गांड के बीच मे लंड रगड दिया

Antarvasna, desi kahani: कुछ दिनों के लिए मैं अपने मामा जी के घर पर गया हुआ था उनसे मुझे कुछ जरूरी काम भी था और मैं उनके घर पर करीब दो दिन रुक गया। जब मैं उनके घर पर रुका तो मैंने उनसे उसकी बात की कि मुझे उन्हीं के साथ कुछ काम शुरू करना है मामा जी का काफी पुराना कारोबार है और उन्होंने मेरी मदद भी की उन्होंने कहा कि हां रजत बेटा मैं तुम्हारी मदद जरूर करूंगा। उन्होंने मुझे कहा कि तुम और सुबोध मिलकर कोई काम शुरू करो मैं तुम्हें उसके बारे में बता दूंगा। मामा जी ने हम दोनों को नया काम शुरू करने के लिए कहा और थोड़े ही दिनों बाद हम लोगों ने एक काम शुरू किया। हम लोगों ने एक फैक्ट्री शुरू की और उसमे हमने गाड़ियों के पार्ट्स बनाने का काम शुरू किया सुबोध और मैं उसमें पूरी तरीके से मेहनत करने लगे। हम दोनों काफी मेहनत करने लगे थे और अब काम भी काफी अच्छा चलने लगा था।  सुबोध जिस लड़की को प्यार करता था उसने उसके साथ शादी करने का फैसला कर लिया था और यह बात उसने मामा जी को भी बता दी थी। मामा जी को भी इससे कोई आपत्ति नहीं थे उन्होंने भी सुबोध की शादी करवाने के बारे में सोच लिया था।

सुबोध की शादी जल्द ही होने वाली थी उसकी शादी की सारी तैयारियां हो चुकी थी क्योंकि मामा जी चाहते थे कि सुबोध की शादी बड़े अच्छे से हो इसलिए उन्होंने उसकी शादी का सारा प्रबंध खुद ही देखा। उन्होंने सुबोध की शादी बड़े धूमधाम से करवाई, सुबोध की शादी हो जाने के बाद वह कुछ दिनों के लिए अपनी पत्नी के साथ सिंगापुर चला गया था तो तब तक मैं ही काम की सारी जिम्मेदारी को संभाल रहा था। काम काफी ज्यादा होने लगा था इसलिए मुझे अकेले काम संभालने में बहुत परेशानी हो रही थी लेकिन कुछ दिनों बाद सुबोध भी वापस आ चुका था और फिर हम दोनों मिलकर काम देखने लगे थे। एक दिन सुबोध ने मुझे कहा कि रजत मुझे लगता है कि तुम्हें कुछ दिनों के लिए काम से छुट्टी ले लेनी चाहिए मैंने उसे कहा हां सुबोध तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो मुझे भी ऐसा ही लग रहा है। मैंने कुछ दिनों के लिये काम से छुट्टी लेने के बारे में सोचा और मैं कुछ दिनों के लिए घर पर ही था। मुझे दो दिन घर पर हो गए थे लेकिन घर पर मेरा मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा था तब मैंने अपने एक पुराने दोस्त को फोन किया उसका नाम सोहन है।

