंध बन रहे थे लेकिन उसके बावजूद भी मैं ममता के बदन को पूरी तरीके से महसूस कर रहा था। मुझे उसके साथ सेक्स संबध बनाने में बहुत अच्छा लग रहा था वह भी इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई उसने अपने दोनों पैरों को खोल लिया और मैंने उसे काफी देर तक तक चोदा। जब मैं उसे तेजी से चोदता तो उसके अंदर की इच्छा पूरी होने लगी थी और कुछ ही क्षण बाद मरा वीर्य मेरे अंडकोषो से बाहर निकलने वाला था जैसे ही मैंने अपने वीर्य की कुछ बूंदों को ममता के स्तनों पर गिराया तो वह खुश हो गई। मैं उसके बाद जौनपुर तो लौट आया लेकिन ममता के गदराए बदन ने मुझे गदगद कर दिया था मै अब भी ममता की योदो मे खोया रहता हूं।