मैंने सोहन को जब फोन किया तो वह मुझसे कहने लगा कि रजत आज तुमने मुझे कैसे फोन कर दिया तो मैंने उसे बताया कि बस आज मुझे तुमसे एक जरूरी काम था। वह मुझसे कहने लगा कि रजत सब कुछ ठीक तो चल रहा है मैंने उसे कहा हां सब कुछ ठीक चल रहा है मैं सोच रहा था कि क्या हम लोग कुछ दिनों के लिए कहीं घूमने के लिए जा सकते हैं। वह मुझे कहने लगा कि लेकिन रजत हम लोग कहां जाएंगे तो मैंने उसे बताया कि मेरे एक परिचित का फार्महाउस है यदि तुम कहो तो मैं उनसे पूछ लेता हूं। सोहन मुझे कहने लगा कि ठीक है मैं भी अपने काम से कुछ दिनों के लिए छुट्टी ले लेता हूं। उसने भी अपने ऑफिस से कुछ दिनों के लिए छुट्टी ले ली थी अब हम दोनों मेरे उन परिचित के फार्महाउस पर जाने वाले थे। हम लोग जब उनके फार्महाउस पर गए तो मैं और सोहन ही वहां पर थे करीब दो दिनों तक हम लोग वहां रुके फिर हम लोग वापस लौट आए। मैं घर पर ही था तो मेरे पापा कहने लगे कि रजत बेटा सब कुछ ठीक तो है ना मैंने उन्हें कहा हां पापा सब कुछ ठीक है वह कहने लगे कि मैं देख रहा हूं कि तुम कुछ दिनों से घर पर ही हो। मैंने पापा को कहा कि पापा काफी समय से मैं काम में कुछ ज्यादा ही बिजी था तो मैंने कुछ दिनों के लिए काम से छुट्टी ले ली है और अभी सुबोध ही काम संभाल रहा है। पापा कहने लगे लेकिन मुझे इस बारे में कुछ पता नहीं था और ना ही तुम्हारी मां ने मुझे इस बारे में कुछ बताया था मैंने पापा से कहा हां पापा दरअसल आप से मेरी बात हो नहीं पाई थी। पापा भी रिटायरमेंट के बाद ज्यादातर समय अपने दोस्तों के साथ ही रहते थे और हम लोग जिस कॉलोनी में रहते हैं वहां पर पापा को अधिकांश लोग पहचानते है। मुझे अब घर पर काफी समय हो चुका था तो मैंने भी सोचा कि क्यों ना मैं काम पर चला जाऊं। मैं जब काम पर गया तो मैंने देखा की सुबोध ऑफिस में ही बैठा हुआ था वह मुझे कहने लगा कि रजत मैं आज तुम्हें ही फोन करने वाला था।

मैंने उसे कहा क्या हुआ सुबोध क्या कोई जरूरी काम था तो वह मुझे कहने लगा कि आज मेरी पत्नी का जन्मदिन है तो मैं सोच रहा हूं कि आज मैं जल्दी घर चला जाऊं। मैंने उसको कहा ठीक है तुम घर चले जाओ और उसके बाद मैं काम संभालने लगा था उस दिन सुबोध ने मुझे जाते वक्त कहा था कि तुम जब यहां से फ्री हो जाओ तो सीधा ही घर चले आना। मैंने सुबोध को कहा ठीक है मैं घर चला लूंगा उसके बाद सुबोध घर जा चुका था और मैं ही ऑफिस में था शाम के वक्त जब मैं फ्री हुआ तो मैं अपने मामा जी के घर चला गया। उस दिन सुबोध ने अपने घर के पास के ही एक होटल में पार्टी का अरेंजमेंट किया हुआ था तो मैं भी वहां पर चला गया लेकिन वहां मेरा बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था मैं अकेला एक कोने में बैठा हुआ था तभी मेरे दोस्त का फोन मुझे आया और मैं उससे बात करने के लिए होटल से बाहर चला गया। मैं उससे बात कर रहा था काफी समय बाद मेरी उससे बात हो रही थी वह दुबई में रहता है और कुछ समय के लिए वह मुंबई आने वाला था तो उसने मुझे कहा कि मैं कुछ दिनों के लिए मुंबई आने वाला हूं। मैंने उसे कहा ठीक है जब तुम मुंबई आओगे तो तुम मुझसे जरूर मिलना वह कहने लगा हां मैं तुमसे जरूर मिलूंगा।

उसके बाद मैंने फोन रख दिया था और मैं वहीं बाहर खड़ा होकर सिगरेट पीने लगा। मैं जब अंदर गया तो मैंने देखा वहां पर एक भाभी खड़ी थी उन्होने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी जिसमें कि वह बहुत ज्यादा सुंदर लग रही थी। मैं उनके पास जाकर खड़ा हुआ वह मेरी तरफ देखने लगी गलती से मेरा हाथ उनके हाथ से टकरा गया तो वह मेरी तरफ अपनी प्यास भरी नजरों से देखने लगी। जब वो जाने वाली थी तो जाते-जाते उन्होंने मेरा नंबर मुझसे ले लिया कुछ दिनों के बाद उन्होंने मुझे फोन किया जब उनका मुझे फोन आया तो उन्होंने मुझे अपना नाम बताया उनका नाम ऊषा है। ऊषा भाभी देखने में बड़ी ही माल हैं जब मैं उनसे बातें करने लगा तो हमारी बातें गरमा गरम होने लगी थी वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित होने लगी थी वह चाहती थी मैं उनसे मिलने के लिए उनके घर पर जाऊं मुझे अभी तक मौका नहीं मिल पाया था। मैं उनके घर पर जाता एक दिन मुझे मौका मिला मैं उनके घर पर गया जब मैं उनके घर पर गया तो उस दिन वह घर पर अकेली थी मैं जैसे ही उनके घर पहुंचा तो उन्होंने मुझे अपने बदन को दिखाना शुरू किया वह अपनी साड़ी के पल्लू को बार-बार नीचे करने की कोशिश करती जिसे देखकर मेरा मन होता कि मैं उनको चोद डालू मुझे इस बात का डर भी था कि कहीं उनके पति ना आ जाए। मैंने जब उनसे पूछा आपके पति कहां है तो उन्होंने मुझे बताया वह घर पर नहीं है वह किसी जरूरी काम से गए हुए हैं मेरे लिए इससे बढ़कर अच्छा मौका कोई हो ही नहीं सकता था। मैंने उनको गरम करना शुरू कर दिया था मैं जब उनके हाथ को अपने हाथ पर लगाता तो वह उत्तेजित होती और मैं उनके स्तनों को अपने हाथों से दबाने लगता मैं जब उनके स्तनों को अपने हाथों से दबा रहा था तो मेरे अंदर की आग बढ़ती जा रही थी और मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगा था। मैं इतना ज्यादा उत्तेजित होने लगा था मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था हमारे अंदर की गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया उन्होने मेरे लंड को देखते ही अपने हाथों में लेकर उसे हिलाना शुरू किया।

वह जब मेरे लंड को हिला रही थी तो मुझे अच्छा महसूस हो रहा था कुछ देर तक उन्होंने ऐसे ही मेरे मोटे लंड को अपने हाथ में लेकर हिलाया जब उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा और मुझे बहुत ही मजा भी आने लगा था। मेरे अंदर की आग पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी मैं चाहता था बस मैं उनके साथ संबंध बनाऊ मैंने उनके कपड़े उतारकर उनकी पैंटी को नीचे उतार दिया था। वह पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी थी उनके अंदर की आग इतनी अधिक होने लगी थी कि वह मेरे मोटे लंड को अपनी  चूत में लेने के लिए बहुत तड़प रही थी। अब मैंने उनके पैरों को खोल लिया था मैंने जब उनके पैरों को खोला तो मैंने उनकी चूत की तरफ देखा जिस से कि पानी बहुत अधिक मात्रा में निकल रहा था।

मैंने अपने मोटे लंड को उनकी चूत पर लगा दिया जब मैंने ऐसा किया तो मुझे अच्छा लग रहा था मैंने धीरे से अपने लंड को उनकी चूत के अंदर घुसा दिया जैसे ही मेरा लंड उनक चूत मे घुसा तो वह जोर से चिल्लाने लगी और अपने पैरों के बीच में मुझे जकडकर कहती मुझे और तेजी से चोदो। मैंने उनको और भी तेजी से चोदना शुरू कर दिया था मैंने उनको तेजी से चोदा मुझे बहुत ही मजा आने लगा था मेरे अंदर की आग बढ़ने लगी थी मुझे एहसास हो चुका था कि मेरा माल जल्दी ही बाहर की तरफ को गिरने वाला है मेरा माल जैसे ही बाहर की तरफ को गिरा तो मैंने उन्हें कहा भाभी अब मैं आपको दोबारा से चोदना चाहता हूं कुछ देर तक उन्होंने मेरे लंड को हिलाया फिर मैंने उन्हें बिस्तर पर उल्टा लेटा दिया मैने उनकी बड़ी चूतडो को मेरी तरफ किया मैं उनकी गांड के बीच में अपने लंड को रगड़ रहा था मैंने उनकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया जैसे ही मैंने उनकी चूत के अंदर लंड को घुसाया तो थोड़ा जोर तक वह चिल्लाई उसके बाद मैंने उनके साथ करीब 10 मिनट तक चुदाई का मजा लिया वह बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी।